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@ak_khalia

जाट 🔰🔰🔰 अभिषेक खालिया Laxmangarh Sikar

Katılım Haziran 2020
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Shivraj Bhai
Shivraj Bhai@ShivaBhai923·
पूर्वी राजस्थान के अधिकतर जिलों में कांग्रेस इसलिए मजबूत है या अधिकतर सीटें जाती है कि वहां दलित मीणा मुस्लिम ओर गुर्जर वोट बैंक का कोम्बीनेशन अच्छा है, ओर रही बात तो शेखावाटी मै या राजस्थान के ओर जगहों पर कांग्रेस उसी जगह पर मजबूत है जहां कांग्रेस से जाट प्रत्याशी है जिसको दलित मुस्लिम वोट बैंक साथ देकर जीता देता है, बाकी जिस जगह पर कांग्रेस से दलित या मुस्लिम या कोई ओर प्रत्याशी है जाट बाहुल्य भी है, लेकिन वहां भाजपा से जाट प्रत्याशी है तो वहां दलित मुस्लिम कांग्रेस प्रत्याशी नहीं जीतता वहां भाजपा का जाट प्रत्याशी जीतता है, बाकी जहां सबसे ज्यादा जाट वोटर है वो कांग्रेस के साथ कितना है सब जानते है, खींवसर में लगभग 1 लाख जाट है कांग्रेस को मुश्किल से मिले होंगे 500 जाट वोट, अधिकतर जाट वोट हनुमान जी को मिले फिर भाजपा को कांग्रेस को ना के बराबर मिले, बायतु में जाट बाहुल्य है दलित मुस्लिम की वजह से बहुत मुश्किल से हरीश चौधरी जी जीते वरना अधिकतर जाट वोट RLP के उम्मेदाराम बेनीवाल को मिले, ओसियां मै जाट बाहुल्य है कांग्रेस की दिव्या मदेरणा हार गई भाजपा जीत गई, हमने तो जाट बाहुल्य सीट पर भाजपा कांग्रेस RLP को छोड़कर RLD के सुभाष गर्ग को भी जीतते देखा है, हर एक जाट बाहुल्य सीट का आंकलन कर लीजिए कांग्रेस वही सीट जीती है जहां कांग्रेस से जाट प्रत्याशी है, क्योंकि वहां दलित मुस्लिम का साथ मिल जाता है, बाकी जाट बाहुल्य है लेकिन कांग्रेस से दलित या मुस्लिम या कोई ओर है भाजपा से जाट प्रत्याशी है वहां भाजपा प्रत्याशी ही जीता है, क्योंकि वहां कांग्रेस को दलित मुस्लिम का ही साथ मिला है जहां दलित मुस्लिमों ने कांग्रेस मै जाट प्रत्याशियों का साथ दिया, लेकिन वहीं भाजपा से जाट प्रत्याशी होने के कारण जाट वहां दलित मुस्लिम प्रत्याशी का साथ नहीं दे पाए, आप जैसे कुछ असामाजिक तत्व जो जातिवाद की जड़ है उनके अलावा सब जानते है राजस्थान मै अधिकतर जाट समाज हनुमान जी के साथ है फिर भाजपा की ओर रुख करता है कांग्रेस की ओर तभी रुख करता है जब जाट प्रत्याशी होता है, हालांकि हर समाज वर्ग हर व्यक्ति को संविधान के अनुसार वोट डालने या पार्टी चुनने व्यक्ति चुनने का अधिकार है, आपको ओर मुझको कोई अधिकार नहीं है किसी समाज व्यक्ति को दोष देने का, सबकी मर्जी है सबका स्वतंत्र अधिकार है, लेकिन पीसीसी मै बैठकर सैलरी के तौर पर पीसीसी अध्यक्ष की देखरेख में कांग्रेस के ही नेताओं को गालियां निकालना प्रदेश के हर समाज वर्ग को गालियां निकालकर बेवजह अपने आपको कांग्रेसी साबित करने से साबित नहीं हो जाएगा,
अमरेन्द्र खलबली amrendra khalbali@Khalbaali

