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Gujarat Lok Bhavan Gandhinagar شامل ہوئے Nisan 2016
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Acharya Devvrat@ADevvrat·
66वें गुजरात गौरव दिवस के राज्यस्तरीय समारोह के अंतर्गत सूरत में पुलिस परेड निरीक्षण कार्यक्रम का भव्य आयोजन हुआ। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्रभाई पटेल जी, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री श्री सी.आर. पाटिल जी, उपमुख्यमंत्री श्री हर्षभाई संघवी जी और राज्य मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सूरत के Y-जंक्शन से लालभाई कॉन्ट्रैक्टर स्टेडियम तक निकली इस परेड में गुजरात पुलिस की 18 प्लाटूनों के 750 से अधिक जवानों ने अपने अदम्य साहस और अनुशासन का प्रदर्शन किया। परेड के दौरान विभिन्न विभागों की आकर्षक झांकियों ने गुजरात की निरंतर बढ़ती 'विकासगाथा' को जीवंत कर दिया। हमारे जांबाज जवानों द्वारा किए गए दिल दहला देने वाले करतबों ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। विश्व प्रसिद्ध गरबा और गुजरात के गौरव आदिवासी नृत्य की प्रस्तुतियों ने हमारी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों की याद दिलाई। "भारत माता की जय" और "जय जय गरवी गुजरात" के गगनभेदी नारों से पूरा सूरत देशभक्ति के रंग में सराबोर हो गया।
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गुजरात स्थापना दिवस की अनंत शुभकामनाएं! संस्कार, पुरुषार्थ और प्रगति की पावन धरा गुजरात के स्थापना दिवस पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई। आज हमारा गुजरात प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के 'विकसित भारत @ 2047' के संकल्प को सिद्ध करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। चाहे वह आधुनिक उद्योग हों या हमारी प्राचीन आध्यात्मिक विरासत, गुजरात ने हमेशा देश को नयी दिशा दिखाई है। विशेष रूप से 'प्राकृतिक कृषि' के माध्यम से हम धरती मां के संरक्षण और स्वस्थ समाज के निर्माण की ओर बढ़ रहे हैं। आइए, हम सब मिलकर गुजरात को और अधिक सशक्त, आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने का संकल्प लें। जय जय गरवी गुजरात! @narendramodi @AmitShah @Bhupendrapbjp @InfoGujarat
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सेवा, समरसता और समर्पण
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अमरेली जिले की खांभा तहसील स्थित त्राकुडा गांव प्रवास के दौरान आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण परियोजना का शुभारंभ हुआ। 'अमृत सरोवर' का भूमिपूजन केवल एक जल परियोजना ही नहीं, बल्कि गांव की आत्मनिर्भरता और समृद्धि का आधार है। हमारा लक्ष्य त्राकुडा को एक आदर्श ग्राम के रूप में गढ़ना है, जो पूरे प्रदेश के लिए एक उदाहरण बनेगा। त्राकुडा को एक मॉडल गांव के रूप में विकसित किया जाएगा। राज्य सरकार के माध्यम से यहां वह सभी अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जो एक आदर्श ग्रामीण व्यवस्था के लिए अनिवार्य हैं। इस अमृत सरोवर के निर्माण से क्षेत्र की सिंचाई क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि होगी। वर्षभर जल का संचय होने से न केवल कृषि को बल मिलेगा, बल्कि पशु-पक्षी और संपूर्ण प्रकृति का भी कल्याण होगा। स्वामीनारायण गुरुकुल संस्थान, राजकोट के पूज्य संतों के वेदमंत्रों के बीच इस पवित्र कार्य का प्रारंभ हुआ। यह आध्यात्मिक ऊर्जा और विकास के समन्वय का प्रतीक है। सरोवर के किनारे किया गया वृक्षारोपण जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण की रक्षा के हमारे संकल्प को और सुदृढ़ करेगा। ग्रामवासियों का उत्साह और सहयोग इस बात का प्रमाण है कि त्राकुडा विकास के नये सोपान तय करने के लिए तैयार है।
