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आदि शंकराचार्थ ने लिखा है
कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता न भवति॥
परन्तु २१ वि सदी की कलयुगी निर्मम निष्ठुर दुष्ट माताओं को देखते तो संभवतः नहीं लिखते ।
कोई स्त्री इतनी दुष्ट कैसे हो सकती है ? जो अपनी औलाद को ट्रेन के सामने फेंक दे ?
मां के नाम पर कलंक है यह स्त्री । पति की मौत के बाद उसकी जगह अनुकंपा नियुक्ति में नौकरी पाई
इस धोखेबाज स्त्री को उसी पति से हुई संतान भी फूटी आंख नहीं सुहाई और उसे मारने की साजिश रचने लगी
लिख लीजिए हो न हो इसने अपने पति को भी मरवाया होगा
पति से दुश्मनी समझी जा सकती है किन्तु उस नन्ही बच्ची से इसकी क्या दुश्मनी जो इसी की बेटी है ?
इस खून को हादसे की साजिश कर रही थी यह औरत , वह तो सीसीटीवी की फुटेज से सच्चाई का पता चला तो इस औरत को धर लिया गया
बच्ची आईसीयू में भर्ती है बचेगी या नहीं कह नहीं सकते । इस महिला को तो फांसी लगनी चाहिए
या इसे उसी रेलवे ट्रैक पर लिटाया जाना चाहिए

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