Vinød

8.6K posts

Vinød banner
Vinød

Vinød

@Vinod62073

लोग क्या सोचेंगे अगर ये भी हम ही सोचेंगे तो फिर लोग क्या सोचेंगे 😎 सामाजिक कार्यकर्ता 🙏 अम्बेडकरवादी 🔥

Katılım Ağustos 2024
540 Takip Edilen654 Takipçiler
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
ईद अल अज़हा, अर्थात् आम बोलचाल की ज़ुबान में बक़रीद पर्व की दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय मुस्लिम भाई-बहनों व उनके परिवार वालों को दिली मुबारकबाद तथा उनके साथ-साथ समस्त देशवासियों के ख़ुश व ख़ुशहाल ज़िन्दगी की शुभकामनायें। सभी पर्व व त्योहार आदि पूरी शान्ति, आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ गुज़रे तो यह देश व जनहित में हमेशा बेहतर, ताकि देश-प्रदेश के विकास व यहाँ के लोगों की तरक़्क़ी पर पूरी ऊर्जा, शक्ति व संसाधन लग सके, जैसाकि बी.एस.पी. की यहाँ यूपी में रही चारों सरकारों में हमेशा से सभी सरकारों में दुर्लभ रही ’’क़ानून द्वारा क़ानून का राज’’ के तहत् पूरी तरह से सर्वसमाज-हितैषी ’सर्वजन हिताय व सर्वजव सुखाय’ की बेहतरीन सरकार रही।
हिन्दी
156
973
3.2K
33.7K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
1.​ यू.पी. के ग्रेटर नोएडा के जेवर में की गई लगभग 15 वर्ष के गोपाल शर्मा की हत्या अति दुःखद व चिन्ताजनक। सरकार इस घटना की उच्च-स्तरीय जाँच कराये और इसके सभी अभियुक्तों को कड़ी सजा दी जाये। 2.​ साथ ही कल हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल के गिरने से कई मजदूरों की हुई मौत के प्रकरण को भी सरकार गम्भीरता से लेते हुये मृतकों के आश्रितों को उचित आर्थिक मदद दे तथा घायलों का भी विशेष ध्यान रखा जाये, बी.एस.पी. की यह भी मांग।
हिन्दी
141
1.7K
5.1K
80.6K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
यू.पी. के जिला गाजियाबाद में खोड़ा के एक नौजवान युवक सूर्या चौहान की हुई हत्या की घटना अति दुखद व चिन्ताजनक। इस प्रकार की आयदिन हो रही घटनाओं की रोकथाम के लिए शासन व प्रशासन को सही कदम उठाने की जरूरत है। साथ ही इस घटना में शामिल अपराधियों की पहचान करके उन्हें कानूनी सजा जरूर दी जाए। इसके साथ ही चुनाव का समय जैसे-जैसे नज़दीक आता जाएगा ऐसी घटनाओं के व्यापक दुष्परिणाम होंगे। अतः सरकार पूरी तरह सतर्क रहे।
हिन्दी
199
2.6K
8.6K
147K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
देश में न्यायप्रिय, धर्मनिर्पेक्ष एवं लोक कल्याणकारी महान शासक के रूप में प्रसिद्ध अहिल्याबाई होलकर जी की जयन्ती पर शत्-शत् नमन एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित। भारतीय इतिहास की महान शासक अहिल्याबाई होलकर जी ने अपने आदर्शों, सेवा-भाव और जनहितकारी कार्यों से समाज को नई दिशा प्रदान की। उनका जीवन नारी शक्ति, सुशासन, सामाजिक समरसता एवं जनसेवा का प्रेरणा स्त्रोत है। आज उनकी जयन्ती के पावन अवसर पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि एवं उनके अनुयायियों को शुभकामनाए।
हिन्दी
142
908
2.5K
22.2K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
26-05-2026-BSP PRESS NOTE-UTTARAKHAND REVIEW MEETING
Mayawati tweet media
English
62
559
1.4K
17.7K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
24-05-2026-BSP PRESSNOTE-UP INTENSIVE REVIEW MEETING
