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@khudTalks

जोहार 🙏🍁 writer, Lerner

Jharkhand, India Entrou em Mart 2019
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prahlad mandal@khudTalks·
फेक नेगेटिव मत फैलाओ !! E20 पर सवाल करने वाले को ये करारा मिलता था लेकिन अब खुद सुप्रीम कोर्ट के सवाल पर सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि " E 20 एक्सपेरिमेंट हैं,इसका फायदा नुकसान अगले साल पता लगेगा। मने ई कि आदमी अब एक्सपेरिमेंट जीव बन गया है कभी आर्थिक रूप से तों शारीरिक रूप से...
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Dr. Sheetal yadav
Dr. Sheetal yadav@Sheetal2242·
प्योर मैंगो जूस का आनन्द लीजिए— इसमें कोई फ़्लेवर ऐड नहीं है। बस आम का जूस कौन कौन इसे चखना चाहिए पहले सैंपल @fssaiindia को भेजा जाना चाहिए।
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prahlad mandal@khudTalks·
तस्वीर इंसान की सच्चाई को बता रहे हैं।
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prahlad mandal@khudTalks·
आज़ादी का इतिहास बताता है कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 ई. में हुआ था लेकिन इससे दो वर्ष पूर्व ही अपने हक़, अपनी अस्मिता की लड़ाई के लिए हुंकार भरी जा चुकी थी संथाल परगना के इलाके में, जिसे हुल दिवस या संथाल विद्रोह के नाम से जाना जाता है। शासकों के दुराचार के खिलाफ जहां कोई एक आगे होने से डरता है, वहीं झारखंड राज्य के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव के एक ही परिवार के चार भाइयों सिद्धू, कान्हू, चांद, भैरव और दो बहनों फूलो और झानो ने वीरांगनाओं की तरह अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अत्यधिक लगान (Tax) वसूल रही थी। जमींदार, अंग्रेजों के इशारे पर संथालों की जमीनों पर कब्जा कर रहे थे और उनसे बेगारी (बिना पैसे के काम) करवाते थे। साहूकार, कर्ज के जाल में फंसाकर उनका भयंकर आर्थिक और शारीरिक शोषण करते थे। इस अन्याय और शोषण ने संथालों के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। 30 जून 1855 को भोगनाडीह गांव में सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में लगभग 400 गांवों के 10,000 से 50,000 संथाल आदिवासी एकत्र हुए। यहीं पर उन्होंने शोषकों के खिलाफ शंखनाद किया और नारा दिया, "अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो।" इसी दिन उन्होंने घोषणा की कि वे अब किसी को लगान नहीं देंगे और अपना स्वतंत्र 'संथाल राज' स्थापित करेंगे। विद्रोह की आग पाकुड़, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और बंगाल के बीरभूम तक फैल गई। संथालों ने कई थानों, जमींदारों के ठिकानों और रेलवे लाइनों को नष्ट कर दिया। संथालों के पास अंग्रेजों जैसी आधुनिक बंदूकें और तोपें नहीं थीं। उन्होंने अपने पारंपरिक हथियारों—तीर-धनुष, भाले और कुल्हाड़ी से ही अंग्रेजों की विशाल और आधुनिक सेना का सामना किया। ब्रिटिश सरकार इस विद्रोह से पूरी तरह घबरा गई थी। उन्होंने विद्रोह को कुचलने के लिए 'मार्शल लॉ' लगा दिया। बंदूकों और तोपों के सामने तीर-धनुष ज्यादा देर टिक नहीं सके। इस विद्रोह में लगभग 20,000 संथाल आदिवासी शहीद हुए। कई गांवों को अंग्रेजों ने पूरी तरह जला दिया। सिद्धू और कान्हू को गिरफ्तार कर लिया गया और भोगनाडीह गांव में ही एक पेड़ से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी गई। चांद और भैरव भी अंग्रेजों की गोलियों का शिकार हुए। हालांकि विद्रोह को क्रूरता से दबा दिया गया, लेकिन अंग्रेजों को आदिवासियों की ताकत का अहसास हो गया। इसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को संथाल परगना (Santhal Pargana) नाम का एक अलग जिला बनाना पड़ा और आदिवासियों की जमीन बचाने के लिए विशेष कानून (Santhal Pargana Tenancy Act / SPT Act) लागू करना पड़ा, ताकि कोई गैर-आदिवासी उनकी जमीन न छीन सके। हुल दिवस केवल एक विद्रोह की याद नहीं है, बल्कि यह जल, जंगल, जमीन और स्वाभिमान की रक्षा के लिए दी गई अदम्य शहादत का प्रतीक है। भारतीय इतिहास में 30 जून का अमर दिन याद दिलाता है कि हक़ की बात में समझौता नहीं, विद्रोह करना ही अपनी पहचान है। ~ प्रहलाद मंडल ✍️
