Central Secretariat SC ST Welfare Association

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The CS SCST EWA is an association of officers of the Government of India posted in various Ministries and their offices in NCR Delhi.

New Delhi Beigetreten Şubat 2024
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Kunal Raja Gautam
Kunal Raja Gautam@kunalrgautam·
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Amit Kumar
Amit Kumar@AmitCSS11·
संत शिरोमणि गुरु रैदास जी की जयंती की सभी को बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। गुरुओं के गुरु संत शिरोमणी रैदास ने भक्तिकाल में इंसानियत के लिए मनुष्यों में आपसी भेदभाव और असमानता के सारे माध्यमों को तोड़कर एक समानता और समतामूलक समाज की स्थापना को जन्म दिया। उन्होंने तत्कालीन समाज में व्याप्त जातिवाद और ऊँच-नीच को समाप्त कर समता, समानता और मानवीय मूल्यों पर आधारित बेगमपुरा की कल्पना की है जहां कोई भी व्यक्ति एक दूसरे से भेदभाव नहीं करता है, सभी समान है और खुशी से रहते हैं । जातियों की प्रकृति और भेदभाव को उन्होंने इस प्रकार कहा है:- "जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात। रैदास मनुष ना जुड़ सके जब तक जाति न जात।।" अर्थात जिस प्रकार केले के तने को छीला तो पत्ते के नीचे पत्ता, फिर पत्ते के नीचे पत्ता और अंत में कुछ नही निकलता, लेकिन पूरा पेड़ खत्म हो जाता है। ठीक उसी तरह इंसानों को भी जातियों में बांट दिया गया है, जातियों के विभाजन से इंसान तो अलग-अलग बंट ही जाते हैं, अंत में इंसान खत्म भी हो जाते हैं, लेकिन यह जाति खत्म नही होती। कोई भी मनुष्य अपने जन्म से नहीं बल्कि कर्म से ऊंचा या नीचा होता है। इसे संत रैदास जी ने कुछ इस प्रकार कहा है: "रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच। नकर कूं नीच करि डारी है, ओछे करम की कीच।।" अर्थात कोई भी व्यक्ति किसी जाति में जन्म के कारण नीचा या छोटा नहीं होता है, आदमी अपने कर्मों के कारण नीचा होता है। व्यक्ति को उसकी जाति से नहीं बल्कि उसके गुणों और योग्यता के आधार सम्मान करना चाहिए। संत रैदास जी कहते है कि : "ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन। पूजिए चरण चंडाल के जो होवे गुण प्रवीन।।" अर्थात किसी व्यक्ति को सिर्फ इसलिए नहीं पूजना चाहिए क्योंकि वह किसी ऊंचे कुल में जन्मा है। यदि उस व्यक्ति में योग्य गुण नहीं हैं तो उसे नहीं पूजना चाहिए, उसकी जगह अगर कोई व्यक्ति गुणवान है तो उसका सम्मान करना चाहिए, भले ही वह कथित नीची जाति से हो। एक कल्याणकारी राज्य की परिकल्पना जोकि हमारा संविधान का उद्देश्य भी है, जिसका आधार स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित है संत रैदास जी ने अपने बेगमपुरा में देखी थी जिसका वर्णन उन्होंने इस प्रकार किया है: "ऐसा चाहूँ राज मैं जहाँ मिले सबन को अन्न। छोट बड़ो सब सम बसे रैदास रहे प्रसन्न।।" अर्थात मैं ऐसा राज चाहता हूँ जहाँ सभी लोगों को भरपेट खाना मिले और सभी लोग किसी भी कारण से भेदभाव से बचे तथा समान रूप से रहें तो रैदास खुश रहेंगे. गुरु रैदास ने ऐसे राज के रूप में बेगमपुरा की कल्पना की है। #रविदास_जयंती #संत_शिरोमणि_गुरुरविदास_जयंती #संत_रविदास_जयंती #बेगमपुरा #समानता #स्वतंत्रता #बंधुत्व #ravidas_jayanti #SantRavidasJayanti #Budget2026 #nirma
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A delegation of the Association paid a courtesy call on Sh. Chirag Paswan, Hon’ble Union Minister, and conveyed New Year Greetings. The Association apprised him of its efforts for the welfare of SC/ST employees, including reservation in promotion. @iChiragPaswan ji @AmitCSS11
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Amit Kumar
Amit Kumar@AmitCSS11·
विद्या बिना मति गयी, मति बिना नीति गयी नीति बिना गति गयी, गति बिना वित्त गया वित्त बिना शूद गये, इतने अनर्थ, एक अविद्या ने किये - #ज्योतिबा_फुले #JyotiraoPhule सामाजिक क्रांति के अग्रदूत, अछूतों एवं नारी शिक्षा और समानता के अधिकार के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले महात्मा फुले की पुण्यतिथि पर शत शत नमन। #EducationForAll #Equality #Reason #humanity @ThePSFront @CS_SCSTWelfAsso @MurariLalBharti @RTIExpress @praveenrpal82
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Amit Kumar
Amit Kumar@AmitCSS11·
बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर जी ने 1920 में #मूकनायक समाचार पत्र की शुरुआत की थी जिसका अर्थ था कि जिस तबके की आवाज़ कोई नही उठाता था उनकी बातों को यही समाचार पत्र स्थान देकर उनकी आवाज़ बनेगा। इसी क्रम में बाबा साहेब का संघर्ष दलितों, महिलाओं, पिछड़ों आदि को मानवता अधिकार जैसे समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व को दिलाने का रहा है और ये संघर्ष आजीवन चलता रहा। भारतीय संविधान में एक व्यक्ति एक वोट और एक वोट एक मूल्य के सिद्धांत से जहां राजनीतिक समानता स्थापित की गई, वहीं सामाजिक तौर पर महिलाओं आदि के राजनीतिक अधिकार पुरुषवादी सामाजिक व्यवस्था की मान्यताओं और विचारों के दायरे से बाहर नहीं निकल पाई थी। जहां पति, बेटे, घर के बुजुर्गों ने कह दिया पूरा परिवार वहीं वोट कर आता था। एक तरह से इन्हें बंधक वोट भी कह सकते हैं।बेशक संविधान मे राज्य को समान नागरिक संहिता के लिए प्रयास करने के लिये कहा गया जिसके सबसे बडे समर्थक बाबा साहेब ही थे, फिर भी ये बंधक वोटर कभी अपनी आवाज़ नहीं उठा पाया और ज्यादातर राजनीतिक पार्टियों ने भी इन्हें इग्नोर ही किया। ये वोटर ही हमारे लोकतांत्रिक व्यवस्था के आज के मूकनायक थे जिनकी आवाज़ माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने उठाई। उनकी अस्मिता के लिये हर घर मे शौचालय, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, ट्रिपल तलाक़, जन धन योजना, आवास योजना, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, मदिरा सेवन प्रतिबंध, मजबूत कानून व्यवस्था आदि योजनाओं और नीतियों से महिलाओं को पितृसत्तात्मक बंधन से मुक्त कराकर भारतीय लोकतंत्र में एक स्वतंत्र और मुखर आवाज़ बनाया है। बाबा साहेब के कानूनी तौर पर महिलाओं के अधिकारों को पुष्ट कर सामाजिक और राजनीतिक पटल पर स्वतंत्र छवि और सोच विकसित करने में जितना कार्य माननीय प्रधानमंत्री जी के कार्यकाल मे हुआ है, उतना पहले कभी नहीं हुआ। हां, हर घर जल....हर घर गैस का सिलेंडर....भी महिलाओं को प्रत्यक्ष तौर पर प्रभावित करते हैं। #WomenEmpowerment #BJP #NaMoSarkar #BiharElections #Ambedkar #Equality #fraternity #Liberty @MurariLalBharti @CS_SCSTWelfAsso @ThePSFront @Mayawati
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Amit Kumar@AmitCSS11