बार बार रोने और फालतू की जातिय नफरत में जीने वालों का कोई इलाज तो नहीं है लेकीन......!! अशोक गहलोत को अगर किसी ने समर्थन किया है तो जोधपुर में 1970s में शुरू से लेकर उनकी राजनीति के अंत (2023) तक जाट दलित मुस्लिम जैसे लोगों ने ही किया है, 2023 में स्पष्ट रूप से मुख्यमंत्री उम्मीदवार सिर्फ अकेले गहलोत थे तब शेखावाटी में जाट दलित मुस्लिम समीकरण से ही कांग्रेस एकतरफा जीती थी, अगर इनमें से कोई एक भी जाति - वर्ग गहलोत से नफरत कर रहा होता तो कांग्रेस की 2023 में 21 सीट भी नहीं आती जबकि अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र मारवाड़ में जहां जोधपुर पाली सिरोही जालोर जैसी जगह पर जाट मुस्लिम दलित समीकरण नहीं है वहां अशोक गहलोत मुख्यमंत्री उम्मीदवार रहते हुए 2023 बुरी तरह से हारे हैं, उन्हीं मारवाड़ की जाट बाहुल्य सीटों पर जाटों का वोट एकतरफा कांग्रेस को गया है ये देखते और जानते हुए भी कि मुख्यमंत्री गहलोत बन रहे हैं...... फालतू की जातिवादी मीडिया की फैलाई झूठी बातों से कुंठा और नफरत छोड़ के असलियत देखकर राजनीतिक विचार - विश्लेषण करना सीख लो। क्योंकि वैभव गहलोत चाहे विधायक बने या सांसद बने, वो जीतेंगे तो जाट मुस्लिम दलित समीकरण से ही जीतेंगे न कि राठौड़ उन्हें राजपूत वोट दिलवा कर सांसद बना लेंगे 🤡 बाकी रही बात 5 दिन में किसी नेता की राजनीती खत्म करने की तो उसी हताशा में गहलोत जी अपनी बची हुई राजनीति खत्म कर बैठे हैं, तुम झूठी कुंठा में रोना जारी रखो जब तक तुम्हारे नेता का खेल राठौड़ - शर्मा की जोड़ी पुरी तरह से खत्म न कर दें।

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Abhishek
Abhishek@ak_khalia·
@manphoolsaran7 किस मुंह से मास्टर कहा जा रहा है इसे 😂
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MP Saharan
MP Saharan@manphoolsaran7·
आज मैथ्स से B.SC करने का दुख हो रहा है कि मैं इस मास्टर जी वाली गणित नहीं सीख पाया ।
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Abhishek
Abhishek@ak_khalia·
@PrateekSai9307 कुण देदी तन गालियां?
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Prateek saini पालड़िया
समय का फेर है ये बस गाली देने वालों का हिसाब अच्छे से होगा..!
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Dev Sharma
Dev Sharma@DevShar777·
कल का एग्जाम contempt of court होगा ❤️❤️🔥🔥✌🏻✌🏻✌🏻 @RPSC1 संज्ञान ले ।।
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SARITA_BISHNOI
SARITA_BISHNOI@SARITA_BISHNOI2·
सब इंस्पेक्टर भर्ती 2021 रद्द होने पर जो लोग खुशियां मना रहे हैं सोचो यदि आप या आपके भाई-बहन भी उस भर्ती में ईमानदारी से मेहनत करके सलेक्ट होते और अब भर्ती रद्द होती तो आपको कैसा महसूस होता। 🙌 सब इंस्पेक्टर में ईमानदार मेहनती इंटेलिजेंट,गरीब परिवार के स्टूडेंट का क्या कसूर था क्या उन्हें अब न्याय मिलेगा। आखिरकार ईमानदार सब इंस्पेक्टर...🥹💔
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Abhishek
Abhishek@ak_khalia·
@SARITA_BISHNOI2 हमारे भाई बहन‌ तो रीट में भी लगे थे मेहनत से 😂😂
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Abhishek
Abhishek@ak_khalia·
@hirenchoudharys दोनों अलग-अलग भर्ती है 🤦🤦
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Abhishek
Abhishek@ak_khalia·
@8PMnoCM सभी रीमोट कंट्रोल वाली विधायक बनेंगी!
