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चन्दन है इस देश की माटी तपोभूमि हर ग्राम है।। हर बाला देवी की प्रतिमा बच्चा बच्चा राम है।।
भारतवर्ष Присоединился Ağustos 2014
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यूपी कैडर के एक आईपीएस अधिकारी ने Mamata Banerjee के पूरे “Ecosystem” में ऐसा कंपन पैदा किया है, मानो किसी ने साउंड सिस्टम में अचानक “सत्य का वॉल्यूम” फुल कर दिया हो 🎚️
डर का लेवल ऐसा है कि All India Trinamool Congress (TMC) के नेता अब चुनाव के बाद की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं...
“उन्हें यूपी से पकड़कर लाओ… सज़ा देंगे…”
मतलब अभी चुनाव चल रहा है, लेकिन बदले की प्लानिंग पहले से तैयार है 📜
इस कहानी के “सिंघम” हैं—अजेपाल शर्मा।
मीडिया ने उन्हें ये टाइटल यूँ ही नहीं दिया… आदमी डायलॉग कम और एक्शन ज़्यादा करता है 🎯
फिलहाल चुनाव आयोग ने उन्हें South 24 Parganas भेजा है—वो इलाका, जहाँ लोकतंत्र कभी-कभी “लाउडस्पीकर पर” नहीं, “डर के सन्नाटे में” होता है।
और फिर आया वो वायरल वीडियो…
जहाँ उन्होंने साफ शब्दों में कहा...
👉 “मतदाताओं को धमकाना बंद करो… नहीं तो बाद में रोने का टाइम भी नहीं मिलेगा।”
बस… यही एक लाइन TMC के इकोसिस्टम में भूकंप बन गई 🌪️
क्योंकि अब तक स्क्रिप्ट कुछ यूँ थी...
👉 वोटर डरता है
👉 दबंग जीतता है
👉 और लोकतंत्र “Adjust” कर लेता है
लेकिन इस बार लगता है “Adjust” की जगह “Action” आ गया है ⚖️
ग्राउंड रिपोर्ट कहती है कि Diamond Harbour, बसंती, भांगर, कैनिंग जैसे इलाकों में हालात ऐसे हैं कि...
👉 सड़कें कम, दबदबा ज़्यादा
👉 पुलिस कम, “लोकल मैनेजमेंट” ज़्यादा
👉 कानून किताब में, हकीकत मैदान में
और जब खबर आती है कि किसी नेता के घर से 100+ बम मिले 💣
तो समझ लीजिए लोकतंत्र यहाँ “मतपत्र” से कम और “बारूद” से ज़्यादा प्रभावित रहा है।
याद कीजिए वो चुनाव, जब Abhishek Banerjee ने यहाँ से रिकॉर्ड मार्जिन से जीत हासिल की थी…
इतना “Area Domination” कि लोकतंत्र भी सोच रहा होगा—
“मैं हूँ भी या सिर्फ नाम का हूँ?” 🤔
अब अजेपाल शर्मा की एंट्री ने उसी फॉर्मूले पर ब्रेक लगा दिया है 🚜
लेकिन असली सस्पेंस यहाँ है—
👉 “चार महीने बाद सज़ा” वाला डायलॉग किसके लिए है?
क्या ये एक अधिकारी को डराने की कोशिश है?
या फिर वोटर को ये याद दिलाने की—
“आज तो ठीक है… लेकिन बाद में हम ही मिलेंगे…”
और इसी बीच, बंगाल की हवा में एक नया नारा तैर रहा है...