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Hemant Soren
Hemant Soren@HemantSorenJMM·
हूल केवल इतिहास नहीं, अन्याय के विरुद्ध हमारी चेतना है... तेहेञ हुल माहां रे बिर बान्टा सिदु कान्हु, चाँद-भैरो आर फूलो झानो सांवते संताल हुल रिन सानाम दिलगारिया कोठेन इञाक् हुल जोहार। तेहेञाक् नोंकान ओकतो रे इञ आबो रिन नुकू हुलगारिया रिन आयो बाबा चुनू मुर्मू आर सुबी हांसदा तीकीन हुञ हुल जोहाराकिन काना। 30 जून 1855 हिलोक् हुयेन संताल रेयाक् भोगनाडीह धारती खोन आबो चेतान हुयुक् कान नाहाचार खातीर ते हुल सेंगेल दो जुल लेना। आबोरिन हापड़ाम दो नोवा जेरेत् सांवते को मेन लेदा जे दाक्, बीर-बुरु, जुमी-जायगा, पारसी, आरिचाली चेतान नाहाचार दो तिस हो बाले हुय ओचोवाक् आ। होक-आयदारी आर मान-सोम्मान रुखिया लागीत् आबो रिन बीर बान्टा आकोवाक् जीवी को आलाय लेदा एनते रेहों नाहाचार सामाङ रेदो बोहोक् तीस हों बाको तिरुब् लेदा। तेहेञ इञ नुकू सानाम बीर बान्टा कोठेन झारखंड पोनोत रिन होड़ को पाहटा खोन इञाक् दाया दुलाड़ीञ सोदोरेद् काना। आबोरिन बिर बान्टा कोवाक् आनाट गे आबोवाक् उपरूम काना आर उनकू वाक् जीवी आलाय गे आबोवाक् दाड़े काना। झारखंड पोनोत बेनाव काते 25 बोछोर पुराव काते नीत नांवा दाड़े आर नांवा उपहार सांवते लाहा चालाक् काना। अबुआ सोरकार हों बीर बान्टा कोवाक् कुकमू पुराव काते गेय ताहेंना।
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prahlad mandal@khudTalks·
धौ मर्दे ई क्या हो गया ? एक ठौ तो बहाना था लोगों का मोबाइल नंबर मांगने का 😀.. जबकि सारे फीचर्स तों मैसेंजर, इंस्टाग्राम पर मिल ही जाते हैं।
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prahlad mandal@khudTalks·
@khurpenchh चंदा भगवान का कभी हुआ ही नहीं बस ये बहुत ज्यादा हैं इसलिए जांच पड़ताल हो रहा है
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
टिन्नू यादव चोरी करते थे, और चंपत राय टिन्नू का हृदय परिवर्तन करने की कोशिश करते थे
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prahlad mandal@khudTalks·
@JaikyYadav16 चंपत राय चोर-चोर मौसेरे भाई की भूमिका में हैं। टिन्नू यादव ही सिर्फ चोर क्यो
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Jaiky Yadav
Jaiky Yadav@JaikyYadav16·
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में शक के दायरे में रहने वाले ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का पहला बयान सामने आया है चंपत राय ने कहा राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में मेरी कोई भूमिका नहीं है बल्कि मुझे जब चढ़ावा चोरी की जानकारी हुई तो मैं सक्रिय हुआ। मेरे कहने पर ही संदिग्ध लोग पकड़े गए हैं। मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि टिन्नू यादव ऐसा करेगा। यही चंपत राय कुछ दिनों पहले लीपापोती कर रहे थे कि नहीं यहां ऐसा कुछ भी नहीं है कोई चोरी नहीं हुई है और अब क्रेडिट लेने आ गए।
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prahlad mandal@khudTalks·
