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annu nair
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annu nair
@annunkn
Believes in Hindutava,I am a proud hindu not an andhbhakt. GC virodhi mere post se door rahe, mulla, ambedkarites, Congressi bhi. Har har mahadev.🙏🙏.
New Delhi, India 가입일 Mart 2013
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@AshokShrivasta6 @EkNoGhamandi Ek Tauntiya chor dusari registered R. Aur kya hi kahe. 😉😉😉😉😉😉😉
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योगी आदित्यनाथ बंगाल में खड़े होकर स्वामी विवेकानंद, नेताजी सुभाषचंद्र बोस, खुदीराम बोस और बंकिम चंद्र की बात की। बंगाल की सांस्कृतिक और सभ्यतागत पहचान की बात की ।
पर एक मुख्यमंत्री और संत के लिए महुआ मोइत्रा की भाषा देखिए "तुम एक मज़ाक हो, जाओ फैंटा पियो।" योगी जी के लिए ऐसी भाषा वो महुआ इस्तेमाल कर रही हैं जो खुद मां काली का अपमान कर चुकी हैं।
टीएमसी के नेता योगी जी के खिलाफ अनाप शनाप इसलिए भी बोल रहे हैं क्योंकि पश्चिम बंगाल में योगी जी की सभाओं में भारी भीड़ जुट रही है। और शायद अखिलेश यादव जी भी यूपी से लेकर बंगाल तक योगी जी की बढ़ती लोकप्रियता से परेशान हैं इसलिए लखनऊ में बैठ कर यूपी के मुख्यमंत्री के खिलाफ अपमानजनक ट्वीट को रिट्वीट कर दिया।
#KarmaYogi

