D K BALAK 'कृष्णन' 🇮🇳 डि के बालक retweetledi
D K BALAK 'कृष्णन' 🇮🇳 डि के बालक
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D K BALAK 'कृष्णन' 🇮🇳 डि के बालक
@DkBalak
| Activist | Humanist | Socialist | Master at Politics | Blogger | Ambedkarite | Liberal | Moralist |
Bihar, India Katılım Ocak 2020
426 Takip Edilen3.8K Takipçiler
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“सखी, सैंया तो ख़ूब ही कमात है
महंगाई डायन खायत जात है…”
ये गीत फिर गूंजने लगात है x.com/AKPPL_Official…
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@samrat4bjp सर ये तो सरासर बईमानी हैं.. नीतीश कुमार जी पहले पहली घोषणा कर चुके थे क़रीब 46000 शिक्षक का बहाली।।
फिर ये क्या देख रहा हूँ..?
@samrat4bjp
@NitishKumar
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राज्य के सभी बच्चों को अच्छी और गुणवतापूर्ण शिक्षा मिले, इसे लेकर हमारी सरकार लगातार प्रयासरत है। इस दिशा में आज शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में निम्न निर्देश दिये गये हैं :-
• अगले 5 वर्षों में 1 लाख शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी जिसके अन्तर्गत प्रत्येक वर्ष कम से कम लगभग 20 हजार शिक्षकों की नियुक्ति की जायेगी। इसके लिये हर वर्ष जुलाई महीने में नियुक्ति संबंधी विज्ञापन जारी किया जायेगा।
• शिक्षकों के स्थानान्तरण को पारदर्शी एवं सुगम बनाने को लेकर शिक्षा विभाग को निदेशित किया गया है कि महिला शिक्षकों का स्थानान्तरण यथासंभव गृह जिले के अपने प्रखण्ड के गृह पंचायत के बगल के पंचायत में तथा पुरूष शिक्षकों को गृह जिले के अपने गृह प्रखण्ड के बगल के प्रखण्ड में स्थानान्तरण करने हेतु नीति बनायी जाय।
• राज्य के सभी विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को पोशाक की आपूर्ति जीविका के माध्यम से किया जाय। इससे पोशाक की ससमय आपूर्ति के साथ महिला स्वावलंबन को भी बल मिलेगा।



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@MaithilAnup @AdityaJhamohan हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं भईया.. 💐💐
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जनसुराज में जनवरी में आदित्य जी और साथियों संग जुड़ना हुआ तभी बिहार के भविष्य, जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर जी ने कहा था की आगे पांच वर्ष संघर्ष करना है, जनता के मुद्दों पर आंदोलन तैयार करना है, युवाओं को जोड़ना है, बिहार की जनता को जगाना है।
आज जनसुराज ने इस कड़ी में एक नया प्रयास किया है। "जनसुराज संघर्ष वाहिनी -JSSV" तैयार हुई है, जिसमें आगे आने वाले दिनों में हजारों नौजवान जुड़ेंगे और शीर्ष नेतृत्व के साथ डायरेक्टली काम करेंगे।
पार्टी ने इसके लिए आज "प्रदेश अध्यक्ष" की जिम्मेदारी सौंपी है। पार्टी प्रदेश अध्यक्ष माननीय मनोज भारती जी, जनसुराज नेतृत्व सहित हमारे माननीय #राजनीतिक #गुरु श्री प्रशांत किशोर जी का आभार व्यक्त करता हूं।
#jansuraaj #prashantkishor #PKforCM #जनसुराज #प्रशांतकिशोर


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@samrat4bjp @ishankishan51 सर आप ये पैसा हम गरीबों पर खर्च कर देते हैं।।
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आईसीसी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में विजेता भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्य, शानदार बल्लेबाज, बिहार के लाल, श्री @ishankishan51 जी को विश्व कप जिताने में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए राज्य सरकार द्वारा 1 करोड़ रुपए की राशि देकर सम्मानित किया।
सफल क्रिकेट करियर के लिए हार्दिक शुभकामनाएँ, बिहार का नाम यूँ ही रोशन करते रहिए।




