#HindustanFacts | जरूरत से ज्यादा टेंशन लेने से Cortisol हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जो हिप्पोकैम्पस (याददाश्त केंद्र) को नुकसान पहुंचाता है और मस्तिष्क की सोचने, ध्यान केंद्रित करने व निर्णय लेने की क्षमता को कुछ समय के लिए धीमा या बंद कर सकता है। इसे 'ब्रेन फॉग' (Brain Fog) भी कहते हैं, जिससे याददाश्त कमजोर होती है और भ्रम महसूस होता है।
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पाक में जारी है ‘धुरंधर’ का कहर! मसूद अजहर का खास कमांडर ढेर, जैश को बड़ा झटका
पाकिस्तान के बहावलपुर से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं. आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े शीर्ष कमांडर मौलाना सलमान अजहर की संदिग्ध हालात में मौत हो गई है. शुरुआती जानकारी इसे एक साधारण सड़क हादसा बता रही है, लेकिन घटनाक्रम इतना सीधा भी नहीं दिख रहा है. बताया जा रहा है कि सलमान अजहर सड़क पार कर रहा था, तभी तेज रफ्तार से आए एक अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया. हादसे के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया, जिससे मामला और भी रहस्यमय हो गया है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, जिस तरह से यह घटना हुई, उसमें कई बातें साफ नहीं हैं. कुछ लोगों का कहना है कि यह महज एक एक्सीडेंट हो सकता है, लेकिन कुछ इसे सोची-समझी साजिश भी मान रहे हैं. फिलहाल पुलिस और स्थानीय एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. मौलाना सलमान अजहर जैश-ए-मोहम्मद का एक अहम चेहरा माना जाता था. वह लंबे समय से संगठन के लिए सक्रिय था और भारत के खिलाफ गतिविधियों की रणनीति बनाने में उसकी भूमिका अहम बताई जाती रही है. ऐसे में उसकी अचानक हुई मौत को संगठन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
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सलमान अजहर का नाम जैश-ए-मोहम्मद के भीतर लंबे समय से बेहद अहम और खतरनाक माना जाता रहा है. वह सिर्फ एक सदस्य नहीं, बल्कि संगठन के उन चुनिंदा लोगों में शामिल था जिन पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता था. बताया जाता है कि वह मसूद अजहर का बेहद करीबी सहयोगी था. सलमान अजहर का काम सिर्फ योजना बनाने तक सीमित नहीं था. वह भारत के खिलाफ साजिशों को अंजाम देने के लिए नेटवर्क खड़ा करता, नए लोगों को जोड़ता, उन्हें ट्रेनिंग दिलवाता और फंडिंग का इंतजाम भी करता था. यानी संगठन के संचालन में वह एक तरह से रीढ़ की हड्डी जैसा था. ऐसे में उसकी मौत को जैश-ए-मोहम्मद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. खास तौर पर इसलिए, क्योंकि वह संगठन के ‘कोर ग्रुप’ का हिस्सा था. वही ग्रुप जो अंदरूनी फैसले लेता है और पूरे नेटवर्क को दिशा देता है. पाकिस्तान में इन दिनों एक अजीब सा खौफ पसरा हुआ है, खासतौर पर उन लोगों के बीच, जिन पर लंबे समय से आतंकवाद के आरोप लगते रहे हैं. सलमान अजहर की जिस तरह हत्या हुई, वह कोई अलग-थलग घटना नहीं लगती, बल्कि एक ऐसे सिलसिले की कड़ी है जो पिछले कुछ समय से लगातार सामने आ रहा है. करीब डेढ़ साल के भीतर कई ऐसे चेहरे अचानक खबरों से गायब हो गए, जिनके नाम भारत में लंबे समय से वांछित आतंकियों की सूची में रहे हैं. कभी किसी को अज्ञात हमलावर सरेआम गोली मार देते हैं, तो कभी किसी संदिग्ध हादसे में उनकी मौत हो जाती है. इन घटनाओं में एक पैटर्न साफ दिखता है. हमलावर कौन हैं, यह आज तक साफ नहीं हो पाया, लेकिन निशाना हमेशा वही लोग बने हैं जो अलग-अलग आतंकी संगठनों से जुड़े बताए जाते रहे हैं.
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