👉 “चुपचाप कमल छाप” 🌸
आवाज़ कम है… लेकिन असर गहरा है।
क्योंकि जब नारे चिल्लाने की जगह “फुसफुसाए” जाने लगें…
तो समझ लीजिए डर भी है… और बदलाव की आहट भी 👀
हिन्दी
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🚨 Sabarimala Reference Hearing – Day 9
“All religions are not the same, Hindu scriptures do not threaten non-believers with hell” — सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता आदरणीय अश्विनी उपाध्याय
“सत्यमेव जयते” — सत्य की ही जीत होती है
“यतो धर्मस्ततो जयः” — जहाँ धर्म है, वहीं विजय है
मेरे लॉर्ड्स के समक्ष रखे गए इस तर्क को सरल भाषा में समझिए:
भारत का संविधान सिर्फ अधिकार देने का दस्तावेज़ नहीं है, बल्कि देश की एकता, संतुलन और वैज्ञानिक सोच को बनाए रखने का मार्गदर्शक है।
अनुच्छेद 25 हर व्यक्ति को धर्म मानने, पालन करने और प्रचार करने का अधिकार देता है, लेकिन यह अधिकार पूरी तरह खुला नहीं है। यह सार्वजनिक व्यवस्था, स्वास्थ्य, नैतिकता और अन्य संवैधानिक प्रावधानों के अधीन है।
अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों को चलाने का अधिकार देता है, लेकिन यह भी उन्हीं सीमाओं में बंधा हुआ है और अनुच्छेद 25 से बड़ा नहीं हो सकता।
मुख्य बात यह है कि अनुच्छेद 25 एक सामान्य नियम है और अनुच्छेद 26 उसी का एक हिस्सा। कोई भी हिस्सा पूरे नियम से बड़ा नहीं हो सकता।
सीधी बात:
धर्म मानना आपका अधिकार है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया जा सकता जिससे समाज में तनाव, भ्रम या विभाजन पैदा हो।
दुनिया के कई देशों में भी धर्म के प्रचार पर सीमाएं हैं। हर जगह यह अधिकार पूरी तरह से खुला नहीं होता।
अगर “धर्म प्रचार” बिना संतुलन के होगा, तो इससे समाज में टकराव, अंधविश्वास और विभाजन बढ़ सकता है।
हमारा लक्ष्य एक ऐसा भारत होना चाहिए जो एकजुट हो, वैज्ञानिक सोच पर चले और संविधान के मूल उद्देश्यों को पूरा करे।
अधिकार जरूरी हैं, लेकिन सीमाओं के भीतर।
धर्म व्यक्तिगत आस्था है, राष्ट्र की एकता सबसे ऊपर है।
जहाँ संतुलन है, वहीं संविधान जीवित है।
@AshwiniUpadhyay
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🚩 Sanatan Dharma 🚩
🚨 मंदिर प्रबंधन पर बड़ा बयान – केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रखी साफ राय 🚨
भारत में मंदिरों के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रही बहस के बीच, 22 अप्रैल 2026 को केंद्र सरकार ने Supreme Court of India की 9 जजों की संविधान पीठ के सामने एक महत्वपूर्ण पक्ष रखा।
👉 सरकार ने स्पष्ट कहा:
मंदिरों का प्रबंधन केवल धार्मिक संस्थाओं और भक्तों के हाथ में होना चाहिए, न कि सीधे राज्य सरकार के नियंत्रण में।
⚖️ सरकार की दलीलें:
संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 धार्मिक स्वतंत्रता देते हैं
राज्य सिर्फ प्रशासन, संपत्ति और व्यवस्था जैसे गैर-धार्मिक पहलुओं तक सीमित रहे
मंदिरों पर स्थायी नियंत्रण या कब्जा संविधान की भावना के खिलाफ है
भारत में हिंदू परंपराएं बेहद विविध हैं—इन पर एक जैसी “Uniformity” थोपना उचित नहीं
🛕 उदाहरण:
Travancore Devaswom Board – केरल में ~3000 मंदिरों का संचालन (जिसमें Sabarimala Temple शामिल)
तमिलनाडु का HR&CE विभाग – 30,000+ मंदिरों का प्रबंधन