Mayawati tweet mediaMayawati tweet media
English
102
649
1.5K
26.2K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
24-05-2026-BSP RELEASE-UP INTENSIVE REVIEW MEETING PHOTOS
Mayawati tweet mediaMayawati tweet mediaMayawati tweet mediaMayawati tweet media
English
76
692
1.9K
24.4K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
24-05-2026-BSP RELEASE- UP INTENSIVE REVIEW MEETING PHOTOS-2
Mayawati tweet mediaMayawati tweet mediaMayawati tweet mediaMayawati tweet media
English
96
665
1.8K
22.7K
Vinød retweetledi
Suraj Kumar Bauddh
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh·
दलित छात्रा के साथ हॉस्पिटल में रेप। लखनऊ के तेजस अस्पताल में डॉ विजय गिरी ने इलाज कराने आई मासूम छात्रा को नशीला इंजेक्शन देकर बेहोश किया और फिर दयनीय हालात में उसका रेप किया। दलित महिलाएं कहीं भी सेफ नहीं हैं। उन्हें लाचार समझकर पापी भेड़िए हर जगह उनका शिकार कर रहे हैं।
Suraj Kumar Bauddh tweet mediaSuraj Kumar Bauddh tweet media
हिन्दी
36
558
1.1K
11.1K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
उत्तर प्रदेश जैसे विशाल आबादी वाले राज्य में भीषण गर्मी के इस मौसम में बिजली की कम अपूर्ति व कटौती आदि की आम शिकायतों व उसको लेकर विशेषकर ग़रीब, मध्यम वर्ग, किसान, छोटे व्यापारियों व अन्य करोड़ों मेहनतकश लोगों का जीवन अति-कष्टदायी बना हुआ है तथा इसको लेकर लोग विभिन्न रूपों में अपना आक्रोश भी प्रकट कर रहे हैं, जिसकी चर्चा मीडिया में भी काफी व निरन्तर रहती है। अतः सरकार से अपील है कि वह बिजली आपूर्ति सम्बंधी लोगों के कष्ट व परेशानियों को ध्यान में रखते हुये ज़रूरी उपाय तत्काल सुनिश्चित करे। इसके साथ ही, नये पावर प्लाण्ट आदि के माध्यम से भी आगे के लिये बिजली आपूर्ति की स्थिति को सुधारने का प्रयास करे तो यह व्यापक जनहित में उचित होगा।
हिन्दी
252
1.5K
4.7K
87.2K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
जैसाकि सर्वविदित है कि अपने भारत देश की दुनिया भर में अच्छी एवं अनोखी मानवतावादी पहचान ख़ासकर परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अनूपम संविधान को लेकर ज़्यादा है, जो पूरी तरह से धर्मनिरपेक्षता (सेक्युलरिज़्म) के सिद्धान्त पर आधारित है अर्थात् यहाँ रहने वाले विभिन्न धर्मों के मानने वाले सभी लोगों को एक-समान आदर-सम्मान देना है तथा देश का मिज़ाज भी अधिकतर ऐसे ही उच्च मानवीय गुणों पर आधारित सभी धर्मों के मानने वालों को उनके जान, माल व मज़हब की आज़ादी एवं सुरक्षा आदि सुनिश्चित करता है और इसके निर्धारित व बताये हुये रास्तों पर चलना सभी सरकारों की ही नहीं बल्कि सभी नागरिकों की भी परम व प्रमुख ज़िम्मेदारी है। इतना ही नहीं बल्कि यह भी सर्वविदित ही है कि यही वह सुरक्षा कवच है जिसके सहारे विदेशों में भारत-विरोधी प्रोपागण्डा आदि का देश हमेशा बख़ूबी सामना करता है, किन्तु केन्द्र व सभी राज्य सरकारों का यह दायित्व/ज़िम्मेदारी बनती है कि वे ऐसा कुछ भी ना करें और ना ही वैसे कुछ होने दें जिससे देश व ख़ासकर भारत सरकार से इसके बारे अप्रिय सवाल-जवाब हो। इस क्रम में ख़ासकर पश्चिम बंगाल में चुनाव उपरान्त जारी हिंसा की सर्वत्र हो रही चर्चाओं में भी विशेषकर