*समान काम समान वेतन* me-retweet

भेष बदलकर एक्टिविस्ट बने पेड दलालों के लिए आँख खोलने वाली बात 🫡
आक्रोश पूरी तरह से सेलेक्टिव है।
UGC से जुड़ी सिफारिशें सिर्फ BJP ने नहीं दी थीं। ये एक संसदीय समिति से आई थीं, जिसकी अगुवाई Digvijaya Singh कर रहे थे, जिसमें Congress, TMC, SP, DMK समेत कई पार्टियों के सांसद एक ही टेबल पर बैठे थे। सबने योगदान दिया। सबकी राय शामिल थी।
लेकिन जब दोष देने की बारी आती है, तो अचानक सारी उंगलियां सिर्फ Narendra Modi पर उठती हैं।
ये जवाबदेही नहीं—ये राजनीतिक सुविधा है।
अगर कई पार्टियां सिफारिश बनाने में शामिल थीं, तो जिम्मेदारी भी साझा होनी चाहिए। सिर्फ मोदी को निशाना बनाना और विपक्षी सांसदों की भूमिका को नजरअंदाज करना एकतरफा नैरेटिव है।
सरकार की कार्रवाई:
Manish R. Joshi को UGC के सचिव पद से हटा दिया गया। उन्होंने 2026 के नियम बिना पूरी सरकारी मंजूरी के जारी/प्रसारित किए थे।
इसका मतलब क्या है?
“मुद्दा सिस्टम में था, सरकार ने उसे ठीक कर दिया।”
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🫡 निष्कर्ष
Manish R. Joshi के हटने से आरोप Narendra Modi से हटकर UGC के अंदरूनी मुद्दे पर आ गया।
👉 Bottom line: BJP ने नैरेटिव कंट्रोल कर लिया; विपक्ष का “ब्लेम मोदी” एंगल कमजोर पड़ गया।
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