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@singhmegh2

सामाजिक कार्यकर्ता। धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः ! तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत् !!

india Katılım Temmuz 2013
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Mr Sharma
Mr Sharma@sharma_views·
🚨 Now or Never. Must Watch. Must Share. BJP देश की रीढ़ काट रही है - और सुप्रीम कोर्ट इसे वैध बना रही है। 2 अरब साल पुरानी अरावली 100 मीटर के खेल में कुर्बान। 90% पहाड़ अब कॉरपोरेट्स के लिए खुले। ये विकास नहीं, विनाश है 😡 #SaveAravali
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CM Office, GoUP
CM Office, GoUP@CMOfficeUP·
ॐ सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।। #UPCM @myogiadityanath ने 'चैत्र नवरात्रि' की पावन नवमी तिथि के अवसर पर आज @GorakhnathMndr में देवी स्वरूपा कन्याओं का पूजन किया एवं प्रसाद ग्रहण कराया।
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ocean jain
ocean jain@ocjain4·
लाहौर में पुराने किले में स्थित प्रभु श्रीराम के पुत्र लव की समाधी पर पहुँचकर कांग्रेस नेता व BCCI उपाध्यक्ष 'राजीव शुल्ला' ने नमन् किया ! लाहौर नगर निगम के रिकॉर्ड में ये बात दर्ज है लाहौर शहर 'लव' ने बसाया था और पाकिस्तान का 'कसूर' शहर कुश ने बसाया था! पाकिस्तान की सरकार भी इस बात को प्रचारित करना चाहती है ताकि हिंदू पर्यटक वहाँ आएँ और उनके कटोरे में मुट्ठी भर-भरकर सिक्के डालें ! आजकल पाकिस्तान का थिंकटैंक सभी हिंदू मंदिरों का जीर्णोदार करने की वकालत पाकिस्तान सरकार से कर रहा है ताकि हिंदू पर्यटन को बढ़ावा मिले अब राम को काल्पनिक बताने वाले इस बात से चिंतित हैं... जब पाकिस्तान सरकार ही हिन्दुओं का स्वागत करेगी तो रजिया कांग्रेस को वोट करने क्यों जाएगी? वजह कोई भी हो... मगर सनातनी सत्य प्रमाणिक तौर पर बाहर आ रहा है। लेकिन जेहादी इस बात को मानने को तैयार नहीं हैं कि उसका बाप किशनलाल ही है!!
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
श्मशान में जब महर्षि दधीचि के मांसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयम् चिता में बैठकर सती हो गयीं। इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा। जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों(फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा। एक दिन देवर्षि
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Vatsala Singh
Vatsala Singh@_vatsalasingh·
2- मुझ अनाथ को शरण पीपल वृक्ष ने दी है। अतः जो भी व्यक्ति सूर्योदय के पूर्व पीपल वृक्ष पर जल चढ़ाएगा उसपर शनि की महादशा का असर नहीं होगा। ब्रह्मा जी ने तथास्तु कह वरदान दिया।तब पिप्पलाद ने जलते हुए शनि को अपने ब्रह्मदण्ड से उनके पैरों पर आघात करके उन्हें मुक्त कर दिया । जिससे शनिदेव के पैर क्षतिग्रस्त हो गए और वे पहले जैसी तेजी से चलने लायक नहीं रहे।अतः तभी से शनि "शनै:चरति य: शनैश्चर:" अर्थात जो धीरे चलता है वही शनैश्चर है, कहलाये और शनि आग में जलने के कारण काली काया वाले अंग भंग रूप में हो गए। सम्प्रति शनि की काली मूर्ति और पीपल वृक्ष की पूजा का यही धार्मिक हेतु है।आगे चलकर पिप्पलाद ने प्रश्न उपनिषद की रचना की,जो आज भी ज्ञान का वृहद भंडार है..... जय जय श्री राम
