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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा,अमरवाड़ा में एक मां ने बच्चे को जन्म दिया लेकिन अस्पताल में नहीं। नदी पार करते वक्त। खटिया पर। पुल नहीं था। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई। गांववालों ने हार नहीं मानी। अपनी जान जोखिम में डालकर मां-बेटे को बचाया। नदी पार कराई। बाइक से अस्पताल पहुंचाया। आज मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। लेकिन सवाल ये है 2026 में भी किसी गर्भवती को नदी पार करके अस्पताल जाना पड़े ये नॉर्मल है क्या? ये किसी एक पार्टी, एक नेता, एक सरकार की बात नहीं है। ये 78 साल की आजादी के बाद भी गांवों तक बुनियादी सुविधा न पहुंचने की बात है। सड़क, पुल, एंबुलेंस ये लग्जरी नहीं हैं। ये जरूरत हैं। ये हक हैं।उस मां की हिम्मत को सलाम। उन गांववालों की इंसानियत को सलाम। और सिस्टम से एक निवेदन ऐसे हालात दोबारा किसी मां के नसीब में न आएं। क्योंकि विकास का मतलब बड़ी-बड़ी बिल्डिंग नहीं, विकास' का मतलब है कि आखिरी गांव की आखिरी मां तक अस्पताल की पहुंच हो। क्या हम सब मिलकर इतना तो मांग सकते हैं?


























