
भाजपा के प्रवक्ता, चाहे उनकी शैली को "बुद्धिहीन" कहें या "रणनीतिक," एक बात तो साफ करते हैं—वे सुर्खियों में रहना जानते हैं। दिमाग को आराम देने की उनकी कला शायद उनकी सबसे बड़ी ताकत है। आखिर, जब आप दिमाग को छुट्टी दे देते हैं, तो जुबान को कौन रोक सकता है? तो अगली बार जब आप टीवी पर किसी प्रवक्ता को देखें, जो सवाल का जवाब देने के बजाय इतिहास, भूगोल, और विज्ञान का कॉकटेल बना रहे हों, तो बस मुस्कुराइए और पॉपकॉर्न ले आइए। क्योंकि यह डिबेट नहीं, मनोरंजन का मेला है!
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