Ashish Kumar Rai

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Ashish Kumar Rai

Ashish Kumar Rai

@ashishrai2000

Journalist, Nationalist, political analyst. Patriot, Activist, Theroist.

Buxar (Bihar) _ Noida (Up) Katılım Eylül 2024
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
@bhojpur_police निर्दोष के लिए कानून अजगर की जकड़ नहीं बन सकती। उम्मीद है कानून के निर्देश पर हमें निष्पक्ष जांच मिलेगा। ये तब होगा होगा आप इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (CDR) और सीसीटीवी फुटेज़ को जांच के दायरे में लाएंगे। मैं बहोरनपुर थाने में दर्ज FIR no _ 15/26 की बात कर रहा।
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
सर, CDR और सीसीटीवी जांच ना होने की वजह से रविरंजन ठाकुर को एयर फोर्स में अपनी सेवा नहीं दे पा रहे हैं। क्योंकि CDR और सीसीटीवी जांच से ही मामला स्पष्ट होगा और उन्हें जमानत मिलने का रास्ता प्रशस्त होगा। @bhojpur_police @bihar_police @officecmbihar @bhojpur_dm @India_NHRC
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
भोजपुर पुलिस अधीक्षक सर, बहोरनपुर थाना में दर्ज FIR No- 15\26 जिसमें मुख्य आरोपी रविरंजन ठाकुर को बनाया गया है। वो बेकसूर हैं, उनके साथ विशाल ठाकुर भी बेकसूर हैं। विवाद कृष्णा ठाकुर और अखिलेश ठाकुर के बीच हुआ था।
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Anupam K. Singh
Anupam K. Singh@AnupamNawada·
हाँ हम बिहारी हैं जी... ले लो दुनिया के सारे सुख-वैभव, हमें खुले आकाश के नीचे एक चारपाई दे देना। मत घुसने देना हमें कभी पाँच सितारा होटलों में, हमें बस पान की दुकान पर गपशप करने देना। रख लेना अपनी कोल्ड कॉफी, हमें बस थोड़ी सी गर्म चाय की चुस्की लेने देना। रख लेना अपने डिजाइन-डिजाइन वाले ग्लास, हमें एक लोटे से काम चलाने देना। तुम खाओ फैक्ट्रियों में बने उत्पाद, हमें सिर्फ वो तिलौरी-अदौरी-चिप्स-अचार दे देना जिन्हें दादीमाँ ने ख़ुद बैठकर सुखाया था। तुम पीसो मशीन में मसाले, हमें सिलबट्टों की महक में ही स्वाद लेने देना। तुम खाओ कड़ाही पनीर और मशरूम, हमें दाल-भात-भुजिया पर ही जमे रहने देना। बिहार केवल हमारा घर नहीं है। बिहार हमारी जीवनशैली है। बिहार हमारा पुश्तैनी राग है, वो हमारी धमनियों में बहता है। जब हम किसी बुजुर्ग महिला को तुलसी के पौधे में जल देते देखते हैं तो हमारा बिहार याद आता है। जब हम किसी आँगन में घंटी बजते सुनते हैं तो हमारा बिहार याद आता है। जब सरसों के खेतों में पड़कर धूप भी पीली हो जाती है तो हमें हमारा बिहार याद आता है। हम बिहारी हैं। हमें हमारे माता-पिता ने नहीं, पूरे समाज ने मिलकर पाला है। बचपन में हमारी नींद घड़ी के अलार्म की जगह चापाकल की चरमराहट से खुलती थी, गाय और उसके बछड़ों की पुकार से खुलती थी, आँगन में पड़ती झाड़ू की सरसराहट और स्टील के बर्तनों की खनखनाहट से खुलती थी। ठण्ड के दिनों में बाहर घूर के धुएँ में मिलती चाय की भाप देखते थे। गर्मी में घने वृक्ष के नीचे मचान पर सोते थे। बिहार से बाहर निकले तो पर्व-त्योहारों के दिखावे में फँस गए, जहाँ देखा सिर्फ़ चंद सजाए हुए दृश्य दिखे। छठ जैसा अनुशासन कहीं नहीं दिखा। जितिया जैसा संतान-प्रेम कहीं नहीं दिखा। तीज वाला पति-प्रेम नहीं दिखा। सामा-चकेवा जैसी कलाकारी नहीं दिखी। मकर संक्रांति वाली वो मूढ़ी व चिउरा की लाइ कहीं नहीं मिली। सतुआनी में असली वाला सत्तू नहीं मिला। होली पर कादो-गोबर वाला उमंग नहीं पाया। दीवाली पर न छप्पर मिला न उसपर रखने को दीये। दुर्गा-पूजा पर कोई मेला घुमाने नहीं ले गया। सरस्वती जी की मूर्ति के सामने रात भर किताब-कॉपी नहीं छोड़ी। हाँ, हम बिहारी हैं जी। हमारे यहाँ छठ पर सोने की थाल और बाँस के सूप बराबर होते हैं। हम डूबते हुए को भी पूजते हैं। हमारे यहाँ अनुष्ठानों में दादी-नानी जो कहती हैं वही शास्त्र है। हमारे भंसाघर की महक को हम कैसे शब्द दें! कभी दूधपुआ, कभी मालपुआ, कभी ठेकुआ, कभी सत्तू की रोटी, कभी लिट्टी - ये पूरे घर को केवल स्वाद नहीं बल्कि सुगंध भी देते हैं। हाँ, हम बिहारी हैं जी। बाढ़, सूखा, बेरोज़गारी, पलायन, राजनीतिक छल और पीढ़ियों के संघर्ष को देखकर भी हँसते रहते हैं, सुबह स्थानीय ख़बरों की जगह अख़बार में रूस-यूक्रेन वाला पन्ना ही पढ़ते हैं। हमसे