
ये द्वेषभावना से भी परे की चीज है। एक लड़के ने चाय पिला दी तो Food सेफ्टी वाले छापा मार रहे रहे हैं। नेता से लड़ो भाई,गरीब आदमी ने क्या बिगाड़ा है?
🏃Lalbahadur Gupta🇮🇳
153.2K posts

@LBGupta7
Aries♈ महाकाल का दास ना सम्मान का मोह ना अपमान का भय! त्रिशूलधारी त्रिपुरारी त्रिलोकेश्वर अवधूत महाकाल 🍃🌙🔱🕉🏹🚩📿🧎🙌🙏🏼☺

ये द्वेषभावना से भी परे की चीज है। एक लड़के ने चाय पिला दी तो Food सेफ्टी वाले छापा मार रहे रहे हैं। नेता से लड़ो भाई,गरीब आदमी ने क्या बिगाड़ा है?

अब भाजपा सरकार बताए कि पीडीए समाज के एक चायवाले को पलायन पर मजबूर करने के लिए कौन ज़िम्मेदार है? एक आम चायवाले पर अत्याचार करके लखनऊ की सरकार कहीं सांकेतिक रूप से किसी और को तो चुनौती नहीं दे रही है। आर्यन को अपने जीवन और जीवनयापन के लिए चिंता करने या डरने की ज़रूरत नहीं है, हम सब करोड़ों पीडीए लोग उसके साथ हैं, उसकी ढाल हैं। आशा है माननीय मुख्यमंत्री जी इस तुच्छता पूर्ण व्यवहार का संज्ञान लेते हुए, इस मामले से जुड़े हुए अराजक तत्वों और अधिकारियों पर तुरंत कार्रवाई करेंगे और अपने राज्य पर लगनेवाले पलायन के दाग़ से बचेंगे, नहीं तो लोग कहेंगे जो मुख्यमंत्री जी एक आम चायवाले की रक्षा अपने दल के अवांछनीय तत्वों से नहीं कर सकते हैं वो पूरा प्रदेश क्या चलाएंगे। अगर मुख्यमंत्री जी को अपने दल के उस असामाजिक तत्व का नाम नहीं पता हो तो हम बता देंगे। अगर फिर भी कुछ नहीं हुआ तो हम आर्यन के रोज़गार के लिए पुख़्ता व्यवस्था करेंगे क्योंकि हमें उसके हाथ की बनी और प्रेम से भरी चाय बहुत अच्छी लगी थी।



भाजपा की सरकार जब-जब किसी की रोज़ी-रोटी छीनेगी, हम तब-तब उसकी मदद के लिए अपनी सामर्थ्य से भी अधिक हाथ बढ़ाएंगे। हम वर्चस्ववादी भाजपा की क्रूरता का जवाब, पीडीए की एकता से देंगे और अत्याचारी भाजपा से पूछेंगे ‘5 बड़ा या 95?’ अब पीडीए साथ-साथ बढ़ेगा, पीडीए ही पीडीए की ताक़त बनेगा! #बुरे_दिन_जानेवाले_हैं







पत्थर तोड़ने वाली मेहनतकश स्त्री से संसद तक पहुँचने वाली भगवती देवी जी भारतीय लोकतंत्र में सामाजिक न्याय की एक अद्वितीय और ऐतिहासिक उपलब्धि थीं। अत्यंत साधारण और वंचित पृष्ठभूमि से निकलकर उन्होंने श्रम, अभाव और सामाजिक उपेक्षा के बीच अपने जीवन का मार्ग बनाया। उनका संघर्ष इस सत्य का प्रमाण है कि लोकतंत्र का वास्तविक अर्थ केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि प्रतिनिधित्व के दायरे का निरंतर विस्तार है - ताकि समाज की आख़िरी पायदान पर खड़ी स्त्री भी निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बन सके। 1969–1972, 1977–1980, 1995–1996 और 2000–2003 तक वे बिहार विधानसभा की विधायक रहीं, जबकि 1996 से 1998 तक लोकसभा सांसद के रूप में उन्होंने वंचितों, दलितों और गरीबों की आवाज़ को संसद तक पहुँचाया। इस पूरी यात्रा को संभव बनाने में लालू जी की सामाजिक न्याय की राजनीति का निर्णायक योगदान रहा, जिसने हाशिये के समाज को केवल मतदाता नहीं, बल्कि सत्ता का सहभागी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की। महिला आरक्षण में भगवती देवी जी जैसी आवाज़ सुनाई देनी चाहिए, अन्यथा इसका अर्थ समान भागीदारी नहीं, बल्कि वर्चस्व को स्थापित करना होगा।




