हाल-ए-राजस्थान

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@Teja_Ramdev

किसान,मजदूर,वंचित व बेरोजगारों की आवाज।

राजस्थान, भारत शामिल हुए Mart 2021
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हाल-ए-राजस्थान रीट्वीट किया
Sharat
Sharat@sharatjpr·
जाटों की गहलोत गुट से दूरी! निर्मल चौधरी को रोकेंगे गहलोत, बेनीवाल का प्... youtu.be/Fa5LZdvAHfE?si… via @YouTube
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@8PMnoCM तीनों बार जनता ने मौका मिलते ही कुर्सी उल्ट दी,पाणी की तरह पैसा बर्बाद करने पर भी जोधपुर व जालोर वालो ने बेटे को बेरंग लौटा दिया,जिस osd को साएँ की तरह 12 साल साथ रखा,उसी ने टेप कांड का भांडा फोड़ दिया,दिल्ली दरवाजा बंद हो गया!बुढ़ापा अलग है,हरिश्चंद्र की फड़फड़ाहट स्वाभाविक है!
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राजस्थानी ट्वीट
भजनलाल शर्मा और मदन राठौड़ की मंशा बता भी दी और पूरी भी कर दी।
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@GovindDotasra देश में शायद ही कोई ऐसा CM है या रहा होगा,जो अपने ही सहयोगी मंत्री को अपने आँखों के सामने नँगा कराता होगा! हर CM अपने मंत्री के काले कारनामों पर पर्दा ही डालता है!लेकिन जादूगर का अंदाज देखिए!किस तरह पाणी पी पीकर गवाही दिलवाए थे आपको नँगा करवाने के लिए! हालांकि,निपट खुद भी गए!
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Govind Singh Dotasra
Govind Singh Dotasra@GovindDotasra·
लोकतंत्र का गला घोंटने वाली भाजपा याद रखे.. राजस्थान की जनता लोकतंत्र बचाना जानती है। भाजपा सरकार पंचायत व निकाय चुनाव टालकर संविधान से खिलवाड़ कर रही है। आज बाड़मेर के उण्डू (शिव) में जनता की बुलंद आवाज़ ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब हर गांव और वार्ड से संघर्ष उठेगा। #संगठन_बढ़ाओ_लोकतंत्र_बचाओ
Govind Singh Dotasra tweet mediaGovind Singh Dotasra tweet mediaGovind Singh Dotasra tweet mediaGovind Singh Dotasra tweet media
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शिक्षक,राष्ट्र निर्माता हैं और रोज-मर्रा के कामों मे उलझी जनता को सियासी ABCD भी समझाते हैं!सरकारें भी शिक्षकों का खूब ध्यान रखती आई हैं,लेकिन एक CM के सामने उनके मंत्री को एक स्वर में बे-नकाब किया गया था,तब से विश्वास का संकट है! @BhajanlalBjp जी को शपथ पत्र नही, आशीर्वाद चाहिए!
M. Verma@Mahavee72269029

थर्ड ग्रेड ट्रांसफर करे सरकार @BhajanlalBjp @madandilawar @1stIndiaNews @UdtaPanchi__

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हाल-ए-राजस्थान
@Abhinav_Pan जिन सत भाईयों ने आज केजरीवाल जी के कंधों को हल्का किया है,वे अब राज्यसभा में संख्या बल बढ़ाने के अलावा शायद उनके भी कंधे ही तोड़ेंगे! कहीं ऐसा तो नहीं है कि, राहुल गाँधी जी का दिल्ली कर्ज उतारना भी एक कारण हो,या फिर सातों के लिए सुरक्षा कवच पहनना ही खास वजह रही है?
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Abhinav Pandey
Abhinav Pandey@Abhinav_Pan·
जब बाकी दलों के नेता BJP में जा रहे थे तो एक बार अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि ‘हमारी पार्टी वाले पैसे से नहीं बिकते हैं, ना किसी भी तरह से टूटते हैं’ अदरक का स्वाद थोड़ा कड़वा होता है,मगर आ सभी के हिस्से रहा है।
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पार्टियों के नेता,अपने कार्यकर्ताओं के आदर्श होते हैं,वे अपने नेता के लिए अपने पडौसी से भी लड़ भिड़ जाते हैं! कार्यकर्ताओं व समर्थकों को अपने ऐसे आदर्श नेताओं से प्रेरणा लेकर लाभांवित होना चाहिए!
Jaswant Dayma@jaswantdayma15

