
The Equality
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(A new view of society, history, and politics) we will always give priority to equality, liberty and fraternity.






मेरी बेटी और उसकी शादी!




कल मैंने नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद 'रावण' के द्वारा भरे मंच से बोली गई भाषा पर सवाल उठा दिया तो उनके कुछ समर्थक लोग तिलमिला उठे। पहली बात तो मैंने सिर्फ उनकी उस भाषा का विरोध किया था चंद्रशेखर रावण का नहीं। अगर संवैधानिक पद पर बैठा हुआ इंसान इस तरह की भाषा का प्रयोग करेगा तो एक छुटभैये नेता और संसद में बैठने वाले व्यक्ति में क्या अंतर रह जाएगा? वो एक सम्मानित और मर्यादित पद पर हैं, उन्हें इस तरह की भाषा से बचना चाहिए। बाकी अगर कोई आपको धमकी दे रहा या कुछ और कह रहा तो आप कानून का सहारा लीजिए अभी आपका राजनीतिक सफर काफी लंबा है। जिस दिन कोई और बड़ा नेता अखिलेश यादव जी या कोई और ऐसी भाषा का इस्तेमाल करेंगे तो उसकी भी आलोचना होगी। बड़े नेता इस तरह छोटी-छोटी चीजों पर नहीं उलझते इससे पहले भी कई बड़े नेताओं को लोग बड़ी-बड़ी बातें बोल चुके हैं।





सांसद की कुर्सी पर बैठे व्यक्ति की भाषा कतई ऐसी नहीं हो सकती। कल नगीना सांसद चंद्रशेखर रावण की बाराबंकी में रैली थी, वहां पर उन्होंने अपने बात को अमर्यादित तरीके से रखा जो एक सभ्य समाज के लिए बेहद शर्मनाक बात है। उन्होंने मंच से धमकी भरे लहज़े में कहा कि, "मैं चमड़े की चप्पल पहनकर आया हूं, हमारा झंडा-डंडा दोनों मजबूत है, हम चमड़ा उतारना जानते है, उसका जूता बनाना भी जानते है और समय आने पर उसे सिर पर पटककर मारना भी जानते है।" ऐसे भाषण कार्यकर्ताओं को केवल भड़काने का काम करते हैं।