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राजस्थानी ट्वीट
राजस्थान में प्रस्तावित परिसीमन के बाद लगभग 90 विधानसभा सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो जाएँगी, जबकि ज़मीनी हकीकत यह है कि खुद राजनीतिक दलों के पास इतने बड़े पैमाने पर योग्य महिला उम्मीदवारों का पूल ही मौजूद नहीं है। आपके क्षेत्र में कौन-सी ऐसी सक्षम महिला है, आप कमेंट में नाम और विधानसभा क्षेत्र सहित पूरा विवरण साझा कर सकते है।
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Abhishek
Abhishek@ak_khalia·
@JATbera1 @Mahi55444314056 रीट वाले कोई रोबोट थोड़ी थे! वो‌ भी तो इंसान थे!!
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Bhera ram
Bhera ram@JATbera1·
भाई यह भर्ती सिर्फ मेरे घर से रिलेटेड नहीं है मेरी बहन पहले से दूसरी नौकरी में है मेरे जीजा जी का अच्छा बिजनेस है भूखे नहीं मरेंगे यह फिक्स है 🙌🙏 पर उन हजारों बच्चों और उनके परिवार के साथ अन्याय हुआ है जिन्होंने अपना सब कुछ बेचकर इस नौकरी के लिए पढ़ाई की, आज बहुत सारे बच्चों के घर में मूलभूत सुविधाएं नहीं है क्या बीत रही होगी उन परिवारों पर, हर जगह तुम लोग थर्ड ग्रेड शिक्षक भर्ती को बीच में लेकर आते हो मैं यहां पर उसका जवाब दूंगा और जिसको जवाब चाहिए वह यहां से पढ़ ले क्योंकि मैं इसका जवाब देते देते थक गया,,,, इस थर्ड ग्रेड भर्ती का एग्जाम मैंने भी दिया था मेरे भी 124 नंबर थे, पेपर उच्च स्तर पर आउट हुआ और इसका गवाह है लेवल वन की आसमान छुती मेरिट, लेकिन हमने इस भर्ती की रद्द की मांग एग्जाम होने के जस्ट बाद में की थी और सब इंस्पेक्टर भर्ती भी रद्द करो इसकी मांग जब एग्जाम हुआ था तब की थी, लेकिन क्या एग्जाम होने के बाद और ज्वाइनिंग देने के ढाई साल बाद भर्ती रद्द होने में कोई फर्क नहीं है? आज वह ईमानदार कहां जाएंगे जिन्होंने दिन रात एक करके अपने सपने साकार किए थे, जिनका इस भर्ती से कोई मतलब नहीं है वो लोग खुशी में उछल रहे हैं उनको पता नहीं कि दूसरों के मातम में खुशियां मनाने वाले जिंदगी में कभी खुश नहीं रहते बड़े ताज्जुब की बात है इसमें ऐसे लोग भी ख़ुशी मना रहे हैं जिन्होंने कभी पढ़ाई का महत्व ही नहीं समझा,,, एग्जाम होते ही रद्द की मांग करना और 4 साल बाद भर्ती रद्द करना दिन-रात का फर्क होता है, और रही बात सब इंस्पेक्टर भर्ती के पेपर आउट की तो यदि यह रीट के लेवल का आउट होता तो मैं खुद इस भर्ती में इंटरव्यू देखकर नहीं आता, मेरी 1400 के आसपास रैंक थी यदि इस लेवल पर पेपर आउट होता तो थर्ड ग्रेड और फर्स्ट ग्रेड टीचर की तैयारी करने वाला लड़का सब इंस्पेक्टर का इंटरव्यू देने तक नहीं पहुंचता, खैर में सभी की भावनाओं का सम्मान करता हूं जिंदगी बहुत लंबी है लोगों की बर्बादी में खुशी मनाने वालों कर्म लौट के आएंगे🙏