आप राज्यसभा सांसद राघव चढ्ढा ने आधिकारिक तौर पर भाजपा ज्वाइन कर ली है। साथ में अशोक मित्तल और संदीप पाठक ने भी भाजपा ज्वाइन कर ली है। बाकी 4 हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रम साहनी और स्वाति मालीवाल का इंतजार है।

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हाल-ए-राजस्थान
@ajitanjum अगर,व्यर्थ में केजरीवाल जी के कंधे ही तोड़े रहे थे तो,इन्हें दोनों कंधों पर लादकर केजरीवाल जी क्यों इतराते थे? BJP अपने कंधे व्यर्थ में क्यों तोड़ना चाहेगी? वो भी वहाँ,जहाँ कुछ लेना-देना ही नही है! क्या कांग्रेस का दिल्ली कर्ज उतारा जा रहा है या फिर राज्यसभा मे जरूरत है?
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हाल-ए-राजस्थान
अगर, सच में समाजवादी पार्टी के नेताओं कार्यकर्ताओं के साथ बहुत बड़ा अन्याय हो रहा है तो, @yadavakhilesh जी उन्हें जल्दी न्याय दिलाएँ,कहीं ऐसा न हो कि, इन्हें न्याय के लिए 'आप' के राज्यसभा सांसदों की तरह कहीं और जाने को मजबूर होना पड़े!
Neeraj Kanojia@NeerajKanojia16

समय अब दहाड़ लगाने का है,समय अब ललकार लगाने का है .

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हाल-ए-राजस्थान
@dineshbohrabmr कुछ नेता,कुछ ज्यादा ही डेढ़ सियाने हैं! गहलोत भी यही समझा करते थे कि,सोचते थे कि,लास्ट तीन महीने खजाने का मुँह उल्टा कर देंगे और जनता भूल-भाल जाएगी! तीसरी बार भी जब,कुर्सी से खींचा गया तो भी नहीं माने थे,जब पाणी की तरह पैसा बर्बाद करके भी जालोर से बेट के आँसू पोछते आए, तक टिके!
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Dinesh Bohra
Dinesh Bohra@dineshbohrabmr·
आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सांसदों के भाजपा में विलय के बाद राघव चड्ढा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा— “सरल शब्दों में कहूँ तो हम राजनीति में अपना करियर बनाने के लिए नहीं आए थे। हम अपना करियर छोड़कर देश की सेवा करने के उद्देश्य से राजनीति में आए थे। लेकिन यदि इस पार्टी में देश के लिए काम नहीं हो पा रहा है, तो उसका कारण यह है कि अब आम आदमी पार्टी पहले जैसी नहीं रही। पिछले कुछ वर्षों से आप सभी मुझसे लगातार पूछ रहे थे कि मैं पार्टी की गतिविधियों से दूर क्यों दिखाई देता हूँ, मैंने पार्टी से किनारा क्यों कर लिया। उस समय मैंने कुछ नहीं कहा, क्योंकि मैं प्रयास कर रहा था कि स्थिति बेहतर हो सके। लेकिन आज मैं आपको इसका वास्तविक कारण बताना चाहता हूँ कि मैंने खुद को पार्टी की गतिविधियों से अलग क्यों किया। इसका कारण यह है कि मैं उनके गलत कार्यों में शामिल नहीं होना चाहता था। मैं उनकी निकटता के योग्य इसलिए नहीं था, क्योंकि मैं उनके ग़लत कार्यों का हिस्सा नहीं बनना चाहता था।”
Dinesh Bohra tweet media
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हाल-ए-राजस्थान
14-15 साल बाद हौश में आए चड्ढा जी!! वे अब तक बेसुध थे,इसलिए कालाधन व लोकपाल के नाम पर ठगाई करनेवाले महाठग @ArvindKejriwal को देवता मान रहे थे और देशवासियों को महंगाई व बेरोज़गारी से मुक्ति दिलानेवाले मोदी जी व Ugc regulation केलिए ईंट से ईंट बजा रहे @RahulGandhi जी को कोस रहे थे!
ABP News@ABPNews

#WATCH | आम आदमी पार्टी के दो तिहाई सांसदों के BJP में शामिल होने से AAP को कितना सियासी नुकसान? @romanaisarkhan | @MeghaSPrasad @brajwasipavan | @AshishSinghLIVE abplive.com/live-tv #BreakingNews #AAP #Politics #RaghavChadha #Politics

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हाल-ए-राजस्थान
2012 मे जनता को बड़े-बड़े झांसे देकर सत्ता में आए @ArvindKejriwal जी तो पता नही शराब घोटाले के आरोपों से कब बरी होंगे,लेकिन उनकी पार्टी के दो-तिहाई राज्यसभा सांसद जरूर पवित्र के लिए वाशिंग मशीन की ओर चल दिए हैं!पंजाब कांग्रेस के लिए आज खुशी का दिन है! @INCIndia @AamAadmiParty
ABP News@ABPNews

