
Subhash Rampal
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अकाल तख्त में आज पंजाब के सभी सिख विधायकों की पेशी हो रही है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी, विपक्षी कांग्रेस और अकाली दल के सिख विधायक अकाल तख्त पहुंचे हैं।
ऐसे ही ख्याल आया कि क्या ऐसा हो सकता है कि कृष्ण जन्मभूमि अयोध्या में यूपी के सभी हिन्दू विधायकों की पेशी हो और उन्हें कहा जाए कि दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान के लिए कार्य करें !

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एक बार अन्नामलाई रोए थे,
बाकी सब इतिहास बन गया।
जब योगी जी रोए थे,
वह भी 2027 में इतिहास रचेंगे।
आज नहीं तो कल।
पूरा भारत आपके साथ है। आपने 140 करोड़ लोगों का दिल जीत लिया है ♥️। 🙏🏽
@myogiadityanath
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जेल में बंद कैदी रोज़ रामायण पढ़ता था… एक दिन जेलर को पता चला कि उसने अपराध क्यों किया था।
1. सीतापुर जेल की बैरक नंबर 7
सीतापुर जिला जेल। ऊँची दीवारें, लोहे की सलाखें और सन्नाटा। बैरक नंबर 7 में 42 कैदी थे। उन्हीं में एक था कैदी नंबर 2911 — राघव शुक्ला। उम्र 38 साल, दुबला-पतला, दाढ़ी बढ़ी हुई, आँखें हमेशा नीचे।
राघव की पहचान थी रामायण। सुबह 4 बजे उठता, नहाकर जेल के मंदिर वाले कोने में बैठ जाता। फटी-पुरानी रामायण खोलता और पाठ करता। आवाज़ धीमी पर साफ। "मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सुदसरथ अजिर बिहारी।"
दूसरे कैदी हँसते। "पंडित, रामायण पढ़ने से सजा कम नहीं होगी। 20 साल काटने हैं तुझे।"
राघव जवाब नहीं देता। पाठ खत्म करके वो रामायण को माथे से लगाता और वापस बैरक में।
जेलर थे अविनाश सिंह। 50 साल के, कड़क अफसर। 25 साल की नौकरी में हर तरह के कैदी देखे थे। पर राघव अजीब था। न लड़ाई, न गाली, न भागने की कोशिश। बस रामायण।
2. अपराध क्या था?
राघव की फाइल में लिखा था — "धारा 302, हत्या। 2019 में लखनऊ के गोमतीनगर में बिल्डर विजय अग्रवाल की हत्या। पत्नी और 2 साल की बेटी के सामने गोली मारी। कोर्ट ने उम्रकैद दी।"
जेलर अविनाश को हैरानी होती। जो आदमी रामायण पढ़ता है, वो एक परिवार के सामने खून कैसे कर सकता है? उन्होंने पुराने सिपाही शिवराम से पूछा।
"साहब, ये आदमी कोर्ट में भी चुप था। वकील नहीं किया। खुद कहा — हाँ, मैंने मारा। बस।"
"क्यों मारा, ये नहीं बताया?"
"ना साहब। जज ने भी पूछा। बोला — वजह मत पूछिए। सजा दे दीजिए।"
अविनाश की उलझन बढ़ गई।
3. जेल में रामराज
राघव 3 साल से जेल में था। धीरे-धीरे उसने बैरक का माहौल बदल दिया। जो कैदी गाली देते थे, वो अब धीरे बोलते। रामायण के बाद राघव सबको एक चौपाई का मतलब समझाता।
"कर्म प्रधान विश्व रचि राखा, जो जस करहि सो तस फल चाखा।"
"मतलब, भाई, जो करोगे वही भरोगे। गाली दोगे तो गाली मिलेगी। प्रेम दोगे तो प्रेम।"
छोटू नाम का 19 साल का लड़का चोरी में आया था। राघव ने उसे अक्षर सिखाए। अब छोटू रामायण पढ़ लेता था।
जेल में लड़ाई हो जाती तो वार्डन बुलाते — "पंडित को बुलाओ।" राघव दो लाइन बोलता, और मारपीट रुक जाती।
जेलर अविनाश देखते रहते। सोचते, "अगर ये आदमी बाहर होता तो कितने घर बचा लेता। पर इसने एक घर उजाड़ दिया। क्यों?"
