Atul Kumar Rai

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Atul Kumar Rai

Atul Kumar Rai

@AuthorAtul

Novelist | Screenwriter | Lyricist | B.Mus. & MPA ( Music ) BHU | Yuva Sahitya Akademi Award winner for debut Hindi Novel चाँदपुर की चंदा |

Ballia - Mumbai Entrou em Mart 2012
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
@KaashiWaleBaba बहुत धन्यवाद. कुछ दिन में रचनात्मक दुनिया एकदम परफ़ेक्ट हो जाएगी. हर चीज सुंदरसुंदर. प्लास्टिक के सुंदर फूलो जैसी.. उन दिनों भी सुगन्ध की तलाश में लोग असली फूल खोजेंगे. जो कम सुंदर होगा लेकिन असली होगा. 😊
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काशीवासी
काशीवासी@KaashiWaleBaba·
@AuthorAtul Waah. Sab social media par hai aur chatgpt/ai tools se kahani aur kavita likhva le rahe hain atul babu. Emotions khatm ho rahe hain.
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
कहानियाँ हर जगह इंतज़ार कर रही हैं लिखे जाने का. कविताएँ बेचैन हैं कि कवि उन्हें देख नहीं पा रहे. ग़ज़ल ढल रही है बहर में,रदीफ़-क़ाफ़िया खोज रहे हैं कि शायर कहाँ गया..प्रिये, ठीक उन्हीं दिनों में हमारा प्रेम भी घट रहा है कहीं…धीरे-धीरे..! ❤️
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
@avanindra43 जो हर जगह है वही बलिया में भी हैं भैया.
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dr Avanindra Kumar Rai
dr Avanindra Kumar Rai@avanindra43·
बलिया में पत्रकारिता paid पत्रकारिता होती जा रही है । नेता अधिकारी के इर्दगिर्द ब्लॉगर उपज रहे और उनका महिमामंडन करके रील बना रहे । ये रील रियल पत्रकारिता के बिल्कुल उलट बह रही ,view और लाइक के चक्कर में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ सबसे जर्जर हो गया है । अजीब हाल है।
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
सबसे उच्च शिक्षित नेताओ को मंत्रिमंडल में शामिल करने वाले बालेन शाह के गृह मंत्री साहब को भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफ़ा देना पड़ा है. बात यही है कि क्रांति भाषणों से आती तो ये देश जेपी के संपूर्ण क्रांति के समय ही सबसे विकसित और सभ्य देश बन गया होता लेकिन अफ़सोस ऐसा नहीं होता.
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Avinash
Avinash@Nomade_quest·
@AuthorAtul भाई क्या रुका जाए , पड़ोस में बड़े जमींदार के प्रपौत्र, बूटलेगर साहब हैं, कई बच्चे जो हमारे आँखो देखे, पैदा हुए , जेल से बेल पर हैं .. अब बताओ, समर वेकेशन मनाना सही है 😁
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
आज हर गाँव में ऐसे पचास घर मिल जाएँगे, जहाँ अब कोई नहीं आता. दशकों पहले लगा ताला भी जंग खाकर टूट चुका है. ऐसा नहीं है कि लोग आ नहीं सकते. बात ये है कि लोग अब गांव आने को जरूरी नहीं समझते.
Mansi Shukla@the_mansi_shukl

went to my hometown this year and this was the condition of my home jiska taala aaj 12 saal se nahi khula, Parents always say stay connected to your roots but they never came back to check on theirs. Ek ghar tha jo sabka tha par aaj kisi ka bhi nahi.

