Faizan Khan

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National Spokesperson @bspindia

Lucknow Katılım Ocak 2016
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
समाजवादी पार्टी (सपा) के एक प्रमुख राष्ट्रीय प्रवक्ता द्वारा अभी हाल ही में ब्राह्मण समाज को लेकर की गयी अभद्र, अशोभनीय एवं आपत्तिजनक टिप्पणी व बयानबाज़ी आदि को लेकर हर तरफ उपजा भारी आक्रोश व उसकी तीव्र निन्दा स्वाभाविक ही है तथा इस विवाद के फलस्वरूप पुलिस द्वारा मुक़दमा दर्ज किये जाने के बाद भी यह मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। किन्तु संकीर्ण जातिवादी राजनीति करने वाली सपा के नेतृत्व की इस मामले को लेकर ख़ामोशी से भी मामला और अधिक गंभीर होकर काफी तूल पकड़ता जा रहा है। स्थिति भी तनावपूर्ण होती जा रही है। वैसे भी सपा प्रवक्ता के ग़ैर-ज़िम्मेदाराना बयान से ब्राह्मण समाज के आदर-सम्मान व स्वाभिमान को जो ठेस पहुँची है तो उसको गंभीरता से लेते हुये सपा मुखिया को इसका तत्काल संज्ञान लेकर ब्राह्मण समाज से छमा याचना व पश्चाताप कर लेना चाहिये तो यह संभवतः उचित होगा। इसके अलावा, इस ताज़ा प्रकरण से लोगों की नज़र में यह भी साबित है कि सपा का ख़ासकर दलितों, अति-पिछड़ों व मुस्लिम समाज आदि की तरह ब्राह्मण समाज-विरोधी भी इनका जातिवादी चाल व चरित्र बदला नहीं है बल्कि और ज़्यादा गहरा ही हुआ है तथा इसके साथ ही, ब्राह्मण समाज के प्रति वर्तमान सरकार के रवैयों को लेकर भी जो ज़बरदस्त नाराज़गी इस समाज में देखने को मिल रही है वह भी किसी से छिपा हुआ नहीं है, जबकि यह सर्वविदित है कि बी.एस.पी. द्वारा सर्वसमाज की तरह ब्राह्मण समाज को भी पार्टी व सरकार में भी भरपूर आदर-सम्मान देने के साथ-साथ हर स्तर पर उन्हें उचित भागीदारी भी दी गयी है अर्थात् बी.एस.पी. में यूज़ एण्ड थ्रो नहीं है बल्कि सर्वसमाज का हित हमेशा सुरक्षित रहा है।
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के विरुद्ध जारी युद्ध समाप्ति की अनिश्चितता के कारण ख़ासकर ऊर्जा संकट व विदेशी मुद्रा भण्डार की चिन्ताओं के मद्देनज़र मा. प्रधानमंत्री द्वारा देश के लोगों से ’संयम’ बरतने की गयी अपीलों से यह साबित है कि भारत के समक्ष संकट केवल पेट्रोल, डीज़ल, रसोई गैस आदि पेट्रोलियम पदार्थों को लेकर ही नहीं बल्कि आर्थिक संकट भी गहरायेगा, जिससे करोड़ों भारतवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है तथा जिसके जारी रहने की भी गंभीर आशंका है। अर्थात् ऐसे समय में जबकि कोरोनाकाल की ज़बरदस्त मार के बाद रोज़ी-रोटी तक के संकट का जीवन झेल रही देश की लगभग सौ करोड़ जनता के पास और अधिक संयमित होने व खोने को कुछ ख़ास नहीं बचा है, तो ऐसी स्थिति में केन्द्र एवं राज्य सरकारें उन ग़रीब व मेहनतकश परिवारों को थोड़ी राहत देकर उनका सहारा बनने के लिये ख़ुद ही कुछ बेहतर करने का उपाय ज़रूर करें तो यह जन व देशहित में उचित होगा, ऐसी आम जन भावना।
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Mayawati@Mayawati·
