𝐒𝐇𝐀𝐒𝐇𝐀𝐍𝐊 𝐌𝐀𝐋𝐀𝐕𝐈𝐘𝐀 𝐌𝐀𝐍𝐔𝐕𝐀𝐃𝐈

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@SHASHANK___123

मनुस्मृति को बदनाम करना एक राजनैतिक और वैचारिक साजिश है। ब्राह्मण दृष्टिकोण | मनुस्मृति defender | सवर्ण rights & truth Moral liability #PartitionWasAScam

Bharat Beigetreten Ocak 2023
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पाकिस्तान से हिंदू साफ हो गए। बांग्लादेश से हिंदू साफ हो गए। अफगानिस्तान से हिंदू साफ हो गए। अगर इन पर अंकुश नहीं लगाया गया तो भारत से भी हिंदू साफ हो जाएंगे। क्योंकि शालीनता, सहनशीलता और समरसता से धर्म अधर्म से कभी नहीं जीत सकता। रामायण और महाभारत हमें यही सिखाता है।
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तीनों यान में जो भिक्षु और भंते होते हैं वो भी अगर अलग विचारधारा के होते हैं तो पौराणिक धर्म स्थलों में ऐसी अराजकता क्यों जब कि ये संस्थाओं को लगातार बदनाम करते रहे हैं। ये सोचने की बात है।
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पौराणिक धर्म को बदनाम करने वाला कोई भी ब्राह्मण नहीं है। सभी घुसपैठिए है जो भगवा लपेटे बैठे हैं। देश जब संविधान से चलता है जो जाति-व्यवस्था पर आधारित है और सभी आस्था अपने नियम कानून से चलता है जैसे सुन्नी के मस्जिद में सिया, सिया के मस्जिद में सुन्नी मौलवी नहीं बन सकता,
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इनमें से कोई लेकिन बदनाम ब्राह्मण होता है। बदनाम करने वाले कौन है एससी एसटी ओबीसी। यह सब संत महाराज जो है एससी एसटी ओबीसी से ही आते हैं। यह धार्मिक अतिक्रमण करके मनुस्मृति और पौराणिक धर्म और धर्मशास्त्रों को बदनाम करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है जो एक कुत्सित सोच का परिणाम है।

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एक ही व्यक्ति (मोदी) पौराणिक धर्म इस्लाम, ईसाई, बौद्ध तीनों विचारधारा का समर्थक एक साथ नहीं हो सकता, जैसा मोदी दिखाना चाहते है- क्योंकि पौराणिक धर्म मानवता और मानव कल्याण का धर्म है जबकि बाकि दोनों संकीर्ण मानसिकता और स्व-प्रभाविता की सोच रखते हुए पौराणिक धर्म का विरोध करती है।
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वो बताना तो चाहता है पर बहुत होशियार है मोदी, वो चाहता है कि वो जितना बताये, बस, उतना ही हम जाने उससे न ज्यादा न उससे कम। सबका मकसद एक ही है इस्लाम को प्रमोट करना बेहतर बताके ताकि पौराणिक धर्म का और ज्ञान का पतन हो, इस्लाम की स्थापना हो।
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किसी ने नहीं बताया। कभी सोचा किसी ने क्यों नहीं बताया? तो अब समझो- इसलिए नहीं बताया कि नेहरू से अंबेडकर से अबुल कलाम आजाद इंदिरा, राजीव मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी कोई नहीं चाहता कि हम अपनी संस्कृति को जाने समझे। मोदी कुछ अच्छा है- क्योंकि
༺ दिव्या ༻@Divya_0405

भारत के वीर योद्धा सिर्फ इतिहास नहीं, हमारी पहचान हैं। उनकी वीरता, त्याग और बलिदान से ही सुरक्षित है हमारा वर्तमान। 🇮🇳 नमन उन अमर वीरों को 🙏 #IndianHeroes