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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
@shub8290279364 ज़रूर शुभम जी पढ़कर बताइयेगा.
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shubham
shubham@shub8290279364·
@AuthorAtul बहुत ज्यादा नाम सुना है ओर मुझे चांदपुर की चंदा आज ही डिलीवर हुई है पढ़ने के बाद अपने अनुभव जरूर शेयर करूंगा 🙌 @AuthorAtul
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Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
आज दिल्ली के होटल ली मेरेडियन में दैनिक जागरण द्वारा आयोजित कार्यक्रम में माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी और प्रिय लेखक प्रसून जोशी जी द्वारा साहित्य का नवांकुर सम्मान दिया गया। ये सम्मान मेरा नहीं बल्कि चाँदपुर की चंदा के समस्त पाठकों का सम्मान है। आप सबकी शुभकामनाएं बनीं रहें 🙏
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
किसी जमाने में ये प्लेटफार्म लिखने-पढ़ने और देश दुनिया के बारे में जानने के लिए एक बेहतरीन जगह हुआ करता था. लेकिन आज मोनेटाइजेशन आने के बाद हर आदमी विचार से ज़्यादा इंप्रेशन के चक्कर में पड़ा है. जिसके पास इम्प्रेशन है, वो इंगेजमेंट के लिए परेशान हैं. जो इंगेजमेंट पा गए हैं वो पेड पोस्ट ठेल रहे हैं. एलन मास्क बाबा की कृपा से आज यहाँ पेड पोस्ट ही अंतिम सत्य रह गया है. बाक़ी सब माया है.
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Neelesh Misra
Neelesh Misra@neeleshmisra·
@AuthorAtul कितना सुंदर लिखा है तुमने अतुल। मेरे जैसे ज़मीनी लोग जो महसूस करते हैं वो लिख दिया लेकिन हमसे कहीं बेहतर शब्दों में। धन्यवाद!
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
मुंबई आकर समझ आया कि घर में बड़ी खिड़की का होना भी आपके जीवन में लग्ज़री का होना है. आपके फ्लैट में हॉल का थोड़ा सा बड़ा हो जाना जीवन में प्रतिष्ठित हो जाना है. अगर सीलिंग दस फ़ीट से ज़्यादा है, तो बधाई हो…! आपका क़द दुनिया में ऊँचा हो चुका है। अगर घर में बालकनी है तो बस आप क़िला फ़तेह करने ही वाले हैं. और अगर आपकी खिड़की से एक किलोमीटर दूर भी समन्दर दिखता है, तो आपको क्या टेंशन है ? सो जाइए। आप तो सी फ़ेसिंग में रहते हैं महाराज, अगला घर वर्ली-बांद्रा में लेने की सोच रहे हैं या अलीबाग में बंगला बनवाएँगे? पिछले दिनों की बात है। एक ब्रोकर ने मेरे राइटर दोस्त को घर दिखाते हुआ कहा, “साहेब इस घर में धूप भी आती है…।” मैनें मजाक किया, “अकेले आती है कि ब्वायफ्रेंड के साथ ? ब्रोकर हँसने लगा… “मजाक नहीं सर, धूप आती है तभी वन बीएचके का किराया इकतीस हज़ार है और डिपाजिट डेढ़ लाख है.” घर लेने गया मेरा लेखक दोस्त, जो उस समय “सोनम की सुहागरात” नामक साइंस फ़िक्शन फ़िल्म एक नए प्रोड्यूसर को बेचने के बाद पनवेल में फ़ार्म हाउस बनवाने के सपने देख रहा था, उसने कहा, “भैया ये थोड़ा ज़्यादा ही बड़ा घर हो गया. साइज छोटा करिए न. शादी भी नहीं हुई हैं, रात को अकेले डर लगता है. “ मैं हँसने लगा… और दोस्त की भावना का अनुवाद किया. जिसका भावार्थ ये था कि भैया ये डार्क कहानी लिखने वाला राइटर है, इसको धूप से एलर्जी हैं. इसकी स्किन को म्हाडा वाले अंधकारमयी घर ही शूट करते हैं. पच्चीस हजार तक में दिखाइए.” बहरहाल. मजाक से इतर… पिछले एक साल से जब भी मुंबई से बलिया जाता हूँ, ये किस्सा याद आ जाता है। तीस पर मेरी माँ नीचे से चिल्लाती है, “दिन भर छतवा पर का करेला हो ?” अब माँ को कैसे समझाऊँ कि माँ तुम्हारे छत पर जो है. वो इस देश के करोड़ों लोगों को बड़े नसीब से मिलता है..