प्रिय चायवालों, फतेहपुर में हमने आपमें से एक, जिस ‘आत्मनिर्भर आर्यन’ की दुकान पर प्रेमपूर्वक चाय पी थी उसकी चाय का सैंपल फूड सिक्योरिटी विभाग ने लेकर, आर्यन को ये धमकी दी है कि तुम एल्युमीनियम के बर्तन में चाय बनाते हो, तुम्हारी दुकान सील कर देंगे। शुक्र है ये नहीं कहा कि ‘लाल’ सिलेंडर पर बनाते हो तो सील कर देंगे, वैसे कह भी नहीं पाते क्योंकि सिलेंडर तो मिल नहीं रहा है। ये धमकी सिर्फ़ एक आर्यन को नहीं है, उन सब आर्यन को है जो महा-बेरोज़गारी के इस भाजपाई दौर में चाय बनाकर या अपना कोई छोटा-मोटा काम करके अपने पैरों पर खड़े होने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा किसी को नौकरी-रोज़गार तो देती नहीं है उसके विपरीत जो स्वयं अपनी मेहनत से कुछ करना चाहते हैं, उनको सिर्फ़ इसलिए धमकाती है क्योंकि हम जैसे लोग उनके काम को सम्मान देने के लिए, उनके कारोबार को प्रोत्साहित करने के लिए, उनके पास चले जाते हैं। अब जब ये सरकारी विभाग का छोटापन, लखनऊ तक पहुँचेगा तो देखते हैं, इस कुकृत्य के लिए ऐसे अधिकारियों का निलंबन होता है या उनको इनाम दिया जाता है। फूड सिक्योरिटी विभाग कभी अपने भ्रष्टाचार का भी तो सैंपल ले। उस घूसखोर विभाग में महा-भ्रष्टाचार के जो बेहद बुरे हालात हैं, उसके आधार पर नाम बदलनेवालों को एक सुझाव ये है कि वो इस विभाग का नाम बदलकर सीधे ‘मिलावट विभाग’ ही कर दें या ‘भाजपा चंदा विभाग’। इससे पीड़ितों में ‘प्रीपेड पीड़ित’ के बाद ‘टी पीड़ित’ की एक और नई श्रेणी जुड़ गयी है। अब पूरे प्रदेश के चाय बेचनेवाले ‘पीडीए’ से जुड़ जाएंगे और एक नई चाय शुरू करेंगे जिसका नाम होगा ‘पीडीए टी’। भाजपा ने अपनी तुच्छ राजनीति को पाताल से भी नीचे ले जाकर खड़ा कर दिया है। घोर निंदनीय! हम हर छोटे-से-छोटे गुमटी-टपरीवाले, रेहड़ी-पटरी-फेरी-ठेलेवालों, साप्ताहिक हाट-सब्ज़ी बाज़ारवालों और हर छोटे-बड़े दुकानदार, काम कारोबार-कारख़ानेवालों की, अपनी रोज़ी-रोटी कमाने की सम्मानजनक कोशिश करनेवालों के साथ खड़े हैं और हमेशा रहेंगे। हम उन सबसे कहेंगे : मत डरिए, अपना काम करिए! चिंता न करें : बुरे दिन जानेवाले हैं! आपका अखिलेश #बुरे_दिन_जानेवाले_हैं विशेष : इस कु-समाचार के बारे में जब भाजपा के कट्टर समर्थकों तक को पता चलेगा तो वो भी बेहद शर्मिंदा होंगे, वैसे सत्ता का लाभ उठा रहे कुछ स्वार्थी लोगों के सिवाय भाजपा के समर्थक लोग अब कुछ ज़्यादा बचे ही नहीं हैं।