Sumit Rathore

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@sumitrathore100

सुमित राठौर (साहू) 🅢🅣🅤🅓🅔🅝🅣. सत्यमेव जयते भारतीय 🇮🇳🇮🇳

Katılım Ağustos 2019
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Sumit Rathore
Sumit Rathore@sumitrathore100·
#स्कूल_मर्जर
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#भरतपुर_संग्रहालय
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केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान भरतपुर
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#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो
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#मधुशाला_नहीं_पाठशाला_दो #स्कूल_मर्जर #स्कूल_बचाओ_अभियान
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Sumit Rathore
Sumit Rathore@sumitrathore100·
यदि गरीबों की "शिक्षा" के लिए सरकारें वास्तव में गंभीर रही होतीं तो प्रत्येक न्याय पंचायत पर न्यूतनम एक राजकीय इंटर कॉलेज और ब्लॉक स्तर पर एक सरकारी डिग्री कॉलेज संचालित करा चुकी होतीं। #SaveVillageSchools
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Rajesh Sahu
Rajesh Sahu@askrajeshsahu·
आपको यह पता है कि यूपी सरकार कम बच्चों वाले प्राइमरी स्कूलों को दूसरे स्कूलों में मर्ज करने जा रही। लेकिन शायद आपको न पता हो 2017-18 से अब तक 28 हजार स्कूल मर्ज किए जा चुके हैं। इसका नुकसान यह हुआ कि 28 हजार से ज्यादा प्रिंसिपल के पद खत्म हो गए। एक बात और, 2021-22 में प्राइमरी स्कूलों में छात्रों का नामांकन 1 करोड़ 91 लाख तक पहुंच गया था। जो अब घटकर 1 करोड़ 49 लाख पर आ गया है। यानी 4 साल में 42 लाख छात्र कम हो गए। विचार यहां होना चाहिए कि आखिर स्कूलों में बच्चों की संख्या कम क्यों हो रही?
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Sumit Rathore
Sumit Rathore@sumitrathore100·
शिक्षा सरकार की प्राथमिकता में होनी चाहिए आवश्यकता में नहीं #SaveVillageSchools #up_want_teacher_vaccancy #up_शिक्षक_भर्ती_दो
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Rajesh Sahu
Rajesh Sahu@askrajeshsahu·
प्राइमरी स्कूल इस देश का प्राण हैं. अगर कोई यह कहते हुए बंद करने की सिफारिश कर रहा कि टीचर पढ़ाते नहीं, स्कूल में बच्चे नहीं आते, सरकारी खर्च बहुत ज्यादा है, तो वह गलत कह रहा। प्राइमरी स्कूलों की बदहाली की वजह से ही प्राइवेट स्कूल मोटा रहे। अगर सरकारी स्कूल पूरी तरह से बदहाल हो जाए तो प्राइवेट स्कूल मनमानी पर उतर आएंगे। फिर जो दिहाड़ी मजदूर है, चना-चूरन बेचने वाले लोग हैं वह अपने बच्चों को प्राइवेट में नहीं पढ़ा पाएंगे। फिर इनकी आबादी पूरे देश में 50% से अधिक है। आप प्राइमरी की आलोचना करते हुए अक्सर अपने गांव को देखते हैं, आपका गांव संपन्न हो सकता है, कमाई के मामले में लोग आगे आ गए हों, लेकिन सुदूर किसी एरिया में जाइए। आप देखेंगे कि पढ़ाई की स्थिति अभी भी भयावह है। लोगों के पास आज भी खाने की व्यवस्था नहीं है। पढ़ाई को लेकर जागरुकता नहीं है। सरकारी टीचर किसी भी राज्य का सबसे जरूरी एसेट्स है। सारे बौद्धिक लोग हैं। राज्य में जो भी लिखा-पढ़ी वाली चीजें होती हैं उनमें आप इन्हीं की सेवा लेते हैं। आप पुलिस या फिर किसी और सर्विस विभाग से काम नहीं ले पाएंगे। आप सरकारों का शिक्षा बजट पर खर्च पता करिएगा। आपको पता चलेगा कि यह कुल बजट का 10% भी नहीं है। मिड-डे-मील पर आज भी प्रति बच्चा 5 रुपए से ज्यादा खर्च नहीं हो रहा। जबकि आपको टीचर की सैलरी ज्यादा लगती है। आप एक चीज और देखिए, जिन स्कूलों में टीचर्स या फिर वहां के ग्राम प्रधान ने अपने से पैसा लगाया, स्कूल को सजाया, बिजली, कुर्सी-मेज, पंखे और पानी की अच्छी व्यवस्था की, वहां बच्चों की संख्या बहुत अधिक मिलेगी। जबकि यह सब व्यवस्था करने का काम शिक्षक का नहीं है। जरूरी है कि स्कूलों की बेहतरी पर काम किया जाए। कुर्सी-मेज, बिजली, पीने की व्यवस्था बेहतर करना सुनिश्चित किया जाए। इंग्लिश मीडिया में तब्दील किया जाए। स्कूल को बारातघर न बनाया जाए। ताश खेलने का अड्डा न बनाया जाए। कम से कम 4 टीचर्स की व्यवस्था की जाए। तब आप देखिए, लोग कैसे अपने बच्चों का एडमिशन करवाने के लिए लाइन लगाकर खड़े नजर आएंगे। यह वीडियो कुछ महीने पहले का है। लखनऊ के एक स्कूल का है। देखिए।
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Rajesh Sahu
Rajesh Sahu@askrajeshsahu·
प्राइमरी स्कूलों में 51 हजार पद तो 2019 में खाली थे। 6 साल बीत चुके हैं। रिकॉर्ड चेक कर लीजिए। खाली पदों की संख्या 1 लाख पार कर चुकी है। सरकार दिल बड़ा करे, भर्ती निकालें। छात्रों को अध्यापकों की जरूरत है।
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