4. बेटी की चिट्ठी
2025 की मार्च। होली का दिन। जेल में कैदियों को घर से चिट्ठी मिलती है। राघव को कभी चिट्ठी नहीं आई थी।
पर उस दिन एक लिफाफा आया। भेजने वाली — "अनन्या अग्रवाल, क्लास 6, सेंट मैरी स्कूल, लखनऊ।"
जेलर चौंक गए। अग्रवाल... वही विजय अग्रवाल की बेटी?
नियम था, जेलर चिट्ठी पढ़कर देते हैं। अविनाश ने लिफाफा खोला।
*अंकल,
आप मुझे जानते नहीं। मैं अनन्या हूँ। पापा विजय अग्रवाल की बेटी।
मम्मा कहती हैं आपने मेरे पापा को मार दिया। पुलिस अंकल ने भी यही कहा।
पर मैं आपसे नफरत नहीं करती।
क्योंकि मम्मा रात को रोती हैं। वो कहती हैं, "तेरे पापा अच्छे आदमी नहीं थे।"
नानी कहती हैं, "राघव अंकल ने तेरी जिंदगी बचाई थी।"
मैं बहुत कन्फ्यूज हूँ।
आप सच बताओगे? आपने पापा को क्यों मारा?
आप रामायण पढ़ते हो न? राम जी तो किसी को नहीं मारते थे बिना वजह।
प्लीज जवाब देना।
अनन्या*
अविनाश का हाथ काँप गया। उन्होंने चिट्ठी राघव को दी।
राघव ने चिट्ठी पढ़ी। पहली बार उसकी आँखें भर आईं। उसने चिट्ठी को माथे से लगाया और जेलर से बोला, "साहब, क्या मैं इसे जवाब दे सकता हूँ?"
"हाँ। पर पहले मुझे बताओ, सच क्या है?"
राघव चुप रहा। फिर बोला, "साहब, कल सुंदरकांड का पाठ पूरा होगा। उसके बाद बताऊँगा। 7 साल से इस दिन का इंतज़ार कर रहा था।"
5. सुंदरकांड और खुलासा
अगली सुबह। जेल के मंदिर में सुंदरकांड। राघव ने पाठ किया। जेलर अविनाश भी बैठे।
पाठ खत्म हुआ। राघव जेलर के कमरे में आया। "साहब, बैठ जाऊँ?"
"हाँ राघव। अब बताओ।"
राघव ने लंबी साँस ली। "साहब, मैं लखनऊ में ड्राइवर था। विजय अग्रवाल के यहाँ। 8 साल काम किया। वो बिल्डर था, पर आदमी नहीं था।"
"मतलब?"
"साहब, विजय अग्रवाल की बीवी यानी मिसेज कविता बहुत शरीफ थीं। बेटी अनन्या तब 2 साल की थी। पर विजय शराब पीकर दोनों को मारता था। कई बार मैंने बीच-बचाव किया। नौकरी जाने का डर था, पर चुप नहीं रह पाया।"
"फिर एक दिन?"
"5 मार्च 2019। होली का दिन था। विजय नशे में था। कविता मैडम ने तलाक माँगा। विजय ने कहा — 'तलाक दे दूँगा, पर पहले तुझे और तेरी बेटी को जान से मारूँगा। इंश्योरेंस का पैसा मिलेगा।'"
राघव की आवाज भर्रा गई। "उसने पिस्तौल निकाली। मैडम डरकर कमरे में भागीं। अनन्या पालने में सो रही थी।
शेष कमेंट में...