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Bhera ram
Bhera ram@JATbera1·
दूसरों के घर उजड़ने की खबर सुनकर खुशियां मनाने वाले जिंदगी में कभी खुश नहीं रहते और यदि ऐसे लोग खुश रहे तो भगवान कहीं है भी नहीं🙌 आखिरी हंसी ईमानदारी और सच्चाई हंसेगी, यदि ऐसा 1% भी नहीं होता है तो सच्चाई, ईमानदारी, मेहनत भगवान ऐसे शब्द सिर्फ काल्पनिक है Congratulations🎉
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Deep 😎 तंवर
Deep 😎 तंवर@dpklovee1·
राजस्थान विविधताओं वाला राज्य है यहां राजस्थानी के रूप में किसी एक भाषा की बात करना यहां की जनता के साथ अन्याय होगा । क्योंकि यहां मेवाड़ी, मारवाड़ी , हाड़ौती ढूंढाड़ी शेखावाटी तोरावाटी वागड़ी, मेवाती ब्रज अनेकों भाषाएं क्षेत्र के हिसाब से बोली जाती हैं। नहीं चाहिए राजस्थानी
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Honest Cricket Lover
Honest Cricket Lover@Honest_Cric_fan·
Rajasthan is also another UP and Bihar if we exclude North Eastern Rajasthan.
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Abhishek
Abhishek@ak_khalia·
@TheTribhuvan अन्य जातियों को आप पावरफुल नहीं मानते??
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
राजस्थान की सबसे प्रभावशाली जातियों में है :
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MP Saharan
MP Saharan@manphoolsaran7·
अरे हम जीत गए …… SI भर्ती 2021 रद्द रहेगी ।।
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Vikash Pachar
Vikash Pachar@VikashPachar_·
हनुमान बेनीवाल जी ने शुरुआत से ही इस मुद्दे को न केवल सोशल मीडिया पर, बल्कि सड़क से लेकर सदन तक प्रमुखता से उठाया। उन्होंने हमेशा यह रुख अपनाया कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए। और अंततः सत्य की जीत हुई। #si_भर्ती @RLPINDIAorg @hanumanbeniwal
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sumit kalra
sumit kalra@sumit1kalra·
पुस्तक का नाम :- "पाकिस्तान और भारत का विभाजन" लेखक का नाम :- " डॉक्टर. बाबासाहेब रामजी आंबेडकर" पेज नंबर 123 मुसलमानों को भारत में नहीं रहना चाहिए। पेज नंबर 125 मुसलमान भारत के लिए खतरा बने रहेंगे और भारत में सांप्रदायिक दंगे कराते रहेंगे। पेज नंबर 231 बुर्के से यौन इच्छा बढ़ती है जिससे अधिक बच्चे पैदा होते हैं। पृष्ठ 233, 234 मुसलमान सामाजिक सुधार और विज्ञान के प्रबल विरोधी हैं। पेज नंबर 294 मुसलमान अपने शरिया कानून को भारत के कानून और संविधान से ऊपर मानेंगे। पेज नंबर 297 मुसलमान भारत में अशांति फैलाने के लिए सांप्रदायिक दंगे कराते रहेंगे। पेज नंबर 303 मुसलमान भारत में हिंदुओं की सरकार कभी स्वीकार नहीं करेंगे। पेज नंबर 332 मुसलमान कभी देशभक्त नहीं हो सकते। खटाखट शेयर बंद नहीं होना चाहिए..! Revisiting old post