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ANIL
ANIL@AnilYadavmedia1·
बूढ़े मुग़ल बादशाह औरंगजेब ने 32 साल के युवा छत्रपति संभाजी महाराज के सामने तीन बहुत मामूली सी शर्ते रखी थी, 1-सभी मराठा किलों पर कब्ज़ा दो,और मराठा साम्राज्य के छिपे हुए खजाने को उजागर करो, 2- उन मुगल गद्दारों के नाम उजागर करें जो मुगल दरबार के अधिकारी थे, 3- इस्लाम कबूल करो, वीर संभाजी अगर इन तीन शर्तों क़ो मान लेते, तो बाक़ी जिंदगी मौज में काट सकते थे, करना ही क्या था, सिर्फ मुग़ल बादशाह का TTM ही तो करना था, लेकिन संभाजी राजे ने औरंगजेब से कहा, धर्म मेरा प्राण है और में उसको नहीं छोड़ सकता, जिसके बाद ऑरंगजेब ने वीर योद्धा की हत्या कर दी,
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SANATAN
SANATAN@Eternaldharma_·
महामृत्युंजय मंत्र की रचना कैसे हुई ? किसने की महामृत्युंजय मंत्र की रचना ? जाने इसकी शक्ति शिवजी के अनन्य भक्त मृकण्ड ऋषि संतानहीन होने के कारण दुखी थे, विधाता ने उन्हें संतान योग नहीं दिया था। मृकण्ड ने सोचा कि महादेव संसार के सारे विधान बदल सकते हैं, इसलिए क्यों न भोलेनाथ को प्रसन्नकर यह विधान बदलवाया जाए। मृकण्ड ने घोर तप किया, भोलेनाथ मृकण्ड के तप का कारण जानते थे इसलिए उन्होंने शीघ्र दर्शन न दिया लेकिन भक्त की भक्ति के आगे भोले झुक ही जाते हैं।
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Shaurya Mishra
Shaurya Mishra@shauryabjym·
महिषासुर आधा महिष और आधा मनुष्य रुपी असुर क्यूँ था..???? महिषासुर को असुरो का राजा बनाया गया, तो रक्तबीज को सेनापती.. अग्निदेव और यक्षराज सम्भरण को देवराज इंद्र ने स्वर्ग से बहिष्कृत किया था.. इसी कारण उन दोनों ने महिषासुर का साथ देना उचित समझकर , इंद्र से प्रतिशोध लेनी की ठानी.. यक्षराज के कहेनुसार इच्छित वरदान पाने हेतु, महिषासुर ने ब्रह्म तपस्या आरंभ की.. देवराज ने इस बार महिषासुर के तपस्या भंग करनी चाही परन्तु पंचाग्नी ब्रह्म तपस्या में अवरोद्ध उत्पन्न नहीं कर पाए .. आखिरकर जब ब्रह्मा, महिषासुर के सामने प्रकट हुए तो महिषासुर ने अमरता के वरदान की इच्छा की पर ब्रह्मदेव ने यह कहते हुए उसे वरदान देने से साफ़ मना किया की जो जन्मा है उसका मरण निश्चित है और यह विधी का विधान हैं.. महिषासुर ने कुछ समय सोचा और अपार शक्तिया, रूप बदलने की क्षमता , प्रचंड सेना, अस्त्र-शास्त्र प्रकट करना और कोई भी पुरुष देव, दानव, मानव, राक्षस उससे मार न सके ऐसा वरदान माँगा.. ब्रह्मदेव उससे ये वरदान देकर चले गए..👇👇👇
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🇮🇳Jitendra pratap singh🇮🇳
क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर यह सेकुलर जगत ये INDI अडानी से इतनी नफरत क्यों करता है ?? इसका कारण बहुत जोरदार है भारत में उद्योगपतियों की एक संस्था है जिसका नाम है कनफेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री यानी सीआईआई गुजरात दंगों के 2 साल के बाद जब देश में कांग्रेस सत्ता में थी तब दिल्ली में इस सीआईआई की बैठक हुई कनफेडरेशन आफ इंडियन इंडस्ट्री ने जब अपना संविधान बनाया था तब उस संविधान में स्पष्ट