jaydev Godara RLP
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@JaydevGodara
जयदेव गोदारा राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी सदस्य विधानसभा क्षेत्र -गुड़ामालानी बाड़मेर जय श्री वीर तेजाजी महाराज 🙏









मुख्यमंत्री श्री @BhajanlalBjp जी, क्या जैसलमेर में एलडीसी भर्ती परीक्षा में सामने आए नकल व धांधली प्रकरण के गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय मामले को दबाने के आरोप झेल रहे जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों को ही जांच सौंपना उचित है? आप अपनी सभाओं और भाषणों में बार-बार दावा करते हैं कि आपकी सरकार ने पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली पर रोक लगा दी है तथा पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षाओं का आयोजन कराया जा रहा है। लेकिन हाल की घटनाओं और लगातार सामने आ रहे मामलो के अनुसार तो यह सिद्ध हो चुका हैं कि पेपर माफियाओं को सत्ता का संरक्षण प्राप्त हैं। 05 जुलाई 2026 को आयोजित एलडीसी द्वितीय ग्रेड भर्ती परीक्षा के दौरान जैसलमेर जिला मुख्यालय स्थित स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल परीक्षा केंद्र पर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। जहाँ परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया कि रिलीवर व विक्षक द्वारा परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र खिड़की से बाहर भेजा गया, बाहर से हल करवाकर अंदर कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुँचाया गया। प्रभावशाली लोगों के परिचितों और रिश्तेदारों को लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से ड्यूटी सुनियोजित ढंग से इस परीक्षा केंद्र पर लगाई गई। इससे पहले भी इन सभी वीक्षक अध्यापकों की ड्यूटी हर भर्ती में सुनियोजित रूप से एक ही सेंटर पर नकल कराने की नीयत से लगाई जाती रही हैं सभी की भूमिका संदिग्ध रही हैं। अपने पारिवारिक सदस्यों, रिश्तेदारो व परिचितो का चयन भी करवाया हैं। इस LDC भर्ती के परीक्षार्थियों के विरोध के बाद तत्काल निष्पक्ष कार्रवाई करने के बजाय शाम 06:00 बजे परीक्षा समाप्त होने के बाद देर रात तक परीक्षा केंद्र के अधिकारियों, रिलीवरो, वीक्षकों और कर्मचारियों को जिला प्रशासन के अतिरिक्त जिला कलेक्टर व पुलिस के अधिकारियों द्वारा केंद्र पर रोककर पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया। सबसे गंभीर बात यह है कि परीक्षार्थियों ने स्वयं विरोध कर कथित अनियमितताओं को उजागर किया, लेकिन इसके बावजूद अब तक दोषियों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। परीक्षा केंद्र के अधीक्षक, प्राचार्य तथा कुछ वीक्षकों की ही नहीं जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व की कई भर्ती परीक्षाओं में भी इन्हीं लोगों की भूमिका विवादों व संदिग्ध घेरे में रही है तथा प्रभाव का उपयोग कर भर्ती परीक्षाओं में ड्यूटी लगवाने और परिचित अभ्यर्थियों को लाभ पहुँचाने के प्रयास किए जाते रहे हैं। इन सभी आरोपों की निष्पक्ष, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। मुख्यमंत्री जी और राजस्थान सरकार, यदि वास्तव में निष्पक्षता से पारदर्शी भर्ती व्यवस्था चाहती है, तो इस पूरे प्रकरण व पूर्व की भर्तियों में इनकी संलिप्तता की जांच स्थानीय प्रशासन या उन्हीं अधिकारियों से कराने के बजाय स्वतंत्र जांच आवश्यक है। इसलिए किसी स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराई जाए। यदि जांच में कोई भी व्यक्ति चाहे वह अधिकारी हो, कर्मचारी हो या किसी राजनीतिक दल से जुड़ा व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोरतम सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। @RajCMO @RajGovOfficial

पत्रकार— हनुमान बेनीवाल जी आप बाड़मेर आए हो जो भाटी का गढ़ माना जाता है बेनीवाल:- बाड़मेर तो मेरा ही गढ़ है और किसी का नहीं चलो बाड़मेर की राजनीति पर विश्लेषण करते हैं…📈 बाड़मेर- निर्दलीय विधायक शिव- निर्दलीय विधायक बायतू- कांग्रेस विधायक गुड़ामालानी- भाजपा सिवाना- भाजपा पचपदरा- भाजपा चोहटन- भाजपा बाड़मेर जिले में RLP की एक भी सीट नहीं है तो फिर बाड़मेर जिला RLP का गढ़ कैसे हुआ कोई जानकार बंदू इस गणित को समझाएगा क्या…🤔