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Atheist
Atheist@atheist798711·
पहली बात आंटी 1.रामायण एक फ़िक्शनल स्टोरी है । 2.दूसरा उस स्टोरी में राम शिकार पर जाते है ,क्या ये जीव हत्या नही हुई ? 3.तीसरा अगर वो क्षत्रिय थे तो आज वाले क्षत्रिय मांस क्यों खा रहे है ? 4.चौथा तुम गोबर थोड़ा कम खाओ ,थोड़ा सा लॉजिक लगाओ । ये तो बच्चा है तुम नही हो ।
Apurva Singh@iSinghApurva

महज 11 साल के बच्चे ने 'ध्रुव राठी' को किया ट्रोल 😂🔥 ध्रुव थोड़ा ज्ञान इस बच्चे से ही ले ले।

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Yogi Baba Productions
Yogi Baba Productions@yogibabaprod·
Spiderman is a Propaganda film Now buy my course 😡
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Vakil Sahab
Vakil Sahab@Vakil_sahab029·
@DEEPSBISHNOI_ @ashokgehlot51 @IYC नहीं वो बात सही है लेकिन विधानसभा अध्यक्ष तो वासुदेव देवनानी है न?
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𝐃𝐄𝐄𝐏𝐀𝐊 𝐁𝐈𝐒𝐇𝐍𝐎𝐈 𝐈𝐍𝐂🇮🇳
हमारे बीच में भी Competition तगड़ा है दोस्तों!! चौहटन विधानसभा से विधानसभा अध्यक्ष हेतू अभी तक मेरे सहित कुल 5 लोगों ने नामांकन किया है!! 1. दीपाराम (दीपक ढाका) - बिश्नोई 2. नासिर ख़ान - मुसलमान 3. ओमप्रकाश - जाट 4. रुख्मणाराम चौधरी - जाट 5. सोयब अली - मुसलमान आप सभी भाईयों से सहयोग की अपेक्षा रहेगी!!🙏
𝐃𝐄𝐄𝐏𝐀𝐊 𝐁𝐈𝐒𝐇𝐍𝐎𝐈 𝐈𝐍𝐂🇮🇳 tweet media
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Prateek saini पालड़िया
समझ सकते है तेरी प्रॉब्लम भाई😂😂😂 बर्नोल सही जगह लगा है
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Jat Ethnic Religion@Jat_Ethnic

★ क्यों राजस्थानी को भाषा का दर्ज़ा नहीं मिलना चाहिए? आज राजस्थानी को भाषा का दर्ज़ा दिलाने की मांग तेज़ हो रही है। लेकिन यह मांग अक्सर उसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों को समझे बिना की जा रही है—और यही सबसे बड़ा खतरा है। भारत में भाषा केवल संचार का माध्यम नहीं होती, बल्कि वह सामाजिक संरचना और सत्ता के वितरण से गहराई से जुड़ी होती है। जैसा कि समाजशास्त्री Pierre Bourdieu ने स्पष्ट किया था, भाषा भी एक प्रकार की “symbolic power” होती है—जो यह तय करती है कि किसका ज्ञान वैध माना जाएगा और किसकी आवाज़ हाशिए पर रहेगी। भारतीय संदर्भ में यह संबंध और भी जटिल है, जहाँ भाषा, जाति और सामाजिक प्रतिष्ठा एक-दूसरे से गुंथे हुए हैं। राजस्थानी के साथ समस्या केवल उसकी मान्यता की नहीं, बल्कि उसके साहित्यिक चरित्र की भी है। ऐतिहासिक रूप से राजस्थानी साहित्य का बड़ा हिस्सा चारणों और दरबारी कवियों द्वारा रचा गया, जिसमें शासकों—राजा-रजवाड़ों और