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Bihar. Entrou em Ocak 2023
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THE freelancer.@FinalDeskX·
मैं पिछले कुछ समय से अपनी posting style को लेकर एक चीज़ पर लगातार सोच रहा हूँ। क्या सच में दिनभर बहुत सारी posts करना ज़रूरी है, या कम posts करके उन्हें ज़्यादा समय देना बेहतर है? जितना मैंने देखा और समझा, उतना मुझे लगा कि दिनभर timeline भरने से ज़्यादा अच्छा है एक ऐसी post करना जिस पर पूरा ध्यान दिया जा सके। मेरे हिसाब से एक post ही काफ़ी होनी चाहिए। बहुत ज़रूरी हो तो दो या ज़्यादा से ज़्यादा तीन। उससे आगे जाने का कोई विशेष कारण नहीं दिखता। जहाँ एक दिन में दस posts होती हैं, वहाँ अक्सर ध्यान भी दस हिस्सों में बँट जाता है। कोई भी post उतना समय नहीं ले पाती जितना उसे मिलना चाहिए। लेकिन अगर पूरा focus सिर्फ एक post पर हो, तो लोग भी उसी पर ज़्यादा समय देते हैं। जितने लोगों से आप दिनभर जुड़ते हैं, जितनों की बातें पढ़ते हैं और उनसे बातचीत करते हैं, उतनी ही संभावना बढ़ती है कि वही लोग आपकी उस एक post तक भी पहुँचें। ऐसे में कई बार एक अच्छी post वही काम कर जाती है, जिसके लिए लोग दिनभर कई posts करते रहते हैं। बाकी पूरा समय नई posts डालने में नहीं, platform पर मौजूद रहने में लगना चाहिए। लोग क्या लिख रहे हैं, क्या सोच रहे हैं, कहाँ अच्छी discussions चल रही हैं, कहाँ कुछ सीखने को मिल रहा है-उसका हिस्सा बनना ज़्यादा ज़रूरी लगता है। अगर किसी दिन सिर्फ एक post लिखी जाए, तो उसी पर अपनी पूरी सोच, पूरी तैयारी और पूरा समय लगाया जा सकता है। इससे जल्दबाज़ी भी कम होती है और हर post की अपनी एक पहचान बनती है। बाकी posting time को लेकर भी एक तय routine होना चाहिए या नहीं, इस पर अभी भी सोच रहा हूँ। आप बताइए... अगर चुनना पड़े, तो 10 या 1 post.
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Majid Khan
Majid Khan@Arham1436·
अपने गांव में कीचड़ है.सड़क नहीं है।एम्बुलेंस नहीं आती।तो मरीज चारपाई पर जाता है। और हम? हम सेशेल्स को 6 एम्बुलेंस गिफ्ट कर रहे हैं। वाह रे विकास! 👏 पहले पड़ोसी का घर रोशन करो.फिर मोहल्ले में दिया जलाना।
Majid Khan@Arham1436

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा,अमरवाड़ा में एक मां ने बच्चे को जन्म दिया लेकिन अस्पताल में नहीं। नदी पार करते वक्त। खटिया पर। पुल नहीं था। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई। गांववालों ने हार नहीं मानी। अपनी जान जोखिम में डालकर मां-बेटे को बचाया। नदी पार कराई। बाइक से अस्पताल पहुंचाया। आज मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं। लेकिन सवाल ये है 2026 में भी किसी गर्भवती को नदी पार करके अस्पताल जाना पड़े ये नॉर्मल है क्या? ये किसी एक पार्टी, एक नेता, एक सरकार की बात नहीं है। ये 78 साल की आजादी के बाद भी गांवों तक बुनियादी सुविधा न पहुंचने की बात है। सड़क, पुल, एंबुलेंस ये लग्जरी नहीं हैं। ये जरूरत हैं। ये हक हैं।उस मां की हिम्मत को सलाम। उन गांववालों की इंसानियत को सलाम। और सिस्टम से एक निवेदन ऐसे हालात दोबारा किसी मां के नसीब में न आएं। क्योंकि विकास का मतलब बड़ी-बड़ी बिल्डिंग नहीं, विकास' का मतलब है कि आखिरी गांव की आखिरी मां तक अस्पताल की पहुंच हो। क्या हम सब मिलकर इतना तो मांग सकते हैं?

