Mannu Singh
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आज लोकसभा में जो हुआ, वह हर उस महिला के लिए पीड़ादायक और निराशाजनक है, जो अपने अधिकार और सम्मान की उम्मीद रखती है। माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने नारी शक्ति को सशक्त बनाने के लिए जो संकल्प लिया, नारी शक्ति वंदन अधिनियम उसी दिशा में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम था। लेकिन विपक्ष द्वारा इस महत्वपूर्ण संविधान संशोधन को पारित न होने देना महिलाओं के अधिकारों के साथ सीधा अन्याय है। एक महिला मुख्यमंत्री होने के नाते, यह विषय मेरे लिए केवल राजनीति का नहीं, बल्कि संवेदना और सम्मान का विषय है। देश की करोड़ों महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में भागीदारी देने का यह अवसर आज उनसे छीन लिया गया है। यह पहली बार नहीं है जब कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने महिलाओं के अधिकारों के रास्ते में बाधा डाली है। उनकी यह सोच महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रति उनकी वास्तविक नीयत को दर्शाती है। लेकिन मैं विश्वास के साथ कहती हूँ कि देश की महिलाएं सब देख रही हैं और समझ रही हैं। नारी शक्ति के साथ हुआ यह अन्याय यूँ ही नहीं जाएगा। दिल्ली सरकार प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण और महिला-नेतृत्व वाले विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

आज लोकसभा में बहुत अजीब दृश्य दिखा। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लिए जरूरी संविधान संशोधन बिल को कांग्रेस, TMC, DMK और समाजवादी पार्टी ने पारित नहीं होने दिया। महिलाओं को 33% आरक्षण देने के बिल को गिरा देना, उसका उत्साह मनाना और जयनाद करना सचमुच निंदनीय और कल्पना से परे है। अब देश की महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण, जो उनका अधिकार था, वह नहीं मिल पाएगा। कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने यह पहली बार नहीं किया, बल्कि बार-बार किया है। उनकी यह सोच न महिलाओं के हित में है और न देश के। मैं उन्हें बताना चाहता हूँ कि नारी शक्ति के अपमान की यह बात यहाँ नहीं रुकेगी, दूर तक जाएगी। विपक्ष को ‘महिलाओं का आक्रोश’ न सिर्फ 2029 लोकसभा चुनाव में, बल्कि हर स्तर, हर चुनाव और हर स्थान पर झेलना पड़ेगा।










आज लोकसभा में कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और पूरे इंडि. गठबंधन का असली महिला-विरोधी चेहरा एक बार फिर बेनकाब हो गया। राहुल गांधी और उनके ‘Anti-Women Alliance’ ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक को पारित न होने देकर देश की ‘आधी आबादी’ के साथ घोर विश्वासघात किया है। जिस कांग्रेस ने दशकों तक महिलाओं को सिर्फ वोट बैंक समझा, आज उसने उनकी हिस्सेदारी और भागीदारी की सरेआम हकमारी की है, जो करोड़ों माताओं-बहनों के सपनों पर एक कायरतापूर्ण प्रहार है। खोखले वादे और नारी शक्ति का बार-बार अपमान करना ही कांग्रेस की असल राजनीति रही है। एक ओर जहाँ आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में देश महिलाओं को 'शक्ति' मानकर उन्हें नेतृत्व की मुख्यधारा में लाने के लिए संकल्पित है, वहीं विपक्ष की यह नकारात्मक सोच उनके विकास विरोधी चरित्र को दर्शाती है। नारी शक्ति का यह आक्रोश अब रुकने वाला नहीं है और आगामी चुनावों में देश की माताएं-बहनें अपने अधिकारों को रौंदने वालों को कड़ा सबक सिखाते हुए इस विश्वासघात का पूरा हिसाब चुकता करेंगी।
















