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कुछ पेशेवर कारणों से हम भी बिहार से पलायन कर रहे है पर शीघ्र लौटेंगे..होली या छठ पूजा तक का इंतेजार नहीं करना होगा ..ना हीं हम ट्रेन में लटक के आयेंगे या जायेंगे ..पलायन तो प्रत्येक बिहारी के नियति में है ..मजबूरी के दंश से मज़दूरी के लिए पलायन कर साल में एक या दो बार लौटने वाले बिहारियों की दशा दिशा कब सुधरेगी अभी कुछ कहा नहीं जा सकता .. बाक़ी अप्रवासी बिहारी मित्रों दिल पर नहीं लेना है कुछ भी ना इस पोस्ट में कोई राजनीति ढूँढनी है

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