मधु शर्मा

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मधु शर्मा

मधु शर्मा

@VedaRicha

सनातनी लेखक✍️भक्ति, प्रेरणा, पौराणिक कथाएं, और कविताएँ। कृतज्ञ👉 @VijayVst0502 @iRakeshPanday @BeingArun28 @RamakantOnline @Bitt2DA @MYogiDevnath #VHPDigital

भारत (आर्यावर्त) انضم Ocak 2022
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मधु शर्मा
श्रीमद्भगवद्गीता: काव्य सार सत्रहवां अध्याय: श्रद्धात्रयविभाग योग (तीन प्रकार की श्रद्धा) पूछा अर्जुन ने, "हे माधव! संशय एक सताता है, शास्त्र-विधि बिन जो भजें, उनका क्या हो जाता है? उनकी निष्ठा कैसी केशव, सात्त्विक या राजस जानूँ? या तामस गुण के वश में, मैं उनको ही पहचानूँ?" बोले केशव, "पार्थ! सुनो, श्रद्धा त्रिविध (तीन) विधाता, देहधारियों के स्वभाव से, उपजे यह सब नाता। सात्त्विक, राजस और तामस, तीनों के गुण भारी, जैसी श्रद्धा वैसा मनुज, यह रीति है जग सारी।" त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा। सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु॥ (१७.२) जैसी श्रद्धा वैसा मनुज, जानो कुन्ती-लाल। तीन गुणों से बंधा है, यह जग का सारा हाल॥ "सात्त्विक भोजन सुख-आयु दे, रसदार और स्निग्ध महान, राजस भोजन दुख-रोग दे, तीखा-कटु अज्ञान। तामस भोजन दुर्गंधमय, बासी और उच्छिष्ट (जूठा) जान, इन तीनों के लक्षण से, पहचानो अन्न का दान।" "विधि-विधान से यज्ञ करे, फल की चाह न होय, वह सात्त्विक यज्ञ कहाता है, जिससे जग सुख सोय। दम्भ और मान के लिए जो, राजस यज्ञ रचाये, और तमस यज्ञ विधि-हीन, श्रद्धा-दान बिन जाय।" देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्। ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते॥ (१७.१४) देव, गुरु और ज्ञानी की, पूजा, शुद्धि, सरलता धर। अहिंसा, ब्रह्मचर्य ये, शारीरिक तप जान, तू डर॥ "मन की शांति, सौम्यता और, मौन-आत्म-विनिग्रह (संयम), भाव-संशुद्धि ये सात्त्विक तप, काटे सब भव-जखम। सत्कार-मान के लिए जो, राजस तप किया जाय, और तमस तप मूढ़ता से, पीड़ा सह कर लाय।" "देश-काल-पात्र समझ, जो दान दिया जाता, फल की चाह रहित वह, सात्त्विक दान कहाता। प्रत्युपकार की चाह में, राजस दान है भारी, और तमस दान अपमानित, अश्रद्धा से दीखारी।" श्रद्धा-तप-भोजन-दान में, मधु सात्त्विक गुण धार। कृष्ण नाम का जप सखी, होगा बेड़ा पार॥ जीवन सूत्र: "आप जो हैं, आपकी श्रद्धा वैसी ही है।" हमारा स्वभाव ही हमारी श्रद्धा, हमारे भोजन और हमारे कर्मों को निर्धारित करता है। गीता हमें सिखाती है कि हमें तामस और राजस प्रवृत्तियों को त्याग कर, अपने जीवन के हर पहलू (श्रद्धा, भोजन, तप, दान) में 'सत्त्व' गुण को बढ़ाना चाहिए, तभी हम सच्चे अर्थों में उन्नति कर सकते हैं। ✍️ — मधु शर्मा #श्रीमद्भगवद्गीता #VedaRicha_ #श्रद्धात्रयविभाग_योग #गीता_सार_काव्यरूप
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मधु शर्मा@VedaRicha

