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केसरिया
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केसरिया
@KESRIYAA
यदि आपका कोई शत्रु नहीं है तो इसका अर्थ है कि आप उन जगहों पर भी ख़ामोश थे जहाँ बोलना बहुत ज़रूरी था जय श्री राम 🚩 हर हर महादे 🙏#HIS Hindu Ideology Support
Delhi, NY Inscrit le Ekim 2021
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।
प्रथम महीना चैत से गिन
राम जनम का जिसमें दिन।।
द्वितीय माह आया वैशाख।
वैसाखी पंचनद की साख।।
ज्येष्ठ मास को जान तीसरा।
अब तो जाड़ा सबको बिसरा।।
चौथा मास आया आषाढ़।
नदियों में आती है बाढ़।।
पांचवें सावन घेरे बदरी।
झूला झूलो गाओ कजरी।।
भादौ मास को जानो छठा।
कृष्ण जन्म की सुन्दर छटा।।
मास सातवां लगा कुंआर।
दुर्गा पूजा की आई बहार।।
कार्तिक मास आठवां आए।
दीवाली के दीप जलाए।।
नवां महीना आया अगहन।
सीता बनीं राम की दुल्हन।।
पूस मास है क्रम में दस।
पीओ सब गन्ने का रस।।
ग्यारहवां मास माघ को गाओ।
समरसता का भाव जगाओ।।
मास बारहवां फाल्गुन आया।
साथ में होली के रंग लाया।।
बारह मास हुए अब पूरे।
छोड़ो न कोई काम अधूरे।।
जय श्री रामजी
आगामी हिन्दू नववर्ष की शुभकामनायें
।
#औ_का

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BJP leader @SuvenduWB da began his campaign at Bhawanipore.
#BattleForBhabanipur #WestBengalAssemblyElections
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मूर्ख कन्वर्टेड महिला..!!!
मिक्स ब्रीड..!!
बसंत ऋतु का आगमन और स्वागत नहीं है,
ये बसंत ऋतु का अंत है और ग्रीष्ण का प्रारंभ है
तुझे क्या पता...
तुम तो इटालियन अम्मा की बिटिया हो
Priyanka Gandhi Vadra@priyankagandhi
आज देश भर में विभिन्न त्योहार मनाए जा रहे हैं। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नव संवत्सर विक्रम संवत-2083, उगादी, गुड़ी पड़वा, नवरोज (नवरेह) एवं चेटीचंड की हार्दिक शुभकामनाएं। वसंत ऋतु और नववर्ष के स्वागत में मनाए जाने वाले ये सभी पर्व भारत की बहुरंगी संस्कृति एवं विविधता के प्रतीक हैं। इस अवसर पर मैं सभी देशवासियों के लिए सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना करती हूं।
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Priest King @narendramodi
And his entire Sabha member
@AmitShah
@myogiadityanath
Going to rule and will make it best
Just believe
If you have an issue
It will addressed
Keep you faith

United Arab Emirates 🇦🇪 English
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दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।
चैत्र नवरात्रि के द्वितीय दिवस पर माँ ब्रह्मचारिणी आप सभी को साहस और संयम प्रदान करें।
जय माँ ब्रह्मचारिणी! 🚩
#Navratri #MaaBrahmacharini #ChaitraNavratri #HIS