भगवान #बिरसा_मुंडा के जन्मदिवस के अवसर पर समस्त देशवासियों को #जनजातीय_गौरव_दिवस की बधाई और शुभकामनाएं। #BirsaMunda #JanjatiyGauravDivas #BhagwanBirsaMunda आदिवासी वीरता और साहस के प्रतीक, राष्ट्र की आत्मा में बसती हुई संस्कृति के रक्षक बिरसा मुंडा जी ! आज जब हम स्वतंत्र भारत के निर्माण की कहानी सुनाते हैं, तो बिरसा मुंडा का नाम एक ज्वाला की तरह चमकता है। 1875 में झारखंड के उलीहातू में जन्मे इस आदिवासी नायक ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद और जमींदारों के शोषण के खिलाफ 'उलगुलान' विद्रोह का बिगुल फूंका। मात्र 25 वर्ष की आयु में उन्होंने मुंडा जनजाति को एकजुट कर भूमि अधिकार, स्वाभिमान और स्वावलंबन की लड़ाई लड़ी।बिरसा के मूल्य आज भी प्रेरणा स्रोत हैं। वे कहते थे, "अबुआ राज एते जना, महारानी राज तुनु जता" – अब हमारा राज, रानी का राज न मानेंगे। उन्होंने शोषण के खिलाफ अडिग साहस दिखाया। समानता और संस्कृति रक्षा: आदिवासी संस्कृति, धर्म और जंगलों को बचाने के लिए उन्होंने 'बिरसैत' धर्म की स्थापना की, जो प्रकृति और समानता पर आधारित था। वे आत्मनिर्भरता सिखाते थे, ताकि जनजातियां अपनी मिट्टी पर राज करें। उन्होंने आदिवासी आंदोलनों की नींव रखी, जो आज भी संविधान के अनुसूचित जनजाति अधिकारों में गूंजती है। बिरसा ने साबित किया कि संघर्ष से ही स्वतंत्रता मिलती है। आइए संकल्प लें, उनके सपनों का भारत बनाएं, जहां हर वंचित की आवाज सुनी जाए। जय बिरसा! जय आदिवासी शक्ति! #Ulgulan #AdivasiAtma #BharatKeVeer #TribalPride @MurariLalBharti @ThePSFront @CS_SCSTWelfAsso @Mayawati @NimSahab @RTIExpress @praveenrpal82

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