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Mohd Imran
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काम के ना काज के...क्यों दुश्मन मुस्लिम समाज के?
◆ देखिये सबसे बड़ा सवाल, गरिमा सिंह के साथ
#SabseBadaSawal | #SBS | @gforgarima
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@news24tvchannel हड्डी और अस्थि में क्या अंतर है कोई ज्ञानी बता सकता है, मानसिक दिवालियापन की पराकाष्ठा 😲
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UP : वाराणसी में नाव पर गंगा में इफ्तार मनाकर चिकन बिरयानी खाई, 14 गिरफ़्तार
#Varanasi | Varanasi | #UttarPradesh | Uttar Pradesh | #Ganga | Ganga
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@garrywalia_ इहै हाल बाय 8 दिन से 🤬 @aajtak @IndianOilcl @PetroleumMin @IOCL_UP @AmarUjalaNews @DainikBhaskar


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“मामला बच्चे का नहीं है। नशे की हालत में औरतों के ऊपर गुब्बारे फेंकना, बदतमीज़ी और छिछोरागिरी करना — यही बात सामने आ रही है। पड़ोस के नाते ऐसे मामले अक्सर शाम तक शांत हो जाते हैं, मगर हिंदू पक्ष कैसे शांत हो जाता? सत्ता का घमंड जो था।
दो-चार लोगों के साथ में पैग वाली पार्टी होती है, लड़के आते हैं और गदर करते हैं। जो शराबी व्यक्ति मरा है, उसके सिर में डंडा या रॉड जैसी किसी चीज़ से चोट लगती है और डर के वजह से दोस्त मौके से फरार हो जाते हैं।
जांच का विषय ये है दोस्तो के हाथों तो मौत नहीं हुई
इसका पूरा ब्लेम मुसलमानों पर आना था। कोई जांच नहीं, कोई पड़ताल नहीं — ऑन द स्पॉट पब्लिकली इंसाफ़ जैसे लूट, तोड़फोड़ वगैरह-वगैरह। किसी ने दोस्तों से कड़ी पूछताछ करना भी ठीक नहीं समझा कि वह कैसे मरा, सामने वाली पार्टी के लोगों को इतनी चोटें कैसे आईं। अगर मुसलमान सेल्फ-डिफेंस कर भी रहे थे तो निहत्थे क्यों थे?
सेल्फ-डिफेंस का अधिकार सबको है। इसके बावजूद भी मार खाए और इतनी मार खाए icu में हैं मकान भी ढहा दिया गया। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में ताले लग जाना चाहिए। जजों, आईएएस और आईपीएस को इस्तीफे दे देना चाहिए। जब इंसाफ़ पब्लिकली ऑन द स्पॉट ही होना है, और एक ही पक्ष का होना है, तो फिर कोर्ट का क्या फायदा? इन पुलिस वालों का क्या फायदा?
सब बंद कर दिया जाए, थानों को संगठन के कार्यालय घोषित कर दिया जाए और कह दिया जाए कि जैसे चाहो वैसे इंसाफ़ करो। सारा दारोमदार उन्हीं हिंदू संगठनों के हाथ में दे दिया जाए।”

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