Dr. Bhupendra Singh M.D.@DrBS07
राम मंदिर में वित्तीय अनियमितता के मामले में तमाम लोगों को दुख कम है और एक मौन आनंद अधिक है। मिडिया इसलिए खुश है क्योंकि चंपत राय जी को घेरने का उन्हें मौका मिल गया, कारण यह है की वह अक्खङ व्यक्ति हैं। उनका यह रूखा व्यवहार मिडिया के साथ भी वर्षों से रहा है। लेकिन जो भी लोग उन्हें जानते हैं, उन्हें यह पता है की यह काम चंपत जी का नहीं हो सकता।
ट्रस्ट बनाते समय उसमें 10 सदस्य ब्राह्मण समाज से रखे गये और एक सदस्य दलित समाज से, इसलिए पिछङे वर्ग में बहुत रोष रहा इस बात को लेकर, उन्हें मौका चाहिए था, वह उन्हें मिल गया, वह इस कांड से खुश हैं। क्षत्रिय समाज का भी दुख कम नहीं था, उनका भी यहीं मानना था की उनके समाज से प्रतिनिधित्व रहना चाहिए था, पर नहीं था, इसलिए वह भी इस घटनाक्रम से प्रसन्न हैं। ब्राह्मण वर्ग में एक धङा जो इसे ट्रस्ट पर वित्तीय आरोप मानने के बजाय अपने समाज पर आरोप मान रहा है, वह इसका सारा ठीकरा टून्नू यादव पर फोङ रहा है। उसके लिये टुन्न्नू यादव एक बलि का बकरा है, जिसके माथे सारा पाप जङकर बाकी एक बङी संख्या को बचाना चाहते हैं। संतों में भी एक वर्ग ऐसा है जो उन संतों का विरोधी है जो इस समय ट्रस्ट में हैं, वह भी इस मामले से प्रसन्न हैं, उदाहरण के लिये श्री वासुदेवानंद सरस्वती जी महाराज, इनका विवाद स्वर्गीय स्वरुपानंद जी के दोनों शिष्यों से चल रहा है जिसमें से एक शिष्य और सपा नेता श्री अविमुक्तेश्वरानंद जी हैं। इसी प्रकार राम मंदिर आन्दोलन के समय बेहद सक्रिय रहे लोगों का एक समूह है, जिन्हें लगता है की उन्हें महत्व नहीं दिया जा रहा है। अयोध्या के अंदर संतों का एक धङा है जो ट्रस्ट वाले संतों का विरोधी है, वह भी प्रसन्न हैं।
कुल मिलाकर इस घटनाक्रम से दुखी लोगों की संख्या कम है और खुश होने वालों की ज्यादा है। मुझे भी आप इस घटनाक्रम से खुश होने वालों में ही गिनकर रखिये। मेरे खुशी का कारण यह है की ये सारा गिरोह बहुत जल्द ही पकङ में आ गया, वरना जैसे दक्षिण भारत के मंदिर व्यवस्था में लगे लोगों के बच्चों के विवाह में उनके बच्चों को चार आठ किलोग्राम सोना पहने फोटो जब तब वायरल होता रहता है और लोग इसे सामान्य मानते हैं, वहीं हाल यहां भी हो जाता। इसलिए इसे भी भगवान राम की ही इच्छा समझनी चाहिए।
मंदिर के चढावे की धनराशि गिनने का काम एक दो लोग नहीं करते। इसके लिए ढेर सारे लोग इसमें लगते हैं। अतः यदि तब भी चोरी हो रही है और रोज हो रही है तो स्पष्ट बात यह है की चढावा गिनने वाले में से प्रत्येक व्यक्ति या तो चोर है अथवा उस चोरी पर मौन है। मंदिर व्यवस्था में समय के साथ तमाम स्थानीय लङकों को वहां की व्यवस्था में जोङा गया। वह लङके किसके रिकमंडेशन पर जोङे गये, किसने उनका नाम सुझाया, उस व्यक्ति की पहचान आवश्यक है।
वैसे उत्तर प्रदेश सरकार ने एस आई टी की जांच शुरु कर दी है, और जिस प्रकार का रुख मुख्यमंत्री जी का इस मामले को लेकर है, मुझे पुर्ण विश्वास है की न केवल ऐसे लोग जल्दी ही पकङे जायेंगे बल्कि इनकी संपत्तियों को भी जब्त किया जायेगा। कम से कम मुझे इस बात में कोई शंका नही है।
इस विषय में आगे क्या होना चाहिए, इस पर मेरी राय यह है की जो भी व्यक्ति ट्रस्ट की तरफ से इस अनुभाग को देख रहा था उसका इस्तिफा आवश्यक है। गुजरात के कई बङे मंदिरों में जिस तरह की चढावे की राशि को गिनने की व्यवस्था है उसे लागू किया जाय क्योंकि वहां प्रश्न उठने की गुंजाईश नहीं रहती। ट्रस्ट के सदस्यों की संख्या बढाकर समाज के अन्य वर्गों से भी कुछ लोगों को रखा जाये ताकि ट्रस्ट के प्रति सर्व सामान्य में एक जो दुराव अथवा विरोध का भाव है वह समाप्त हो। राम मंदिर आन्दोलन में जिन लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, उन लोगों की ट्रस्ट पहचान करे और उनका एक संरक्षण मंडल या ऐसा ही कोई टोली बना दे ताकी वह भी औपचारिक रुप से ही सही लेकिन उस व्यवस्था से जुङ जायें। मेरा मानना है की यदि ऐसे कुछ परिवर्तन हो जाते हैं तो इस घटना का एक सुखद परिणाम आ सकता है। नहीं तो ऐसी घटनायें बार बार होती रहेंगी और जो आगे नहीं भी होंगी तो सर्व समाज ट्रस्ट को स्वीकार करने के बजाय ऐसे मौकों के इंतजार में वैसे ही बैठा रहेगा, जैसे अब तक बैठा था।