लिखा है कि यह संस्था सिर्फ भारत के उद्योग जगत के लिए काम करेगी इस संस्था के मंच पर कोई भी राजनीतिक गतिविधि नहीं होगी और कोई भी ऐसी गतिविधि नहीं होगी जो भारत के उद्योग जगत से अलग हो और जब से यह संस्था बनी तब से इस संस्था के मंच पर सिर्फ भारत के उद्योग जगत के समस्याएं चुनौतियां इत्यादि के बारे में चर्चा ही होती थी ... यह संस्था भारत के उद्योग जगत के फायदे के लिए अपनी एक मांग बनाकर सरकार के सामने रखती थी फिर एक अमित मित्रा नामक व्यक्ति इस संस्था का चेयरमैन बना जो आज ममता बनर्जी की सरकार में बंगाल का वित्त मंत्री है उसके बाद जो भी संस्था की बैठक दिल्ली में हुई तब ऐसा लगा कि जैसे यह संस्था भारत के उद्योग जगत के लिए ना होकर भारत के सेकुलर और किसी राजनीतिक पार्टी का मंच है उस बैठक में हिंदुओं पर खूब जहर उगले गए गुजरात दंगों पर खूब चर्चा हुई.... सबसे पहले तत्कालीन चेयरमैन अमित मित्रा ने गुजरात पर जहर उगला मोदी पर जहर मिला पूरे गुजराती समाज पर जहर उगला.... फिर थर्मैक्स की चेयरमैन अनु आगा ने जहर उगला उसके बाद राहुल बजाज ने जहर उगला .. इस मीटिंग में से 12 लोग उठ कर चले गए उसमें कैडिला के चेयरमैन निरमा के चेयरमैन और गौतम अडानी, रिलायंस के प्रतिनिधि रिलायंस के ग्रुप प्रेसिडेंट परिमल नाथवानी, टाटा समूह के प्रतिनिधि सहित गुजरात के कई उद्योगपति थे सीआईआई की इस विवादास्पद बैठक के बाद 2 घटनाएं हुई पहली घटना यह हुई मनमोहन सिंह सरकार ने यानी कांग्रेस ने सोनिया गांधी के इशारे पर तुरंत ही राहुल बजाज और अनु आगा को राज्यसभा में भेज दिया यानी उन्हें भौकने का इनाम दे दिया गया अमित मित्रा बाद में अपनी उद्योगपति की केचुली उतारकर ममता बनर्जी की पार्टी के नेता बन गए और पिछले 10 सालों से बंगाल के वित्त मंत्री बने हैं और दूसरी दो प्रमुख घटना हुई कि गुजरात के तमाम उद्योगपति अहमदाबाद वापस लौट कर एक बड़ी बैठक की और अपना खुद का एक संस्था बना लिया जिसका नाम है सीआईआई गुजरात टाटा समूह भी सीआईआई गुजरात से जुड़ गया अंबानी समूह में सीआईआई गुजरात से जुड़ गया उसके बाद सीआईआई को बहुत बड़ा झटका लगा और सीआईआई गुजरात को बनाने में सबसे बड़ी भूमिका अडानी ने निभाई अदानी ने सीआईआई गुजरात की बैठक में कहा था कि जब हमारी सीआईआई संस्था के संविधान में लिखा है कि हम किसी भी राजनीतिक मुद्दों पर बात नहीं करेंगे तब सीआईआई को एक राजनीतिक मंच क्यों बनाया गया इसलिए अब हमें गुजरात के उद्योगपतियों को अपना खुद का संगठन बनाना चाहिए क्योंकि सीआईआई ने गुजरात को बदनाम किया है ... भारत में पहले भी भीषण दंगे हुए हैं लेकिन कभी भी सीआईआई ने अपने मंच पर उस प्रदेश को या उस प्रदेश के मुख्यमंत्री को या उस पूरे प्रदेश के लोगों को बदनाम नहीं किया है उसके बाद सीआईआई संस्था को भी एक स्टेटमेंट जारी करने पर मजबूर होना पड़ा कि हमारे मंच से कुछ उद्योगपतियों द्वारा जो कहा गया है हम उसे सहमत नहीं है बस इसी घटना के बाद गौतम अडानी सोनिया गांधी के निशाने पर हैं सेकुलर सूअरों के निशाने पर हैं और विदेशी मीडिया के निशाने पर हैं
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Shaurya Mishra
Shaurya Mishra@shauryabjym·
