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Md Husain Qadri
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शुक्र-ए-रब है कि बस अमान में हूँ
किन दुआओं के साएबान में हूँ
पर हैं भीगे हुए उड़ान में हूँ
वक़्त के सख़्त इम्तिहान में हूँ
आज भी अजनबी है हर अपना
जब कि बरसों से ख़ानदान में हूँ
पत्थरों ने सुकून छीन लिया
जब से मैं काँच के मकान में हूँ
क्या जुदाई का और हो इम्काँ
तेरे दिल में हूँ तेरी जान में हूँ
घर की तारीफ़ क्या करूँ राहत
मैं तो मुद्दत से इक मकान में हूँ !
❤️🤲🥰

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मैं भारत की किशोरियों को गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का टीका लगवाना चाहता हूँ !
प्रधानमंत्री ने बिल गेट्स के साथ एक वार्तालाप में मार्च 2024 में कहा था
गेट्स स्वयं एक साक्षात्कार में यह स्वीकार कर चुका है कि हेल्थ सेक्टर में भारत उसके प्रयोग की जगह है ! वह भारतीयों को 'गिनि पिग' समझता है ! 2009-10 में HPV वैक्सीन का प्रयोग उसने गुजरात और आंध्रप्रदेश में किया था, जिसमें कई लड़कियां मर गई थी ! उसके बाद तत्कालीन मनमोहन सरकार ने उस पर रोक लगा दिया था !
लगभग हर किसी का ब्रेनवाश हो जाता है ! अगर प्रचार करने वाला उसका प्रिय नेता, सेलेब्रिटी हो !
हर स्कूल में 14 साल की बच्चियों के माता-पिता को HPV का टीका दिलवाने के लिए बाध्य किया जा रहा है !
होश के नाख़ून लीजिये रहिये, अपने बच्चों को बचाइए !
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“अगर तुम शुक्र अदा करोगे तो मैं तुम्हें ज़रूर और ज़्यादा दूँगा; लेकिन अगर तुम नाशुक्रे बनोगे, तो मेरा अज़ाब यक़ीनन सख़्त है।”
— क़ुरआन 14:7
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न्यूरोलॉजी (Neurology) कहती है !
हर बार जब आप शुक्र अदा करते हैं, तो आपका दिमाग़ जिस्मानी तौर से खुद को बदलता है, जिससे आप फितरतन ज़्यादा positive और मज़बूत/ बा-हिम्मत बन जाते हैं ! (Neurology)

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1946
फादिल अब्दुल्लाह यहूदा (जिसे “शैख़” कहा जाता था) एक जासूस था ! वह यमन से फ़िलस्तीन हिजरत करके आया !
मोसाद ने उसे अपने लिए भर्ती किया ! उसने इस्लाम का दिखावा किया, क़ुरआन को हिफ़्ज़ किया, उसका तफ़्सीर और उलूम (ज्ञान) सीखे ! वह नमाज़ियों की इमामत करता था और कहा जाता है कि यहाँ तक कि मस्जिद अल-अक़्सा में भी !
वह लोगों को वाज़ (नसीहत) देता, उन्हें उनके दीन की बातें समझाता, और कब्ज़े/ऑक्युपेशन के ख़िलाफ़ प्रतिरोध की हिमायत करते हुए उसके लिए जीत की दुआ करता था !
फ़िलस्तीन का माहौल उस वक़्त सख़्त तनाव और सियासी-सैन्य संघर्ष से भरा हुआ था ! इसी हालात में ज़ायोनी तंजीमें ऐसे यहूदी मुहाजिरीन (प्रवासी) तलाश कर रही थीं जो अरबी ज़बान जानते हों, ताकि फ़िलस्तीनियों और अरबों के दरमियान दाख़िल होकर मालूमात हासिल कर सकें !
उन्हें अपनी तलाश एक शख़्स में मिली जिसका नाम था फादिल अब्दुल्लाह यहूदा यमन से आया हुआ एक यहूदी मुहाजिर !
उसे क़ुद्स में मोसाद ने अपने उद्देश्य के लिए भर्ती किया ! उसका इंतिख़ाब बहुत सोच-समझकर किया गया, क्योंकि वह अरबी ज़बान में माहिर था और अरब तहज़ीब व साक़ाफ़त से वाक़िफ़ था !