Tirumala Tirupati Devasthanams – Tirupati Balaji Temple का संचालन
🔥 सरकार का स्पष्ट संदेश:
ना तो केंद्र मंदिरों को अपने अधीन लेने जा रहा है,
ना ही हिंदू धर्म पर नियंत्रण बढ़ाने की कोई मंशा है।
📢 अब निगाहें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर हैं,
जो देशभर में मंदिर प्रबंधन और राज्य की भूमिका को नई दिशा दे सकता है।
🧭 धर्म स्वतंत्र रहे, व्यवस्था संतुलित रहे — यही असली संविधानिक भावना है।
#SanatanDharma #TempleManagement #SupremeCourt #ReligiousFreedom #India 🚩
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🚨 पश्चिम बंगाल चुनाव सिर्फ सत्ता का खेल नहीं — ये राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है! 🇮🇳
West Bengal आज सिर्फ एक राज्य नहीं रहा, बल्कि भारत की स्ट्रैटेजिक फ्रंटलाइन बन चुका है।
📍 एक तरफ Bangladesh — जहां राजनीतिक अस्थिरता का असर सीधे भारत की सीमाओं पर पड़ता है
📍 दूसरी तरफ Bay of Bengal — जो अब Indo-Pacific का गेमचेंजर ज़ोन बन चुका है 🌏
⚠️ सवाल सिर्फ चुनाव जीतने का नहीं है, सवाल है:
👉 Border Security
👉 Illegal Infiltration
👉 Geo-Politics में China का बढ़ता प्रभाव 🇨🇳
Amit Shah का 15 दिन तक बंगाल में रहना ये दिखाता है कि मामला कितना गंभीर है — ये सिर्फ राज्य चुनाव नहीं, National Security Mission बन चुका है।
🔥
West Bengal =
➡️ Strategic Location
➡️ Sensitive Borders
➡️ International Trade Route
अगर यहां स्थिति कमजोर होती है, तो असर पूरे भारत पर पड़ेगा।
💬 अब फैसला बंगाल की जनता के हाथ में है:
देश की सुरक्षा या सिर्फ राजनीति?
🗣️ आपकी क्या राय है? कमेंट में जरूर बताएं!
#WestBengal
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देश के एक सजग नागरिक के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम लोकतंत्र को और अधिक सशक्त बनाने के लिए रिकॉर्ड मतदान सुनिश्चित करें। इस तरह हम न केवल भारतवर्ष के नवनिर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी निभा सकते हैं, बल्कि एक समर्थ और समृद्ध राष्ट्र की नींव को और मजबूत कर सकते हैं।
राज्ञो हि व्रतमुत्थानं यज्ञः कार्यानुशासनम्।
दक्षिणा वृत्तिसाम्यं च दीक्षितस्याभिषेचनम्॥
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@Akhand_Bharat_S #पश्चिम_बंगाल अब धार्मिक तुष्टिकरण की प्रयोगशाला बन चुका है—
जहां मंदिरों पर हमला होता है,रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव होता है,दुर्गा विसर्जन रोका जाता है, और अब साधु-संतों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
यही नहीं,यह बीमारी केवल बंगाल तक सीमित नहीं है।
#WestBengal
#MamtaBanerjee
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यही वह वीडियो है जिसके कारण गौतम खट्टर की गिरफ्तारी हुई 🚨
सत्य भगवान शिव का स्वरूप है—फिर उससे डर क्यों?
नरसंहार के दोषियों के नाम पर संस्थान, और सच बोलने पर गिरफ्तारी?
क्या इतिहास कहना अब अपराध है? 🔥
We Stand With Gautam Khattar
#ReleaseGautamKhattar
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गौतम खट्टर के साथ जो हो रहा है, इसे सारा हिन्दू समाज देख रहा है! 👁️
गोवा में हिंदुओं के साथ क्या हुआ? और Francis Xavier की उसमें क्या भूमिका थी?