मा. हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद सरकारों को इसके प्रति सतर्क व अराजकता के विरुद्ध सख़्त हो जाना चाहिये, ताकि किसी भी सरकार के ऊपर संकीर्ण राजनीति, धार्मिक भेदभाव, जातीय द्वेष व पक्षपात आदि का दोष लगे, यह अति-चिन्ता की बात ज़रूर होनी चाहिये। इसके साथ ही, व्यापक जनहित व जनसुरक्षा के मद्देनज़र स्थापित नियम-क़ानूनों के अनुपालन या तत्सम्बंधी नये क़ानून आदि बनता है तो उसका अनुपालन सभी धर्मों के लोगों पर एक समान रूप में होना चाहिये अर्थात् संविधान व क़ाूनन की मान-मर्यादाओं को बरकरार रखने के लिये ज़रूरी है कि क़ानूनों का इस्तेमाल धार्मिक व जातीय भेदभाव/पक्षपात व द्वेष के बिना हो, ताकि सरकारें सर्वसमाज व सर्वधर्म हितैषी हों और लोगों को लगे भी तथा जिससे सरकारों की संवैधानिक गुडविल प्रभावित ना हो तो यह उचित होगा। वैसे भी देश के ख़ासकर सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक हालात इतने कठिन व ज्वलन्त समस्यायें इतने अधिक दुखद/कष्टदायी हो गये हैं कि सभी सरकारों को उन विशेष मुद्दों पर अपना ध्यान पूरी तरह से केन्द्रित करना चाहिये, ना कि विध्वंसकारी इमेज आदि के माध्यम से लोेगों का ध्यान उस पर से बाँटने का प्रयास करना चाहिये, क्योंकि इससे देश की राष्ट्रीय समस्याओं का समाधान नहीं होगा बल्कि क्राइसिस के हालात को और बढ़ायेेगा, जो देश व जनहितैषी कतई भी नहीं होगा, यही अपील।
हिन्दी
168
992
2.5K
43.6K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा अभी हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गयी अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी व बयानबाज़ी आदि को लेकर हर तरफ उपजा भारी आक्रोश व उसकी तीव्र निन्दा स्वाभाविक ही है तथा इस विवाद के फलस्वरूप पुलिस द्वारा मुक़दमा दर्ज किये जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किन्तु संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले को लेकर ख़ामोशी से भी मामला और अधिक गंभीर होकर काफी तूल पकड़ता जा रहा है। स्थिति भी तनावपूर्ण होती जा रही है। वैसे भी सपा प्रवक्ता के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान व स्वाभिमान को जो ठेस पहुँची है तो उसको गंभीरता से लेते हुये सपा मुखिया को इसका तत्काल संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से छमा याचना व पश्चाताप कर लेना चाहिये तो यह संभवतः उचित होगा। इसके अलावा, इस ताज़ा प्रकरण से लोगों की नज़र में यह भी साबित है कि सपा का ख़ासकर दलितों, अति-पिछड़ों व मुस्लिम समाज आदि की तरह ब्राह्मण समाज-विरोधी भी इनका जातिवादी चाल व चरित्र बदला नहीं है बल्कि और ज़्यादा गहरा ही हुआ है तथा इसके साथ ही, ब्राह्मण समाज के प्रति वर्तमान सरकार के रवैयों को लेकर भी जो ज़बरदस्त नाराज़गी इस समाज में देखने को मिल रही है वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है, जबकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. द्वारा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी व सरकार में भी भरपूर आदर-सम्मान देने के साथ-साथ हर स्तर पर उन्हें उचित भागीदारी भी दी गयी है अर्थात् बी.एस.पी. में यूज़ एण्ड थ्रो नहीं है बल्कि सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।
हिन्दी
985
5.1K
17.6K
457.5K