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जिस संविधान की शपथ लेकर टीना डाबी कलक्टर बनी, उस संविधान सभा में पन्द्रह महिलाएं भी थीं जिन्होंने अंबेडकर की सहायता की थी। अंबेडकर का पैतृक संपत्ति 'संविधान' तो 1950 में आया पर इसको बनाने में 15 महिलाएं शामिल थी। जो संविधान लागू होने से पहले महिला अधिकार का साक्षात् प्रमाण है।
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सत्तर वर्षों में एक ही महिला कलक्टर बनी दूसरी नहीं बन सकी शायद । और कैसे बनी आरक्षण से। इसको तो ये भी नहीं पता जब ध्वजारोहण होता है तो किस तरफ मूंह करके खड़ा हुआ जाता है। अंबेडकर के पहले महिलाएं कहां-कहां थी ? जिस संविधान के कथित वास्तुकार अंबेडकर थे-
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न मंदिर अपवित्रीकरण का विरोध, न खाने में रूकने का विरोध, न किसी दंगे का विरोध, न भड़काऊ नारों का विरोध, न शोभायात्राओं पर पत्थरबाजी का विरोध, न पौराणिक कथाओं और देवी-देवताओं के अपमान का विरोध करते कोई अच्छा मुस्लिम देखा गया।बल्कि बचाव करते देखे गये।
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क्योंकि अच्छे मुसलमान अभी कतार में हैं, बुरे मुसलमान आगे खड़े हैं। जब ये आगे आएंगे तब इनकी जगह कोई और ले लेगा। इसलिए ये विरोध नहीं करते। सभी एक किताब पढ़ते हैं। कोई आज तक विरोध करने वाला नहीं मिला- न लव जेहाद विरोध न सर तन से जूदा का विरोध, न आतंकी हमलों का विरोध
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प्यार करना हो तो ऐसे इंसान से प्यार करो जो तुमसे प्यार न जताए, बल्कि तुम्हारी हर बात मानें, तुम्हारी आंखों में आसूं आने से पहले कयामत ला दे, पहले तुमको खिलाएं फिर खाएं। अपनी हर बात तुमसे कहे और तुम्हारी सुनें। प्यार करना हो तो ऐसे इंसान से करो जो गुलामी न करें। सम्मान करें।
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@DollyS4159 72 हूरों से मिलाने के लिए अगर धर्मावलंबी को अपना बलिदान देना पड़े जैसे की शेर को फसाने के लिए चारा डाला जाता है तब तो यह सही नहीं है। पुलिस, कानून, अदालत, संविधान क्या कर रहा है? तमाशा देख रहा है? एक-एक करके धर्मावलंबियों पर हमले हो रहे हैं और कानून तमाशा देखे जा रहा है।
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Doli Bhardwaj
Doli Bhardwaj@DollyS4159·
जिन जिहादियों को सलीम वास्तिक जी से दिक्कत है तो आजाओ तुम्हारा स्वागत है तुमको फ्री मै 72 हूर से मिलवा देंगे जय श्री राम जय हिंदुराष्ट्र
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जीते जी प्यार दो, अपनापन दो, इज्जत दो, कब क्या होगा कोई नहीं जानता। एक बार चला गया फिर कभी नहीं, कभी नहीं वापस आएगा। बाद में प्यार के चाहे भेजो हजारों सलाम: वो फिर नहीं आते... बो फिर नहीं आते!!
🦋forever chahat🦋@Chahak__soni_pc

सच्चे साथी की कदर कर लो दोस्तों वरना मर जाने के बाद ऐसा हाल होता है, इन बुजुर्गो का दर्द देखकर आंखों से आंसू आ गए ... 😭😭😭😭😭😭