ईसाई चर्च इस सच को देश से छिपा क्यों रहा है? 🤔
जब मैं सारे हिंदुओं को कन्वर्ट करके उन्हीं के हाथों से उनके मंदिर और मूर्तियां तुड़वाऊंगा—जिन मंदिरों से वे कभी प्रेम करते थे… छोटे-छोटे बच्चे गुस्से में मूर्तियों को तोड़ेंगे, उन पर थूकेंगे… और मुझे उससे ज़्यादा आनंद नहीं मिलेगा।
ये मेरे शब्द नहीं—ये सेंट फ्रांसिस जेवियर के बताए जा रहे शब्द हैं। ⚠️
मूर्ति-पूजकों में एक वर्ग—ब्राह्मण… जो मंदिरों और मूर्तियों की रक्षा करते हैं… और जिन्हें मास कन्वर्ज़न में सबसे बड़ी बाधा बताया गया।
किंग जॉन III को लिखे पत्र में पूरे भारत को क्रिस्टियन बनाने और आदेश न मानने वालों को सख्त सज़ा देने की बात कही गई।
पर सवाल वही है—
इतिहास बोलना गुनाह कब से हो गया? 🔥
और क्या सच बताने की कीमत गिरफ़्तारी है? 🚨
#ReleaseGautamKhattar
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"BJP Winning Bengal" 🔥
Mamata Banerjee के राज में West Bengal हिंदू विरोध की प्रयोगशाला बनता जा रहा है।
यह कोई संयोग नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित प्रयोग है।
यही वजह है कि West Bengal में हर उस आवाज को कुचला जा रहा है, जो हिंदू धर्म की बात करती है।
भारत सेवा आश्रम संघ के पूज्य संत, पद्मभूषण से सम्मानित कार्तिक महाराज—जिन्होंने आदिवासी बेटियों के लिए स्कूल खोला, गरीबों के लिए अस्पताल बनवाया,
उन्हें एक संयोजित षड्यंत्र के तहत बदनाम किया जा रहा है।
मजे की बात यह है कि जिस महिला का नाम इस साजिश में घसीटा गया, उसने खुद आकर पोल खोल दी,
यह सब एक पत्रकार दीपक, एक व्यापारी और एक चुनाव कैंपेनिंग कंपनी की स्क्रिप्ट थी।
महिला का कहना है कि उसे कोलकाता से गाड़ी भेजी गई, प्रेस कॉन्फ्रेंस करवाई गई।
यानी एक संत को बदनाम करने के लिए एक महिला को मोहरा बनाया गया।
असल में यह सब कुछ #मुर्शिदाबाद में हिंदुओं पर हुई हिंसा के बाद रचा गया खेल है।
मत भूलिए— I-PAC वही संस्था है जिसने ममता का चुनावी चेहरा चमकाया।
पश्चिम बंगाल अब धार्मिक तुष्टिकरण की प्रयोगशाला बन चुका है—
जहां मंदिरों पर हमला होता है, रामनवमी की शोभा यात्रा पर पथराव होता है, दुर्गा विसर्जन रोका जाता है, और अब साधु-संतों को भी निशाना बनाया जा रहा है।
यही नहीं, यह बीमारी केवल बंगाल तक सीमित नहीं है।
Tamil Nadu में M. K. Stalin सरकार ने सतगुरु के आश्रम में रेड डलवाई—और जब कुछ नहीं मिला, तो केस बंद।
यूपीए सरकार में दिवाली के दिन शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार किया गया—
बिना सबूत, बिना तर्क—सिर्फ आस्था को कुचलने की जिद।
बाद में कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया।
क्या अब संतो पर लांछन लगाकर सत्ता का खेल खेला जाएगा ⁉️
ये आपका मौन नहीं—बल्कि एक मौन स्वीकृति है।
साधु-संत ही नहीं, पूरे समाज का अपमान है ‼️
अब वक्त है बदलाव का,
वक्त है प्रतिकार का।
प्रतिकार के बिना—ना साजिश रुकेगी, ना स्वाभिमान बचेगा।
इसलिए हिंदू सनातन के खिलाफ साजिश रचने वालों को जवाब देना जरूरी है।
🕉️ आज ही लें संकल्प ⛳
🤝 Hindus Must Unite
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श्री राम दरबार — भक्ति, मर्यादा और समर्पण का दिव्य संगम।
जहाँ प्रभु श्रीराम की मर्यादा, माता सीता की पवित्रता, लक्ष्मण जी की सेवा-भावना और हनुमान जी की अटूट भक्ति एक साथ झलकती है
वही है सच्चा राम दरबार।
🙏 जय श्री राम 🚩
@ShriAyodhya_

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नीति आयोगकी दक्षता निश्चित बढ़ेगी 🙏🏻
Narendra Modi@narendramodi
Met Prof. Gobardhan Das Ji this morning. His personal life journey is very inspiring. Every struggle he faced only strengthened his commitment to serve society and make it free from suffering. This has been reflected in his contribution to public health and immunology. His rich work and scholarship will enrich our policy-making architecture. @dasgobardhan
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