ठाकुरों—की अतिशयोक्तिपूर्ण प्रशंसा, वीर-गाथाएँ और सामंतवादी मूल्यों का महिमामंडन प्रमुख रहा है। इस साहित्य में यथार्थ से अधिक कल्पना, और समाज की समानता से अधिक सत्ता की चापलूसी दिखाई देती है। ऐसा साहित्य जब भाषा के साथ संस्थागत रूप से प्रमोट होता है, तो वह केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति नहीं रहता—बल्कि एक विचारधारा का विस्तार बन जाता है। परिणामस्वरूप: समाज में सामंतवादी मानसिकता को नई वैधता मिलती है जातिगत ऊँच-नीच और भेदभाव को सांस्कृतिक समर्थन मिलता है “वीरता” और “सम्मान” के नाम पर असमानता को सामान्य बना दिया जाता है यह वही प्रक्रिया है जिसमें साहित्य के माध्यम से एक ऐसा कल्पना-लोक गढ़ा जाता है, जहाँ ऐतिहासिक शासक “नायक” बन जाते हैं और आम जन का संघर्ष अदृश्य हो जाता है—मानो वे किसी काल्पनिक गाथा के पात्र हों, न कि वास्तविक समाज के हिस्से। इसलिए यह प्रश्न केवल भाषा का नहीं है, बल्कि उस सामाजिक प्रभाव का है जो उसके साथ जुड़ा हुआ है। यदि किसी भाषा की मुख्यधारा का साहित्य लगातार सामंतवाद, अतिशयोक्ति और सामाजिक असमानता को ही पोषित करता रहा है, तो उसे संस्थागत मान्यता देना अनजाने में उन्हीं मूल्यों को पुनर्जीवित करना हो सकता है। अतः यह आवश्यक है कि हम भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि एक गहरी सामाजिक समझ के साथ निर्णय लें। जब तक राजस्थानी साहित्य में व्यापक रूप से समतावादी, यथार्थवादी और प्रगतिशील दृष्टिकोण का विकास नहीं होता, तब तक उसे भाषा का दर्ज़ा देने की मांग पर पुनर्विचार होना चाहिए। वैसे भी राजस्थानी भाषा का साहित्य अत्यधिक घटिया क़िस्म का हैं। जो व्यक्ति राजस्थानी साहित्य में रुचि लेने लग जाता हैं, वो शेष संसार से कट जाता हैं और एक कल्पना लोक में जीने लग जाता हैं। राजस्थानी साहित्य अत्यधिक अतिशयोक्तिवादी और सामंतवादी हैं। राजस्थानी साहित्य पढ़ने वाले को राजपूत Harry Potter के हीरो लगने लग जाते हैं। पूरे राजस्थानी साहित्य का एक नमूना इस प्रकार हैं जैसे : “पहलां सूरज अरदास करी, रण में लीयो नाम, धरती माथां तिलक धर्यो, बोल्या जीतूं आजो काम। जियो जियो ठाकुर लाखा, गजब कर्यो शौर्य काम, मकोड़ो रो माथो काप्यो, आबू बह्यो लहू तमाम। इतरो देख सब चकित रह्या, बाज्या ढोल-नगाड़ा नाम, नानकड़ो रण जीत गयो, बण गयो वीरां में धाम। कविया लिख्या गाथा ऐ री, बढ़्यो शौर्य रो नाम, मकोड़ां सूं रण जीत लियो, थांरो अमर रह्यो काम। नाम रो डंको गूंज उठ्यो, चारूं दिसा अर धाम, लाखा रा जस गावत फिरे, गूंज्यो थारो नाम। फेर उठी रण री हुंकार, हाथां ली तीखी तलवार, लाखा फेर कमाल कर्यो, लायो पाड़ तितर रो बाल। थांरो बढ़्यो सम्मान, देख्यो सगळो संसार, इण महा रण में फेर, थारो गूंज्यो जयकार।”

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