वैसे तो मंत्रिमण्डल का घटाना-बढ़ाना व विस्तार आदि सत्ताधारी पार्टी का आन्तरिक राजनीतिक चिन्तन का मामला ज़्यादा होता है और इसीलिये उत्तर प्रदेश मंत्रिमण्डल के कल हुये विस्तार के बारे में कुछ भी टीका-टिप्पणी करना उचित नहीं होगा, किन्तु कुल मिलाकर इसका अच्छा प्रभाव आमजन के हित के साथ-साथ ख़ासकर सर्वसमाज के ग़रीबों, मज़दूरों, किसानों, युवाओं के जीवन की बेहतरी एवं महिला सुरक्षा-सम्मान आदि पर पड़ता हुआ दिखना भी ज़रूर चाहिये, वरना लोग इसको राजनीतिक जुगाड़ तथा सरकारी संसाधन पर बढ़ा हुआ बोझ ही मान लेंगे। इतना ही नहीं बल्कि समाज के हर वर्गों में भी विशेषकर कमज़ोर तबक़ों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा व उन्हें न्याय मिलता हुआ महसूस होने पर सरकार व उनके सभी मंत्रियों के कार्यकलापों में परिलक्षित भी हो तो यह उचित होगा, जो कि सरकारों व उनके मंत्रियों की पहली संवैधानिक ज़िम्मेदारी बनती है। इसी क्रम में अभी हाल ही में राजधानी लखनऊ में ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के एक युवा नेता पर जानलेवा हमला होने से हर तरफ एकबार फिर से क़ानून-व्यवस्था के साथ-साथ इस बात पर भी चर्चा शुरू हो गयी है कि यूपी में ब्राह्मण समाज यहाँ केवल उपेक्षित ही नहीं बल्कि काफी असुरक्षित भी है, जो अति-चिन्तनीय, जबकि बी.एस.पी. की रही सभी सरकारों में समाज के हर वर्ग के जान, माल व मज़हब के साथ-साथ बेहतरीन क़ानून-व्यवस्था के तह्त ब्राहमण समाज सहित समाज के सभी वर्गों को ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त के अन्तर्गत न्याय और सुरक्षा दी गयी थी, जो कि सर्वविदित है।
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यूपी के ज़िला सहारनपुर के गाँव लालवाला में एक भूमि में फोटो/तस्वीर रखने को लेकर लोगों के बीच हुये विवाद और फिर संघर्ष में दलित वर्ग के अनेक लोगों के भी घायल होने से वहाँ स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। पुलिस व प्रशासन को वहाँ हालात को काबू में रखने के लिये तत्काल निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिये। साथ ही, दोनों वर्गों के लोगों से भी अपील है कि वे शान्ति-व्यवस्था व आपसी सद्भाव बनाये रखें और मामले को ताक़त से नहीं बल्कि क़ानूनी तरीके़ से ही सुलझायें।
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Mayawati
Mayawati@Mayawati·
देश में कमर्शियल सिलिण्डर की भारी क़िल्लत के बीच उसकी क़ीमत में एक मुश्त 993 रुपयों की फिर की गयी वृद्धि व उसका आम जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभाव से जुडी ख़बरें इलेक्ट्रानिक सहित सभी मीडिया जगत की सुर्ख़ियों में हैं और इस आशंका से कि जल्द ही रसोई गैस, पेट्रोल व डीज़ल सहित अन्य पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतें भी ज़रूर बढ़ेंगी, लोगों में बेचैनी व्याप्त है। इसका वास्तविक कारण चाहे अमेरिका-इजराइल का ईरान पर युद्ध हो या अन्य कुछ और, सरकार ने जिस प्रकार से राज्यों के विधानसभा आमचुनाव के मद्देनज़र ख़ासकर पेट्रोलियम पदार्थों आदि की क़ीमत को काफी कुछ नियंत्रण में रखा, उस नीति को वर्तमान में भी व्यापक जनहित व जनकल्याण के तहत् जारी रखना चाहिये तो यह देशहित में उचित होगा। दिल्ली में भी नई दर पर कमर्शियल सिलेण्डर की कीमत अब लगभग तीन हजार से अधिक हो जायेगी। पेट्रोलियम पदार्थों की क़ीमतों के इस प्रकार से बढ़ने से पहले से ही महंगाई से त्रस्त देश के अधिकतर ग़रीब व मध्यम वर्गों के लोगों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका ऑकलन करके ही सरकार अपनी नीतियों का निर्धारण करे तो यह बेहतर।