उसे बाक़ायदा तरबियत (प्रशिक्षण) दी गई, यहाँ तक कि उसने हर पहलू में महारत हासिल कर ली ! वह तक़रीबन रोज़ाना मस्जिद अल-अक़्सा में लोगों के दरमियान बैठता, जहाँ उसने एक परहेज़गार और मुत्तक़ी शैख़ का लिबास ओढ़ रखा था लंबी दाढ़ी और दीनी शक्ल-सूरत के साथ !
वह लोगों के दीनी सवालों के जवाब देता, उन्हें इस्लामी तालीमात समझाता, दीनी हलक़े (बैठकें) और ख़ुत्बे (प्रवचन) मुनज़्ज़म करता ! हर नमाज़ के बाद वह फ़िलस्तीन में मुजाहिदीन और प्रतिरोध के लिए दुआ करता, उन्हें क़िताल और जिहाद के लिए उकसाता, और यहूदियों व ब्रिटानियों के ख़िलाफ़ जीत और समर्थन की दुआ करता !
1948 में, जब अरब–इज़राइल जंग भड़क उठी, तब फादिल अब्दुल्लाह ने अपनी हक़ीक़ी पहचान छुपाए रखी ! बल्कि वह ख़ान यूनुस की मस्जिद के मिंबर से अरब फ़ौजों की फ़तह (जीत) के लिए दुआ करता था, जहाँ वह स्थायी तौर पर रहने आ गया था !
जब मिस्री फ़ौज की टुकड़ी, शहीद अहमद अब्दुल अज़ीज़ की क़ियादत में, ख़ान यूनुस में दाख़िल हुई, तो उसने मीनार से ऊँची आवाज़ में क़ुरआन की तिलावत की और उनके लिए जीत की दुआ की, बार-बार पुकारते हुए: “अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर !”
अपनी फ़साहत (वाक्पटुता) और असरदार अंदाज़ की वजह से वह मिस्री बटालियन के क़ाइद और उसके नायब के क़रीब हो गया ! यहाँ तक कि वह मिस्री सिपाहियों की नमाज़ की इमामत करने लगा, उनके सवालों के जवाब देता और अक्सर मिस्री कैंप में आने-जाने लगा, जहाँ उसका इस्तक़बाल किया जाता था !
▪️ उस दौर में 22 से 29 मई तक एक मुख़्तसर युद्धविराम लागू हुई ! इस दौरान ज़ायोनी फ़ौजों ने एक यहूदी अफ़सर के इलाज के लिए, जो संगीन ज़ख़्मी था, मिस्री फ़ौज से कुछ तिब्बी (चिकित्सकीय) सामान माँगा ! मिस्री फ़ौज ने मंज़ूरी दी और एक मिस्री डॉक्टर को दवा और ज़रूरी औज़ारों के साथ भेजा ! जंग के दौरान हुदना के वक़्त दुश्मन से दवा माँगना एक मामूली और क़ानूनी अमल था, क्योंकि ऐसी हालत में दोनों तरफ़ के दरमियान कुछ सामान और तिब्बी मदद का तबादला इजाज़तशुदा होता है !
▪️ इत्तिफ़ाक़ से उसी रात फादिल यहूदा यहूदी कैंप में मौजूद था, जहाँ वह उन्हें मालूमात पहुँचा रहा था और उनके साथ गुफ़्तगू कर रहा था ! मिस्री डॉक्टर ने उसे देख लिया, मगर ज़ाहिर नहीं किया ! वापसी पर उसने अपनी क़ियादत को उसकी असलियत बताई कि वह एक इस्राइली जासूस और ख़ाइन (गद्दार) है !
• इसके बाद फादिल पूरी तरह ग़ायब हो गया और मिस्री कैंप में आना तथा नमाज़ की इमामत करना बंद कर दिया !
लेकिन एक मिस्री अफ़सर ने उसे यहूदी कैंप से अगवा करने के लिए ख़ुद को पेश किया और इसमें कामयाब रहा ! उसे मिस्री फ़ौजी अदालत के सामने पेश किया गया, जिसने उस पर हुक्म सुनाया और उसे फ़ौरन गोली मारकर सज़ा-ए-मौत दे दी !
