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इंजीनियर बाबू
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इंजीनियर बाबू
@engineer_babu7
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Bareilly, Uttar Pradesh Katılım Mayıs 2022
189 Takip Edilen65 Takipçiler
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मैंने स्वयं को वहां से संभाला है जहां से
संभावनाएं भी मेरे पक्ष में नहीं थी..
और....…..!
यही मेरा गर्व है न कि अंहकार...!!
#साक्षी
#GoodMorning

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शादी उस आदमी से करो जो तुम्हारे बच्चों के लिए सबसे अच्छा पिता साबित हो।
क्योंकि एक सच्चाई है जो कोई तुम्हें नहीं बताता: वो तितलियाँ (जो शुरुआत में उड़ती हैं) मर जाती हैं। जुनून धीरे-धीरे फीका पड़ जाता है। और अच्छी शक्ल-सूरत? वो 3 बजे रात को तब कोई काम नहीं आती जब बच्चा रो रहा हो और तुम्हारा शरीर टूट चुका हो।
तुम्हारा बैंक बैलेंस बच्चे की नैपी नहीं बदलेगा। उसकी मीठी बातें दूध की बोतल गर्म नहीं करेंगी।
और जो आदमी यही समझता है कि पैसे देना ही उसका काम है, वो तुम्हें अजनबी की तरह देखेगा जब तुम थकावट में डूबी होगी।
उससे शादी करो जो सिर्फ "मदद" करना नहीं चाहता — उससे करो जो समझता है कि ये उसका भी काम है। वो जो हिसाब नहीं रखता क्योंकि उसे पता है कि तुम दोनों एक ही जंग लड़ रहे हो। वो जो समझता है कि पितृत्व (fatherhood) ‘बेबीसिटिंग’ नहीं है। वो है हर रोज़ उठकर ज़िम्मेदारी निभाना।
उन लोगों पर मत फिदा हो जो दुनिया के सामने एक्टिंग करते हैं, पर जब असली ज़िंदगी आती है, तो गायब हो जाते हैं। उससे प्यार करो जो तुम्हारे साथ खड़ा रहता है जब कैमरे बंद होते हैं, घर बिखरा होता है और ज़िंदगी मुश्किल लगती है।
क्योंकि प्यार फूलों और डेट नाइट्स से नहीं साबित होता;
प्यार साबित होता है मुश्किल वक़्त में। जब वो तुम्हारे थके, टूटे हुए शरीर को देखकर भी तुम्हें अपनी रानी समझता है।
जब वो बिना कहे जिम्मेदारियाँ उठा लेता है।
जब वो टिके रहता है, लड़े और अपने परिवार की रक्षा करे जैसे उसकी ज़िंदगी उसी पर टिकी हो।
शादी उस आदमी से करो जो तुम्हारा बोझ उठाए — उस से नहीं जो ख़ुद बोझ बन जाए।
क्योंकि एक दिन जब तुम थक जाओगी, और सब कुछ अकेले संभालने की ताक़त नहीं होगी, तो या तो तुम खुद को शुक्रिया कहोगी कि तुमने सही चुना...
या पछताओगी कि तुमने लाल झंडियों को नजरअंदाज़ किया।
समझदारी से चुनो। परियाँ बच्चों की कहानियों में होती हैं। तुम्हें असली ज़िंदगी के लिए एक साथी चाहिए।

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खुद को बढ़ती उम्र के साथ स्वीकारना एक तनावमुक्त जीवन देता है।
हर उम्र एक अलग तरह की खूबसूरती लेकर आती है उसका आनंद लीजिये
बाल रंगने हैं तो रंगिये,
वज़न कम रखना है तो रखिये,
मनचाहे कपड़े पहनने हैं तो पहनिए,
बच्चों की तरह खिलखिलाइये,
अच्छा सोचिये,
अच्छा माहौल रखिये,
शीशे में दिखते हुए अपने अस्तित्व को स्वीकारिये।
कोई भी क्रीम आपको गोरा नही बनाती,
कोई शैम्पू बाल झड़ने नही रोकता,
कोई तेल बाल नही उगाता,
कोई साबुन आपको बच्चों जैसी स्किन नही देता।
चाहे वो PNG हो या पतंजलि.....सब सामान बेचने के लिए झूठ बोलते हैं।
ये सब कुदरती होता है।
उम्र बढ़ने पर त्वचा से लेकर बॉलों तक मे बदलाव आता है।
पुरानी मशीन को Maintain करके बढ़िया चला तो सकते हैं, पर उसे नई नही कर सकते।
ना किसी टूथपेस्ट में नमक होता है ना किसी मे नीम।
किसी क्रीम में केसर नही होती, क्योंकि 2 ग्राम केसर भी 500 रुपए से कम की नही होती !
कोई बात नही अगर आपकी नाक मोटी है तो,
कोई बात नही आपकी आंखें छोटी हैं तो,
कोई बात नही अगर आप गोरे नही हैं
या आपके होंठों की shape perfect नही हैं,
फिर भी हम सुंदर हैं,
अपनी सुंदरता को पहचानिए।
दूसरों से कमेंट या वाह वाही लूटने के लिए सुंदर दिखने से ज्यादा ज़रूरी है, अपनी सुंदरता को महसूस करना।
हर बच्चा सुंदर इसलिये दिखता है कि वो छल कपट से परे मासूम होता है और बडे होने पर जब हम छल व कपट से जीवन जीने लगते हैं तो वो मासूमियत खो देते हैं
और उस सुंदरता को पैसे खर्च करके खरीदने का प्रयास करते हैं।
मन की खूबसूरती पर ध्यान दो।
पेट निकल गया तो कोई बात नही उसके लिए शर्माना ज़रूरी नही।
आपका शरीर आपकी उम्र के साथ बदलता है तो वज़न भी उसी हिसाब से घटता बढ़ता है उसे समझिये।
सारा इंटरनेट और सोशल मीडिया तरह तरह के उपदेशों से भरा रहता है,
यह खाओ, वो मत खाओ
ठंडा खाओ, गर्म पीओ,
कपाल भाती करो,
सवेरे नीम्बू पीओ,
रात को दूध पीओ
ज़ोर से सांस लो,लंबी सांस लो
दाहिने से सोइये ,
बाहिने से उठिए,
हरी सब्जी खाओ,
दाल में प्रोटीन है,
दाल से क्रिएटिनिन बढ़ जायेगा।
अगर पूरे एक दिन सारे उपदेशों को पढ़ने लगें तो पता चलेगा
ये ज़िन्दगी बेकार है ना कुछ खाने को बचेगा ना कुछ जीने को !!
आप डिप्रेस्ड हो जायेंगे।
ये सारा ऑर्गेनिक, एलोवेरा, करेला, मेथी, पतंजलि में फंसकर दिमाग का दही हो जाता है।
स्वस्थ होना तो दूर स्ट्रेस हो जाता है।
अरे! अपन मरने के लिये जन्म लेते हैं,
कभी ना कभी तो मरना है अभी तक बाज़ार में अमृत बिकना शुरू नही हुआ।
हर चीज़ सही मात्रा में खाइये,
हर वो चीज़ थोड़ी थोड़ी जो आपको अच्छी लगती है।
भोजन का संबंध मन से होता है
और मन अच्छे भोजन से ही खुश रहता है..😍
मन को मारकर खुश नही रहा जा सकता।
थोड़ा बहुत शारीरिक कार्य करते रहिए,
टहलने जाइये,
लाइट कसरत करिये,
व्यस्त रहिये,
खुश रहिये,
शरीर से ज्यादा मन को सुंदर रखिये.. 💞