थोड़ा छत पर खड़े हो लेने दो. निहार लेने दो इस चढ़ते चैत को. देखो न, सारे पंत, निराला मेरे सामने नाँच रहे हैं. किट्स और मिल्टन कविताएँ लिखने बैठे हैं. जरा सा रुको. क्या ये छपरा जाने वाली छह बजिया सिटी बजा रही है ? तब तो केदारनाथ सिंह मांझी के पुल पर बैठकर लिख रहे होंगे. “मेरी बस्ती के लोग सिर्फ़ इतना जानते हैं कि दुपहर की धूप में जब किसी के पास कोई काम नहीं होता तो पके हुए ज्वार के खेत की तरह लगता है माँझी का पुल” लेकिन जानता हूँ कि माँ नहीं देख सकती माँझी के पुल को, पके हुए ज्वार के खेत की तरह..सोचता हूँ कि ये सब कहने से भी क्या ही फ़ायदा. माँ को इसका महत्व कभी समझ नहीं आएगा. बहुतों को समझ नहीं आता. आदमी का स्वभाव ही अजीब है. जब तक किसी चीज का अभाव न हो आदमी उसके महत्व को स्वीकार नहीं कर पाता. लेकिन मुझे समझ आ गया है कि आज आपको साफ़ हवा, आसमान और खेत नसीब है, तो बधाई हो प्रभु…. आप एक लग्ज़री लाइफ़ जी रहे हैं. 😄 अतुल बलिया (तस्वीर अपने घर की छत से )
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Vishal Tiwari
Vishal Tiwari@vishaltiwarit·
@AuthorAtul @anshulchouhan @Prad_Rajput तो भाई मूवी आने दो न कोई व्यक्ति अगर उस महाकाव्य को विश्व स्तर पर रखना चाहता है तो सपोर्ट तो बनता ही है न अब उसमें कमियां निकाले लेकिन कुछ खूबियां की भी चर्चा होनी चाहिए रही बात एक्टर की तो हर एक्टर अपने रोल के लिए जी जान लगाता है वो चाहे पूर्व में गोविल जी रहे हो या अभी रणवीर
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
रामानंद सागर के पास कोई टेक्नॉलाजी नहीं थी लेकिन उन्हें राम के व्यक्तित्व की समझ थी. दृष्टिहीन रविन्द्र जैन देख नहीं सकते थे लेकिन उन्होंने अपने सुरों में राम को देख लिया था. आज के डायरेक्टर-प्रोड्यूसर हालीवुड और मार्वल यूनिवर्स की बराबरी के चक्कर में भूल जाते हैं कि राम का पूरा व्यक्तित्व सहजता का पर्याय है. उनको क्रुद्ध-व्याकुल और अधीर दिखाना उनके व्यक्तित्व के साथ अन्याय करना है. रामायण के सबसे बड़े विलेन रावण के चरित्र तक में मर्यादा है. रामायण की पूरी कहानी ही मर्यादा में रहने की कहानी है. यही कारण है कि बड़े-बड़े वीएफएक्स और सीजेआई से बने रामायण दर्शकों को असहज कर देते हैं. अब तक बने तमाम रामायण और आज का टीजर देखने के बाद यही समझ आता है कि एक बार देख तो लेंगे लेकिन दिल से कहें तो अपनी पुरानी रामायण ही ठीक है. 🙏 #रामायण
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
@premchopraji अरे भाई, मेरे कहने का आशय है कि फिल्मी विलेन तो नहीं ही था एकदम डार्क. जैसा बालीवुड के लोग समझते हैं.
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Prem Chopra
Prem Chopra@premchopraji·
@AuthorAtul रावण के चरित्र में मर्यादा? कौन सी रामायण पढ़ ली अतुल भाई?
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
@vishaltiwarit @anshulchouhan @Prad_Rajput भाई मेरे कहने का आशय रावण को महान बताना नहीं है, मेरे कहने का मतलब है कि सबसे बुरे आदमी में भी तमाम अछाइयाँ थी, वो एकदम से फ़िल्मों की तरह डार्क विलेन नहीं था .
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Vishal Tiwari
Vishal Tiwari@vishaltiwarit·
@AuthorAtul @anshulchouhan @Prad_Rajput मर्यादा का धनी रावण होता तो स्त्री हरण नहीं करता मर्यादा का धनी रावण होता तो पराई स्त्री पर नज़र न डालता मर्यादा का धनी रावण होता तो अपनी पत्नी के कहने मात्र से सीता जी राम जी के पास छोड़ आता