आज़ादी का इतिहास बताता है कि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 ई. में हुआ था लेकिन इससे दो वर्ष पूर्व ही अपने हक़, अपनी अस्मिता की लड़ाई के लिए हुंकार भरी जा चुकी थी संथाल परगना के इलाके में, जिसे हुल दिवस या संथाल विद्रोह के नाम से जाना जाता है। शासकों के दुराचार के खिलाफ जहां कोई एक आगे होने से डरता है, वहीं झारखंड राज्य के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव के एक ही परिवार के चार भाइयों सिद्धू, कान्हू, चांद, भैरव और दो बहनों फूलो और झानो ने वीरांगनाओं की तरह अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका। ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी अत्यधिक लगान (Tax) वसूल रही थी। जमींदार, अंग्रेजों के इशारे पर संथालों की जमीनों पर कब्जा कर रहे थे और उनसे बेगारी (बिना पैसे के काम) करवाते थे। साहूकार, कर्ज के जाल में फंसाकर उनका भयंकर आर्थिक और शारीरिक शोषण करते थे। इस अन्याय और शोषण ने संथालों के भीतर भारी आक्रोश पैदा कर दिया था। 30 जून 1855 को भोगनाडीह गांव में सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में लगभग 400 गांवों के 10,000 से 50,000 संथाल आदिवासी एकत्र हुए। यहीं पर उन्होंने शोषकों के खिलाफ शंखनाद किया और नारा दिया, "अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो।" इसी दिन उन्होंने घोषणा की कि वे अब किसी को लगान नहीं देंगे और अपना स्वतंत्र 'संथाल राज' स्थापित करेंगे। विद्रोह की आग पाकुड़, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और बंगाल के बीरभूम तक फैल गई। संथालों ने कई थानों, जमींदारों के ठिकानों और रेलवे लाइनों को नष्ट कर दिया। संथालों के पास अंग्रेजों जैसी आधुनिक बंदूकें और तोपें नहीं थीं। उन्होंने अपने पारंपरिक हथियारों—तीर-धनुष, भाले और कुल्हाड़ी से ही अंग्रेजों की विशाल और आधुनिक सेना का सामना किया। ब्रिटिश सरकार इस विद्रोह से पूरी तरह घबरा गई थी। उन्होंने विद्रोह को कुचलने के लिए 'मार्शल लॉ' लगा दिया। बंदूकों और तोपों के सामने तीर-धनुष ज्यादा देर टिक नहीं सके। इस विद्रोह में लगभग 20,000 संथाल आदिवासी शहीद हुए। कई गांवों को अंग्रेजों ने पूरी तरह जला दिया। सिद्धू और कान्हू को गिरफ्तार कर लिया गया और भोगनाडीह गांव में ही एक पेड़ से लटकाकर उन्हें फांसी दे दी गई। चांद और भैरव भी अंग्रेजों की गोलियों का शिकार हुए। हालांकि विद्रोह को क्रूरता से दबा दिया गया, लेकिन अंग्रेजों को आदिवासियों की ताकत का अहसास हो गया। इसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को संथाल परगना (Santhal Pargana) नाम का एक अलग जिला बनाना पड़ा और आदिवासियों की जमीन बचाने के लिए विशेष कानून (Santhal Pargana Tenancy Act / SPT Act) लागू करना पड़ा, ताकि कोई गैर-आदिवासी उनकी जमीन न छीन सके। हुल दिवस केवल एक विद्रोह की याद नहीं है, बल्कि यह जल, जंगल, जमीन और स्वाभिमान की रक्षा के लिए दी गई अदम्य शहादत का प्रतीक है। भारतीय इतिहास में 30 जून का अमर दिन याद दिलाता है कि हक़ की बात में समझौता नहीं, विद्रोह करना ही अपनी पहचान है। ~ प्रहलाद मंडल ✍️
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prahlad mandal
prahlad mandal@khudTalks·
"इशारा दिल्ली से हुआ है, लेकिन सतर्क पूरे देश को होना चाहिए। सरकारी फरमान कब पूरे देश में लागू हो जाए, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। ​इंडियन एक्सप्रेस हिंदी में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2028 के बाद दिल्ली में पेट्रोल बाइक का रजिस्ट्रेशन बंद हो जाएगा। ​हालांकि, इथेनॉल वाले पेट्रोल के आने के बाद इस बात की खूब चर्चा रही थी कि E-20 लॉन्च करने से पहले सरकार ने कोई संदेश क्यों नहीं दिया था? इसी तर्ज पर, दिल्ली सरकार ने दिल्ली में पूर्ण रूप से EV (इलेक्ट्रिक वाहन) लागू करने के लिए एक समय-सीमा (अल्टीमेटम) तय कर दी है। ​आपको क्या लगता है, क्या अब पूरे देश के लोगों को पेट्रोल बाइक खरीदने से पहले सोचना चाहिए?"