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@dromsudhaa राजीव गांधी कंप्यूटर इसलिए लाये थे क्योंकि कांग्रेस के घोटालों का हिसाब कैलकुलेटर में करना संभव नही हो पा रहा था
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@JaikyYadav16 अमिताभ का अनेक फिल्मों में नाम "विजय" है
जोसफ का भी नाम विजय है
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सत्ता में सादगी सबसे बड़ी ताकत है
Activist Licypriya ने सवाल उठाया था कि लोग जानते हैं CM VIP हैं फिर भी अब तौलिया कल्चर क्यों?
CM को देखकर छोटे से बड़े अधिकारी अपनी कुर्सी पर तौलिया इस्तेमाल करते हैं जोकि VIP कल्चर को दर्शाता है।
तमिलनाडु के नए CM अभिनेता विजय ने Licypriya की एक छोटी सी अपील पर अपना चेयर वाला सफेद तौलिया हटा दिया।
ये बात मामूली सी है मगर संदेश काफ़ी बड़ा है।
एक्टिविस्ट ने उन्हें इसके लिए ग्रेट इंस्पिरेशन बताया।


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@PNRai1 माननीय जी यह निर्णय मूर्खता भरा होगा !
धर्म, देश, प्रदेश तथा भाजपा का हित इसी में है कि अन्नामलाई तामिलनाडु को ही समर्पित रहें, तामिलनाडु ही कर्मभूमि रहे, राज्यसभा इनके बिना भी चल रही है किन्तु इनके बिना राज्य चलना कठिन है, छल कपट रोकने तथा धर्मरक्षा हेतु राज्य ही कर्मभूमि रहे।
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रंजय त्रिपाठी जी की लेखनी
मैं अपने एक वामपंथी मित्र से मिलने जा रहा हूँ… रास्ते में जो हो रहा है वो देख कर अचंभित हूँ…
कलकत्ता के सड़कों पर एक अलग सा चहल पहल है... कुछ इलाके जो सदा से यातायात के कारण खचाखच भरे रहते थे उनमे 30-40% की कमी है....
मुझे समझ नहीं पा रहा हूँ की क्या कलकत्ता की जनसँख्या कम हो गई है ?
क्या कलकत्ता से लोग पलायन कर गए हैं ? या फिर घुसपैठियों की जनसंख्या में कमी हो गई है ?
कलकत्ता में लोगों ने आना बंद कर दिया है.... क्यों कलकत्ता में अजीब लग रहा है...
वर्ष में 4-5 बार कलकत्ता आकर हल्दिया, खड़गपुर, दुर्गापुर, आसनसोल आदि जाना हुआ करता है... इस बार कलकत्ता थोड़ा अलग क्यों लग रहा है......
इस मानसिक द्वंद में उलझकर चलते चलते आखिर में अपने कम्युनिस्ट मित्र के घर पहुँच गया और दरवाजा की सिटकनी खुलने से दरवाजा खुलने के बीच झरझरा के इन सारे प्रश्नों की झड़ी लगा दी.....
कम्युनिस्ट मित्र पहले मुझे घूरे, फिर कूल्हे उचकाते हुए बिस्तर के ओर बढे और पेट के बल लेट गए.... मैंने कहा लार सलाम मित्र, उत्तर दो मेरे प्रश्नों का..... मित्र ने कहा जानते सब हो लेकिन चिढ़ाने आ गए....
हमने कहा ये सही है मित्र हमें नहीं पता कि कलकत्ता आज इतना अलग सा क्यों है .. ट्रैफिक इतना लहराते हुए अलमस्त क्यों चल रहा है.......
मित्र बोले आज शुक्रवार है....
मैंने कहा उससे क्या हुआ ?