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निर्मोही
निर्मोही@up_ka_l_adka·
क्या आपने कभी गौर किया है कि आज की दुनिया में जब हमें Goosebumps आते हैं, तो हम उसे सिर्फ एक एहसास मानकर आगे बढ़ जाते हैं ? 🤔 हमें लगता है कि कोई गाना दिल को छू गया, कोई सीन बहुत जबरदस्त था या किसी बात ने अंदर तक झकझोर दिया। लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा गहरा है। Goosebumps दरअसल हमारी Evolution की वो याद हैं, जो आज भी हमारे साथ चल रही है। एक समय था जब इंसानों के शरीर पर घने बाल हुआ करते थे। जब ठंड लगती थी, तो शरीर की छोटी-छोटी मांसपेशियां सिकुड़ जाती थीं और बाल खड़े हो जाते थे। इससे उनके बीच हवा की एक परत बनती थी, जो शरीर की गर्मी को बाहर जाने से रोकती थी। उस दौर में Goosebumps किसी Natural Heater की तरह काम करते थे और ठंड से बचाने में मदद करते थे। लेकिन यह सिर्फ ठंड तक सीमित नहीं था। जब कोई खतरा महसूस होता था, तो यही रिएक्शन शरीर को बड़ा और ज्यादा खतरनाक दिखाने में मदद करता था। खड़े हुए बाल दुश्मन को यह आभास देते थे कि सामने वाला उससे ज्यादा ताकतवर है। आज भी कई जानवरों में यह प्रतिक्रिया साफ दिखाई देती है। समय के साथ इंसान बदल गया। शरीर पर बाल कम हो गए और Goosebumps का वह असली उपयोग लगभग खत्म हो गया। लेकिन प्रकृति अपने बनाए सिस्टम को इतनी जल्दी मिटाती नहीं है। इसलिए यह प्रतिक्रिया आज भी हमारे अंदर मौजूद है, बस उसका रूप बदल गया है। अब Goosebumps तब आते हैं जब हम कुछ गहराई से महसूस करते हैं। कोई देशभक्ति गीत, कोई भावुक कहानी या कोई ऐसा पल जो दिल और दिमाग दोनों को एक साथ छू जाए तब हमारे अंदर वही पुराना सिस्टम फिर से सक्रिय हो जाता है। फर्क बस इतना है कि पहले यह हमें जिंदा रखने के लिए काम करता था, और आज यह हमें यह एहसास दिलाता है कि हम अब भी महसूस कर सकते हैं। इसलिए अगली बार जब आपके शरीर पर Goosebumps आएं, तो उसे सिर्फ एक छोटी सी प्रतिक्रिया मत समझिए। यह आपके अंदर मौजूद उस प्राचीन दुनिया की एक झलक है, जो आज भी आपको यह याद दिलाती है कि हम कितने भी आधुनिक क्यों न हो जाएं, हमारी जड़ें अब भी उसी पुराने समय से जुड़ी हुई हैं।
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Ashish Basera
Ashish Basera@basera_ashish·
मेरे चाचा के पास ₹50 लाख थे। आस-पड़ोस और रिश्तेदारों की फौज ने उन्हें तुरंत एक चमचमाती फॉर्च्यूनर खरीदने की सलाह दे डाली। आखिर रौब भी तो झाड़ना था! लेकिन चाचा के दिमाग में कुछ और ही गेम प्लान चल रहा था। उन्होंने दिखावे के बजाय कमाई को चुना और उन पैसों से 20 ई-रिक्शा (E-Rickshaws) खरीद लिए। गणित कुछ ऐसा था: एक ई-रिक्शा की कीमत: ~ ₹2.5 लाख कुल खरीदे गए रिक्शा: 20 कुल निवेश (Investment): ₹50 लाख कमाई का मीटर:
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Who_Care
Who_Care@yadav_sunny84·
