MP Deora bhopalgarh me-retweet

आज 49 सिविल लाइंस पर मीडिया से बातचीत की :
प्रतिकूल मौसम से किसानों को होने वाली पीड़ा एवं RGHS के संबंध में पूछे सवाल का जवाब :
एक तो फसलों को ओलावृष्टि से बहुत नुकसान हुआ है और ऊपर से मौसम भी लगातार खराब चल रहा है। इस बार पता नहीं क्या हो रहा है, क्लाइमेट चेंज लगातार असर दिखा रहा है। अभी अप्रैल का महीना चल रहा है और क्लाइमेट की प्रिडिक्शन भी अलग तरह की आ रही है। इसलिए यह बहुत चिंता का विषय है।
सरकार को चाहिए कि अभी से इस पर ध्यान दे, ताकि किसानों को टाइमली क्षतिपूर्ति मिल सके और किसान की कमर न टूटे। किसानों की हालत बहुत खराब है। वे मेहनत करते हैं, लेकिन बाद में तूफान, ओलावृष्टि और कोल्ड वेव के कारण फसलें खराब हो जाती हैं, तो उनका दिल जलता है।
मैं समझता हूं कि हमारी प्रायोरिटी किसान होना चाहिए, नंबर 1 और नंबर 2, हालात बहुत गंभीर हैं। लोग तरह-तरह की शिकायतें कर रहे हैं। सभी विभागों में पेमेंट बाकी है और सबसे खतरनाक स्थिति मेडिकल के अंदर है। दवा दुकानदारों ने दवाइयां देना बंद कर दिया है। करीब एक हजार करोड़ रुपये का पेमेंट बाकी था।
प्राइवेट हॉस्पिटल अब लोगों से पैसे मांगने लगे हैं। पहले एक आदमी जाता था तो फ्री इलाज होता था, लेकिन अब जाते-जाते उससे ₹5 लाख, ₹2 लाख, ₹8 लाख तक मांगे जा रहे हैं। उनका कहना है कि सरकार से पेमेंट नहीं आ रहा, इसलिए वे मांग रहे हैं। उन्होंने आरजीएचएस स्कीम के तहत इलाज देना भी बंद कर दिया है।
इस स्कीम में पेंशनर्स हैं, रिटायर्ड कर्मचारी हैं, और पत्रकार भी शामिल हैं। इस तरह पेमेंट नहीं होने की स्थिति बनी हुई है। इसका कोई जवाब नहीं दिया जा रहा। तकलीफ इस बात की है कि सरकार कम से कम सफाई तो दे—कहे कि 10 दिन में पेमेंट कर देंगे, या कोई जांच चल रही है इसलिए 10 दिन और लगेंगे। लेकिन कुछ भी स्पष्ट नहीं है।
लोगों में हाहाकार मचा हुआ है। मेडिकल सुविधाएं हर परिवार के लिए जरूरी होती हैं, और वहां की स्थिति बहुत खराब है। सरकार इस गंभीरता को समझ नहीं रही है। लोगों में सरकार के प्रति गुस्सा लगातार बढ़ता जा रहा है।
इंतजारशास्त्र पर तथ्यात्मक जवाब के बजाय भाजपा नेताओं द्वारा ऊलजलूल बयान देने पर :
जवाब क्या आ रहा है? इनकी हिम्मत ही नहीं है जवाब देने की। ये बौखला गए हैं, और जब आदमी बौखला जाता है तो उसका माइंड ठीक से काम नहीं करता। फिर वह उलझुलूल जवाब देने लगता है। वही स्थिति इस सरकार की बन गई है।
घनश्याम तिवारी जी को खड़ा कर दिया, मदन राठौड़ साहब खड़े हो गए, राजेंद्र राठौड़ साहब खुद खड़े हो गए और मुख्यमंत्री भी खड़े हो गए। लेकिन इनसे पूछो तो कम से कम हमारे इंतजार शास्त्र का सीधा जवाब तो दें। ये लोग कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे, बस बात को घुमा-फिराकर दूसरी दिशा में ले जाते हैं।
क्लियर कट बिल्डिंग खड़ी है, जो आपको इंतजार शास्त्र में साफ दिखाई दे रही है। लेकिन कोई यह कहने को तैयार नहीं कि छह महीने लगेंगे, सात महीने लगेंगे, या इस कारण से देरी हुई।
विपक्ष सवाल पूछेगा, तो इनको बुरा नहीं मानना चाहिए। विपक्ष का काम ही सवाल पूछना है। जनता ने हमें विपक्ष में बैठाया है। हमने विथ ह्यूमिलिटी अपनी हार स्वीकार की कि ठीक है, हम हार गए। अब आप सत्ता में आए हैं तो विपक्ष का अधिकार है कि वह पब्लिक इंटरेस्ट में आपसे सवाल पूछे।
इनका कर्तव्य बनता है कि ढंग से जवाब दें। इसके बजाय अंदर ही अंदर गुस्सा करें, गिल्टी कॉन्शियस हो जाएं और ऊलजलूल जवाब देने लग जाएं , ऐसी स्थिति नहीं बननी चाहिए।
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