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हालाँकि देश भर के पुरुष व महिला मज़दूरों व श्रमिक समाज की हालत में कोई अपेक्षित सुधार लाख कोशिशों के बावजूद अब तक देखने को नहीं मिलता है, और इसीलिये ’मज़दूर दिवस’ के महत्व को आज भी नकारा नहीं जा सकता है और इस मौके़ पर नित्य दिन जीवन संघर्षों में लगे मेहनतकश तबके़ के सभी लोगों को आज ’मई दिवस’ की बधाई तथा उन सबके थोड़े ’अच्छे दिन’ की फिर से शुभकामनायें। वैसे तो देश निर्माण में मज़दूरों एवं सभी मेहनतकश समाज के लोगों का ज़बरदस्त योगदान रहता है और उनके इस महत्वपूर्ण योगदान को देखते हुये परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने देश की आज़ादी से पहले और फिर आज़ादी के बाद भी इन सबके लिये ख़ुश व ख़ुशहाल जीवन की गारण्टी सुनिश्चित करने का प्रयास किया था, किन्तु अब तो आउटसोर्सिंग, दैनिक वेतन भोगी तथा हायर एड फायर की प्रथा ने जीवन के हर पहलू में प्रचलित हो जाने से देश के मेहनतकश तबक़ों/समाज को नई मुसीबतों व रोज़गार अनिश्चितताओं का ज़बरदस्त सामना है, जिससे उसके परिवार को पालन-पोषण ही नहीं बल्कि उसकी शिक्षा-दीक्षा, स्वास्थ्य आदि पर भी बुरा प्रभाव पड़ता हुआ साफ दिखाई पड़ता है अर्थात् विकास की चाह में मज़दूरों का भविष्य ही नहीं बल्कि उनका व उनके परिवार का जीवन दाव पर लगा हुआ दिखता है, जो उचित नहीं प्रतीत होता है। साथ ही, महिलाओं को इसके लिये वास्तव में सुरक्षित वातावरण नहीं मिल पाना भी भारत में चिन्ता का विषय बना हुआ है। कुल मिलाकर, देश के विकास में मज़दूर/श्रमिक वर्ग की उचित भागीदारी सुनिश्चित हो, ऐसी आज मई दिवस पर सभी सरकारों से अपील है। वैसे भी बी.एस.पी. का संघर्ष उन्हीं मेहनतकश बहुजनों के हक़ के लिये समर्पित है और रहेगा।
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सत्य, अहिंसा व मानवता के आदर्श ज्योति को दुनिया में फैलाकर भारत को जगदगुरु की विश्व ख्याति व सम्मान दिलाने वाले तथागत (भगवान) गौतम बुद्ध को आज उनकी जयन्ती पर शत्-शत् नमन व उनके अनुयाइयों को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक बधाई एवं सुख, शान्ति व सौहार्द भरे जीवन की शुभकामनाएं। तथागत गौतम बुद्ध के बताए रास्ते पर सही से चलकर लोगों के जीवन को सुखी व सम्पन्न बनाना ही सच्चा राजधर्म है, इससे भला कौन इंकार कर सकता है। लेकिन इसकी सार्थकता तभी संभव है जब सभी सरकारें अपनी कथनी व करनी में अन्तर ना आने दें और वही करें जो कहें एवं वही कहें जो कर पायें, तभी इससे सभी को प्रेरणा मिलेगी। साथ ही, सरकारें ख़ासकर सभी धर्मों के मानने वालों के जान, माल व मज़हब की सुरक्षा सुनिश्चित करें तो यह तथागत गौतम बुद्ध को सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इतना ही नहीं बल्कि ’अप्प दीपो भवः’ अर्थात शिक्षित बनो, ख़ुद ऊपर उठो व अपना प्रकाश स्वयं बनो के सिद्धान्त से ही देश आत्मनिर्भर एवं महान बनेगा।