वियतनाम विश्व का एक छोटा सा देश है जिसने अमेरिका जैसे बड़े बलशाली देश को झुका दिया। लगभग बीस वर्षों तक चले युद्ध में अमेरिका पराजित हुआ। अमेरिका पर विजय के बाद वियतनाम के राष्ट्राध्यक्ष से एक पत्रकार ने एक सवाल पूछा... 👇👇
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Ayodhya Darshan
Ayodhya Darshan@ShriAyodhya_·
!! बालकृष्ण और शिव मिलन !! जब भगवान श्रीकृष्ण जी का जन्म हुआ, तब उस समय भोले बाबा समाधि में थे। जब वह समाधि से जागृत हुए तब उन्हें मालूम हुआ कि भगवान श्रीकृष्ण ब्रज में बालरूप में प्राकट्य हो गया है, इससे बाबा भोलेनाथ ने बालकृष्ण के दर्शन के लिए विचार किये। भगवान शिवजी ने जोगी (साधु) का स्वाँग सजा और अपने दो गण श्रृंगी व भृंगी को भी अपना शिष्य बनाकर साथ चल दिए।
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Shaurya Mishra
Shaurya Mishra@shauryabjym·
हिन्दू धर्म में वास्तु शास्त्र को बहुत अधिक अहमियत दी जाती है। कहते हैं कि जिस घर का वास्तु ठीक रहता है वहाँ पॉजिटिव एनर्जी, सुख और पैसा आता है। वहीं जहाँ वास्तु दोष रहता है वहाँ नेगेटिव एनर्जी, दुख और गरीबी आती है। वास्‍तु शास्‍त्र (Vastu Shastra) में पशु-पक्षियों, कीड़े-मकोड़ों के घर में प्रवेश करने को लेकर भी शुभ-अशुभ बातें बताई गई हैं। घरों में जीव-जन्तु या पशु-पक्षियों का आना आम बात है। आप ने भी देखा होगा कि कई बार घर में चिड़िया-कबूतर घोंसला बना लेते हैं। तो वहीं मधुमक्खियाँ भी अक्सर घर में अपना छत्ता बनाते रहती हैं। ऐसे में क्या आप ने कभी सोचा है कि इस घटना का आपके जीवन और घर पर क्या असर पड़ता है? चलिए जानते हैं। 👇👇
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Shaurya Mishra
Shaurya Mishra@shauryabjym·
ये सुंदर विश्लेषण जानकारी हिंदू समाज तक पहुंचना अनिवार्य है! हर वर्ग और समाज में वीरों की गाथाओं को बताकर उन्हें गर्व की अनुभूति करानी चाहिए! खोयी हुई, या गायब की हुई इतिहास की एक झलक* 622 ई से लेकर 634 ई तक मात्र 12 वर्ष में अरब के सभी मूर्तिपूजकों को मुहम्मद ने तलवार से जबरदस्ती मुसलमान बना दिया! (मक्का में महादेव काबळेश्वर (काबा) को छोड कर!) 634 ईस्वी से लेकर 651 तक, यानी मात्र 16 वर्ष में सभी पारसियों को तलवार की नोंक पर जबरदस्ती मुसलमान बना दिया! 640 में मिस्र में पहली बार इस्लाम ने पांव रखे, और देखते ही देखते मात्र 15 वर्ष में, 655 तक इजिप्ट के लगभग सभी लोग जबरदस्ती मुसलमान बना दिये गए! नार्थ अफ्रीकन देश जैसे अल्जीरिया, ट्यूनीशिया, मोरक्को आदि देशों को 640 से 711 ई तक पूर्ण रूप से इस्लाम धर्म में जबरदस्ती बदल दिया गया! 3 देशों का सम्पूर्ण सुख चैन जबरदस्ती छीन लेने में मुसलमानो ने मात्र 71 वर्ष लगाए! 👇👇👇
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Ayodhya Darshan
Ayodhya Darshan@ShriAyodhya_·
भगवान शंकर ने दक्ष को बकरे का सिर क्यों लगाया? 🔹दक्ष प्रजापति व सती की कथा🔹 स्वायम्भुव मनु की तीन पुत्रियाँ थीं – अकुति, देवहूति और प्रसूति। इनमें से प्रसूति का विवाह दक्ष नाम के प्रजापति से हुआ। दक्ष को 16 कन्याओं की प्राप्ति हुई। इनमें से एक थी ‘सती’ जिनका विवाह भगवान शिव के साथ हुआ था, उनको किसी संतान की प्राप्ति नहीं हुई, क्योंकि उन्होंने युवावस्था में ही अपने पिताजी के यहाँ देह का परित्याग कर दिया था।
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