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
@vishaltiwarit Haa वाल्मीकि के राम ज्यादा मनुष्य हैं, उन्हें क्रोध भी आता है. लेकिन लोक की स्मृति में तुलसी के राम बसे हैं. रामानंद सागर ने सारे रामायण से संदर्भ लिया लेकिन राम का व्यक्तित्व वही रखा जो तुलसी ने लिखा है.
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Vishal Tiwari
Vishal Tiwari@vishaltiwarit·
@AuthorAtul आप रामायण और रामचरितमानस दोनों पढ़ो दोनों में भगवान् श्री राम को क्रुद्ध और व्याकुल दोनों व्यक्तित्व के साथ लिखा गया है।
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
जीवन में कुछ शुभ हो तो हम कृतज्ञता के साथ उन्हें ही याद करते हैं. कुछ बिगड़ने लगे तो लगता है बन ही जाएगा. कुछ सच में बिगड़ जाए तो ये भी लगता है कि जाने दो, शायद इससे ज़्यादा अच्छा होने वाला होगा. पिछले दिनों पीसीएस क्वालीफाई करने के बाद हनुमान जी के सामने फफककर रो रहे प्रयागराज के आनंद राज सिंह को मैनें देखा, तो ये समझ आया कि हनुमान जी के प्रति आस्था लाखों-करोड़ों लोगों के लिए तब रोशनी का काम करती है, जब उनके जीवन में दूर-दूर तक अंधेरा ही अंधेरा फैला होता है.. ये अंधेरा एक दिन छँटता है और हमारे हाथ उनके सामने श्रद्धा से जुड़ जाते हैं. बिश्वास की इसी डोर श्री हनुमान जी महाराज के जन्मदिन पर सादर वंदन 🙏
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
@Lovi3039 जन्मदिन की शुभकामनाएँ 🎉
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Sachin Pandey Lovi
Sachin Pandey Lovi@Lovi3039·
जन्मदिन के अवसर पर माँ विंध्यवासिनी जी के दिव्य दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। माँ की असीम कृपा और आशीर्वाद से मन अत्यंत प्रसन्न है 😍 आप सभी के स्नेह, आशीर्वाद एवं शुभकामनाओं का आकांक्षी हूँ। 🙏 जय माँ विंध्यवासिनी! 🚩
Sachin Pandey Lovi tweet mediaSachin Pandey Lovi tweet media
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
महाराष्ट्र के ज्योतिषाचार्य निसंदेह अपराधी हैं लेकिन उनके साथ वीडियो में दिख रही महिलाएँ कौन सी मासूम और अनपढ़ थी । सब संभ्रांत, पढ़ी-लिखी लग रही हैं। जाहिर है उनसे न पूछताछ होगी और न ही केस-मुक़दमा होगा। लेकिन सच तो ये है कि ऐसे ज्योतिषियों का मन बढ़ाने में इन महिलाओं का ही बड़ा योगदान है और ये बराबर की अपराधी हैं।
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Atul Kumar Rai
Atul Kumar Rai@AuthorAtul·
प्यार में महबूबा का सिलेंडर भरवा रहे दीवाने कौन सा विश्वयुद्ध लड़ रहे हैं, ये नेतन्याहू और ट्रम्प कभी नहीं बता सकते। स्टेट् ऑफ़ हॉर्मुज खुले या न खुले इन आशिकों की क़िस्मत खुल चुकी है। प्यार का कोई रंग,रूप गैस होता है कि नहीं ये तो साइंसदान ही समझे लेकिन गाँव के टिलुआ ने बताया है कि उसकी मम्मी ने आज पहली बार कहा कि ए बाबू तुम अच्छे लड़के हो जी 😌
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Abhi Pathak
Abhi Pathak@abhipathak5055·
एक गांव एक प्रेम और गांव की समस्या और लड़कियों की स्थिति और समाज में दहेज़ रूपी एक बीमारी का एक ऐसा उदाहरण एक लेखक किस हद तक सोच सकता है वो आपको ये किताब "चांदपुर की चंदा" पढ़कर समझ आयेगा जब भी आपको थोड़ा सा भी समय मिले तो आप जरूर पढ़े, एक अद्भुत किताब।। @AuthorAtul
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