क्या सोनम वांगचुक जी के इस भूख हड़ताल और विरोध प्रदर्शन को अन्ना हजारे जैसा नहीं बनाया जा सकता? 2014 में कांग्रेस को सत्ता से हटाने में अन्ना हजारे के आंदोलन की बहुत बड़ी भूमिका थी। जिस तरह आज देश के करोड़ों छात्र पेपर लीक, बेरोज़गारी और भर्ती में देरी जैसे मुद्दों से जूझ रहे हैं,  ठीक उसी तरह 2011 में भी लोग हर विभाग में फैले भ्रष्टाचार से परेशान थे। अन्ना हजारे ने उसी मुद्दे को लेकर ऐसा जनआंदोलन खड़ा किया, जिसने 2014 तक भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलकर रख दी। तो क्या आज भी ऐसा संभव नहीं है कि सभी विपक्षी दल एक साथ आएँ,  इस आंदोलन का समर्थन करें और इसे एक बड़े जनआंदोलन का रूप दें? क्या ऐसा आंदोलन 2029 की राजनीति की तस्वीर नहीं बदल सकता? आप लोगों का इस विषय पर क्या विचार है?
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कल्याण
कल्याण@rajkalyan24·
आज कोई कैप्शन नहीं दूंगा आप खुद देखो और कमेंट में बताओ क्या कैप्शन होना चाहिए 🤣🤣🤣🤣
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Arun Chaudhary🇮🇳
Arun Chaudhary🇮🇳@iarunchaudhary·
पति रोटी खाये 3 या चार 🫓 उतने आटे में ही बनके तैयार 🤣 इसे कहते समझदार पत्नी 🫡👇🏻
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YODDHA
YODDHA@ChoudharyAarv·
बेटा : पापा मुझे NEET , IIT , UPSC , नहीं होगा ! देवकीनन्दन ठाकुर : बेटा ये सब छोड़ इन सब में कुछ नहीं रखा , तू मेरी गद्दी पर बैठ UPSC , IIT , NEET वाले तेरी सेवा मे रहेंगे ! बेटा , लेकिन पापा मुझे तो ये शब आता जाता नहीं है ! देवकीनन्दन ठाकुर : कोई बात नहीं बेटा बस तुमको हिंदू राष्ट्र , गाय , गोबर , गोमूत्र , मुस्लिम हिंदू करते रहना हे बाकी सब मेरे अंधभक्त संभाल लेंगे ! बेटा : ठीक है पापा
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Devyani Chauhan
Devyani Chauhan@ChauhanDevyani7·
अब तेरा क्या होगा कालिया...!!!🙂 Dogesh भाई बोल पाते...तो पहला सेंटेंस क्या बोलते इस सिचुएशन में????🤭
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Samiya_Haq ✨
Samiya_Haq ✨@Samiya_Haq·
मोहम्मद जुनैद से मिलने के लिए इस हिंदू महिला ने 180km का सफर तय किया... जंतर मंतर में चल रहे आंदोलन में लगातार लोगो की मदद कर रहे मोहम्मद जुनैद अब लोगो के दिल में जगह बना रहे है, सहारनपुर की एक हिंदू महिला सुनीता अरोड़ा कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में मुस्लिम भाई मोहम्मद जुनैद की वजह से 180 किलोमीटर का सफर करके जंतर मंतर पहुंची, सिर्फ मोहम्मद जुनैद से मिलने के लिए, मिलते ही सुनीता ने मोहम्मद जुनैद को अपना बेटा कहा और उनके इस कार्य की सराहना की, उनकी हिम्मत अफजाही की, और भावुक हो कर रोने लगे, जिसे देख कर मोहम्मद जुनैद की आंखे भी नम हुई, सुनीता ने मोहम्मद जुनैद से कहा के तुमने हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल कायम की है, ऐसे ही नेक काम करते रहना...
