
सहिया बिनीता बानरा पहले से दो बेटियों की मां थी। प्रसव पीड़ा उठी तो उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंची- लेकिन वहां न बिजली थी, न बुनियादी व्यवस्था। अंधेरे में, मोबाइल की टिमटिमाती रोशनी के सहारे प्रसव कराया गया। बिनिता ने बेटे को जन्म दिया… लेकिन ये खुशी पलभर भी टिक न सकी। मां और नवजात- दोनों की मौत हो गई। सवाल ये है कि आखिर कब तक ऐसी लापरवाही जिंदगियां निगलती रहेगी? क्या हमारे अस्पताल सिर्फ नाम के लिए हैं? ये सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उस बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का कड़वा सच है, जहां अंधेरा सिर्फ कमरे में नहीं, सिस्टम में भी है। मुझे उम्मीद है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी मानते हुए उनके दोनों बच्चे को गोद लेगी। मामला सरायकेला जिला के राजनगर थाना क्षेत्र स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का है।

