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@JainKiran6 काले तिरपाल मे जाने के संकेत दे रही है शायद? 🤔
कोई तो मिला है? 😳जो पट्टी पढा रहे है.
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Radhika Khera on Pappu Yadav: राधिका खेड़ा का पप्पू यादव के बहाने कांग्रेस पर तीखा हमला.. लिखा.. “भूल गए संसद में इनकी पत्नी भी बैठती है”..
ibc24.in/country/radhik…
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@AnantKayastha @EkNoGhamandi Uska dalla bhi Yahi hoga. For sure. 😉😉😉😉😉😉😉😉😉😉😡😡😡😡😡
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कोर्ट में पेपर पर आखिरी साइन होते ही वकील मुस्कुराया और बोला, “लो मैडम, अब आपका डिवोर्स हो गया है। कोर्ट ने आपको 10 लाख रुपये हर्जाने के तौर पर दिए हैं, और आपको हर महीने खर्च के लिए 10,000 रुपये मिलते रहेंगे।
क्या अब आप खुश हैं?”
वह थोड़ा मुस्कुराई और बोली, “हाँ… मैं खुश हूँ… मुझे अब किसी से कुछ नहीं चाहिए।”
वकील ने पेपर्स इकट्ठा करना शुरू कर दिया और अश्विनी अपने मम्मी-पापा के साथ बाहर चली गई।
नवनाथ—उसका पति—कोने में खड़ा चुपचाप सब कुछ देख रहा था। अश्विनी ने एक बार भी उसकी तरफ नहीं देखा।
कार का दरवाज़ा बंद हो गया…और रिश्ता भी।
पहला महीना -
घर में सब लोग बड़े प्यार से पेश आते थे।
अश्विनी को लगा…यही आज़ादी है…यही शांति है!
दूसरा महीना -
घरवालों का माहौल थोड़ा बदलने लगा।
कभी भाई गुस्से में बोलता,
भाभी ताना मारती…“बड़ी हो गयी हो, कुछ ज़िम्मेदारी लो…”
भतीजे भी कहने लगे, “बुवा, तुम यहाँ कब तक रहोगे?”
तीसरा महीना—
घर का माहौल बदलने लगा।
जहाँ पहले प्यार था, अब वहाँ बोझ था।
अश्विनी शांत रहती थी…लेकिन उसके दिल में दर्द बढ़ता जा रहा था।
चौथा महीना—
वे उसकी हर हरकत पर नज़र रखने लगे।
जब भी वह बाहर जाती, पड़ोसी फुसफुसाते—
“उसका तलाक हो गया है…क्या अब वह इसी घर में रहेगी?”
अश्विनी के अंदर कुछ टूट रहा था।
पहली बार उसे एहसास हुआ—
ससुराल का रिश्ता मुश्किल था, लेकिन वह उसका अपना घर था। इस घर पर वह न तो मेहमान थी और न ही घर की सदस्य—बस एक बोझ।
एक रात, छत पर बैठकर वह सोचने लगी, "मुझे पैसे मिल गए... मुझे आज़ादी मिल गई... लेकिन इज़्ज़त? प्यार? और एक घर?"
उसने खुद से फुसफुसाया, "मैंने गलती की... मैंने फ़ैसले लेते समय सिर्फ़ दर्द देखा, लेकिन उसके नतीजे नहीं देखे..."
उसे एहसास हुआ कि रिश्ता टूटने के बाद एक औरत को सबसे ज़्यादा सहारे की ज़रूरत होती है, लेकिन समाज उसे पहले जज करता है।
और पीहर…?
“पीहर तो है, लेकिन कोई अधिकार नहीं है। मैंने अपने अहंकार की वजह से अपना असली घर छोड़ दिया…”
उसकी आँखों में आँसू आ गए।
अब उसे इस फैसले की कीमत समझ में आई।
चार महीने बीत चुके थे…
अश्विनी को हर दिन एक ही सवाल परेशान करने लगा…“मैंने क्या खोया…?
मैंने इतना बड़ा फैसला सिर्फ़ गुस्से और तानों की वजह से लिया…?”
वह आसमान की तरफ़ देखती रहती…
नवनाथ की यादें उसके पीछे दौड़ती रहतीं…उसकी आदतें, छोटे-मोटे झगड़े, और सबसे बढ़कर?…उसका साथ देना।
एक रात, उसका दिल पूरी तरह टूट गया।
उसने फ़ोन उठाया…नंबर डायल किया।
“हेलो?”, नवनाथ
अश्विनी ने कांपती आवाज़ में कहा, “नवनाथ… क्या हम… अपने रिश्ते को एक और मौका दे सकते हैं? मैं तुम्हें बहुत मिस करती हूँ… मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ…”
दोनों तरफ़ एक पल की खामोशी…
नवनाथ ने धीरे से कहा, “मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता… यह हमारी गलती थी, हम दोनों को मिलकर इसे सुधारना होगा। अगर तुम ‘हाँ’ कहो… तो मैं अभी चला जाऊँगा।”
अश्विनी के गालों पर आँसू बहने लगे।
“हाँ… मैं तैयार हूँ।”
रात के 12 बज रहे थे।
नवनाथ ने कार ली और निकल गया।
ठंडी, सुनसान सड़क…
लेकिन उसके मन में बस एक ही आवाज़ थी…“मैं उसे वापस घर लाना चाहता हूँ।”
वह लगातार 5 घंटे गाड़ी चलाता रहा।
वह न रुका और न ही थका।
सुबह 5 बजे, वह अश्विनी के घर के दरवाज़े पर खड़ा था।
अश्विनी बाहर आई… डरी हुई, शर्मिंदा… लेकिन चेहरे पर राहत लिए।
उसके मम्मी-पापा ने दरवाज़ा खोला। नवनाथ ने विनम्रता से सिर झुकाया।
अश्विनी ने बैग उठाया।
कोई बात नहीं, कोई बहस नहीं।
दोनों जानते थे कि यह फैसला दिल से लिया गया था।
कार स्टार्ट हुई…और अश्विनी अपने घर—अपने असली घर की ओर चल पड़ी।
दोस्तों…
रिश्ते टूटते नहीं।
कभी-कभी आपको बस उन पर से धूल झाड़ने की ज़रूरत होती है।
सही समय पर उठाया गया एक छोटा सा कदम पूरी ज़िंदगी बचा सकता है…
नमोस्तुते!
स्वाती गाडेकर की FB पेज से साभार…

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Take it 🏆
credits: @nurungi_hamster
@LtGovDelhi
#hamster
#DPUpdates
#HelloDelhiPolice
#HelloPoliceStation

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@ManiYogini @CerebrumPeak @ArunKoslii Yeh chapri type neta hi rahega, Tauntiya chor. Na isski sarkar aayegi na hi iska dimaagi diwaliyapan theen hone ka. 🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣
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