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Vivek
Vivek@MurmuringInk·
अभी जुगनुओं के साथ चल रहा हूँ, मगर सूरज से मुलाक़ात बाक़ी है। ये रात मेरी मंज़िल नहीं है दोस्त, मेरे हिस्से की सुबह की शुरुआत बाक़ी है।
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Pooja sharma
Pooja sharma@Poojakumar89308·
कुछ X क्रिएटर ai chat gpt se उत्तर बनावा कर रिप्लाई करते हैं पोस्ट पर और वो लोग किसी पोस्ट को रिपोस्ट भी नहीं करते है सिर्फ 3 सेकेंड में like और कमेंट कर देते हैं मतलब वो लोग आपकी पोस्ट पर सिर्फ 3 सेकेंड रुके हैं और इन 3 सेकेंड रुकने का कोई फायदा नहीं होता है जिसने पोस्ट की उसे और उल्टा पोस्ट पर नेगेटिव असर पड़ता है पोस्ट दब जाती है X को खराब सिग्नल जाता है कि पोस्ट में कुछ नहीं है जो लोग पोस्ट पर टाइम नहीं बिता रहे हैं किसी भी पोस्ट को वायरल होने के लिए उस पोस्ट पर लोगो को रुकना जरूरी होता है ज्यादा नहीं तो कम से कम 15 सेकेंड आप उस पोस्ट को दो जिस पोस्ट पर आप जा रहे हो और खुद से लिखो उत्तर चाहे कमेंट छोटा ही लिखो पर खुद से लिखो किसी को सपोर्ट कर रहे हो तो दिल से करो नहीं तो बिल्कुल मत करो। अगर आपकी भी पोस्ट पर कोई chat gpt से उत्तर बनवा के रिप्लाई कर रहा है तो उसे भी मना करे और समझाये अगर मान जाए ठीक है नहीं तो जैसा चल रहा है चलने दे किसी से जबरजस्ती तो कर नहीं सकते हैं पर में कभी भी किसी भी पोस्ट पर कमेंट करने के लिए AI chat gpt का प्रयोग नहीं करूंगी पहले करती थी जब मुझे कमेंट नहीं करना आता था और दिन में 500 कमेंट करनी होती थी पर अब नहीं करती बहुत दिनों से
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Naadish
Naadish@naveenanand143·
Same brand. Same ghee. Same weight. Just different packaging. The pouch costs ₹470. The plastic bottle costs ₹475. A plastic bottle is generally considered more expensive to manufacture than a pouch. So why is the price difference only ₹5? Is it because the pouch also has high-quality printing, lamination, and sealing, making its total packaging cost almost similar? Or is there a different strategy at play such as pricing, marketing, or consumer psychology? If you know please comment ,I'd love to hear the real reason behind this.
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Jamil Ansari
Jamil Ansari@jamil2832·
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कहते हैं भारतीय जनता पार्टी की सरकार में बेटी बहनों की सुरक्षा की गारंटी है। उत्तर प्रदेश में ही देख लो गुंडे थर थर कांपते हैं लेकिन योगी आदित्यनाथ जी ध्यान से देख लो बदांयू में एक ग़रीब घर की लड़की जो मिल से मजदूरी का काम कर घर वापस आ रही थी। जिनका उम्र सिर्फ 13 साल बताया जा रहा है दरिंदो ने पहले जाती पूछा फ़िर घसीट कर मक्के की खेत में ले गया और दुष्कर्म किया। देश में बेटी बहन कितनी सुरक्षित है सब जानते हैं
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THE freelancer.