श्रीमद्भगवद्गीता: काव्य सार षोडश अध्याय: दैवासुरसम्पद्विभाग योग (दैवीय और आसुरी स्वभाव) बोले माधव, "पार्थ! सुन, दो संपदा जग माँझ, एक दिव्य जो मुक्ति दे, एक बाँधे दिन-साँझ। अभय, शुद्धि और ज्ञान-योग, दान-दम और यज्ञ, तप, आर्जव, स्वाध्याय और, अहिंसा में जो विज्ञ।" "सत्य, अक्रोध और त्याग-शांति, दया और कोमलता, अलोलुपता और ह्री (लज्जा), धैर्य-तेज और निर्मलता। ये छब्बीस गुण दिव्य हैं, पांडव! तू पहचान, दैवी संपदा लेकर जनमे, पुरुष जो भाग्यवान।" अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्॥ (१६.१) अभय, ज्ञान और शुद्धि मन, दान, दम, यज्ञ और तप। आर्जव (सरलता) जो धारते, वे तजते भव-ताप॥ "पर आसुरी स्वभाव वाले, दम्भ और अभिमान में, क्रोध, कठोरता और अज्ञान, रमे जो अज्ञान में। वे नहीं जानते कर्तव्य क्या, न शौच (शुद्धि) न आचार, झूठ के आश्रय में खड़े, करते अधम विचार।" "काम-भोग ही परम लक्ष्य, चिंता में जो डूबे, लोभ और मोह के वश में, तृष्णा जिनकी न ऊबे। आज यह पाया, कल वह पाऊँगा, शत्रु का करूँ विनाश, ऐसे मूढ़ मति गिरते हैं, नरक के गहरे पाश।" त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः। कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥ (१६.२१) काम, क्रोध और लोभ ये, नरक द्वार हैं तीन। आत्मा का जो नाश करें, करें मनुज को दीन॥ "इन तीनों द्वारों को तज, जो कल्याण पथ पर चलता, वही पुरुष है तत्ववेत्ता, जो अंधकार से निकलता। शास्त्र-विधि को छोड़ जो, मनमाना आचरण करता, न सुख पाए न सिद्धि वह, न ही परम गति वरता।" "अतः शास्त्र ही प्रमाण है, क्या कर्तव्य क्या अकर्तव्य, जान नियम विधान को, कर कर्म तू गंतव्य। पार्थ! तू दैवी संपदा, लेकर ही है जनमा, व्यर्थ न कर तू शोक अब, कर वही जो ईश-मनसा।" काम-क्रोध-लोभ तज मधु, दिव्य गुणों को धार। शास्त्र मार्ग पर चल सखी, होगा बेड़ा पार॥ जीवन सूत्र: "स्वभाव ही स्वर्ग और नरक का द्वार है।" हमारे भीतर के काम, क्रोध और लोभ ही हमें पतन की ओर ले जाते हैं। जब हम इन पर विजय प्राप्त कर दैवीय गुणों (सत्य, दया, क्षमा) को अपनाते हैं, तभी हम परमात्मा के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। ✍️ — मधु शर्मा #श्रीमद्भगवद्गीता #VedaRicha_ #दैवासुरसम्पद्विभाग_योग #गीता_सार_काव्यरूप

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मधु शर्मा
A US F-35 fighter jet was forced to make an emergency landing at a US air base in the Middle East after reportedly being struck by suspected Iranian fire, according to two sources familiar with the situation. Captain Tim Hawkins, a spokesperson for US Central Command, said the fifth-generation stealth jet was “flying a combat mission over Iran” when it encountered trouble and had to land.
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मधु शर्मा
@grok I'd like to learn more about the figure in this image. Who is she, and what is the history behind her life? Put this image in life
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विनोद बंसल Vinod Bansal বিনোদ বনসল వినోద్ బన్సాల్
विश्व भर में हिंदू संस्कृति व भारतीय जीवन मूल्यों के लिए समर्पित राष्ट्र भक्ति से ओत प्रोत धर्म धुरंधर व्यक्तियों के व्यक्तित्व निर्माण की हजारों कार्यशालाओं के निर्माता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक आद्य सर संघचालक प पू केशव बलिराम हेडगेवार जी की जयंती पर उन्हें कोटिश: नमन्...