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Bhagavad Gita 🪷
Bhagavad Gita 🪷@Geetashloks·
Dedicate your self into something meaningful 💪
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prahlad mandal@khudTalks·
Hello @grok क्या ये सच न्यूज हैं कि अब Airtel ने 5G unlimited खत्म कर दिया
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prahlad mandal@khudTalks·
जय सियाराम 🙏🚩
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prahlad mandal@khudTalks·
राजनीति में एक्टिंग बहुत जरूरी हैं,तेलचिट्टा गिरी से अब कुछ नहीं होने वाला है इसलिए अब अभिजीत दीपके ने मां वाला इमोशनल,कलेजा टचिंग वाला बात कहना शुरू कर दिया है एक वीडियो में वो कह रहें हैं "मेरी मां मेरे लिए घर से खाना बना कर लाती हैं" इसके साथ वो रोने की एक्टिंग करते हुए कहते हैं आप इस सीन को काट देना लेकिन पत्रकार भाईसाहब को चूल चढ़ा था फैल एक्टिंग दिखाने की...
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जिस देश में शराब की बोतल बिस्तर में डिलीवर हो जाए, उस देश का किसान खाद के लिए तरस रहा है। धान रोपाई का सीजन है लेकिन किसानों को खाद नहीं मिल पा रही है। @ChouhanShivraj जी, कौन से किसान हैं जिनकी आय 8 गुनी हुई है?
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prahlad mandal@khudTalks·
कुर्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं हो सकती चाहे वो कितना भी आयरन कर लो.. लड़की रोते हुए शौ से बाहर जा रही हैं क्योंकि उनके पिताजी का हार्ट अटैक आया हैं.. ये बात भी हंसने के लिए हैं इन सब नल्लो के लिए.. !! ये कह-कहकर कर हंस रहा हैं.. बताओं एक इंसान और कितना गिरेगा।
POL@CptoneP

This is peak unmaturity in boys these days. When your girlfriend's Dad suddenly has a minor heart attack, she leaves crying but you don't give her your shoulder and keep enjoying your favourite show 🥲

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prahlad mandal@khudTalks·
कुर्ते की पूंछ कभी सीधी नहीं हो सकती चाहे वो कितना भी आयरन कर लो.. लड़की रोते हुए शौ से बाहर जा रही हैं क्योंकि उनके पिताजी का हार्ट अटैक आया हैं.. ये बात भी हंसने के लिए हैं इन सब नल्लो के लिए.. !! ये कह-कहकर कर हंस रहा हैं.. बताओं एक इंसान और कितना गिरेगा।
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@HemantSorenJMM विद्यालय में शिक्षक की पूर्ति को लेकर क्या विचार हैं ?
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Hemant Soren
Hemant Soren@HemantSorenJMM·
झारखंड के करोड़ों लोगों के प्रति हमारी सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन एक बेहतर समाज का निर्माण तभी संभव है, जब हर नागरिक अपने दायित्व का भी पूरी निष्ठा से पालन करे। मैं सभी शिक्षकों से कहना चाहूंगा कि वे सरकार की आँख, कान और नाक बनकर विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक समरसता का संदेश पहुँचाएँ। मैं यह स्पष्ट शब्दों में कहना चाहूंगा कि विद्यालय बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित और प्रेरणादायी स्थान होना चाहिए। बच्चों के साथ किसी भी प्रकार की बर्बरता, दुर्व्यवहार या समाज में द्वेष फैलाने वाली मानसिकता को राज्य सरकार किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं करेगी।क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि संवेदनशील, वैज्ञानिक सोच वाले और मानवीय मूल्यों से परिपूर्ण नागरिक तैयार करना है।
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prahlad mandal@khudTalks·
@khurpenchh चोरी की भविष्यवाणी नहीं कर पाए.. धौअ मुर्दे क्या ही बाबा बनेगा ये
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खुरपेंच
खुरपेंच@khurpenchh·
काश ! बाबाजी ने पर्ची बना दी होती तो राम मन्दिर में चोरी नहीं होती
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prahlad mandal@khudTalks·
@JaikyYadav16 एक एक दिन जैकी यादव रीच के लिए नंगा भी यहां नाचने लगे तो आश्चर्यचकित नहीं होना.. ये एकदम से उल्टा कैप्शन इसलिए लिखा है ताकि लोग बहस करे और इनका रीच बढ़े
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Jaiky Yadav
Jaiky Yadav@JaikyYadav16·
मेरी नज़र में 10 Most Cringe Content Creators ये हैं। 1: ज़ाकिर खान 2: सतीश राय 3: रवि गुप्ता 4: राजन अरोड़ा 5: धर्मेंद्र बिलोटिया 6: खान सर 7: अमित किलहोर 8: सौरव जोशी 9: एल्विश यादव 10: राज समानी
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