

भारतीय संविधान के निर्माता, आधुनिक भारत के शिल्पकार एवं शोषितों-वंचितों के मसीहा, महिलाओं के मुक्तिदाता, ज्ञान के प्रतीक, विश्व रत्न परम पूज्य डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी की 135वीं जयंती के बाद उनकी मूर्तियों को तोड़े जाने, उन पर अपमानजनक तरीके से पेंट करने , उनके बैनर-पोस्टर फाड़ने एवं जलाने की घटनाओं में जो चिंताजनक वृद्धि हुई है, वह अत्यंत निंदनीय, शर्मनाक और देश के सामाजिक सौहार्द पर गंभीर प्रहार है और इनमें सबसे अधिक घटनाएं विशेष रूप से उत्तर प्रदेश में सामने आई हैं। यह घटनाएं उन करोड़ों लोगों की भावनाओं को आहत करती हैं जो उन्हें अपना भगवान मानते हैं। इस प्रकार की हरकतें समाज में वैमनस्य फैलाने, शांति व्यवस्था को बिगाड़ने और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने का प्रयास प्रतीत होती हैं। और जब उनको भगवान मानने वाले उनके अनुयायी अपना विरोध दर्ज कराते हैं, तो उन्हीं पर दमनात्मक कार्रवाई की जाती है, जो स्थिति को और अधिक गंभीर बनाती है। मैं अपने बहुजन के स्वाभिमानी लोगों से कहना चाहता हूँ कि हमारे रहबर, मान्यवर कांशीराम साहब की बात आज भी उतनी ही सच्ची और मार्गदर्शक है-“जिसका राज होता है, उसी का स्वाभिमान सुरक्षित रहता है।” इसलिए यह समझना जरूरी है कि स्वाभिमान, सम्मान और अधिकार किसी से मांगकर नहीं मिलते, बल्कि संगठित संघर्ष, राजनीतिक हिस्सेदारी और जागरूकता से हासिल किए जाते हैं। जब तक समाज सत्ता पर अपना अधिकार नहीं होता, तब तक सम्मान और सुरक्षा की गारंटी पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री @myogiadityanath जी, आप सामाजिक न्याय के योद्धाओं के नाम पर 403 करोड़ रुपये देने का ढोल पीट रहे हैं, तो उसे आप ही अपने पास संभाल कर रख लीजिए। मैं पूरे बहुजन समाज की तरफ से साफ-साफ कहना चाहता हैं कि हमें दिखावा नहीं, बल्कि सम्मान और सुरक्षा चाहिए। हमारे स्वाभिमान से खिलवाड़ अब बर्दाश्त से बाहर हो रहा है। हम यह भी स्पष्ट करना चाहते हैं कि केवल मूर्तियों पर छत डालना या दिखावटी कार्य करना पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि परम पूज्य बाबा साहेब की प्रतिमाओं की वास्तविक सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। बार-बार प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचना और दोषियों पर सख्त कार्रवाई न होना सरकार की गंभीर विफलता को दर्शाता है।























