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लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है किंतु हत्या का अधिकार नहीं है।जहानाबाद @BJP4India के कार्यकर्ता विजय कुमार सिंह के परिवार के प्रति मेरी संवेदना है। सत्ता में आना जाना लगा रहता है लेकिन लोकतांत्रिक मर्यादा बची रहे इसका प्रयास होना चाहिए। @narendramodi @NitishKumar @yadavtejashwi



पंचायत चुनाव - 2023 : 45 लोगों की हत्या विधानसभा चुनाव - 2021 : 57 लोगों की हत्या पंचायत चुनाव - 2018 : 23 लोगों की हत्या पंचायत चुनाव - 2013 : 15 लोगों की हत्या ये आंकड़े पश्चिम बंगाल के हैं। सरकार तृणमूल कांग्रेस की है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हैं। इस 'निर्ममता' पर विपक्ष की चुप्पी क्यों?

कोई भी सेक्युलर बड़ा यूट्यूबर जैसे @dhruv_rathee @ravishndtv @TheLallantop @ajitanjum @abhisar_sharma अनुसूचित जाति लिस्ट मामले में अनुसूचित जाति के साथ नहीं है क्योंकि उनके ज़्यादातर सब्सक्राइबर मुसलमान हैं। ये विषय अब सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। मुसलमान और ईसाई पक्ष चाहते हैं कि इन धर्मों में भी जो अछूत हैं उनको भी एससी लिस्ट में लाया जाए जबकि ये संविधान सभा का सैटल किया हुआ मैटर है कि ये नहीं हो सकता। ये यूट्यूबर चुप है क्योंकि दुनिया का कोई यूट्यूबर अपने सब्सक्राइबर को नाराज़ करके कंटेंट का बिज़नेस नहीं कर सकता। ये लोग एक से ज्यादा शादी वाले मामले में भी मुस्लिम औरतों के साथ भी खड़े नहीं हो पायेंगे। ये उनकी मजबूरी है। वे कह ही नहीं सकते कि पत्नी के रहते हुए मर्द का दूसरी पत्नी लाना ग़लत है। अब वे चार शादी का सीधा समर्थन नहीं करेंगे। वे यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड का विरोध करेंगे। यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड बकवास है। पर उनके लिए ये सब्सक्राइबर को खुश करने का तरीक़ा है। ये क्यों है? इसके पीछे है पैसा और यूट्यूब का सिस्टम। कहने को वे सेक्युलर हैं पर उनका मुख्य पैसा मुसलमान सब्सक्राइबर से आता है। वही नेटवर्क उनको सम्मान दिला रहा है। इन सेक्युलर यूट्यूबर को मुसलमान अपने कंधे पर ढो रहा है। सेक्युलरिज्म करते करते कब वे मुसलमानों को खुश करने वाला कंटेंट बनानेवाले यूट्यूब चैनल बन गए, शायद उनको भी नहीं पता चला होगा। ये सोशल मीडिया की तासीर है। अब जैसे लोगों से घिरे होते हैं, वही बन जाते हैं और जब आपने एक बार बंदर का नाच दिखाकर तालियाँ बटोरना शुरू कर दिया तो आप अचानक से नहीं कह सकते कि यहाँ कल से फ़िलासफ़ी या मैथेमैटिक्स की क्लास लगेगी। अब तय हो चुका है कि आप बंदर का नाच ही दिखाएँगे क्योंकि आपने मजमा यही बोलकर जुटाया है। वे न्याय या संवैधानिक व्यवस्था के साथ खड़े नहीं होंगे क्योंकि ईमान और न्याय की बात करते ही उनके सब्सक्राइबर भाग जानेंगे। यूट्यूबर का बिज़नेस ही सब्सक्राइबर से चलता है। सब्सक्राइबर ही कंटेंट डिसाइड करता है। यूट्यूब का कोई भी तथाकथित सवर्ण सेक्युलर स्टार या सवर्ण सेक्युलर पत्रकार-विश्लेषक एससी लिस्ट में मुसलमानों और ईसाइयों को शामिल करने के मामले में अनुसूचित जाति का पक्ष नहीं ले सकता। उनमें कोई नहीं कह सकता कि ये लिस्ट संविधान बनते समय तय हो चुकी थी। सिख और बौद्ध संविधान के अनुच्छेद 25 के मुताबिक़ हिंदू परिभाषा के अंदर हैं। अनुसूचित जाति लिस्ट सिर्फ़ इनसे ही बनी है। ये लिस्ट 1950 में जब जारी हुई तक बाबा साहब क़ानून मंत्री थे। प्रधानमंत्री नेहरू और गृह मंत्री सरदार पटेल थे। कैबिनेट में अबुल कलाम आज़ाद और रफ़ी अहमद किदवई थे। लेकिन सेक्युलर यूट्यूबर या पत्रकार ये बोलेंगे नहीं। उनको डर है कि ये करते ही मुसलमान नाराज़ हो जाएँगे और ये होती ही उनके यूट्यूब चैनल की जान निकल जाएगी। वे कहने को सेक्युलर हैं पर वे हिंदू-मुस्लिम द्वैत में दूसरे पक्ष हैं। वे सांप्रदायिकता का दूसरा पहलू हैं। उनकी रोज़ी-रोटी मुसलमान सब्सक्राइबर से चलती हैं। वे न्याय का पक्ष लेंगे तो उनके व्यू 80% तक कम हो जाएँगे। कमाई ख़त्म। स्टारडम ज़ीरो। ये विचारधारा नहीं, बिज़नेस है। यक़ीन न हो तो अपने पसंदीदा सेक्युलर यूट्यूबर को टैग करके पूछिए कि वे इस मामले में किसके साथ हैं। सेक्युलर यूट्यूबर इसे मुसलमान और अनुसूचित जाति के बीच विवाद की तरह देख रहे हैं। जबकि उनको सिर्फ़ फैक्ट बताना है और न्याय के पक्षों खड़ा होना है। पर वे यह कर नहीं पा रहे हैं। मुसलमान के नाराज़ होते ही उनके यूट्यूब चैनलों की कमाई ख़त्म हो जाएगी। उन्हीं के दम पर ये चलते हैं। इसलिए अब तो वहीं नाच दिखाना पड़ेगा, जिसके लिए सब्सक्राइबर आए हैं।