THE freelancer.@FinalDeskX·
@Kpgour72 सच कह रहा हूं अगर इस व्यक्ति के बारे में मैं तीन-चार लाइन बोल दूं ना तो विवाद हो जाएगा भाई साहब
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Kamlesh
Kamlesh@Kpgour72·
कुछ लोग कहते थे मंदिर नहीं बनेगा, लेकिन बन गया..!! मोहन भागवत.... भक्त कहते थे मंदिर में चोरी नहीं होगा, लेकिन हो गया..!! अन्धभक्तो के पापा...
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Ravindra Upadhyay
Ravindra Upadhyay@Ravindrau07·
शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन में दुर्गेश कुमार नाम का एक फर्जी टीटी टिकटों की जांच कर रहा था। वह बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों से पैसे वसूल रहा था। अब सवाल यह है कि यात्रियों को कैसे पता चले कि कौन असली है और कौन नकली? इसी बीच ट्रेन अलीगढ़ स्टेशन पहुंची और दुर्गेश कोच C-11 में चढ़ गया। संयोग से उसी डिब्बे में असली टीटी भी मौजूद था। उसे देखते ही दुर्गेश के होश उड़ गए। असली टीटी ने तुरंत आरपीएफ को बुलाया। कड़ी पूछताछ के दौरान फर्जी टीटी को पकड़ लिया गया। उसके पास से एक पहचान पत्र भी बरामद किया गया। आप ट्रेन में असली और नकली टीटी की पहचान कैसे करेंगे? अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए। 📍 कानपुर, उत्तर प्रदेश
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Sidd
Sidd@SirAbdullahSidd·
बताओ बेचारे के साथ कांड हो गया। मोहर्रम के जुलूस में एक आदमी को निशानी के तौर पर “यज़ीद” बनाकर जुलूस में शामिल किया गया। बाकी सब लोग यज़ीद समझकर उसे मार रहे थे। अगले चौराहे पर कुछ हुसैनियों ने यज़ीद को डंडों से खूब पीट दिया, जिससे वह बेहोश हो गया। 😃 जब यज़ीद को होश आया तो उसने कहा: “मेरी दिहाड़ी मुझे दो, और अगले साल अपने यज़ीद का इंतज़ाम खुद कर लेना। मुझे नहीं बनना यज़ीद-वज़ीद!” 😄
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Pooja sharma
Pooja sharma@Poojakumar89308·
4 X गुरुओं के स्पेस चल रहे हैं अब किस स्पेस में जाना चाहिए जो अच्छी और सटीक जानकारी देते हो अपने स्पेस में और जो पे आउट दिलवा सके X से
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Rebellious 2.0🕊️
Rebellious 2.0🕊️@RebelliousPari8·
वाह रे साहब ! वाह रे न्याय ! मिटिंग खत्म हुई कुछ बिस्किट के टुकड़े बचे! चपरासी ने सोचा यहां फेंकने से बेहतर है, बच्चों के लिए घर ले जाऊं! नतीजा..? अधिकारियों को सहन नहीं हुआ उन्हें यह भ्रष्टाचार का मामला लगा तो तुरंत नौकरी से निकाल दिया ! क्योंकि लाखों-करोड़ों का घोटाला, टेंडर में मलाई खाना, हेलीकॉप्टर से घूमना, 5-सितारा होटल में खाना ये सब देश सेवा में गिना जाता है! लेकिन एक गरीब चपरासी का बच्चा बचे हुए बिस्किट खा ले तो भ्रष्टाचार हुआ है! कोर्ट ने फटकार लगाकर नौकरी बहाल कर दी और बकाया तनख्वाह देने का आदेश दिया! माने अब.. जो जितना बड़ा चोर, उतना बड़ा सम्मान! जो जितना छोटा, उतनी बड़ी सजा! एक प्लेट में से बचे हुए बिस्किट ले गया जो कूड़े में फेंकने होते हैं तो सस्पेंड कर दिया गया! हजारों करोड़ डकार गए तो "सर" और "जनाब"..!!
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