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Prashant Singh
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Prashant Singh
@prshntsingh920
Farmer's Son, Engineer, Social Thinker. Working on Overpopulation,Environment, Agriculture in my own little way.
India Katılım Nisan 2012
5K Takip Edilen2.1K Takipçiler
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मुजफ्फरनगर
➡खेलते वक्त मासूम बच्चे की मौत
➡ठेले से खेलने के दौरान बच्चा की मौत
➡बच्चे की मौत से परिवार में मचा कोहराम
➡मीरापुर कस्बे के मोहल्ला मुश्तर्क का मामला
@muzafarnagarpol
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हरिद्वार जहां हिंदुओं का पवित्र हर की पैड़ी है
हरिद्वार जहां कुंभ का मेला लगता है
हरिद्वार जहां से जीवनदायनी मोक्षदायिनी गंगा नदी बहती है
उस गंगा नदी में ड्रम में भरकर चिकन बिरयानी फेके जा रहे हैं
हरिद्वार पुलिस से अनुरोध है इस तरह की एक्टिविटी पर तुरंत रोक लगाई जाए
और अपराधियों को गिरफ्तार करके जेल भेजो
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उत्तराखंड की डेमोग्राफी तेज़ी से पूरे षड्यंत्र के साथ बदला जा रहा है अल्मोड़ा मे 450 नाली ज़मीन में बाउंड्री मारकर हाइवे पर मस्जिद बनाने की तैयारी है
अगर @pushkardhami आपके रहते ऐसा होगा तो कैसे काम चलेगा , हमारी देवभूमि पर इतने बड़े पैमाने पर ये होना एक हिंदू होने के नाते क़तई बर्दाश्त नहीं है 🙏
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ये बेहद गंभीर मामला है 🚨
@myogiadityanath जी स्वयं संज्ञान लें🙏
टीचर शाहिस्ता नूर और प्रिंसिपल मिलकर हिंदू
बच्चियों को जबरन पढ़ा रहे उर्दू, और सिखा रहे इस्लामिक रीवाजें..
मना करने पर शाहिस्ता बुलाती है मुस्लिम लड़के
जो स्कूल के गेट पर करते हैं बच्चियों का शोषण.
Hello @deo__kaushambi please Look into This ✍️
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बीकेटी इलाके में वर्षों से पहचान छिपाकर रह रहे बांग्लादेशी नागरिक अरूप बख्शी का मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सिर पर टीका, हाथ में कलावा और क्लीनिक में मंदिर बनाकर वह खुद को हिंदू बताता रहा, लेकिन स्थानीय पुलिस और खुफिया तंत्र को इसकी भनक तक नहीं लगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर फर्जी दस्तावेजों के सहारे उसने पासपोर्ट तक कैसे बनवा लिया और पुलिस सत्यापन में उसे क्लीन चिट किसने दी। मुकदमा दर्ज होने के 24 घंटे बाद भी पुलिस कर्मियों का पता नहीं लगा सकी।
बीकेटी थाना क्षेत्र के बरगदी स्थित अस्ती रेलवे क्रासिंग के पास अरूप बख्शी ‘बंगाली चांदसी क्लीनिक’ के नाम से क्लीनिक चला रहा था। स्थानीय लोगों के मुताबिक वह सुबह पूजा-पाठ करता था और क्लीनिक में मंदिर भी बना रखा था, ताकि किसी को उस पर शक न हो।
घर में भी हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी थीं। लोगों का कहना है कि वह कई वर्षों से इलाके में रह रहा था और कई लोगों का हाइड्रोसील आपरेशन तक कर चुका है। इसके अलावा प्रापर्टी डीलिंग का काम भी करता था।
पुलिस जांच में सामने आया कि अरूप वर्ष 2012 में बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत आया था। वह नेपाल के रास्ते लखीमपुर पहुंचा और बाद में सीतापुर में रहने लगा। इसी दौरान उसने मतदाता पहचान पत्र, आधार कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज बनवा लिए।
वर्ष 2016 में उसने पासपोर्ट भी हासिल कर लिया। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि पासपोर्ट सत्यापन के दौरान किस पुलिसकर्मी और एलआइयू कर्मी ने रिपोर्ट लगाई थी।
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अरूप लंबे समय से खुलेआम क्लीनिक चला रहा था, लेकिन पुलिस और खुफिया एजेंसियां उसकी गतिविधियों से अनजान रहीं।
सीतापुर पुलिस से इनपुट मिलने के बाद जब बीकेटी पुलिस ने जांच शुरू की तो परतें खुलती चली गईं। हालांकि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद से आरोपित फरार है और पुलिस अब उसकी तलाश में दबिश दे रही है।
इंस्पेक्टर संजय कुमार सिंह ने बताया कि 16 मई की रात उपनिरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपित की तलाश की जा रही है और फर्जी दस्तावेज बनाने में मदद करने वालों की भी जांच की जा रही है।
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