क्या आज भी हमारे दरमियान फादिल यहूदा जैसे लोग मौजूद हैं?

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राहुल गाँधी पप्पू है, जिसने बहुत पहले इसराहेली जासूसी सॉफ्टवेर के बारे में सवाल उठाया था ?
एहूद बराक की कंपनी, जिसके बोर्ड में एहूद बराक भी शामिल हैं वही व्यक्ति जिसने एपस्टीन के "एहूद के अपार्टमेंट" में दर्जनों रातें बिताईं, उसके जेट में यात्रा की और उससे दस लाख डॉलर लिए उसने यह खुलासा कर दिया कि उसका हथियार दुनिया पर कैसे जासूसी करता है !
एहूद बराक से जुड़ी एक इज़रायली स्पाइवेयर कंपनी के कंट्रोल पैनल का लाइव स्क्रीनशॉट लीक हो गया, जिससे पता चला कि यह टूल लोगों के फोन और मैसेजिंग ऐप्स को आसानी से हैक कर सकता है ! इससे उजागर हुआ कि यह कंपनी पत्रकारों, कार्यकर्ताओं और खासकर नेताओं पर जासूसी के लिए काम कर रही है और सरकारों व ताकतवर खरीदारों के हाथों में एक खतरनाक निगरानी हथियार बन चुकी है !
उन्हें अब छिपने की ज़रूरत नहीं है ! आज उन्होंने हमें दिखा दिया कि उनकी पहुंच कितनी दूर तक है !
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शैतानी रस्मों के दुर्व्यवहार की शिकार एक महिला का कहना है कि जन्म से ही उसे रोम के एक भूमिगत केंद्र में तस्करी और यातनाएं दी गईं, जिसकी सुरंगें वेटिकन से जुड़ी थीं और जिसका इस्तेमाल यूरोपीय अभिजात (इलीट) वर्ग करता था !
उसका दावा है कि उसने वेटिकन के अंदर बच्चों की बलि होते हुए देखी, जिसमें बच्चों का खून पीना भी शामिल था !
उसका आरोप है कि धर्म, सेना, मीडिया, चिकित्सा, खुफिया एजेंसियां और सरकारें, सभी उनके नियंत्रण में हैं !
“हमारी दुनिया शैतानी बाल यौन शोषण करने वाले मनोरोगियों द्वारा नियंत्रित और संचालित है!”
एपस्टीन की जानकारी 5% सामने आई है, गेटी म्यूजियम, डाउनटाउन डेनवर में ब्राउन पैलेस के बारे में पोस्ट किया है, वेटिकेन के बारे में चौकाने वाले खुलासे है लेकिन बेहतर है कि पीड़ित ही आगे कहे !
ज़रूरत के हिसाब से लिखना और किन शैतानों का कंट्रोल है ये बताना मक़सद है !
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एपस्टीन आइलैंड की पीड़िता जूलियट ब्रायंट का मानना है कि जेफरी एपस्टीन मानव क्लोनिंग में शामिल था !
उनका कहना है कि फिल्म निर्देशक माइकल बे से उनकी मुलाकात एपस्टीन के साथ उस साल हुई थी जब उन्होंने मानव क्लोनिंग पर आधारित बड़े बजट की फिल्म "द आइलैंड" का निर्देशन किया था !
यह भी पुष्टि हो चुकी है कि सांसद स्टेसी प्लास्केट एपस्टीन के द्वीप पर गई थीं और उन्होंने एपस्टीन से पैसे और निर्देश प्राप्त किए थे !
क्लोन हैंडलर भी हो सकते हैं ? जी हाँ
क्या हैंडलर के ज़रिये कंट्रोल्ड कठपुतलियाँ मौजूद हों, तो क्या वहाँ अनियंत्रित कठपुतलियाँ भी हो सकती हैं ?
जनसंख्या में कई क्लोन मौजूद हैं !
क्लोनिंग के बाद आत्मा वाले मूल लोग कहाँ हैं ? मर गए ? जीवित हैं ?
यह परिस्थिति पर निर्भर करता है ! या तो मृत, या जीवित और परिस्थितियों के हिसाब से !
सब कुछ सामने आ रहा है। बदलाव निकट है !
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