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आदरणीय प्रधानमंत्री @narendramodi
देश के सामने आकर बताइए कि ऐसे सरकारी खर्चों में कटौती के लिए सरकार क्या क़दम उठा रही है या उठाने जा रही है जिनसे विदेशी मुद्रा (डॉलर) की खपत सीधे तौर पर जुड़ी है। देश की जनता आपके मुंह से सुनना चाहती है। इससे उनमें भरोसा बढ़ेगा कि जनता को तो जो करना है वो करना ही है, सरकार भी अपने स्तर पर कुछ कर रही है। इंतज़ार रहेगा।
बहुत शुक्रिया
एक भारतीय
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ममता दीदी 71 साल की हैं। थिरू एमके स्टालिन 73 के हैं। भाजपा के सामने लड़ रहे सभी बड़े नेताओं ने सत्ता देखी है। पावर का अनुभव किया है। केजरीवाल, अखिलेश जी से लेकर शरद पवार जी तक..सभी ने किसी न किसी वक्त में बड़े स्टेट को संभाला। तेजस्वी जी ने नहीं संभाला।
तेजस्वी के पास जब दो बार सत्ता आई भी तो बेहद सीमित शक्तियों के साथ आई। उन्होंने हर उस वादे को निभाने को कोशिश की, जो जनता से किया। लेकिन फिर भी चुनाव में बुरी हार मिली।
34 साल के तेजस्वी का संघर्ष अकेले उनका नहीं, पूरी जनरेशन का है। जब आप CM रहते हैं। आपके पास ताक़त होती है। केजरीवाल ममता और स्टालिन के पास ताक़त थी, प्रशासन था, हर वो योजना लागू कर देने की व्यवस्था थी। एक बड़े वोट बैंक को रोका जा सकता था। लेकिन तीनों अपनी सीट नहीं बचा पाए।
तेजस्वी के पास ये सब कुछ भी नहीं था। न मीडिया थी, न नैरेटिव को मूव कराने का संसाधन था, साफ शब्दों में धन नहीं था।
तेजस्वी की लड़ाई इसलिए भी बड़ी है कि उनके साथ लालू जी की लीगेसी तो थी, उनका स्वास्थ्य नहीं। परिवार था तो झगड़े भी। भाई, बहन, दोस्त और दुश्मन भी।
सबसे बड़ी दुश्मन ब्यूरोक्रेसी, जो नहीं चाहती आप सत्ता में आए। जब देश में नॉन बीजेपी सरकार थी, आपके पिता पर मुकदमे चलाए गए। आपके सांसदों के समर्थन से चल रही सरकार ने पर कतरने की साजिश की। सालों तक जेल में रखा, जब पत्नी पेट से थी तो 15 घंटे तक ED ने बैठाकर पूछताछ की।
तेजस्वी फिर भी नहीं रुके। हमेशा जनता के बीच रहे। युवा जनसमर्थन यात्रा, आरक्षण बढ़ाओ, बेरोज़गारी भगाओ यात्रा, जन विश्वास यात्रा, वोटर अधिकार यात्रा, बिहार अधिकार यात्रा। बिहार में जहां कहीं भी घटना हुई, तेजस्वी ने प्रतिपक्ष की भूमिका निभाई।
पार्टी के बड़े नेताओं से लेकर मामूली कार्यकर्ताओं तक, खास से लेकर आम तक, सबसे मिलते रहे। फिर भी हारे। यकीन मानिए, जबतक ये व्यवस्था रहेगी, हारेंगे। बुरी तरफ हारेंगे। ट्रोल होंगे, गाली सुनेंगे। मुकदमे झेलेंगे। रेड होगी। लेकिन लड़ना नहीं छोड़ेंगे।
तेजस्वी यादव इसीलिए मेरे लीडर हैं।
वो मुश्किल से मुश्किल वक्त में भी लड़ना जानते हैं।

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हावड़ा में बीजेपी के गुंडों द्वारा टीएमसी नेता श्यामलाल मित्रा के साथ की गई बर्बर मारपीट लोकतंत्र पर सीधा हमला है।
लेकिन विडंबना देखिए - देश का तथाकथित “मुख्यधारा” मीडिया इस सच को दिखाने से कतराता है। सत्ता की चाटुकारिता में इतना डूब चुका है कि उसे न हिंसा दिखाई देती है, न अन्याय। अभी वे चुनावी जीत के जश्न में मशगूल हैं और नरेंद्र मोदी व भाजपा को बधाइयाँ देने में व्यस्त हैं।
जब मीडिया सत्ता का पहरेदार बनने के बजाय उसका प्रवक्ता बन जाए, तो लोकतंत्र कमजोर होता है। यह सिर्फ एक घटना नहीं है - यह उस खामोशी का प्रमाण है, जो सच के खिलाफ खड़ी कर दी गई है।
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@umashankarsingh सर मैं भी बिहार मधुबनी से ही हूँ... आपको युद्ध के समय से फॉलो कर रहा हैं.. एक बेहतरीन रेपोरिंग और पत्रकार की लाज को बचा के रखे हैं आप जैसे पत्रकार.. 👏
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मेरे गृह प्रदेश बिहार का ये जागरूक ड्राइवर बता रहा था कि पुल गिरने वाला है पर नेहरू की सरकार सुन ही नहीं रही थी!
Umashankar Singh उमाशंकर सिंह@umashankarsingh
बिहार एक ग़ज़ब जागरूक प्रदेश है। पुल गिरते ही ड्रोन विजुअल आ गए थे… पार्श्व गीत के साथ 🤓 जिन्होंने भी बनाया उनका नाम पता चले तो credit 🙏
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@KraantiKumar इस बेहूदा का पैर छूना.. मतलब जिंदा लाश।।
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धीरेंद्र शास्त्री ने नागपुर में जाकर छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया. आए दिन आरक्षण पर टिका टिप्पणी करते हैं.
डॉली चायवाला ने धीरेंद्र शास्त्री का पैर छूकर आशीर्वाद लिया. डॉली चायवाला को एक बार भी एहसास नही वो क्या करने जा रहा है. आशीर्वाद प्राप्त करना था, तो अपने माता पिता का पैर छूता.
डॉली चायवाला को सोशल मीडिया पर आगे बढ़ाने में सबसे ज्यादा योगदान बहुजन समाज और माइनॉरिटी समाज का है.
इस हरकत के लिए सोशल मीडिया पर डॉली चायवाले का विरोध किया जा रहा है. जस्टिस बीआर गवाई, और अब डॉली चायवाला. आखिर बहुजन समाज के नायकों को क्या हो गया है ?