Riyadh, Kingdom of Saudi Arabia 🇸🇦 हिन्दी
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महिषासुरमर्दिनि स्तोत्रम्-ॐ दुं दुर्गायै नमः
अयि गिरिनन्दिनि नन्दितमेदिनि विश्वविनोदिनि नन्दिनुते
गिरिवरविन्ध्यशिरोऽधिनिवासिनि विष्णुविलासिनि जिष्णुनुते।
भगवति हे शितिकण्ठकुटुम्बिनि भूरिकुटुम्बिनि भूरिकृते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१॥
सुरवरवर्षिणि दुर्धरधर्षिणि दुर्मुखमर्षिणि हर्षरते
त्रिभुवनपोषिणि शङ्करतोषिणि किल्बिषमोषिणि घोषरते
दनुजनिरोषिणि दितिसुतरोषिणि दुर्मदशोषिणि सिन्धुसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२॥
अयि जगदम्ब मदम्ब कदम्ब वनप्रियवासिनि हासरते
शिखरि शिरोमणि तुङ्गहिमलय शृङ्गनिजालय मध्यगते ।
मधुमधुरे मधुकैटभगञ्जिनि कैटभभञ्जिनि रासरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥३॥
अयि शतखण्ड विखण्डितरुण्ड वितुण्डितशुण्द गजाधिपते
रिपुगजगण्ड विदारणचण्ड पराक्रमशुण्ड मृगाधिपते ।
निजभुजदण्ड निपातितखण्ड विपातितमुण्ड भटाधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥४॥
अयि रणदुर्मद शत्रुवधोदित दुर्धरनिर्जर शक्तिभृते
चतुरविचार धुरीणमहाशिव दूतकृत प्रमथाधिपते ।
दुरितदुरीह दुराशयदुर्मति दानवदुत कृतान्तमते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥५॥
अयि शरणागत वैरिवधुवर वीरवराभय दायकरे
त्रिभुवनमस्तक शुलविरोधि शिरोऽधिकृतामल शुलकरे ।
दुमिदुमितामर धुन्दुभिनादमहोमुखरीकृत दिङ्मकरे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥६॥
अयि निजहुङ्कृति मात्रनिराकृत धूम्रविलोचन धूम्रशते
समरविशोषित शोणितबीज समुद्भवशोणित बीजलते ।
शिवशिवशुम्भ निशुम्भमहाहव तर्पितभूत पिशाचरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥७॥
धनुरनुषङ्ग रणक्षणसङ्ग परिस्फुरदङ्ग नटत्कटके
कनकपिशङ्ग पृषत्कनिषङ्ग रसद्भटशृङ्ग हताबटुके ।
कृतचतुरङ्ग बलक्षितिरङ्ग घटद्बहुरङ्ग रटद्बटुके
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥८॥
सुरललना ततथेयि तथेयि कृताभिनयोदर नृत्यरते
कृत कुकुथः कुकुथो गडदादिकताल कुतूहल गानरते ।
धुधुकुट धुक्कुट धिंधिमित ध्वनि धीर मृदंग निनादरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥९॥
जय जय जप्य जयेजयशब्द परस्तुति तत्परविश्वनुते
झणझणझिञ्झिमि झिङ्कृत नूपुरशिञ्जितमोहित भूतपते ।
नटित नटार्ध नटी नट नायक नाटितनाट्य सुगानरते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१०॥
अयि सुमनःसुमनःसुमनः सुमनःसुमनोहरकान्तियुते
श्रितरजनी रजनीरजनी रजनीरजनी करवक्त्रवृते ।
सुनयनविभ्रमर भ्रमरभ्रमर भ्रमरभ्रमराधिपते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥११॥
सहितमहाहव मल्लमतल्लिक मल्लितरल्लक मल्लरते
विरचितवल्लिक पल्लिकमल्लिक झिल्लिकभिल्लिक वर्गवृते ।
शितकृतफुल्ल समुल्लसितारुण तल्लजपल्लव सल्ललिते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१२॥
अविरलगण्ड गलन्मदमेदुर मत्तमतङ्ग जराजपते
त्रिभुवनभुषण भूतकलानिधि रूपपयोनिधि राजसुते ।
अयि सुदतीजन लालसमानस मोहन मन्मथराजसुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१३॥
कमलदलामल कोमलकान्ति कलाकलितामल भाललते
सकलविलास कलानिलयक्रम केलिचलत्कल हंसकुले ।
अलिकुलसङ्कुल कुवलयमण्डल मौलिमिलद्बकुलालिकुले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१४॥
करमुरलीरव वीजितकूजित लज्जितकोकिल मञ्जुमते
मिलितपुलिन्द मनोहरगुञ्जित रञ्जितशैल निकुञ्जगते ।
निजगणभूत महाशबरीगण सद्गुणसम्भृत केलितले
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१५॥
कटितटपीत दुकूलविचित्र मयुखतिरस्कृत चन्द्ररुचे
प्रणतसुरासुर मौलिमणिस्फुर दंशुलसन्नख चन्द्ररुचे
जितकनकाचल मौलिमदोर्जित निर्भरकुञ्जर कुम्भकुचे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१६॥
विजितसहस्रकरैक सहस्रकरैक सहस्रकरैकनुते
कृतसुरतारक सङ्गरतारक सङ्गरतारक सूनुसुते ।
सुरथसमाधि समानसमाधि समाधिसमाधि सुजातरते ।
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१७॥
पदकमलं करुणानिलये वरिवस्यति योऽनुदिनं सुशिवे
अयि कमले कमलानिलये कमलानिलयः स कथं न भवेत् ।
तव पदमेव परम्पदमित्यनुशीलयतो मम किं न शिवे
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१८॥
कनकलसत्कलसिन्धुजलैरनुषिञ्चति तेगुणरङ्गभुवम्
भजति स किं न शचीकुचकुम्भतटीपरिरम्भसुखानुभवम् ।
तव चरणं शरणं करवाणि नतामरवाणि निवासि शिवम्
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥१९॥
तव विमलेन्दुकुलं वदनेन्दुमलं सकलं ननु कूलयते
किमु पुरुहूतपुरीन्दु मुखी सुमुखीभिरसौ विमुखीक्रियते ।
मम तु मतं शिवनामधने भवती कृपया किमुत क्रियते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२०॥
अयि मयि दीन दयालुतया कृपयैव त्वया भवितव्यमुमे
अयि जगतो जननी कृपयासि यथासि तथानुमितासिरते ।
यदुचितमत्र भवत्युररीकुरुतादुरुतापमपाकुरुते
जय जय हे महिषासुरमर्दिनि रम्यकपर्दिनि शैलसुते ॥२१॥
ॐ जगदम्बिके दुर्गायै नमः
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Why are sons given complete freedom while daughters are kept under restrictions?
This reflects a mindset- and a deliberate approach they continue to follow.
Even after witnessing this, people in Hindu society often fail to become aware and challenge such thinking.
Staying aware and alert is essential.
English
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The Gudi we raise on Gudi Padwa is more than a festive symbol- it reflects cultural meaning and practical wisdom.
It represents victory and auspicious beginnings, often linked with prosperity in the Maratha era.
Neem leaves with jaggery or sugar are consumed during seasonal change to support immunity, showing traditional health wisdom.
The inverted copper vessel on top symbolizes purity and prosperity.
A beautiful blend of tradition, health, and lifestyle.
English
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हिंदू नव वर्ष, चैत्र नवरात्रि और महर्षि गौतम जयंती के साथ अब राजस्थान दिवस भी जुड़ गया है।
यह सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, परंपरा और गौरव का प्रतीक है।
राजस्थानवासियों के लिए यह अवसर है गर्व, उत्सव और सामूहिक एकता का, जो हर साल हमें हमारी धरोहर और इतिहास से जोड़ता है।
इस दिन हम अपने राज्य की उपलब्धियों, संस्कृति और पहचान का जश्न मनाते हैं।
राजस्थान अब हर दृष्टि से उत्कृष्टता और गौरव का प्रतीक बन चुका है।
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