

DXPWA- DwarkaExpressway Welfare Association
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@_DXPAssociation
Home Buyers Association (Sector 37, 77 to 115) Complete #DwarkaExpressway, Remove #KherkiDaulaToll, Provide #BasicAmenities New Gurugram



बहुत फ़ोन आ रहे है कि जयहिन्द भाई सोशल मीडिया पर फ़ैले गंद का कुछ करो ye गंद ghar ghar पहुँच chuka hai बच्चों पर bahut galat असर हो रहा है तो भाई आप अपने सुझाव भेज दे हम रुका मारके सरकार तक आपकी आवाज पहुचा देंगे लोग सही में गंद खत्म करना चाहते है या गंद देखना चाहते है 🙏

@timesofindia @CNBCTV18Live @ZeeNews @gurgaonpolice @M3MIndiaPvtLtd @SMARTWORLDDEV shame! Shame!!!

मेरा सफर: याशीश यादव Via Dwarka Expressway आज से लगभग दस साल पहले 2014 के आखिर मे जब मै महिंद्रा औरा मे शिफ्ट हुआ तो देखा Northan Peripheral Road ( NPR) जिस रोड को जिसे गुडगाँव की लाइफ लाइन् रोड कह के बिल्डरो ने सपने दिखाए थे और हम लोगो को घर बेचे थे वो तो कहीं नहीं है सिर्फ धुल के गुब्बहार है समश्या विकट थी हमे लगा कहा फस गये तब कुछ घर खरीदार इक्खता हुए प्रदीप मिश्रा ने मार्गदर्शन किया ओर एक एसोसिएशन Dwarka Expressway Welfare Association (DXPWA) का गठन हुआ ओर मुझे अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी तो शुरु हुआ हमारा सफर जिस मे कोमल आहूजा, प्रदीप राही, गौरव प्रकाश, प्रदीप मिश्रा, मेजर मनु पांडे आदि रहे। हम लोगो ने दफ़्तरों के चक्कर लगाने शुरु किये, समझना शुर किया, कैसे क्या किया जाए, हमने जाना की NPR को 2008 मे लांच किया था ओर इसकी समय सीमा की 2010 कॉमन वेल्थ गेम से पहले रखी गयी थी, मगर 2014 तक यहाँ रोड के नाम पर सिर्फ धुल मिट्टी थी कुछ कुछ बन भी गया था मगर अधिकांश जगह पैच बचे हुए थे कही मकान, कही फैक्ट्री, कही बिजली के हाई टेंशन खंबे, दिल्ली साइड मे तो जमीन अधिग्रंण ही नही हुआ था फिर हमे शुरुआत करी, अधिकारियों से मिले, नेताओं से मिले, मगर सब नील बट्टे सन्नाटा कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं, किसी को कोई मतलब नही, कोई जानकारी नही, ज्ञापन दिये, मांग रखी मगर नतीजा वही कुछ नहीं हो सकता, लिटीगेशन है कैसे होगा मसला कोर्ट का है हमने इसे अब अपने हर ज्ञापन् मे Dwarka Expressway लिखना शुरु कर दिया था अधिकारियों, दफ़्तरों ओर नेताओ के चक्कर लगा लगा कर परेशान हो गये थे,मगर कुछ नहीं हो रहा था सब नौकरी पेसा वाले लोग थे तो निर्णय हुआ की धरना करना पड़ेगा वैसे कोई बात नहीं बनने वाली तो हम गुडगाँव डीसी ओफ़्फ़िस् मे धरने की अनुमति