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लड़की: तुम यहां क्यों आए हो? और अंकल जी को साथ में क्यों लेकर आए हो?
(लड़का चुपचाप सिर झुकाकर खड़ा रहता है।)
लड़की: कुछ बोलोगे भी या ऐसे ही खड़े रहोगे?
लड़के के पिता: बेटा, मैं मजबूरी में यहां आया हूं। इसने तुम्हारा नंबर ब्लॉक होने के बाद खाना-पीना लगभग छोड़ दिया है। घर का माहौल बहुत खराब हो गया है।
लड़की: अंकल जी, लेकिन आप मेरी बात भी सुनिए। यह मुझे दिन में पचास-पचास कॉल करता है। मैं पढ़ाई करती हूं। मेरे पास अपना काम करने का भी समय नहीं बचता। मैं बहुत परेशान हो गई थी, इसलिए मैंने इसका नंबर ब्लॉक किया।
लड़के के पिता: मैं तुम्हारी परेशानी समझता हूं बेटा। लेकिन इसकी हालत देखकर एक बाप होने के नाते मैं भी टूट गया हूं।
लड़की: अंकल जी, आप चिंता मत कीजिए। मैं इसका नंबर ब्लॉक लिस्ट से निकाल दूंगी और शांति से बात कर लूंगी। आप घर जाइए।
लड़की: अंकल जी, एक बात और सुन लीजिए।
लड़के के पिता: हां बेटा, बोलो।
लड़की: यह सिर्फ ज्यादा कॉल ही नहीं करता। यह बिना बताए मेरे घर भी आ जाता है।
रात-रात भर फोन करता है। मेरे भाई से दो बार पिट भी चुका है, फिर भी नहीं माना। मैं इसके इस व्यवहार से बहुत परेशान हो चुकी हूं।
लड़के के पिता: बेटा, सच कहूं तो मुझे अपने बेटे की इन हरकतों पर शर्मिंदगी है। मैं इसे दुखी भी नहीं देखना चाहता और किसी की जिंदगी में परेशानी का कारण बनते हुए भी नहीं देखना चाहता। रिश्ते प्यार और सम्मान से चलते हैं, दबाव और जिद से नहीं।
(लड़का अब भी सिर झुकाकर खड़ा रहता है।)
लड़की: अगर कोई बात नहीं करना चाहता तो उसका फैसला मानना चाहिए। बार-बार फोन करना, घर पहुंच जाना और मानसिक दबाव बनाना प्यार नहीं होता।
लड़के के पिता: बिल्कुल सही कहा तुमने।
आपकी क्या रॉय है इस पर?


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