विनोद बंसल Vinod Bansal বিনোদ বনসল వినోద్ బన్సాల్ tweet media
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विनोद बंसल Vinod Bansal বিনোদ বনসল వినోద్ బన్సాల్
आज राजधानी दिल्ली में एक अनुपम राम कथा श्रवण का आनंद लिया। नाम था 'नदियों के राम' और कथाकार थे - डॉ अशोक हरिवंश 'भैया जी', जो कि वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन में ज्वाइंट कमिश्नर के रूप में कार्यरत हैं। 'दिव्य भारत' हिंदी दैनिक के श्री रमाकांत पाण्डेय व जलपुरुष पद्मश्री उमाशंकर पांडेय जी की इस अदभुत कल्पना ने राम जी के जल जीवन को तो उकेरा ही, जल संरक्षण, जल प्रबंधन व जल अध्यात्म के साथ नदियों के प्रति समाज के कर्तव्यों को भी संगीतमय काव्यरूप में जन मन में प्रतिष्ठित करने में अपनी अहम भूमिका निभाई। महान् दार्शनिक व चिंतक श्री केएन गोविंदाचार्य जी ने नदियों की वर्तमान स्थित पर समाज को जागरूक किया। राजधानी दिल्ली के प्रसिद्ध कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक व सामाजिक कार्यक्रम में दिल्ली सरकार के मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा, भाजपा के केंद्रीय कार्यालय सचिव श्री महेंद्र पांडेय, केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री श्री राज भूषण चौधरी के साथ मुझे भी रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वास्तव में राम तो सबके हैं। पर्यावरण के, प्रकृति के, जल के, नभ के, तल के, वायुमंडल के, जीव के, निर्जीव के, संजीव के। इसीलिए तो उनको कहते हैं #सबके_राम लेकिन वास्तव में जल ही जीवन है यह बड़ा संदेश आज इस राम कथा के माध्यम से मिला। कथाकार व सभी आयोजकों को धन्यवाद और साधुवाद।
विनोद बंसल Vinod Bansal বিনোদ বনসল వినోద్ బన్సాల్ tweet mediaविनोद बंसल Vinod Bansal বিনোদ বনসল వినోద్ బన్సాల్ tweet mediaविनोद बंसल Vinod Bansal বিনোদ বনসল వినోద్ బన్సాల్ tweet media
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मधु शर्मा
@VijayVst0502 नव वर्ष मंगलमय हो। चैत्र नवरात्रि पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई। जय माता दी जी।
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Vijay Shankar Tiwari
Vijay Shankar Tiwari@VijayVst0502·
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Vijay Shankar Tiwari
Vijay Shankar Tiwari@VijayVst0502·
मैं आज ट्रेन संख्या 12429 में यात्रा कर रहा हूँ, कोच B3 में सीट 17 पर मुझे जो चादर दिया गया वह प्रयोग किया है यह यात्रियों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर लापरवाह है। कृपया इस पर तुरंत संज्ञान लें।@RailMinIndia @IRCTCofficial @RailwaySeva
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मधु शर्मा
श्रीमद्भगवद्गीता: काव्य सार सत्रहवां अध्याय: श्रद्धात्रयविभाग योग (तीन प्रकार की श्रद्धा) पूछा अर्जुन ने, "हे माधव! संशय एक सताता है, शास्त्र-विधि बिन जो भजें, उनका क्या हो जाता है? उनकी निष्ठा कैसी केशव, सात्त्विक या राजस जानूँ? या तामस गुण के वश में, मैं उनको ही पहचानूँ?" बोले केशव, "पार्थ! सुनो, श्रद्धा त्रिविध (तीन) विधाता, देहधारियों के स्वभाव से, उपजे यह सब नाता। सात्त्विक, राजस और तामस, तीनों के गुण भारी, जैसी श्रद्धा वैसा मनुज, यह रीति है जग सारी।" त्रिविधा भवति श्रद्धा देहिनां सा स्वभावजा। सात्त्विकी राजसी चैव तामसी चेति तां शृणु॥ (१७.२) जैसी श्रद्धा वैसा मनुज, जानो कुन्ती-लाल। तीन गुणों से बंधा है, यह जग का सारा हाल॥ "सात्त्विक भोजन सुख-आयु दे, रसदार और स्निग्ध महान, राजस भोजन दुख-रोग दे, तीखा-कटु अज्ञान। तामस भोजन दुर्गंधमय, बासी और उच्छिष्ट (जूठा) जान, इन तीनों के लक्षण से, पहचानो अन्न का दान।" "विधि-विधान से यज्ञ करे, फल की चाह न होय, वह सात्त्विक यज्ञ कहाता है, जिससे जग सुख सोय। दम्भ और मान के लिए जो, राजस यज्ञ रचाये, और तमस यज्ञ विधि-हीन, श्रद्धा-दान बिन जाय।" देवद्विजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम्। ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते॥ (१७.१४) देव, गुरु और ज्ञानी की, पूजा, शुद्धि, सरलता धर। अहिंसा, ब्रह्मचर्य ये, शारीरिक तप जान, तू डर॥ "मन की शांति, सौम्यता और, मौन-आत्म-विनिग्रह (संयम), भाव-संशुद्धि ये सात्त्विक तप, काटे सब भव-जखम। सत्कार-मान के लिए जो, राजस तप किया जाय, और तमस तप मूढ़ता से, पीड़ा सह कर लाय।" "देश-काल-पात्र समझ, जो दान दिया जाता, फल की चाह रहित वह, सात्त्विक दान कहाता। प्रत्युपकार की चाह में, राजस दान है भारी, और तमस दान अपमानित, अश्रद्धा से दीखारी।" श्रद्धा-तप-भोजन-दान में, मधु सात्त्विक गुण धार। कृष्ण नाम का जप सखी, होगा बेड़ा पार॥ जीवन सूत्र: "आप जो हैं, आपकी श्रद्धा वैसी ही है।" हमारा स्वभाव ही हमारी श्रद्धा, हमारे भोजन और हमारे कर्मों को निर्धारित करता है। गीता हमें सिखाती है कि हमें तामस और राजस प्रवृत्तियों को त्याग कर, अपने जीवन के हर पहलू (श्रद्धा, भोजन, तप, दान) में 'सत्त्व' गुण को बढ़ाना चाहिए, तभी हम सच्चे अर्थों में उन्नति कर सकते हैं। ✍️ — मधु शर्मा #श्रीमद्भगवद्गीता #VedaRicha_ #श्रद्धात्रयविभाग_योग #गीता_सार_काव्यरूप
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मधु शर्मा@VedaRicha

श्रीमद्भगवद्गीता: काव्य सार षोडश अध्याय: दैवासुरसम्पद्विभाग योग (दैवीय और आसुरी स्वभाव) बोले माधव, "पार्थ! सुन, दो संपदा जग माँझ, एक दिव्य जो मुक्ति दे, एक बाँधे दिन-साँझ। अभय, शुद्धि और ज्ञान-योग, दान-दम और यज्ञ, तप, आर्जव, स्वाध्याय और, अहिंसा में जो विज्ञ।" "सत्य, अक्रोध और त्याग-शांति, दया और कोमलता, अलोलुपता और ह्री (लज्जा), धैर्य-तेज और निर्मलता। ये छब्बीस गुण दिव्य हैं, पांडव! तू पहचान, दैवी संपदा लेकर जनमे, पुरुष जो भाग्यवान।" अभयं सत्त्वसंशुद्धिर्ज्ञानयोगव्यवस्थितिः। दानं दमश्च यज्ञश्च स्वाध्यायस्तप आर्जवम्॥ (१६.१) अभय, ज्ञान और शुद्धि मन, दान, दम, यज्ञ और तप। आर्जव (सरलता) जो धारते, वे तजते भव-ताप॥ "पर आसुरी स्वभाव वाले, दम्भ और अभिमान में, क्रोध, कठोरता और अज्ञान, रमे जो अज्ञान में। वे नहीं जानते कर्तव्य क्या, न शौच (शुद्धि) न आचार, झूठ के आश्रय में खड़े, करते अधम विचार।" "काम-भोग ही परम लक्ष्य, चिंता में जो डूबे, लोभ और मोह के वश में, तृष्णा जिनकी न ऊबे। आज यह पाया, कल वह पाऊँगा, शत्रु का करूँ विनाश, ऐसे मूढ़ मति गिरते हैं, नरक के गहरे पाश।" त्रिविधं नरकस्येदं द्वारं नाशनमात्मनः। कामः क्रोधस्तथा लोभस्तस्मादेतत्त्रयं त्यजेत्॥ (१६.२१) काम, क्रोध और लोभ ये, नरक द्वार हैं तीन। आत्मा का जो नाश करें, करें मनुज को दीन॥ "इन तीनों द्वारों को तज, जो कल्याण पथ पर चलता, वही पुरुष है तत्ववेत्ता, जो अंधकार से निकलता। शास्त्र-विधि को छोड़ जो, मनमाना आचरण करता, न सुख पाए न सिद्धि वह, न ही परम गति वरता।" "अतः शास्त्र ही प्रमाण है, क्या कर्तव्य क्या अकर्तव्य, जान नियम विधान को, कर कर्म तू गंतव्य। पार्थ! तू दैवी संपदा, लेकर ही है जनमा, व्यर्थ न कर तू शोक अब, कर वही जो ईश-मनसा।" काम-क्रोध-लोभ तज मधु, दिव्य गुणों को धार। शास्त्र मार्ग पर चल सखी, होगा बेड़ा पार॥ जीवन सूत्र: "स्वभाव ही स्वर्ग और नरक का द्वार है।" हमारे भीतर के काम, क्रोध और लोभ ही हमें पतन की ओर ले जाते हैं। जब हम इन पर विजय प्राप्त कर दैवीय गुणों (सत्य, दया, क्षमा) को अपनाते हैं, तभी हम परमात्मा के मार्ग पर आगे बढ़ सकते हैं। ✍️ — मधु शर्मा #श्रीमद्भगवद्गीता #VedaRicha_ #दैवासुरसम्पद्विभाग_योग #गीता_सार_काव्यरूप

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अतीव
अतीव@AtivAb·
ये क्या हो गया ....🤣
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मधु शर्मा
@73ps_ Hahahaha कोटे वाला डॉक्टर तो नहीं था जिसने मृत घोषित किया 😅😂
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Santosh Mishra Lahari
🔥 "मृत घोषित युवक पोस्टमार्टम हाउस से नग्न भागा... हड़कंप" ! मध्य प्रदेश के GUNA जिला अस्पताल से एक सनसनीखेज, चौंकाने वाली घटना सामने आई है! 😨 डाक्टरों ने जिस युवक को मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा दिया था, वह अचानक होश में आ गया ! युवक खुद को मुर्दों...See more
Santosh Mishra Lahari tweet media
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मधु शर्मा أُعيد تغريده
आकाश गुप्ता
अब तक, देश जानता है कि कौन एक समस्या होने वाली है! 🤣 🤡🤦🏻 ♂️
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किरण सिंह परमार
@VedaRicha नक्षत्रों के बारे में जानने की उत्सुकता है जय श्री कृष्णा 🙏🚩
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मधु शर्मा
गीता जी के दिव्य ज्ञान के बाद, अब बारी है समय के विज्ञान की! ⏳ समय केवल घड़ी की सुइयां नहीं, ग्रहों की चाल है! 🪐 गीता जी की श्रृंखला के समापन के तुरंत बाद, #VedaRicha पर आ रही है एक विशेष श्रृंखला—'पंचांग: काल गणना का आधार'। नक्षत्रों की डिग्री से लेकर ग्रहणों के सटीक गणित तक, सब कुछ सरल भाषा में। 📜✨ क्या आप हमारे पूर्वजों की इस अद्भुत विरासत को जानने के लिए उत्सुक हैं? या फिर किसी और विषय पर आप काव्यरूप पढ़ना चाहेंगे। कमेंट्स में बताएं! #PanchangSeries #IndianAstronomy #VedaRicha_ #AncientScience
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मधु शर्मा أُعيد تغريده
A v ! ..!™ 😉
A v ! ..!™ 😉@AvantikA_2·
कभी कभी अपनेही अपनों का ऐसा तमाशा बनाते हैं कि किर वो अपना कहलाने के लायक ही नही रहते 🌶🍒 #तमाशा #शुभसंध्या 😉😎🤓🤞
A v ! ..!™ 😉 tweet media
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मधु शर्मा أُعيد تغريده
Vishva Hindu Parishad -VHP
Vishva Hindu Parishad -VHP@VHPDigital·