आतिथ्य सीखना, कोई घर में आने वाला हो तो दुरा-दरवाजे को ही साफ़ नहीं करते, तकिये के खोल तक बदल लेते हैं। हम गंगा से निकले पोषण भी हैं, हम कोसी से उपजे विषाद भी। कोहरे में सनी सुबहों में भी हम स्कूल जाया करते थे। जेठ की तपती दुपहरी गाछी में बिताया करते थे। सावन-भादो के बादलों की छाया के नीचे खेला करते थे। हम अपना इतिहास क्या बताएँ, हमारे इतिहास से देश है। हम अखंड भारत हैं, हमीं अखंड भारत हैं। जब संसार जंगलों में भटकता था तब चाणक्य ने अर्थशास्त्र दिया। जहाँ पहुँचने से पहले सिद्धार्थ भी भटकते रहे, यहीं एक पेड़ के नीचे बुद्ध बने। जिसने वर्धमान को महावीर बनाया। चन्द्रगुप्त मौर्य से लेकर अशोक तक, कभी हमसे विश्वविजयी सिकंदर भी काँपा तो कभी सिर्फ़ हम ही हम थे। ऑसफोर्ड-कैम्ब्रिज से सैकड़ों वर्ष पूर्व नालंदा में ज्ञान का महान परिसर था, लाखों किताबें जला दी गईं लेकिन इतिहास तो इतिहास है। जब देश पर तानाशाही थोपी गई तो यही बिहार 'संपूर्ण क्रांति' का नाद करते हुए उठा। बिहार लालू-नीतीश नहीं है। बिहार का मतलब राजनीति नहीं है। बिहारी मतलब मजदूर नहीं। देशभर में उपहास का पात्र बनने के बावजूद हमारी देशभक्ति और धर्मपरायणता हिली नहीं, क्योंकि ये हमारे रक्त में बहती है। जातिगत नरसंहारों से लेकर पलायन के दंश तक, सूखा-बाढ़ की विभीषिका से लेकर दिल्ली की उपेक्षा तक - हमने क्या नहीं झेला। फिर भी एक आशा लेकर जीते हैं - जिस धरती ने तर्क और विद्या को ही सर्वोपरि माना, वो फिर उठ खड़ा होगा। जहाँ टिमटिमाती लालटेन की रौशनी में पढ़कर IAS-IPS निकलते हों, उस धरती की जिजीविषा ही उसे आगे लेकर जाएगी। आप सबको बिहार दिवस की शुभकामनाएँ! हैप्पी बिहार दिवस - आम के बगीचों से। हैप्पी #BiharDivas - साँझ को घर लौटती गायों के खुरों से उड़ती धूल से। हैप्पी #BiharDiwas - पोखरों के किनारे की बैठकियों से। और हैप्पी बिहार दिवस - बियाह-जनेऊ के गीतों से।
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
प्रश्न बहुत है, मगर सरकार बोल रही है एलपीजी संकट अफवाह है तो मान लेते हैं। अब तो हर चीज AI से हो रहा है, लोगों की सिलेंडर का प्रबंध भी AI कर देगा। #Israël #IranIsraelWar #LPGForHomes #LPG
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
अब पता चला है, हमारे देश की बुद्धिजीवी वर्ग खामनेई के मरने का शोक क्यों मना रहा था। उन्हें पता था भारत में एलपीजी की कमी हो जाएगी। अब एलपीजी का मतलब भी लापता प्रधानमंत्री हो गया है। पहले सरेंडर अब सिलेंडर वाह धुरंधर साहब! हम तो आत्म निर्भर बन रहे थे, क्या हुआ?
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
अब किसके भरोसे बैठना है। 5 ट्रिलियन अर्थव्यस्था वाला देश दूसरे के व्यवस्था पर निर्भर है। और चले हैं हम विश्वगुरु बनने। दूसरे देश में हो रही जंग ने हमारे शेयर बाजार और व्यापार का तेल निकाल दिया है। अगर हमारा किसी देश से जंग हुआ तो कैसे हालात होंगे?
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
मैं गौरा ( बहोरनपुर) प्रकरण की बात कर रहा। मैंने आपसे मामले में दखल देने की बात कही थी। लेकिन अफसोस निराशा हाथ लगी है।
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
@rakesh_v_ojha .. क्या हुआ विधायक जी? आप भी कहीं फर्जी मुकदमा दर्ज करने वालों के साथ तो नहीं.. आपसे सहायता मांगी तो आप फोन रिसीव नहीं कर रहे। क्या अब निर्दोष लोगों को बिहार छोड़ के जाना होगा? क्योंकि कोई भी फर्जी मुकदमा लगा देगा और आदमी पिसता रहेगा।?
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Ashish Kumar Rai
Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
@rakesh_v_ojha क्या हुई विधायक जी? आपको फोन करने करने पर आपकी तरफ से कोई जवाब नहीं दिया जा रहा। ऐसे ही निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाया जाएगा? कुछ तो समाधान निकालते? गौरा ( बहोरनपुर) प्रकरण की बात कर रहा मैं!
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Ashish Kumar Rai@ashishrai2000·
मुझे लगता है इस देश में लोग फर्जी मुकदमे लगाते रहेंगे और प्रशासन भी उनका साथ देता चला जाएगा? अब कानून का सहारा इंसाफ लेने नहीं सामने वाले से पैसे ऐठना और परेशान करना रह गया है। @bihar_police @AmitShah @ANI @NitishKumar
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