प्रसेनजीत कुमार
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प्रसेनजीत कुमार
@Hum__PK
Let people think whatever.




















एक संस्मरण... 16 अप्रैल की वह तिथि जब जयपुर की सड़कें जन-सैलाब की गवाह बनीं। जब पुलिस प्रशासन ने पदयात्रा को रोका, तो अधिकांश लोग शांतिपूर्ण ढंग से वहीं बैठ गए। किंतु जोश से भरे कुछ युवा और छात्र नेता पुलिसकर्मियों से उलझने लगे। उस समय सुमेर सिंह जी बड़ी आत्मीयता से सबको समझा रहे थे। उनके शब्द आज भी कानों में गूँजते हैं,,, हम इनसे कैसे लड़ सकते हैं? इनके पास सत्ता और शक्ति है, एक मुकदमा दर्ज कर सबको भीतर कर देंगे। हमारा पक्ष तो स्वयं देवी (माँ) रखेंगी, वही इनका सामना करेंगी। रैली का समापन हुआ। ओरण पदयात्रियों के अतिरिक्त लगभग सभी विदा हो चुके थे। शाम की उस बेला में सुमेर सिंह जी, कुंदन सिंह जी और सुमेर सिंह जी मसूरिया एक साथ बैठे थे। जब कुंदन सिंह जी ने प्रशासन के साथ हुई वार्ता का विवरण साझा किया, तो सुमेर सिंह जी के चेहरे पर एक अलौकिक मुस्कान तैर गई। वे हँसकर बोले,,, हमें ओरण को बचाने की चिंता क्यों करनी? क्या वह हमारी है? वह तो डोकरी (माँ) की है, वह अपनी ओरण की रक्षा स्वयं कर लेंगी। आज जब भाजपा सरकार को लगे दो 'बड़े झटके' सामने आए हैं, तो यह सिद्ध हो गया कि डोकरी की भुजाएं इन सत्ताओं के अहंकार से कई गुना अधिक शक्तिशाली हैं। माँ की न्याय की लाठी बेआवाज़ है, पर उसका प्रभाव अचूक है। —घेवर सिंह भादरिया #जय_जैसाण 🌳🚩