Vinød retweetledi
Suraj Kumar Bauddh
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh·
तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार। अभी मैंने श्याम मीरा सिंह का एक वीडियो देखा, जिसमें वह दावा कर रहे हैं कि मान्यवर कांशीराम ने 1981 में जो DS4 संगठन बनाया था, यह उसका प्रमुख नारा था। इंडिपेंडेंट और प्रोग्रेसिव होने का चोला ओढ़े कई सवर्ण बुद्धिजीवियों की यही समस्या है। उन्हें किसी विषय की गहराई से जानकारी भले नहीं होती, लेकिन हर मुद्दे पर एक्सपर्ट बनकर वीडियो बनाने की जल्दबाजी रहती है। इस चक्कर में न तो वे तथ्यों की सही जांच करते हैं और न ही दलित समाज के अनुभवों और संवेदनाओं को समझते हैं। बस सुनी-सुनाई बातें दोहरा देते हैं। यही गलती यहां भी दिखाई देती है। 90 के दशक में एक बार मायावती जी रजत शर्मा के शो "आप की अदालत" में गई थीं। वहां रजत शर्मा ने उनसे पूछा था कि बसपा नारा है- "तिलक, तराजू और तलवार, इनको मारो जूते चार", इस पर आपका क्या कहना है? इस पर बहन जी ने साफ कहा था कि बहुजन समाज पार्टी ने कभी भी यह नारा नहीं दिया। उन्होंने चुनौती देते हुए पूछा था कि क्या कोई उनकी आवाज़ में या मान्यवर कांशीराम जी की आवाज़ में यह नारा दिखा सकता है? बहन जी ने आगे कहा कि यह विरोधियों द्वारा बसपा को बदनाम करने के लिए फैलाया गया प्रचार है। जब रजत शर्मा ने दीवारों पर लिखे नारों का हवाला दिया, तो बहन जी ने जवाब दिया कि ऐसे नारे शायद रात में आपके जैसे लोग ही लिख आते होंगे। बसपा ने कभी यह नारा नहीं लगाया। बहन जी ने वर्ष 2020 में भी ट्वीट करके स्पष्ट किया था कि बहुजन समाज पार्टी का इस नारे से कोई संबंध नहीं है। वीडियो को ध्यान से देखने पर यह भी साफ लगता है कि श्याम मीरा सिंह स्वयं इस विषय को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं दिखते। यहां तक कि उन्होंने नारे की राइमिंग भी गलत बोल दी। इसलिए यह माना जा सकता है कि शायद उनका उद्देश्य जानबूझकर पार्टी की छवि खराब करना न रहा हो। फिर भी हमारा सुझाव है कि वे जल्द से जल्द वीडियो को डीलिट करके दोबारा अपलोड करें अथवा संबंधित हिस्से को youtube से क्रॉप करके हटा दें। साथ ही उन्हें अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस विषय में स्पष्टीकरण भी देना चाहिए। दलित समुदाय और बहुजन राजनीति से जुड़े मुद्दों पर वीडियो बनाते समय अत्यंत निष्पक्ष, संवेदनशील और तथ्य-आधारित दृष्टिकोण रखना जरूरी है। मीडिया या अफवाहों में चल रही हर बात को बिना जांचे सच मान लेना समाज के साथ अन्याय है। चूंकि उत्तर प्रदेश में चुनाव नजदीक हैं, इसलिए बसपा की छवि को नुकसान पहुंचाने के कई प्रयास होंगे। और क्योंकि बसपा की अपनी कोई IT सेल नहीं है, पार्टी के अधिकांश पदाधिकारी भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सक्रिय नहीं दिखते, इसलिए विरोधियों द्वारा फैलाया गया झूठ धीरे-धीरे जनता को सच लगने लगता है। यही वह जगह है जहां बसपा बार-बार कमजोर पड़ जाती है और विपक्ष अपनी रणनीति में सफल हो जाता है। ऐसे में बहन जी को स्वयं इस दिशा में ध्यान देना चाहिए।
Suraj Kumar Bauddh tweet mediaSuraj Kumar Bauddh tweet mediaSuraj Kumar Bauddh tweet media
हिन्दी
50
261
811
22.2K
Vinød retweetledi
Mayawati
Mayawati@Mayawati·
अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में ज़बरदस्त आंधी-तूफान से हुई जान-माल की भारी तबाही से प्रभावित लोगों/परिवारों की मदद के लिए राज्य सरकार को अपनी पूरी उदारता बरतते हुये हर प्रकार से उनके सहयोग के लिये आगे आना चाहिये ताकि वे लोग अपने उजड़े/बिखरे हुये पारिवारिक जीवन को समेट कर दोबारा से अपनी ज़िन्दगी शुरू कर सकें। इसके साथ ही, ख़ासकर पेट्रोलियम पदार्थों आदि, इन आवश्यक वस्तुओं के मूल्य में अनवरत वृद्धि को जारी रखते हुये केन्द्र सरकार द्वारा पेट्रोल व डीज़ल आदि की क़ीमत में तीन रुपये प्रति लीटर की वृद्धि करोड़ों ग़रीबों व मेहनतकश परिवारों, खेती-किसानी आदि के साथ-साथ मिडिल क्लास के जीवन को भी बुरी तरह से प्रभावित करेगा, अर्थात् इस महंगाई का सीधा असर इन सबके परिवार के पालन-पोषण पर पड़ेगा। इसीलिये सरकार को महंगाई व जीवन दुष्कर करने वाली इस प्रकार की नियमित वृद्धि को कम करने के लिए ज़रूरी सार्थक क़दम उठाने चाहिये, यही समय की माँग है।
हिन्दी
159
949
2.6K
41.6K
Vinød retweetledi
Vishwanath Pal
Vishwanath Pal@PalVishwnathbsp·
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं। मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है। ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए। मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा। देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी। सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है। — माननीय आकाश आनंद जी राष्ट्रीय समन्वयक बसपा
हिन्दी
12
297
850
4.2K
Vinød retweetledi
Akash Anand
Akash Anand@AnandAkash_BSP·
माननीय प्रधानमंत्री जी की हालिया अपील ऐसे समय आई है जब देश की अर्थव्यवस्था पहले से ही दबाव में है। पिछले तीन महीनों में हमारा विदेशी मुद्रा भंडार लगभग $38 अरब घटकर मात्र $690 अरब रह गया है। रुपया डॉलर के मुक़ाबले ₹95 पार कर चुका है, और व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ये केवल आँकड़े नहीं हैं, ये करोड़ों परिवारों की रोज़मर्रा की चिंता हैं। मैं मानता हूँ कि मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था चलाना आसान काम नहीं है, और दुनिया भी एक कठिन दौर से गुज़र रही है। ऐसे समय में सरकार का ध्यान मांग बढ़ाने पर होना चाहिए, मांग घटाने पर नहीं। दुनिया का आर्थिक इतिहास हमें एक सीधी बात सिखाता है कि जब आर्थिक गति धीमी हो, तब लोगों से कम खर्च करने को कहना समाधान नहीं होता, समाधान यह है कि टैक्स में राहत देकर, छोटे व्यापारियों को सहारा देकर, मध्यम वर्ग पर बोझ कम कर आम परिवारों के हाथ में थोड़ा ज़्यादा पैसा छोड़ा जाए। मुझे दुख इस बात का है कि हर बार किफ़ायत की ज़िम्मेदारी उसी ईमानदार करदाता पर आ जाती है जिसने कोविड के समय भी सबसे ज़्यादा सहा। उसने उस वक़्त भी पूरे भरोसे से अपनी भूमिका निभाई थी, तब भी उसके लिए राहत सीमित थी, और आज फिर उसी को बलि का बकरा बनाया जा रहा है और वो भी बिना ये बताए कि सरकार अपनी ओर से उसके लिए क्या करने जा रही है। केंद्र सरकार और राज्य सरकारों को रेवडियां बांटने वाली नीतियों पर तुरंत रोक लगानी होगी ताकि सरकारी खजाने पर बोझ कम हो सके। अगर सरकारें fiscal dicipline और productive capital creation पर ध्यान नहीं देंगी, तो थोड़े समय का राजनीतिक लाभ देश को लंबी आर्थिक कीमत चुकाने पर मजबूर करेगा। देश को अपील नहीं, एक स्पष्ट रास्ता चाहिए। लोग जानना चाहते हैं विकास कैसे लौटेगा, नौकरियाँ कैसे बढ़ेंगी, और किसानों, छोटे व्यापारियों व मध्यम वर्ग को असली राहत कब मिलेगी। सिर्फ़ नागरिकों से त्याग माँगना शासन नहीं होता। जवाबदेही, दूरदृष्टि और आर्थिक संतुलन यही असली राष्ट्रहित है।