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#अरे_लखिया_बाबुल_मोरे
भारतीय संस्कृति मे विवाह महज एक रसम नही,बल्कि एक ऐसा संस्कार है जो एक तरफ तो हमे भावनाओं के असीम सागर मे बहा ले जाता है तो वहीं दूसरी ओर जिम्मेदारियों का एहसास भी करा जाता है ...विवाह शब्द आते ही चाहे कितनी भी आधुनिक लड़की हो एक भावनात्मक एहसास से भर उठने से खुद को नही रोक पाती। और जब विवाह कि बात हो और पारम्परिक गीतों का जिक्र न आए ये भला कैसे हो सकता है ...।
हमारे यहां अलग-अलग रसमो के अलग-अलग गीत गाए जाते हैं ,इसमे बिदाई का गीत बेहद महत्वपूर्ण और भावुक करने वाला होता है जिन्हे सुनते हीं आंखे स्वतः भर उठती हैं।बेटी कि बिदाई किसी भी पिता के लिए एक अत्यंत कठिन क्षण होता है। अपने कलेजे के टुकड़े को, अपने ही रक्त माँस के अंश को किसी और के हाथों में सौपना कितना कठिन है ये एक पिता से ज्यादा कौन समझ सकता है?
ऐसा ही एक बिदाई गीत हमारे उत्तर भारत मे एक भावनात्मक राग के साथ गाया जाता है जो बेहद प्रचलित है ,जिसमे एक पिता और पुत्री के बीच का संवाद बेहद कारुणिक चित्र दर्शाता है ..
बेटी अपनी माँ की गोद मे सुकूं से बेखबर सो रही है कि तभी उसकी नींद उचट जती है।वो अपने पिता से पूछती है कि ये किसकी बारात है? मेरी कच्ची नींद उचट गई ...
और पिता उसे बताते हैं कि बेटी ये तुम्हारी ही बारात है,ये सुनकर वो घबराई सी कहती है कि बाबा मैने तो अभी तक कुछ भी नहीं सीखा ..रसोई बनाना भी नही जानती,मै ससुराल मे कैसे रहूँगी। और पिता उसे साहस और धैर्य देते हैं ...
सुतल रहनी अम्मा के गोदिया ...
निंदिया उचट गईले मोर हो ..
केकरा दुआरे बाबा बाजन बाजे ..
केकर रचब बियाह हो ...
तु ही बेटी आऊर तु ही बेटी बाऊर
तु ही हऊ चतुर सयानी हो ..
अपना दुआरे बेटी बाजन बाजे
तोहरे ही रचब बियाह हो ...
ना ही सिख्यो एकहुं गुण ढंग बाबा
ना ही सिख्यो रामा रसोई हो
सास ननद मिली ताना जे दिहें
हमसे सहलो नाही जाई हो ...
सिख लेहु बेटी गुण ढ़ंग सिख लेहु
सिख लेहु रामा रसोई हो ..
सास ननद मिली ताना जे दिहें
ले लिह आँचरा पसार हो....
इसे लिखते हुए मेरी आंखे भी भर आईं हैं तो .....🙏🙏
मेरे सभी पेज मेंबर
आशा है कि गीत के बोल समझ जाएंगे वैसे थोड़ी दिक्कत होगी क्यूँ कि मुझे भी हुई थी,पर समझ जाना ...
गीत को गीत की तरह लेना,भावुक मत हो जाना ..
आप लोग के घर या रिश्तेदार में किसी की शादी हो तो विवाह,और विदाई गीत सुनकर देखिए आंखे भर आएंगी,

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