निरर्थक

15K posts

निरर्थक banner
निरर्थक

निरर्थक

@nirarthak_

अर्थहीन इंसान , यही मेरी पहचान...!

जयपुर राजस्थान Beigetreten Ağustos 2020
9 Folgt23.3K Follower
Angehefteter Tweet
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
एक दिन हम मर जाएंगे, अपनी अपनी चुप्पियां लेकर ,और हमारा आखिरी ख्याल होगा:"हमें बोलना चाहिए था....!
हिन्दी
48
708
2.1K
0
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
सब कुछ लिखने का हुनर होने के बावजूद,जब तुम्हारे सवाल के जवाब में मेरे होंठों से सिर्फ हाँ या हू ही निकलता है,तो यह बात मुझे भी कई बार खटकती है,लेकिन हर बार मैं यही सोचकर ठहर जाता हूँ कि जहाँ करीबी होती है,वहाँ एक शब्द भी पूरी भावनाओं को व्यक्त कर देता है...!
हिन्दी
0
14
64
1.3K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
अज्ञानी होना कोई बुरी बात नहीं,क्योंकि हर ज्ञान की शुरुआत उसी से होती है किन्तु जब व्यक्ति अपने अज्ञान को ही सत्य मानकर उसे दूसरों पर थोपने लगता है,तब वह न केवल स्वयं के विकास को रोकता है,बल्कि समाज में भ्रम और मतभेद भी उत्पन्न करता है...!
हिन्दी
0
23
74
1.5K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
सब कुछ जब सही चल रहा होता है,तभी अचानक कुछ ऐसा हो जाता है कि मन उलझनों में घिर जाता है समझ नहीं आता कि क्या किया जाए और कैसे उस स्थिति से बाहर निकला जाए ऐसे क्षणों में इंसान खुद को असहाय महसूस करता है,लेकिन समय के साथ यही ठहराव हमें फिर से संभलना और आगे बढ़ना सिखा देता है...!
हिन्दी
0
28
104
1.9K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
जीवन मे सबसे बडी़ विडम्बना तो यही है कि हर व्यक्ति अपनी जगह सही होता है और वास्तविक संघर्ष सही और गलत के बीच न होकर सही और सही के बीच ही होता है...!
हिन्दी
0
23
89
2K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
कभी-कभी मन यूँ ही अतीत की यादों और भविष्य की चिंताओं में उलझकर खुद को उदास कर लेता है,और इस भटकाव में वह वर्तमान की खुशियों को महसूस ही नहीं कर पाता ऐसे में इन चंद शब्दों का सहारा मन में फिर से विश्वास जगा देता है,वक्त कभी एक समान नहीं रहता...!
हिन्दी
0
16
60
1.4K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
कुछ समय से मैंने खुद को सब से दूर कर लिया है,अब जब कोई अपनापन दिखाकर करीब आने की कोशिश करता है,तो दिल में सुकून नहीं,बल्कि एक अनजानी सी ऊब और खामोशी उतर आती है जैसे मन ने लोगी की भीड़ से थककर,अकेलेपन को ही अपना सहारा बना लिया हो...!
हिन्दी
0
30
125
2.5K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
मैं फालतू बहस नहीं करता,क्योंकि मुझे अच्छी तरह पता है कि ऐसी बहस में उतरते ही इंसान खुद ही अपनी समझ पर सवाल खड़े कर देता है...!
हिन्दी
0
3
29
1.2K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
एक लड़ाई लड़नी है अपने आप से और इसके लिए मैंने स्वंय को तैयार भी कर लिया है,खैर!...आप सब को पता ही होगा कि किसी पुरानी स्मृति को भूलकर उसकी जगह नई स्मृति जमाना कितना मुश्किल है खासकर उस तरह के समाज में जहां लोग जीते जी पत्थर मारते हैं और बाद मरने के पूजते है...!
हिन्दी
0
29
102
2.9K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
सब अपनी जगह सही होते है,हम ही हर गलत जगह होते है...!
हिन्दी
0
9
31
1.3K
निरर्थक
निरर्थक@nirarthak_·
मुझे पढ़ने वाले और समझने वाले लोग हमेशा कम ही रहे,पर जो भी मेरी गहराई तक पहुँचे उन्होंने कभी साथ छोड़ने की ज़रूरत ही महसूस नहीं की क्योंकि समझ अक्सर भीड़ में नहीं मिलती,वो कुछ खास लोगों के हिस्से आती है और वही लोग फिर उम्र भर साथ निभाते हैं...!
हिन्दी
0
37
130
3K