Navin Sharma

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ᴵ'ᵐ ᴺᵒᵗ ᵃ ᴾᵒˡᶦᵗᶦᶜᶦᵃⁿ ᴮᵘᵗ ᴵ ᵏᵉᵉᵖ ᵃⁿ ˢʰᵃʳᵖ ᴱʸᵉ ᵒⁿ ᵃˡˡ ᵗʰᵉ ᴸᵉᵃᵈᵉʳˢ, ᴵ ᵂᶦˡˡ ᴼᵖᵖᵒˢᵉ ᴬⁿʸᵒⁿᵉ ᵂʰᵒ ᴼᵖᵖᵒˢᵉˢ ᴵⁿᵈᶦᵃ.

Bihar India Beigetreten Temmuz 2015
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Navin Sharma@Navinsofficial·
महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे और संजय राउत अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस बीच पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच बड़ा ट्विस्ट सामने आया है। दिल्ली पहुंचे उद्धव गुट के सांसदों में शामिल राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर दिया है। इस बयान के बाद बगावत की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है और महाराष्ट्र की सियासत का समीकरण बदलता नजर आ रहा है। साथ ही यह संकेत भी मिल रहे हैं कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत अपनी पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट की स्थिति बनने से बचने की कोशिश में जुटे हैं।
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राहुल गांधी ने टेलीग्राम ऐप बैन करने पर सरकार की जमकर आलोचना की है. राहुल गांधी ने कहा चोर को पकड़ने के बजाय सरकार ने पीड़ित के घर पर ताला लगा दिया. टेलीग्राम के फाउंडर Pavel Durov ने भी भारत सरकार द्वारा टेलीग्राम पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध की आलोचना की.
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पेपर लीक जैसे मुद्दे पर अगर विपक्ष आंदोलन करता है तो उसे राजनीति कहा जाता है, और जब वह चुप रहता है तो पूछा जाता है कि विपक्ष कहाँ है। लोकतंत्र में जनता से जुड़े मुद्दों पर सड़क से लेकर संसद तक आवाज उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है। युवाओं के भविष्य, भर्ती परीक्षाओं और पारदर्शिता से जुड़े सवालों पर आंदोलन होना स्वाभाविक है। असली बहस यह होनी चाहिए कि पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और उन्हें रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, न कि इस पर कि विरोध कौन कर रहा है।
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बड़ी खबर 🚨 कोई रोकने से नहीं रुक रहा है! जैसे मधुमक्खी रसीले फूल की तरफ भागती हैं वैसे सब सांसद बीजेपी की तरफ भाग रहे हैं. उद्धव गुट के 9 में से 6 बागी सांसद दिल्ली पहुंच गए. स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात भी कर सकते हैं!
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महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ देखने को मिल रहा है। उद्धव ठाकरे और संजय राउत अब पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहे हैं। इस बीच पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं के बीच बड़ा ट्विस्ट सामने आया है। दिल्ली पहुंचे उद्धव गुट के सांसदों में शामिल राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ने शिंदे गुट में शामिल होने की अटकलों को खारिज कर दिया है। इस बयान के बाद बगावत की चर्चाओं पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है और महाराष्ट्र की सियासत का समीकरण बदलता नजर आ रहा है। साथ ही यह संकेत भी मिल रहे हैं कि उद्धव ठाकरे और संजय राउत अपनी पार्टी में बड़े पैमाने पर टूट की स्थिति बनने से बचने की कोशिश में जुटे हैं।
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ये विपिनवा जाति के प्रेम में पगला गया जब तक खान सर इसके प्रचार में नहीं गए थे तब तक सीजदा पाबोस करता था, ये विपिनवा कही से अध्यापक नहीं लगता सिवाय ढोल नगाड़ा पीटने वाले के अलावा, शिक्षक होता तो इसे कानून और भारत के संविधान पर भरोसा रहता और कहता ये जांच का विषय है, कल को कोई इसके ऊपर आरोप लगा दे कि इसने खान सर से 1 करोड़ रुपया लिया था अब दे नहीं पा रहा, तो इल्जाम लगा रहा, इसकी जांच की मांग करेगा कि मान लेगा कि मैने खान सर से 1 करोड़ लिया था ये छपरी टीचर है इसको आता जाता कुछ नहीं, ये 1 नंबर के जातिवादी इंसान है!
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जो लोग आज विपक्षी दलों के टूटने और सांसदों के पाला बदलने पर जश्न मना रहे हैं, उन्हें यह भी सोचना चाहिए कि यही राजनीति आगे चलकर लोकतंत्र के लिए कितना खतरनाक उदाहरण बन सकती है। सत्ता के बल पर दल बदल और राजनीतिक तोड़फोड़ की संस्कृति किसी एक दल तक सीमित नहीं रहती। आज जो हथियार किसी के हाथ में है, कल किसी और के हाथ में भी हो सकता है। इतिहास बताता है कि राजनीतिक दबाव और सत्ता की ताकत के सामने बड़े-बड़े संगठन और नेता भी झुके हैं। लेकिन जिन दलों की जड़ें लंबे जनआंदोलनों और वैचारिक संघर्षों में होती हैं, वे अक्सर चुनौतियों के बीच भी टिके रहते हैं। लोकतंत्र में असली ताकत विरोधी आवाज़ों को खत्म करने में नहीं, बल्कि उनसे मुकाबला करने में होती है।