मांगी हमें समय मिलता रहा मिलने का, मगर हमें धरने की अनुमति नहीं मिली मगर हमें धरना करना था अनुमति कर बाद् हि इसलिय हमें चक्कर लगाते रहे, लोगो को भी जोड़ना था अनुमिति भी लेनी थी ओर जब अनुमति मिलने वाला समय आया तो पता लगा की धरने के लिए एसोसिएशन का रजिस्ट्रेशन् भी होना चाहिए, हम रेजिस्ट्रेशन मे लग गये, रेजिस्ट्रेशन करवाके दोबारा धरने की अनुमति मांगी इस सबमे एक साल गुजर गया, 2016 के शुरू मे जिस दिन फाइनल अनुमति देने के लिये डी सी साहब हमे बुलाया हम सब उनके केबिन मे ही थे उसी दौरान उनके माध्यम से पता लगा जाट आंदोलन शुर हो गया ओर आपलोगो को अब अनुमति नही दे सकते ओर हमारी सारी तैयारी फेल ओर अनुमति मिलते मिलते रहे गयी, असफलता हाथ लगी हमने हिम्मत नहीं हारी हमें लगा यहाँ अनुमति नहीं मिलेगी हमारी सारी तैयारी तो पहले से ही थी तब निर्णय हुआ की दिल्ली जंतर मंतर मे धरना देंगे दिल्ली मे धरना देने के लिये हमे ओर् लोगो कि टीम की जरूरत थी तो प्रखर सहाय, समीर सोनिक, मिर्दुल् बबर आदि साथी साथ आये, हमें वाह अनुमति मिल गयी, ओर हमारा पहला धरना अप्रैल 2016 मे बेहद सफल हुआ शायद गुडगाँव मे नहीं होता, नेशनल मीडिया ने मुद्दा उठाया, डिजिटल ओर प्रिंट मिडिया ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया ओर घर खरीदारो को राष्ट्रीय चैनलो पर लाइव डिबेट मे बुलाया गया, लाईव डिबेट एसोसिएशन की तरफ से मै याशीश यादव, मेजर मनु पाण्डे, एवं प्रखर सहाय लोग मुद्दा रखते गये, प्रदीप मिश्रा से पूरा मीडिया मे सहयोग करते रहे, मै नोएडा मीडिया हाउस जाता रहा, कभी गुड़गांव मीडिया हाउस मे, Dwarka Expressway, हुडा ऑफिस मे मुद्दे उठाता रहा, साथियो ने सहयोग दिया, सबमे समय देने के लिये मैने नौकरी छोड़ी और फिर हमे बड़ी सफलता मिली, अगस्त 2016 मे एक नोटिफ़िकेशन जारी करके सरकार ने इस रोड को NHAI (National Highway authority of India) के अंतर्गत दे दिया ओर हमें समय दिया की अब इसकी DPR (Detailed Project Report) बनेगी ओर जल्द काम शुरु हो जायेगा मगर अभी तो संग्रर्ष शुरु हुआ था धरने प्रदेशन जारी रहे, क्योंकि प्रोजेक्ट रिपोर्ट बन ही नही रही थी हमे भी लगे रहे ० हवन के माध्यम से प्रोटेस्ट ० DxPl क्रिकेट टूरनामेंट के माध्यम से प्रोटेस्ट (मार्च 2018) एक मुद्दा एक मैच के तहत ० गुलाब देकर प्रोटेस्ट ० कैंडल मार्च ० कार रैली करके प्रोटेस्ट ० NHAI के दफ़्तर के समाने प्रोटेस्ट, सितम्बर 2017 ० हुडा ऑफिस के सामने धरना ० सचिवालय के सामने धरना ० प्रेस कॉन्फ्रेंस ० मीडिया बाइट ० वोटर कार्ड - पौधा रोपण #DXPWA #DwarkaExpressway #ThankyouModiJi Cont. 1-3