#WATCH | आम आदमी पार्टी के दो तिहाई सांसदों के BJP में शामिल होने से AAP को कितना सियासी नुकसान? @romanaisarkhan | @MeghaSPrasad @brajwasipavan | @AshishSinghLIVE abplive.com/live-tv #BreakingNews #AAP #Politics #RaghavChadha #Politics

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Science Journey
Science Journey@ScienceJourney2·
नीचे वाला पोस्ट प्रोपेगैंडा + गलत निष्कर्ष का मिश्रण है। 1. “सारी डिग्री तीसरी श्रेणी” — गलत। अम्बेडकर ने Bombay University से B.A., Columbia से M.A./Ph.D., LSE से doctorate और Gray’s Inn से Bar-at-Law किया। Supreme Court of India लिखता है कि “excellent performance” के कारण उन्हें Baroda scholarship मिली। LSE भी उन्हें “brilliant scholar” कहता है और दो doctorates की पुष्टि करता है। 2. “गरीब नहीं थे क्योंकि बचपन की फोटो है” — बचकाना तर्क। फोटो होना गरीबी/जातिगत भेदभाव के न होने का प्रमाण नहीं। वे सूबेदार के बेटे थे, पर दलित समाज से थे और शिक्षा, पानी, स्कूल-व्यवहार में भेदभाव का सामना उनके जीवन-वृत्तांतों में दर्ज है। Columbia और LSE दोनों उन्हें Dalit background से आया व्यक्ति बताते हैं जिसने भेदभाव के विरुद्ध काम किया। 3. “उन्होंने शूद्रों/दलितों को पढ़ने का अधिकार नहीं दिया” — स्ट्रॉमैन। अम्बेडकर ने अकेले “पढ़ने का अधिकार” नहीं दिया; संविधान ने समानता, भेदभाव-विरोध और अस्पृश्यता-उन्मूलन को कानूनी अधिकार बनाया। Article 15 जाति/लिंग आदि के आधार पर भेदभाव रोकता है, Article 16 समान अवसर देता है, Article 17 अस्पृश्यता समाप्त करता है। 4. “उन्हें पढ़ने नहीं दिया गया—झूठ, क्योंकि स्कॉलरशिप मिली” — भ्रामक। स्कॉलरशिप मिलना यह साबित नहीं करता कि समाज में भेदभाव नहीं था। उल्टा, यह दिखाता है कि असाधारण प्रतिभा के कारण उन्हें सीमित अवसर मिला। Sayajirao Gaekwad scholarship ऐतिहासिक तथ्य है, लेकिन इससे जातिगत बाधाएँ खत्म नहीं हो जातीं। 5. “महिलाओं को अधिकार 15 महिला सदस्यों ने दिए, अम्बेडकर ने नहीं” — अधूरा सच। संविधान सभा में 15 महिलाएँ थीं और उनका योगदान महत्त्वपूर्ण था। पर अम्बेडकर कानून मंत्री के रूप में Hindu Code Bill के बड़े समर्थक थे, जो विवाह, उत्तराधिकार, संपत्ति और लैंगिक समानता से जुड़ा था; उन्होंने कहा था कि लिंग-आधारित असमानता छोड़ी गई तो संविधान “farce” बन जाएगा। 6. “अम्बेडकर अंग्रेजों के एजेंट थे / Simon Commission ने लाला लाजपत राय की हत्या की” — गलत। Simon Commission ने हत्या नहीं की; लाला लाजपत राय की मृत्यु पुलिस लाठीचार्ज के बाद हुई। अम्बेडकर ने Simon Commission के सामने Depressed Classes के अधिकारों के लिए evidence दिया—यह दलित प्रतिनिधित्व की राजनीति थी, अंग्रेज-भक्ति का प्रमाण नहीं। 7. “1946 में पार्टी हार गई, इसलिए अम्बेडकर शक्तिहीन थे” — गलत निष्कर्ष। चुनावी हार से वैचारिक/संवैधानिक योगदान शून्य नहीं हो जाता। वे स्वतंत्र भारत के पहले Law Minister बने और 29 अगस्त 1947 को Drafting Committee के Chairman नियुक्त हुए। 8. “आरक्षण अम्बेडकर ने अकेले नहीं दिया” — सही, पर भ्रामक। हाँ, संविधान सभा ने सामूहिक रूप से प्रावधान बनाए। पर अम्बेडकर ने SC/ST प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की संवैधानिक भाषा को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। Poona Pact में भी Depressed Classes के reserved seats का प्रश्न उनके नेतृत्व से जुड़ा था। 