تغريدة مثبتة

प्रेम और कर्तव्य के बीच में उलझा हुआ था मैं
बांसुरी छोड़कर चक्र न उठाता तो क्या करता
जब शांति के द्वार हर घर से बंद कर दिए गए
अंत में अनिवार्य युद्ध न रचाता तो क्या करता
जिस राजसभा को मुझे बंदी बनाने का भ्रम था
उसे विश्वंभर स्वरूप न दिखाता तो क्या करता
कुरुक्षेत्र के धर्मयुद्ध में अपनों से मोह हो जाए
फिर महान ग्रन्थ गीता न सुनाता तो क्या करता
जहां नीति नियम से धर्म की जीत न होने पाए
वहां अधर्म को छल से न हराता तो क्या करता
................ @कुमार विनि ✍️


हिन्दी
































