Mukesh Kumawat
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Mukesh Kumawat
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Jaipur, India Bergabung Kasım 2015
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@SrBachchan भाई जी मैं तो समझ रहा हूं, और किसी की कह नहीं सकता।
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@SrBachchan पिता हरिवंश राय बच्चन जी का असर तो रहेगा ही। आप लिखकर छोड़ देंगे और बाद में समझने वाला समझता रहेगा!
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🚨 शिवम दुबे ट्रेन हादसा 🚨
शिवम दुबे ने अहमदाबाद से मुंबई जाने वाली सुबह 5 बजे की ट्रेन पकड़ी:
दुबे ने बताया, “मैंने टोपी, मास्क और पूरी बाजू की जर्सी पहनी थी ताकि कोई मुझे पहचान न सके।”
दुबे थर्ड एसी ट्रेन में चढ़े और ऊपरी बर्थ पर बैठ गए। टिकट चेकर आया और उसने पूछा,
“ये शिवम दुबे कौन हैं? वो क्रिकेटर?”
दुबे की पत्नी ने जवाब दिया, “नहीं नहीं,
वो यहाँ क्यों आएगा।”
टिकट चेकर आगे बढ़ गया और दुबे बोरीवली पहुँच गए। (एक्सप्रेस स्पोर्ट्स)

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वर्ल्डकप जीतने के बाद ट्रेन के थर्ड AC से घर पहुंचा ये प्लेयर, कोई नहीं पहचान सका, पत्नी भी साथ में थीं
शिवम ने बताया,
“मैं, मेरी पत्नी और एक दोस्त ने ट्रेन से जाने का फैसला किया. थर्ड AC की टिकटें मिल रही थीं, इसलिए हमने वो बुक कर लीं. जिसको भी ये पता चला, वो काफी चिंतित हो गया. सभी को लग रहा था कि अगर स्टेशन पर या ट्रेन के अंदर कोई मुझे पहचान लेता तो क्या होता?”
लेकिन शिवम ने प्लान सेट कर लिया था. कोच में चढ़ते ही वो सीधे ऊपर की बर्थ पर जाकर लेट गए. ट्रेन में टिकट चेकिंग हुई. टीटी भी आया. उसने पूछा,
"कौन शिवम दुबे? वो क्रिकेटर?"
तभी शिवम की पत्नी अंजुम ने कहा,
"नहीं-नहीं, वो कहां से आएगा?"
इस तरह बात टल गई. और टीटी आगे बढ़ गया. पर बात सिर्फ यहां खत्म नहीं हुई. 8 घंटे की जर्नी थी. रात में शिवम को वॉशरूम जाने के लिए सीट से उतरना पड़ा. वो बताते हैं,
“रात में मैं बर्थ से नीचे उतरा, लेकिन वॉशरूम जाने-आने के रास्ते में किसी ने मुझे पहचाना नहीं. ट्रेन का सफर बहुत अच्छा और स्मूथ रहा, लेकिन मुझे डर था कि सुबह बोरीवली स्टेशन पर दिन में उतरते वक्त लोग मुझे पहचान लेंगे, और वहां मैं लोगों से बच नहीं सकता."
पुलिस से मदद लेनी पड़ी
आखिरकार शिवम दुबे को पुलिस की मदद लेनी पड़ी. उन्होंने बताया,
“पुलिस वालों को लगा कि मैं एयरपोर्ट से बाहर आऊंगा, लेकिन जब मैंने बताया कि ट्रेन से आ रहा हूं तो वो हैरान रह गए. फिर उन्होंने मुझे पुलिस एस्कॉर्ट दिया, जिससे बाहर निकलने में दिक्कत नहीं आई.”
ये कहानी तो ट्रेन जर्नी की थी. शिवम की इस वर्ल्ड कप की ❤️

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