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@SabitaShailend1 @ArvindKuma22911 कल मैंने grok से पूछा। उसने बताया इस्लाम पहले भी था क्योंकि ये ईसाई पंथ का विचलन है कोई पृथक विचारधारा नहीं है। ईसाइयत की एक नयी शाखा। इसलिए इस्लाम में ईसाई से शादी और परिवारिक संबंध की इजाजत है। ईसा के पहले ओल्ड टेस्टामेंट था तो वो भी इस्लामी कहे जाएंगे। घुसपैठ कमाल का किया है!
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Sabita Shailendra
Sabita Shailendra@SabitaShailend1·
जो रामायण और महाभारत काल में मुगलों को ढूंढते है ,से बाबा से संपर्क करे ...
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@PandeyR_O2025O @RahulGandhi मीडिया, विश्वविद्यालय और “सेकुलर-प्रोग्रेसिव” बौद्धिक वर्ग ने “सवर्ण = दबंग = दमनकारी” का नैरेटिव 70 साल से बनाया है। नेता खुलकर “सवर्णों के हित” की बात करता है तो उसे ब्राह्मणवादी, सवर्णवादी, आरक्षण विरोधी बोलकर मार दिया जाता है। नेरेटिव से सवर्ण भी सवर्ण का समर्थन नहीं करता।
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@PandeyR_O2025O @RahulGandhi राहुल गांधी अपना पक्ष रख रहे है, वो‌ मुस्लिम, दलित, पिछड़े, आदिवासी समुदाय के नेता हैं, उनको इनके बचाव और समर्थन का हक है, जिम्मेदारी भी और जवाबदेही भी। अगर वो‌ दंगाईयों के बचाव की बात कर रहे हैं तो गलत नहीं। हमें ये देखना है सवर्ण समर्थक नेता सवर्णों का समर्थन क्यों नहीं करते?
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Rahul Gandhi
Rahul Gandhi@RahulGandhi·
8 साल पहले, SC/ST Act को कमजोर करने के खिलाफ लाखों दलित-आदिवासी युवाओं ने आंदोलन किया, जिसमें कई गिरफ्तार हुए। संसद ने कानून तो मजबूत किया, लेकिन आज भी निर्दोष युवा मुकदमों का बोझ उठा रहे हैं। मजबूत SC/ST Act उनका हक है और शांतिपूर्ण आंदोलन उनका अधिकार। आज प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि संवेदनशील और न्यायपूर्ण दृष्टि से ये सभी मामले वापस लिए जाएं।
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इनमें से कोई लेकिन बदनाम ब्राह्मण होता है। बदनाम करने वाले कौन है एससी एसटी ओबीसी। यह सब संत महाराज जो है एससी एसटी ओबीसी से ही आते हैं। यह धार्मिक अतिक्रमण करके मनुस्मृति और पौराणिक धर्म और धर्मशास्त्रों को बदनाम करने का एक सुनियोजित षड्यंत्र है जो एक कुत्सित सोच का परिणाम है।
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कुछ लोग पूछ सकते हैं- "क्या कानून हमेशा धर्म के अनुरूप होता है?" या "अगर कानून अधर्मी हो तो क्या?" कानून हमेशा धर्म के अनुसार होना चाहिए कानून धर्म के अनुसार नहीं है तो धर्म का दोषी नहीं, धर्म तो वो कर्तव्य जो सही समय पर सही मानसिक के साथ मानवतार्थ की जाए, धर्म हमेशा महान है।
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इसलिए नीति, नियम, कानून और संविधान राष्ट्र से बड़ा है और नीति, नियम, कानून और संविधान कर्तव्य है और कर्तव्य ही धर्म है इसलिए धर्म राषपरूसे सदैव बड़ा था, बड़ा है और बड़ा रहेगा। धर्मो रक्षति रक्षित:। धर्म का अगर साथ है तो कहीं भी राष्ट्र बनाया जा सकता है धर्म नहीं है कुछ नहीं।
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राष्ट्र कभी सर्वोपरी नहीं हो सकता। आस्था भी सर्वोच्च नहीं हो सकता। क्योंकि आस्था व्यक्तिगत होती है‌। विचारधारा (मजहब) भी राष्ट्र से बड़ा नहीं हो सकता क्योंकि ये संप्रदायिक होता है। है। क्योंकि कोई भी राष्ट्र नीति, नियम, कानून और संविधान से चलता है।
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