छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में कोरोना लाकडाइउ के नाम पर अपनी प्रशासनिक ताक़त का बेजा इस्तेमाल कर बच्चे के हाथ से मोबाइल छीन कर पटकने और उसे थप्पड़ मारने और फिर सिपाही से डंडा मरवाने वाले डीएम रणवीर शर्मा कार्रवाई होगी और वे नपेंगे इतना तय है। बस कुछ वक्त का इंतज़ार कीजिए।
ममता जी ने तो पहले हाई चेतावनी दे दिया था ..चुनाव के बाद हमारा समय होगा ..उसके बाद क्या होगा ...
आज पूरा हिंदुस्तान देख रहा है “उसके बाद क्या होगा”
ममता जी की शांति की अपील में भी अशांति का ज़हर घुला हुआ है.
#BengalViolence
बनी-ठनी एक राजस्थानी चित्रकला है जो किशनगढ़ चित्रकला से सम्बन्धित है इनकी रचना निहाल चन्द ने की थी। इसको भारत की मोनालिसा भी कहा जाता है। बनी-ठणी राजस्थानी एक शब्द है, इसका हिन्दी में मतलब सजी-धजी
@History__India आगे अमर सिंह के साले अर्जुन गौड़ के द्वारा उनकी हत्या करवा दी गई। और मतीरे की राड़ में अंतिम विजय बीकानेर की हुई.. आगे यही राजा कर्ण सिंह जांगलधारी बादशाह के नाम से प्रसिद्ध हुए।
मतीरे पर युद्ध जो नागौर के अमरसिंह व बीकानेर के कर्णसिंह के मध्य 1644 ई. में लड़ा गया था। इतिहासकार युद्ध होने का कारण बताते हैं कि तरबूज का एक पौधा बीकानेर रियासत की सीमा में उगा हुआ था, लेकिन उसका एक फल नागौर रियासत की सीमा में चला गया।
@History__India एक दिन जब अमर सिंह ने निश्चय किया कि वो मिलकर ही रहेंगें ओर जबरदस्ती मिलने का प्रयास किया तो बक्शी ने उन्हें गंवार जैसे अपशब्द कहे... जिससे कुपित होकर अमर सिंह ने वही बक्शी को तलवार से काट डाला इसीलिए अमर सिंह को कटार का धणी कहा जाता है
@History__India की अमरसिंह बादशाह से मिले उभोने इसके लिए सारे घोड़े खोल दिए ।।। अमर सिंह बार बार मिलने का समय मांगते लेकिन बक्शी सलावत खान बादशाह की व्यस्तता का हवाला देकर उन्हें लोटा देता
@History__India मतीरा तो बहाना था असली राड़ जखड़िया गांव की सीमा को लेकर था ...बस लड़ने का बहाना चाहिए था। नागौर के अमर सिंह उस समय आगरा में थे जब उन्हें इस बात का पता लगा तो वो शाहजहाँ से अवकाश लेकर आना चाहते थे लेकिन बीकानेर के कर्ण सिंह नही चाहते थे.....
इस वीडियो की तारीख नहीं पता पर वीडियो मुकेश अम्बानी के आफिस का है जहां पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह सीधे किसानों से उपज खरीदने की योजना पर चर्चा कर रहे हैं। बाकी आप समझदार हैं।
#किसान_आंदोलन
ये क्या जादू हो रहा है राहुल जी?
पहले आप जिस चीज़ की वकालत कर रहे थे, अब उसका ही विरोध कर रहे है।
देश हित, किसान हित से आपका कुछ
लेना-देना नही है।आपको सिर्फ़ राजनीति करनी है।लेकिन आपका दुर्भाग्य है कि अब आपका पाखंड नही चलेगा। देश की जनता और किसान आपका दोहरा चरित्र जान चुके है।
“किसानों को उनकी पैदावार की सही कीमत तभी मिलेगी जब वे बिना किसी बिचौलिए के अपनी पैदावार सीधे शहरों तक पहुँचा सकेंगे”: यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी
राजकोट में 3 अक्तूबर 2012 का भाषण