9. “अम्बेडकर ने संविधान नहीं बनाया, BN Rau ने बनाया” — आधा सच। BN Rau constitutional adviser थे और प्रारंभिक draft तैयार किया। लेकिन Drafting Committee, जिसके Chairman अम्बेडकर थे, ने Assembly के निर्णयों के आधार पर draft को scrutinise, amend और final legal form दिया। संविधान किसी एक व्यक्ति ने नहीं लिखा, पर अम्बेडकर को “chief architect” कहना उनकी भूमिका के कारण ऐतिहासिक रूप से उचित है। 10. “दलिस्तान की मांग” — झूठ/विकृति। अम्बेडकर ने Depressed Classes के लिए separate electorate/राजनीतिक प्रतिनिधित्व माँगा था, अलग देश “दलिस्तान” नहीं। 1932 का विवाद separate electorates पर था, जो Poona Pact में reserved seats के रूप में बदला। 11. “पटेल ने आरक्षण को विष कहा” — विश्वसनीय प्रमाण नहीं। यह वायरल दावा है, पर Constituent Assembly के प्रमाणित रिकॉर्ड में ऐसा लोकप्रिय quote स्थापित नहीं मिलता। आरक्षण/प्रतिनिधित्व पर बहसें हुईं, लेकिन इस पोस्ट की नाटकीय कहानी स्रोतहीन लगती है। 12. “कोट-पैंट पहनना अंग्रेजियत/राष्ट्र-विरोध” — हास्यास्पद। कपड़ों से राष्ट्रवाद तय नहीं होता। नेहरू, पटेल, सुभाष, जिन्ना, सावरकर—कई नेताओं ने अलग-अलग समय पर पश्चिमी पोशाक पहनी। अम्बेडकर का काम संविधान, सामाजिक न्याय, श्रमिक अधिकार, स्त्री अधिकार और दलित प्रतिनिधित्व से मापा जाएगा, न कि सूट से। निष्कर्ष: पोस्ट का तरीका साफ है—सही तथ्यों के टुकड़े लेकर गलत निष्कर्ष निकालना। अम्बेडकर देवता नहीं थे; उनकी आलोचना हो सकती है। लेकिन ऊपर दिए गए अधिकांश दावे ऐतिहासिक रूप से गलत, संदर्भहीन या दुर्भावनापूर्ण हैं।
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@TheTribhuvan दंगल जीत गई तो, आज की इंदिरा के रूप मशहूर होना तय है!बम्पर वोटिंग से पूरे देश का ध्यान बंगाल ने खींच लिया है!
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Tribhuvan_Official
Tribhuvan_Official@TheTribhuvan·
क्या इन शिक्षा मंत्री और अब तक शिक्षा मंत्री रहे किसी नेता को यह मालूम है कि हिन्दी वर्णमाला में कितने अक्षर होते हैं? क्या यह शिक्षा विभाग के अधिकारियों को मालूम है? आरपीएससी में हिन्दी शिक्षकों के साक्षात्कार लेने वालों को मालूम है? ऐसे जैसे कि अंगरेज़ी में 26 अल्फ़ाबेट होते हैं, ठीक वैसे!!!
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राहुल गाँधी जी सियासी नफे-नुकसान के लिहाज से चाहे कुछ भी संदेश दें,लेकिन अगर दीदी ये महादंगल जीत गई तो,देश की जनता उन्हें दूसरी इंदिरा के नाम से ही संबोधित करेगी और राहुल गाँधी जी भी मुस्कराएंगे! ऐतिहासिक मतदान ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है और ज्ञानेश जी भी फिर चर्चा मे आ गए!
ABP News@ABPNews

#WATCH | 'झालमुड़ी' से बंगाल की हवा मुड़ी ? देखिए 'जनहित' चित्रा त्रिपाठी (@chitraaum) के साथ  abplive.com/live-tv   #ChitraTripathiOnABP #politics #WestBengal #Elections #MamtaBanerjee #ElectionsWithABP #PMModi

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हाल-ए-राजस्थान
रिफाईनरी अग्निकांड से जहाँ बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है,उससे भी ज्यादा चिंताजनक तो,देश के PM की रैली की सुरक्षा में हुई चूक है!इसलिए @BhajanlalBjp सरकार ने कड़ा एक्शन लेना शुरु कर दिया!पेपर घोटालों के बड़े मगरमच्छों की तरह इस कांड के दोषी भी बच नही पाएंगे! अचलाराम निलंबित! @RajCMO
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