प्रेस वक्तव्य:   विहिप का सांसद संपर्क अभियान शुरू, 27 मार्च तक दोनों सदनों के सभी सांसदों से मिलकर तीन खास विषयों पर होगी विशेष चर्चा   नई दिल्ली। मार्च 11, 2026। विश्व हिंदू परिषद का त्रि-साप्ताहिक सांसद संपर्क अभियान 27 मार्च तक चलेगा। विहिप के केंद्रीय महामंत्री श्री बजरंग लाल बागड़ा ने आज एक प्रेस वार्ता में बताया कि इसी सोमवार यानि 9 मार्च को प्रारंभ हुए विशेष सांसद संपर्क अभियान के अंतर्गत हम देश के दोनों सदनों के सभी सांसदों से मिलकर तीन ज्वलंत विषयों पर चर्चा करेंगे। उन्होंने कहा कि हालांकि हर शीतकालीन सत्र के दौरान सांसद संपर्क हमारी वार्षिक योजना का एक हिस्सा है किंतु, इस वर्ष उस सत्र की अवधि कम होने के कारण बजट सत्र में यह आयोजित किया गया है। इस वर्ष हम कुछ विशेष विषयों को लेकर देश के कानून निर्माताओं से निवेदन करेंगे। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जनसंख्या असंतुलन पर एक व्यापक राष्ट्रीय चिंतन की आवश्यकता है। पिछली अनेक सरकारों ने इस बारे में अपने-अपने तरीके से काम किया लेकिन अब आवश्यकता इस बात की है कि इसकी बारीकियों पर चिंतन कर एक प्रभावी जनसंख्या नीति बने और नारी सशक्तिकरण, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार तथा क्षेत्रीय और सांप्रदायिक जनसंख्या संतुलन नीतियों जैसे माध्यमों के साथ जन मन की सहभागिता से यह कार्य आगे बढ़े। भारत धर्म प्राण देश है, जिसकी आत्मा तीर्थों में बसती है और तीर्थ विकास के बिना भारत के विकास की कल्पना अधूरी है। तीर्थ यात्राओं का देश की अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान है। इसलिए, हम सभी सांसदों से निवेदन करेंगे कि देश के तीर्थक्षेत्रों का समुचित विकास हो और वे भारत की अर्थव्यवस्था, संस्कृति और स्वाभिमान के केंद्र बिंदु बनकर, पुनः धर्म, आध्यात्म और मानव कल्याण के वैश्विक प्रहरी बनें। मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्ति मिले, हिंदू का पैसा हिंदू हित में काम आए तथा तीर्थाटन के विकास के लिए संस्कृति मंत्रालय में एक स्वतंत्र विभाग का गठन कर इनका चहुंमुखी विकास हो। तीसरे विषय के रूप में हम संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के प्रावधानों को देश के सभी नागरिकों के लिए समान रूप से लागू करने के लिए उनसे निवेदन करेंगे। जिससे कि सभी धर्मों को धार्मिक शिक्षा का भेदभाव रहित सामान संवैधानिक अधिकार सुनिश्चित हो सके। साथ ही अल्पसंख्यक को परिभाषित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित करेंगे। विहिप महामंत्री ने बताया कि यह अभियान तीन चरणों में होगा।अलग-अलग चरणों में देश के अलग-अलग प्रांतों से आए हुए कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र के सांसदों से राजधानी दिल्ली में संपर्क कर रहे हैं। पहला चरण 9 से 13 मार्च तक होगा और दूसरा 16 से 20 मार्च तक। इसके बाद 23 मार्च से 27 मार्च तक इस अभियान का समापन सप्ताह होगा। उन्होंने बताया कि हम बिना किसी राजनीतिक या विचार भेदभाव के हर दल के, हर मत पंथ संप्रदाय के और हर क्षेत्र के सांसद से मिलकर खुलकर अपनी बात उनके समक्ष रखेंगे। प्रेस वार्ता में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री तथा अखिल भारतीय विशेष संपर्क प्रमुख श्री अंबरीश सिंह भी मौजूद थे। जारी कर्ता: विनोद बंसल राष्ट्रीय प्रवक्ता - विश्व हिंदू परिषद
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