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DEEPU🙈🙉🙊
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@deepi088
💯% फ़ॉलो बैक!! 🔱ॐ🔱 छल ही छल का देवता,छल ही छल का पाप डर ही डर को पूजता, डर कर अपने आप🙏🚩
New Delhi, India Beigetreten Temmuz 2017
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आज की 2️⃣ लिस्ट रिपोस्ट करने वालों का प्रमोशन।
नेक्स्ट लिस्ट में किया जाएगा, सभी रिपोस्ट करे।
@Bhumika_ji
@vjNTR9999
@VK_Rastogi1
@satis_aggarwal
@RaghurajSi28051
@SauryaMishra17
@TejPrat25560933
@viratmi24660335
@santoshjipathak
@Bhardwaj_Pooja3
@Dinesh86525900
@Ashishk85914885 #zonauang #JanaNayagan
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@Srishtivishwak4 बहुत दुःखद घटना है बच्चों की आत्मा को शांति व परिवार को दुख सहने की शक्ति दे भगवान्
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आपके आसपास कनेर के फूल का पेड़ जरुर देखने को मिल जाएगा। इसपर जो फल लगता है वो बहुत जहरीला होता है। वाराणसी में इसी कनेर का फल खाने से तीन बच्चियों की मौत हो गई।
इनमें से दो बच्चियां सगी बहनें हैं। पांच बच्चियां एक साथ घर से बाहर खेल रही थी। आंवला समझकर बच्चियों ने कनेर के फल को खा लिया।
डीसीपी गोमती जोन आकाश पटेल ने बताया कि तीनों बच्चियों की मौत जहरीला कनेर का फल खाने से हुई है। बच्चे खेलते समय अनजाने में फल खा गए थे। अन्य बच्चों की हालत सामान्य है।



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काबिलियत परिस्थितियों से आती है, मैं जहाँ से आया हूँ अगर गिरूँगा भी तो उससे ऊपर ही रहूँगा ।
ये कहना हैं शंख एयरलाइन के चेयरमैन श्रवण कुमार विश्वकर्मा का …पढ़िये पूरा इंटरव्यू dainik.bhaskar.com/jlBspNP5BZb
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अगर हौसला बुंलद है तो कोई भी मुसीबत आपको आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती....
ऐसी ही कुछ कहानी है झारखंड के बरांगा गांव के उत्क्रमित उच्च विद्यालय में गणित पढ़ाने वाले शिक्षक गुलशन लोहार की...
गुलशन लोहार 39 साल के हैं और वे जन्म से ही बिना हाथों के हैं। इसके बावजूद उन्होंने अपनी कमजोरी को कभी रास्ते की रुकावट नहीं बनने दिया।
वे पैरों से चाक पकड़कर रोज कक्षा में बच्चों को गणित पढ़ाते हैं।बरांगा गांव सरांदा जंगल के अंदर स्थित है, जहां शिक्षा पाना आसान नहीं है।
गुलशन ने पढ़ाई के लिए कठिन रास्तों पर पैदल चलकर सफर किया, कर्ज लिया और मुख्यमंत्री अनुदान की मदद से बी.एड. की पढ़ाई पूरी की।
इसके बाद उन्होंने एम.एड. भी किया और साल 2011 में एसएआईएल के सहयोग से शिक्षक बने।
गुलशन लोहार सिर्फ पढ़ाते ही नहीं हैं, बल्कि बच्चों को यह भी सिखाते हैं कि मुश्किल हालात से डरना नहीं चाहिए और मेहनत व हिम्मत से आगे बढ़ना चाहिए।
गांव के लोग उन्हें “प्रेरणा का स्तंभ” कहते हैं और बच्चे प्यार से “गुरुजी” बुलाते हैं। उनका धैर्य, मेहनत और साहस उन्हें समाज के लिए एक सच्चा आदर्श बनाता है।



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