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महिलाओं को राजनीति में उचित भागीदारी देने की पहल के तहत् देश की संसद लोकसभा व राज्यों की विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला काफी लम्बी जद्दोजहद के बावजूद भी आगे नहीं बढ़ पाया है, यह अति-दुःखद, दुर्भाग्यपूर्ण व अति-चिन्तनीय भी है और इस सन्दर्भ में आज यू.पी. विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया गया है जिसका बी.एस.पी स्वागत करती है तथा महिला आरक्षण का समर्थन भी करती है।
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30-04-2026-BSP PRESSNOTE-PUNJAB-HARYANA REVIEW MEETING
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Mayawati@Mayawati·
28-04-2026-DELHI REVIEW MEETING
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जैसाकि सर्वविदित है कि बी.एस.पी. अध्यक्ष, ज़िला ग़ाज़ियाबाद द्वारा कल श्री जय प्रकाश सिंह को तथा बी.एस.पी. अध्यक्ष, ज़िला बुलन्दशहर द्वारा आज श्री धर्मवीर सिंह अशोक, पूर्व विधायक को पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के कारण पार्टी से निष्कासित कर दिया गया, जिसकी काफी चर्चा मीडिया में है, लेकिन आज ही बाद में पाटी के तीन वरिष्ठ लोगों - श्री मेवालाल गौतम, श्री मुनक़ाद अली व श्री नौशाद अली - को पार्टी से निष्कासित करने वाला बी.एस.पी. अध्यक्ष, ज़िला बुलन्दशहर के जाली लेटरपैड पर जारी प्रेस विज्ञप्ति पूर्णतः फेक व फ़र्ज़ी है। इसीलिये उस पर क़तई ध्यान नहीं दिया जाये। मीडिया भी ऐसे तथ्यहीन ख़बरों से बचे तथा आगे ऐसे फेक ख़बरों पर ज़रूरी सावधानी बरते अर्थात् पुष्टि/सत्यापन ज़रूर कर ले तो यह उचित होगा।
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Mayawati@Mayawati·
1. ख़ासकर उत्तर प्रदेश स्टेट के बी.एस.पी. के सभी ज़िला अध्यक्ष एवं छोटे-बड़े पदाधिकारी व कार्यकर्तागण, आज मैं पार्टी के कार्यों से दिल्ली जा रही हूँ और कार्य पूरा होते ही जल्दी वापिस भी आ जाऊँगी। और इस दौरान् पार्टी की पिछले महीने दिनांक 31 मार्च सन् 2026 को लखनऊ में हुई यू.पी. प्रदेश-स्तरीय बड़ी बैठक में पार्टी संगठन को तैयार करने व कैडर आदि के ज़रिये पार्टी का जनाधार बढ़ाने एवं आर्थिक मज़बूती देने तथा यू.पी. विधानसभा आमचुनाव की तैयारी से सम्बन्धित जो भी ज़रुरी दिशा-निर्देश दिये गये थे, उस पर पूरी ईमानदारी व निष्ठा से अमल करते रहना है। 2. साथ ही, बैठकों में यू.पी. में बी.एस.पी. के नेतृत्व में रही सरकार में प्रदेश के विकास व जनहित आदि में किये गये कार्यों के बारे में ज़रूर बताना है। बैठकों में यह भी बताना है कि यू.पी. में अब तक जितने भी एक्सप्रेस-वे आदि बने हैं तथा नोएडा में एयरपोर्ट भी बना है ऐसे अनेकों और भी जनहित के कार्य किये गये हैं जिनकी योजना व रुपरेखा बी.एस.