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ये बहुत तकलीफदेह तस्वीर है
ये घटना दिखाती है, सिस्टम आज भी, आम लोगों के लिए कितना क्रूर हो सकता है
आम लोग, गरीब लोग, कितनी पीड़ा सहते हैं उसकी हम और आप शायद सही-सही कल्पना भी नहीं कर सकते
सरकार में ऊंची कुर्सी पर बैठे लोगों को अभी बहुत काम करने की जरूरत है, लेकिन सबसे पहले उन्हें घटना की जिम्मेदारी लेनी होगी
इस बुजुर्ग शख्स से माफी मांगनी होगी
ओडिशा के इस व्यक्ति की बहन की मौत हो गई थी, लेकिन डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन सका... बैंक ने बहन के खाते में जमा करीब 19 हजार रुपये देने से मना कर दिया...
आखिर में ये सबूत के तौर पर, बहन की डेड बॉडी, कब्र से निकालकर बैंक पहुंचे... क्योंकि इन्हें और कोई रास्ता समझ नहीं आया...
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सोशल मीडिया पर वायरल इस वीडियो पर दो शब्द
ये भावनात्मक रूप से बहुत परेशान करने वाली तस्वीर है कि एक भाई को मृतक बहन के बैंक अकाउंट से पैसा निकालने के लिए बहन की कब्र खोद कर उसके शव को ले जाना पड़ा ताकि वे बैंक कर्मियों को सबूत पेश कर सकें कि बहन वाक़ई में मर चुकी है। ये किसी की भी आत्मा को झकझोर देगा।
लेकिन इसमें एक दूसरा पहलू भी है जिसे समझना चाहिए। वो है बैंक के ज़रूरी नियम का पहलू। हर अकाउंट होल्डर को विशेषाधिकार होता है कि ख़ुदा न ख़स्ता अपनी मौत की स्थिति में अकाउंट का पैसा किसके पास जाए उसे वह नॉमिनेट करे। और बैंक को ये अधिकार है कि वह पैसा निर्गत करने से पहले इसकी पुष्टि कर ले। इसमें कोई समस्या है तो दावा करने वाले रिश्तेदार के साथ सहयोगात्मक रवैया दिखा उसे क़ानूनी तौर पर पैसा पाने का हक़दार बनने का रास्ता बताए। अगर बैंक ने ऐसा किया है तो बैंक की ग़लती नहीं है। लेकिन अगर बैंक ने मृतक का पैसा पचाने के लिए ग़ैरज़रूरी परेशानी पैदा किए हैं तो फिर बैंक/बैंककर्मी पर सख़्त कार्रवाई हो।
हमारी सहानुभूति भाई के साथ है जिन्होंने अपनी बहन को खो दिया है। उनकी पीड़ा समझी जा सकती है। 🙏
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ओडिशा के एक गरीब आदिवासी जीतू मुंडा को अपनी बहन कालरा मुंडा के बैंक खाते से सिर्फ 19,300 रुपये निकालने थे। बैंक ने कहा - खाताधारक को लाओ या डेथ सर्टिफिकेट और कानूनी वारिस का प्रमाण दो।
गरीबी, लाचारी और व्यवस्था की बेरुख़ी ने जीतू को ऐसा कदम उठाने पर मजबूर किया कि उसने बहन की कब्र खोदी, कंकाल को बोरी में भरा और 5 किलोमीटर कंधे पर लादकर बैंक पहुंच गया।
यह तस्वीर “विश्वगुरु” और “बड़ी अर्थव्यवस्था” के दावों के पीछे छिपे असली भारत की है - जहाँ गरीब आज भी सम्मान नहीं, सिर्फ अपमान पाता है।
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मीडिया हमेशा लालू जी के ख़िलाफ़ रहा। एक समय पर उन्हें महिला विरोधी घोषित किया गया।
उनकी गलती यही थी कि उन्होंने महिला आरक्षण बिल में SC/ST/OBC और मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए कोटे के अंदर कोटा की माँग की थी।
वो माँग आज और मज़बूत हो चुकी है। विपक्ष यदि ठान ले तो यही मसौदा पिछड़ा विरोधी मोदी सरकार के पतन का कारण बनेगा।
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