تغريدة مثبتة

आजादी जिंदाबाद...
स्वघोषित, स्वयंभू टाइप समाज में वैमनस्य और नफरत पैदा करने वाले लोग आपसे उम्मीद करेंगे कि आप उनके मन-मुताबिक चलो। जैसी उनकी सोच, जो उनको पसंद है वो ही बात करो। वो दिन को अगर रात कहें तो आप भी रात कहो। फिर यह तो चुनाव का टाइम है। मीडिया में स्वतंत्र रूप से काम करने वालों को टारगेट किया जा रहा है। मित्रो, बड़ा मुश्किल समय है। आपको आपके एक ही ट्वीट से जज कर लिया जाएगा और लोग अपना लठ्ठ लेकर आपके पीछे दौड़ पड़ेंगे। ऐसे खुद को सामाजिक तत्व बताने वाले असामाजिक तत्व आपको हर खेमे में मिलेंगे लेकिन इनसे घबराकर अपनी राह थोड़े ही छोड़ी जाती है। सच की राह सदैव ही कठिन रही है, आज भी कठिन ही है और कठिन ही रहेगी। ये ताकतें पहले सिर्फ जमीन पर काम करती थीं, अब सोशल मीडिया पर हावी हैं। मैं इस मंच से किसी के भी मन-मुताबिक चलने से साफ इनकार करता हूं। आजादी मेरे लिए सर्वोपरि है और सर्वोपरि ही रहेगी। आजादी की कीमत चुकानी पड़ती है और मैं इसके लिए हमेशा तैयार हूं।
इस राह के हर राही का स्वागत, अभिनंदन

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