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राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने स्पष्ट किया है कि वह हर परिस्थिति में ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के साथ खड़ी रहेंगी। उनका कहना है कि किसी भी राजनीतिक दल या नेता के प्रति वास्तविक निष्ठा की परीक्षा अच्छे समय में नहीं, बल्कि चुनौतीपूर्ण दौर में होती है। सागरिका घोष ने उन नेताओं पर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए जो पार्टी के टिकट और चुनाव चिन्ह पर जीतकर बड़े पदों तक पहुंचे, लेकिन कठिन परिस्थितियों में संगठन से दूरी बना रहे हैं। उनके अनुसार, राजनीति केवल सत्ता और पद प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि विचारों, सिद्धांतों और नेतृत्व के प्रति प्रतिबद्धता का भी विषय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक संघर्ष के समय ही यह स्पष्ट होता है कि कौन व्यक्ति अपने नेतृत्व और संगठन के साथ मजबूती से खड़ा है और कौन परिस्थितियों के अनुसार अपना रास्ता बदल लेता है। सागरिका घोष ने दोहराया कि उनका विश्वास ममता बनर्जी के नेतृत्व में है और वह पार्टी के अच्छे-बुरे हर दौर में उसके साथ बनी रहेंगी।
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इन दिनों संसद का सत्र नहीं चल रहा है। ऐसे में आज कल किसी भी विपक्षी दल के सांसद की दिल्ली जाने की खबर आती है तो उस पार्टी के नेताओं की सांसें उखड़ने लगती हैं।
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एक समय राघव चड्ढा कहा करते थे कि न कोई इतनी बड़ी रकम बनी है और न कोई ऐसी पार्टी बनी है जो उन्हें खरीद सके। वहीं बंगाल चुनाव के दौरान सायोनी घोष ने तंज कसते हुए कहा था, 'मैं चड्ढा नहीं हूँ जो चड्ढी बन जाऊँगी।' राजनीति का पहिया घूमता रहा। आज हालात बदल गए, समीकरण बदल गए और आरोप-प्रत्यारोप की दिशाएँ भी बदल गईं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि नेता अपने रास्ते बदल लेते हैं, जबकि समर्थक पुराने बयानों और पुरानी लड़ाइयों को लेकर आज भी एक-दूसरे से भिड़ते रहते हैं।😄
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दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे 2 करोड़ रुपये के मानहानि मामले में आज की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पत्रकार अंजना ओम कश्यप और टीवी टुडे नेटवर्क की ओर से सोशल मीडिया पर मौजूद कथित आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट हटाने की मांग की गई। दूसरी ओर, खान सर सहित अन्य शिक्षकों के वकीलों ने तर्क दिया कि सभी कंटेंट क्रिएटर्स और यूट्यूबर्स को एक ही मुकदमे में शामिल किया गया है, जबकि सभी के बयान और चैनल अलग-अलग हैं। सुनवाई के दौरान पत्रकार की सुरक्षा और उनके परिवार से जुड़े संदर्भों पर भी चर्चा हुई। वहीं बचाव पक्ष ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत जिम्मेदारी से जुड़े मुद्दे उठाए। फिलहाल अदालत ने वीडियो हटाने को लेकर कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है। मामले की अगली सुनवाई 2 जुलाई को निर्धारित है। अब सभी की नजरें अगली सुनवाई पर हैं, जहां इस मामले की दिशा और अधिक स्पष्ट हो सकती है।
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खान सर और रौशन आनंद सर के बीच चल रहे विवाद में इसने आग में घी डालने का काम किया है। #bipinmukhiya
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खान सर और रौशन आनंद सर के बीच चल रहे विवाद को शांत करने के बजाय इसने उसे और भड़काने का काम किया है।
PK@priyank20061992

सबसे ज्यादा दिक्कत इस बेचारे "विपिन यादव" को है #KhanSir के कम फीस बेहतर एजुकेशन की वजह से इसके कोचिंग में कोई बच्चा जाता ही नहीं ... इसकी ऑफलाइन क्लास में मात्र 50 बच्चे हैं वो भी रेगुलर नहीं आते! इसकी तो नेता बनने के चक्कर में "मुखिया" पद भी गया... विधानसभा 2025 में बुरी तरह हार से विधायक भी नहीं बन पाया! खान सर ने मुसल्लहपुर हाट में जगह देकर कोचिंग खुलवाया वो भी धंधा अब मंदा पड़ गया ! अब एक नया धंधा बचा है "पशुपालन, सूअर पालन, भैंस पालन, बकरी पालन" इसमें सरकार लोन भी दे रही है ! . #GyanBinduPatna

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