
बसावन इंडिया
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लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, मानवीय गरिमा की स्वतंत्रता और समता के परिपेक्ष में मानवता को प्रभावित करने वाली घटनाओं और कहानियों का विश्लेषण



































समाजवादी सरकार ने 2012-2017 के दौरान कई पत्रकारों, लेखकों और साहित्यकारों को यश भारती से सम्मान सम्मानित किया उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दिया जाने वाला सर्वोच्च राज्य स्तरीय सम्मान है इसमें 11 लाख का नकद पुरस्कार व जीवनभर ₹50,000 प्रति माह पेंशन का प्रावधान रहा, लेकिन एक गंभीर प्रश्न यह उठता है कि फ्रैंक हुज़ूर जैसे प्रखर और निर्भीक लेखक को यह सम्मान क्यों नहीं दिया गया? फ्रैंक हुज़ूर केवल एक लेखक नहीं थे, बल्कि राजनीति, विचारधारा और समाज पर निर्भीकता से लिखने वाले साहित्यिक योद्धा थे उन्होंने अपनी लेखनी से सत्ता और कट्टरता दोनों को चुनौती दी। उनके नाटक "Hitler in Love with Madonna" ने 20 साल की उम्र में ही उन्हें भारतीय साहित्य और रंगमंच में एक अलग पहचान दिला दी थी। फ्रैंक हुज़ूर ने पत्रकारिता और साहित्य में साहसिक प्रयोग किए, ब्रिटेन में इमरान ख़ान की जीवनी लिखी और भारत में धर्मनिरपेक्षता, समाजवाद और सांप्रदायिकता जैसे सामाजिक न्याय के विषयों पर अपने पत्रिका Socialist Factor में बेबाकी से लिखा लेकिन क्या उनकी सपा के कुछ सामाजिक न्याय के मुद्दों पर असहजता उनके सम्मान की राह में बाधा बनी? यश भारती पुरस्कार पाने वाले लोगों में योगेश मिश्रा, हेमंत शर्मा, शिखा पांडे, राजकृष्ण मिश्र, मणिन्द्र कुमार मिश्रा, माहेश्वर तिवारी, देवी प्रसाद पाण्डेय, माता प्रसाद त्रिपाठी व ब्राम्हण चालीसा गाने वाले पण्डित मनोज मुंतसिर जैसे सैकड़ो नाम इस सूची में शामिल हुए लेकिन इस सम्मान से फ्रैंक हुज़ूर जैसा नाम गायब रहा, जो समाजवादी, सामाजिक न्याय विचारधारा का मजबूत स्तंभ था! #Frankhuzur #YashBharti #यशभारती