पी. की रही सरकार में ही बनाई गयी थी और ये सभी कार्य काफी हद तक ज़रूर पूरे हो जाते यदि उस समय केन्द्र की रही कांग्रेसी सरकार बी.एस.पी. के प्रति अपनी जातिवादी मानसिकता के चलते इनमें रुकावटें पैदा नहीं करती। 3. कहने का तात्पर्य यह है कि यूपी के समुचित विकास व सर्वसमाज की उन्नति/तरक़्क़ी व बेहतर कानून व्यवस्था हेतु ’कानून द्वारा कानून का राज’ के ज़रिये बी.एस.पी. के ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ शासन में ही यह संभव हो सकता है, जिस पर भी ध्यान देने की अपील। 4. इतना ही नहीं बल्कि लखनऊ में दिनांक 22 फरवरी सन् 2026 की यू.पी. को छोड़कर आल-इण्डिया की हुई बड़ी बैठक में, पार्टी व मूवमेन्ट के हित में जो भी ज़रुरी दिशा-निर्देश दिये गये थे, तो उन्हें भी समय से ज़रूर पूरा करना है। 5. इसके इलावा, यू.पी. सहित पूरे देश में, पार्टी द्वारा दिये गये दिशा-निर्देशों को लेकर स्थानीय स्तर पर पार्टी की बुलाई जा रही सभी इन बैठकों में महिला आरक्षण को लेकर अभी हाल ही में, मेरे द्वारा दिनांक 15 अप्रैल 2026 को मीडिया में पार्टी का जो स्टैण्ड रखा गया है तथा उसके बाद एक्स पर पोस्ट भी किया गया है और ज़रुरत पड़ने पर आगे भी बयान दिये जायेंगे। 6. अर्थात् महिला आरक्षण के समर्थन के मामले में अभी भी पार्टी का स्टैण्ड दिनांक 15 अप्रैल वाला ही है, इसमें कोई भी बदलाव नहीं किया गया है, उसके बारे में भी इन बैठकों में ज़रूर बताना है ताकि महिला आरक्षण के इस ख़ास मुद्दे पर पार्टी के लोग गुमराह ना हो सकें, लेकिन इसके लिए पार्टी के अनुशासन के मुताबिक़ कोई भी धरना-प्रदर्शन आदि नहीं करना है।
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1. देश के SC, ST व OBC समाज के संवैधानिक/क़ानूनी अधिकारों आदि के मामले में, कांग्रेस भी गिरगिट की तरह अपना रंग बदलने वाली यह पार्टी भी, महिला आरक्षण में, जो अब इन वर्गों की बात कर रही है, तो यही कांग्रेस पार्टी है जिसने अपनी केन्द्र की सरकार के रहते हुये किसी भी क्षेत्र में इनके आरक्षण के कोटे को पूरा कराने की कभी पहल नहीं की है। 2. तथा ना ही OBC समाज हेतु मण्डल कमीशन की रिपोर्ट के हिसाब से उन्हें सरकारी नौकरी व शिक्षा के क्षेत्र में 27 प्रतिशत आरक्षण को भी लागू किया, जिसे फिर BSP के अथक प्रयासों से पूर्व प्रधानमंत्री श्री वी.पी. सिंह की सरकार में अनततः लागू किया गया था, जो सर्वविदित है। 3. इसी प्रकार, यू.पी. में पिछड़े मुस्लिमों को OBC का लाभ देने के लिए, पिछड़ा वर्ग आयोग की जुलाई 1994 में ही आई रिपोर्ट को भी सपा सरकार ने ठण्डे बस्ते में डालकर इसे लागू नहीं किया था, जिसे फिर यहाँ बी.एस.पी. की दिनांक 3 जून सन् 1995 में पहली बनी सरकार ने इसे तुरन्त लागू किया, जो कि अब यही सपा अपना रंग बदलकर अपने राजनैतिक स्वार्थ में इनकी महिलाओं को अलग से आरक्षण देने की बात कर रही है। 4. इस प्रकार, अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी सपा जब सरकार में नहीं है तो अलग रवैया अपना रही है, किन्तु जब सरकार में होती है तो अलग संकीर्ण जातिवादी व तिरस्कारी रवैया अपनाती है। अतः इन सभी वर्गों को ऐसी सभी छलावा एवं दोहरे चरित्र वाली पार्टियों से हमेशा सावधान रहना होगा, तभी कुछ बेहतर संभव हो पायेगा। 