मेरा सफर: याशीश यादव Via Dwarka Expressway आज से लगभग दस साल पहले 2014 के आखिर मे जब मै महिंद्रा औरा मे शिफ्ट हुआ तो देखा Northan Peripheral Road ( NPR) जिस रोड को जिसे गुडगाँव की लाइफ लाइन् रोड कह के बिल्डरो ने सपने दिखाए थे और हम लोगो को घर बेचे थे वो तो कहीं नहीं है सिर्फ धुल के गुब्बहार है समश्या विकट थी हमे लगा कहा फस गये तब कुछ घर खरीदार इक्खता हुए प्रदीप मिश्रा ने मार्गदर्शन किया ओर एक एसोसिएशन Dwarka Expressway Welfare Association (DXPWA) का गठन हुआ ओर मुझे अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गयी तो शुरु हुआ हमारा सफर जिस मे कोमल आहूजा, प्रदीप राही, गौरव प्रकाश, प्रदीप मिश्रा, मेजर मनु पांडे आदि रहे। हम लोगो ने दफ़्तरों के चक्कर लगाने शुरु किये, समझना शुर किया, कैसे क्या किया जाए, हमने जाना की NPR को 2008 मे लांच किया था ओर इसकी समय सीमा की 2010 कॉमन वेल्थ गेम से पहले रखी गयी थी, मगर 2014 तक यहाँ रोड के नाम पर सिर्फ धुल मिट्टी थी कुछ कुछ बन भी गया था मगर अधिकांश जगह पैच बचे हुए थे कही मकान, कही फैक्ट्री, कही बिजली के हाई टेंशन खंबे, दिल्ली साइड मे तो जमीन अधिग्रंण ही नही हुआ था फिर हमे शुरुआत करी, अधिकारियों से मिले, नेताओं से मिले, मगर सब नील बट्टे सन्नाटा कोई कुछ सुनने को तैयार नहीं, किसी को कोई मतलब नही, कोई जानकारी नही, ज्ञापन दिये, मांग रखी मगर नतीजा वही कुछ नहीं हो सकता, लिटीगेशन है कैसे होगा मसला कोर्ट का है हमने इसे अब अपने हर ज्ञापन् मे Dwarka Expressway लिखना शुरु कर दिया था अधिकारियों, दफ़्तरों ओर नेताओ के चक्कर लगा लगा कर परेशान हो गये थे,मगर कुछ नहीं हो रहा था सब नौकरी पेसा वाले लोग थे तो निर्णय हुआ की धरना करना पड़ेगा वैसे कोई बात नहीं बनने वाली तो हम गुडगाँव डीसी ओफ़्फ़िस् मे धरने की अनुमति मांगी हमें समय मिलता रहा मिलने का, मगर हमें धरने की अनुमति नहीं मिली मगर हमें धरना करना था अनुमति कर बाद् हि इसलिय हमें चक्कर लगाते रहे, लोगो को भी जोड़ना था अनुमिति भी लेनी थी ओर जब अनुमति मिलने वाला समय आया तो पता लगा की धरने के लिए एसोसिएशन का रजिस्ट्रेशन् भी होना चाहिए, हम रेजिस्ट्रेशन मे लग गये, रेजिस्ट्रेशन करवाके दोबारा धरने की अनुमति मांगी इस सबमे एक साल गुजर गया, 2016 के शुरू मे जिस दिन फाइनल अनुमति देने के लिये डी सी साहब हमे बुलाया हम सब उनके केबिन मे ही थे उसी दौरान उनके माध्यम से पता लगा जाट आंदोलन शुर हो गया ओर आपलोगो को अब अनुमति नही दे सकते ओर हमारी सारी तैयारी फेल ओर अनुमति मिलते मिलते रहे गयी, असफलता हाथ लगी हमने हिम्मत नहीं हारी हमें लगा यहाँ अनुमति नहीं मिलेगी हमारी सारी तैयारी तो पहले से ही थी तब निर्णय हुआ की दिल्ली जंतर मंतर मे धरना देंगे दिल्ली मे धरना देने के लिये हमे ओर् लोगो कि टीम की जरूरत थी तो प्रखर सहाय, समीर सोनिक, मिर्दुल् बबर आदि साथी साथ आये, हमें वाह अनुमति मिल गयी, ओर हमारा पहला धरना अप्रैल 2016 मे बेहद सफल हुआ शायद गुडगाँव मे नहीं होता, नेशनल मीडिया ने मुद्दा उठाया, डिजिटल ओर प्रिंट मिडिया ने इसे राष्ट्रीय मुद्दा बनाया ओर घर खरीदारो को राष्ट्रीय चैनलो पर लाइव डिबेट मे बुलाया गया, लाईव डिबेट एसोसिएशन की तरफ से मै याशीश यादव, मेजर मनु पाण्डे, एवं प्रखर सहाय लोग मुद्दा रखते गये, प्रदीप मिश्रा से पूरा मीडिया मे सहयोग करते रहे, मै नोएडा मीडिया हाउस जाता रहा, कभी गुड़गांव मीडिया हाउस मे, Dwarka Expressway, हुडा ऑफिस मे मुद्दे उठाता रहा, साथियो ने सहयोग दिया, सबमे समय देने के लिये मैने नौकरी छोड़ी और फिर हमे बड़ी सफलता मिली, अगस्त 2016 मे एक नोटिफ़िकेशन जारी करके सरकार ने इस रोड को NHAI (National Highway authority of India) के अंतर्गत दे दिया ओर हमें समय दिया की अब इसकी DPR (Detailed Project Report) बनेगी ओर जल्द काम शुरु हो जायेगा मगर अभी तो संग्रर्ष शुरु हुआ था धरने प्रदेशन जारी रहे, क्योंकि प्रोजेक्ट रिपोर्ट बन ही नही रही थी हमे भी लगे रहे ० हवन के माध्यम से प्रोटेस्ट ० DxPl क्रिकेट टूरनामेंट के माध्यम से प्रोटेस्ट (मार्च 2018) एक मुद्दा एक मैच के तहत ० गुलाब देकर प्रोटेस्ट ० कैंडल मार्च ० कार रैली करके प्रोटेस्ट ० NHAI के दफ़्तर के समाने प्रोटेस्ट, सितम्बर 2017 ० हुडा ऑफिस के सामने धरना ० सचिवालय के सामने धरना ० प्रेस कॉन्फ्रेंस ० मीडिया बाइट ० वोटर कार्ड - पौधा रोपण #DXPWA #DwarkaExpressway #ThankyouModiJi Cont. 1-3















दम तोड़ देती हैं लाखों युवाओं की उम्मीदें जब भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी होती है तो। अभ्यर्थियों के कठिन परिश्रम पर भारी पड़ती है विभाग की नाकामियां। #ssc_chairman_jwab_do बेरोजगारी चरम पर है ओर मौजूदा सरकार को युवाओं की कोई चिंता नहीं।


