अब मित्र रुआंसे होते हुए बोले आज शुक्रवार है जीवन के 54 बसंत देख चुके, 40 याद है.. तो इन चालीस वर्षों में सदा से मैने राजा बाजार, मौलाअली, धर्मतल्ला, स्यालदाह, जकरियाबाजार या खिदरीपुर... सब जगह हमने 5 वक्त सड़क पर कब्जा देखा है,
मैंने कहा आज क्या हुआ ?
मित्र ने कहा यहाँ जो उप्र वाले बाबा को दण्डवत प्रणाम करने वाला नया CM आया है उसने शुक्रवार का कब्ज़ा बंद कर दिया है…
बंगाल पुलिस ने कहा सबको, जो भी करना है वो घर में या अपने अड्डे पे करो, बहादुर मजहबी नहीं माने तो पुलिस ने कुछ को दुःखहरण लट्ठ से सटासट दे दिया..... बस फिर क्या था सब जगह खाली और कलकत्ता का माहौल बदल गया....
मैंने पुछा उ तो ठीक है लेकिन तुमको क्या हुआ.... उसने बताया कि इस मामले में वो कब्जा गैंग की ओर से बतियाने गया था पुलिस से उनका हक़ दिलवाने को.... वही पुलिस जो हमें सलाम ठोंकती थी आज पकड़ के ले गई और उठा बैठक करवा दी....
हाथ में शरबत ए आजम का बोतल था जो हम कब्जाधरियों को प्रत्येक शुक्रवार पिलाते थे... उसको देख के एक पुलिसिया कॉन्स्टेबल बोला....
"इ मानुष भीसोन बोड़ो क्रन्तिकारी छीलो,
आमी नित्यो देखेछी...."
इंस्पेक्टर ने कांस्टेबल को आदेश दिया....
"क्रांतिकारिये पोदार एई शरबत ए आजम
बोतल दीए दीन..."
मित्रों मैं वापस घर आ गया हूँ.... कुछ दिन के लिए क्रन्तिकारी कम्युनिस्ट मित्र, बोतल और उसके कराहते "पोदार" को अकेले छोड़ देता हूँ.....
आशा है आपको बंगाली आती होगी!!

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@Gobhiji3 तुम्हें गलत बताया गया है, वो विजय नहीं है,,, जोसफ है,
I m granddad
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यह बात नहीं भूलना चाहिए कि
केंद्रीय पार्टी नेतृत्व के न चाहने के बाद भी 2012 से मोदी जी को दिल्ली लाने के लिए पूरे भारत में एक अभियान चलाया गया था। उसी का नतीजा था कि 2014 में मोदी देश के प्रधानमंत्री बन गए थे।
देश की एकता, अखंडता, राष्ट्रीयता के लिए तमिलनाडु और केरल में भी राष्ट्रवादी सरकार बननी चाहिए।
10 लाख भारतीयों का समर्थन चाहिए़।
Bring back K. Annamalai
Support K. Annamalai

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भोजशाला पर हिंदुओं के पक्ष में फैसला आ गया है, लेकिन इस मामले में "मुस्लिम मानसिकता" को भी समझना जरूरी है...
आपको ये जानकर आश्चर्य होगा कि 1937 से 1942 के बीच जब हिंदू और मुसलमानों के बीच विवाद हुआ... तब धार स्टेट के तात्कालीन राजा ने मुसलमानों को नमाज पढ़ने के लिए बख्तावर मार्ग पर मस्जिद के लिए स्थान दे दिया, जहां पर आज भी रहमत मस्जिद मौजूद है... राजा के द्वारा दी गई रहमत के कारण ही इसे रहमत मस्जिद का नाम दिया गया...
अब सोचिए भोजशाला के बदले में मुसलमानों को पहले ही मस्जिद मिल चुकी थी, लेकिन इसके बाद भी इन्होंने फिर से भोजशाला पर दावा ठोक दिया... और हिंदुओं को अपना मंदिर पाने के लिए कोर्ट में चप्पलें घिसवाईं...
#Bhojshala

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