5. जहाँ तक महिला आरक्षण के लिए पिछली (सन् 2011) जनगणना के आधार पर परिसीमन करने का सवाल है, तो इस बारे में यही कहना है कि यदि इसे जिन भी कारणों से जल्दी लागू करना है तो फिर इसी जनगणना के आधार पर करना है और यदि वर्तमान में कांग्रेस पार्टी केन्द्र की सत्ता में होती तो फिर यह पार्टी भी बीजेपी की तरह ही यही क़दम उठाती। 6. कुल मिलाकर, कहने का तात्पर्य यह है कि देश में SC, ST व OBC एवं मुस्लिम समाज के वास्तविक हित, कल्याण व उनके भविष्य संवारने आदि के किसी भी मामले में कोई भी पार्टी गम्भीर नहीं रही है। 7. इसीलिये महिला आरक्षण के मामले में इन वर्गों को अभी जो कुछ भी मिलने वाला है तो उसे इनको फिलहाल स्वीकार कर लेना चाहिये और इस मामले में आगे अच्छा वक्त आने पर इनके हितों का सही से पूरा ध्यान रखा जायेगा अर्थात् इन्हें किसी के भी बहकावे में नहीं आना है क्योंकि इनको खुद अपने पैरों पर खड़े होकर अपने समाज को आत्मनिर्भर एवं मजबूत बनाना है। यही सलाह है।
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विशाल आबादी वाले अपने भारत देश में ’बहुजन समाज’ अर्थात् बहुजनों के मसीहा भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनकी जयंती पर प्रातः मेरे द्वारा शत्-शत् नमन, पुष्पांजलि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ ही बी.एस.पी. के लोगों द्वारा पूरे देश भर में ख़ुद व अपने परिवार सहित उन्हें पूरी मिशनरी भावना के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के लिये सभी लोगों का तहेदिल से आभार, शुक्रिया एवं धन्यवाद। सर्वविदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का पूरा जीवन देश के ग़रीबों उपेक्षितों, शोषितों तथा जातिवाद एवं सामंतवाद से पीड़ित महिलाओं आदि समेत ’बहुजन समाज’ की सुरक्षा, सम्मान व उत्थान के लिये अत्यन्त ही कड़े संघर्ष में बीता, और अन्ततः जिसकी गारण्टी उन्होंने संविधान में सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक कार्य किया और अमर हो गये और जिसके लिये देश हमेशा उनका कृतज्ञ रहेगा। किन्तु काश, देश की केन्द्र व यहाँ राज्यों की सत्ता में रहने वाली पार्टियाँ बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अति-मानवतावादी, सर्वजन-हितैषी व बहुजन-कल्याणकारी संविधान के पवित्र उद्देश्यों को प्राप्त करने में सही से सफल हो पातीं तो भारत अभी तक स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर व विकसित देश बनकर यहाँ के करोड़ों बहुजनों की अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, जातिवादी द्वेष, शोषण व जुल्म-ज़्यादती आदि से मुक्त समता एवं न्याय-युक्त जीवन लोगों को ज़रूर दे पाता। अगर ऐसा नहीं हो पाया है तो क्यों? इसका जवाब ढूंढने पर देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ का कारवाँ चुनावी सफलता भी हासिल करके अपनी मंज़िल की ओर ज़रूर आगे बढ़ेगा। जय भीम, जय भारत
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