हिन्दी
253
1.1K
2.1K
37.2K
Vinød retweetledi
Suraj Kumar Bauddh
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh·
बाबासाहेब की बेटी बनी टॉपर। 🔥 हरियाणा में दलित समुदाय से आने वाली दीपिका मेघवाल ने 12वीं की परीक्षा में टॉप किया है। शाबाश बहन। बाबासाहेब की बेटी दीपिका मेघवाल ने अपनी काबिलियत से जन्मजात मेरिटधारी होने का दंभ भरने वाली मानसिकता को एक आईना दिखाया है कि मेरिट जन्म से नहीं आती।
Suraj Kumar Bauddh tweet mediaSuraj Kumar Bauddh tweet media
हिन्दी
115
275
1.2K
11.7K
Vinød retweetledi
Akash Anand
Akash Anand@AnandAkash_BSP·
NEET-UG 2026 का रद्द होना सिर्फ एक परीक्षा का रद्द होना नहीं है, यह उन लाखों परिवारों के भरोसे की बात है, जिन्होंने अपने बच्चों के लिए सपने देखे, मेहनत से पढ़ाया और यह माना कि अगर बच्चा ईमानदारी से पढ़ेगा, तो व्यवस्था भी उसके साथ ईमानदारी से पेश आएगी। मैं जानता हूँ कि देश भर में एक साथ परीक्षा कराना आसान काम नहीं है। लेकिन हमारे युवाओं को इतना अधिकार तो है कि उनकी मेहनत का सम्मान हो, और उनका भविष्य किसी की लापरवाही की भेंट न चढ़े। जब पेपर लीक एक के बाद एक दोहराए जाएँ, और छात्र सड़कों पर न्याय माँगने को मजबूर हों तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक चूक नहीं रह जाती, यह हमारे साझा भरोसे की चूक बन जाती है। हमारे परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जी ने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा हथियार बताया था। उस हथियार को कमजोर करने वालों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार और एजेंसियों को जवाब देना होगा कि आखिर हर बार युवाओं का भविष्य ही क्यों दांव पर लगाया जाता है? देश के सभी छात्रों के साथ हमारी पूरी संवेदना और एकजुटता है। न्याय, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना अब सरकार की नैतिक जिम्मेदारी है। #NEET
हिन्दी
167
1K
2.1K
25.2K
Vinød retweetledi
Suraj Kumar Bauddh
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh·
ब्राह्मण शादी में पानी पीने पर दलित भाइयों पर हमला। उत्तराखंड के हल्द्वानी में एक शादी के दौरान डीजे चला रहे दलित भाईयों ने पास में रखे बर्तन से पानी पी लिया तो गुस्साए ब्राह्मणों ने उन पर चाकू से हमला कर अधमरा कर दिया। इस घटना पर सारे हिंदू संगठन मौन हैं? क्या यही हिंदुत्व है?
Suraj Kumar Bauddh tweet mediaSuraj Kumar Bauddh tweet media
हिन्दी
37
247
596
7.2K
Vinød retweetledi
Suraj Kumar Bauddh
Suraj Kumar Bauddh@SurajKrBauddh·
संसद में हर वक्त अखिलेश यादव के सामने हाथ जोड़कर खड़े होने वाले अवधेश प्रसाद ने क्या कभी दलितों की आवाज उठाई है? या फिर केवल चुनाव के समय दलित बनते हैं? अभी प्रयागराज में साहिल यादव ने हिमांशु सरोज नामक एक दलित की निर्मम हत्या कर दी। अब PDA नेता कहां हैं?
Suraj Kumar Bauddh tweet media
हिन्दी
15
160
568
4.3K