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अमरेली जिले के त्राकुडा प्रवास के दौरान प्रगतिशील किसान श्री अश्विनभाई दुधात के खेत का निरीक्षण किया। अश्विनभाई द्वारा प्राकृतिक पद्धति से तैयार किया गया आम का बगीचा इस बात का जीवंत प्रमाण है कि बिना रसायनों के भी उत्कृष्ट और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। किसान भाइयों से आह्वान किया कि वह कम उत्पादन के डर को त्यागकर लोक-कल्याणकारी प्राकृतिक खेती अपनाएं। यह न केवल आपकी लागत कम करेगी, बल्कि समाज को स्वास्थ्य की सौगात भी देगी। खेत पर ही किसानों को बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, आच्छादन और बहु फसल खेती के वैज्ञानिक महत्व को समझाया। यदि इन पांचों आयामों का सही पालन हो, तो पहले वर्ष से ही परिणाम दिखने लगते हैं। रासायनिक खाद और कीटनाशकों ने हमारे मित्र जीव 'केंचुओं' और सूक्ष्म जीवाणुओं को नष्ट कर दिया है, जिससे जमीन बंजर हो रही है। केंचुआ ही प्राकृतिक खेती की आत्मा है, उसे सहेजना हमारा धर्म है। मुझे विश्वास है कि त्राकुडा गुजरात का ऐसा आदर्श गांव बनेगा, जहां शत-प्रतिशत किसान प्राकृतिक खेती अपनाएंगे। प्रायोगिक तौर पर 'जीवामृत' और 'घनजीवामृत' तैयार करने की विधि का प्रदर्शन भी किया गया ताकि किसान भाई इसे सरलता से स्वयं बना सकें।
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अमरेली जिले के त्राकुडा गांव में रात्रि विश्राम के पश्चात, भोर की पहली किरण के साथ विद्यार्थियों और ग्रामवासियों के साथ योग एवं प्राणायाम करने का सुखद अनुभव प्राप्त हुआ। ​योग भारत की वह प्राचीन जीवन पद्धति है, जिसे आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रयासों ने आज एक 'विश्वव्यापी आंदोलन' बना दिया है। यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का विज्ञान है। विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्हें बताया कि योग से न केवल शारीरिक तंदुरुस्ती आती है, बल्कि इससे मानसिक तनाव दूर होता है और पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है। ​कपालभाति, अनुलोम-विलोम और भस्त्रिका जैसे प्राणायामों के नियमित अभ्यास से हमारा श्वसन तंत्र मजबूत होता है और शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। सूरत की नन्ही छात्राओं, ज्हानी दुधात और क्रिवा दुधात द्वारा योग की सुंदर प्रस्तुति को देखकर मन अत्यंत प्रसन्न हुआ। हमारी नयी पीढ़ी का योग के प्रति यह उत्साह उज्जवल भारत का प्रतीक है। ​सत्र का समापन गायत्री मंत्र के पवित्र उच्चारण के साथ हुआ, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। मेरा सभी से अनुरोध है कि व्यस्त जीवनशैली के बीच स्वयं को स्वस्थ रखने के लिए योग को अपनी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनाएं।
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अमरेली जिले की खांभा तहसील स्थित त्राकुडा गांव में 'ग्राम कल्याण कार्यक्रम' के अंतर्गत आयोजित रात्रिसभा में सम्मिलित होकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। यहां से हमने 'आदर्श ग्राम अभियान' का शुभारंभ किया है, जिसके तहत गुजरात की प्रत्येक तहसील में एक 'आदर्श ग्राम' विकसित करने का हमारा संकल्प है। अमीरी-गरीबी, ईर्ष्या और भेदभाव से ऊपर उठकर 'मानवता' को सर्वोच्च स्थान देना ही श्रेष्ठ जीवन है। आपसी भाईचारा और एकता ही हमारी ग्राम संस्कृति की असली शक्ति है। हमारा लक्ष्य है कि प्रत्येक बच्चा केवल शिक्षित ही नहीं, बल्कि 'दीक्षित' और संस्कारवान बने। नयी पीढ़ी को नशे जैसी कुरीतियों से दूर रखकर एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण करना हमारा साझा दायित्व है। रासायनिक खेती और जहरीली दवाओं ने हमारे स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। किसानों से आह्वान किया कि वह देशी गाय के महत्व को समझें और गौ-आधारित प्राकृतिक कृषि को अपनाएं। यह न केवल भूमि की रक्षा है, बल्कि भावी पीढ़ी को 'विशुद्ध अन्न' देने का माध्यम भी है। ग्लोबल वार्मिंग के खतरों से बचने के लिए जल संरक्षण और वृक्षारोपण को हमे अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाना अनिवार्य है। गुजराती समाज विश्व में जहां भी जाता है, दूध में शक्कर की तरह घुल-मिल जाता है। इसी आत्मीयता और सहकार की भावना से हमें अपने गांवों को 'आदर्श' बनाना है।
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अमरेली जिले की खांभा तहसील के त्राकुडा गांव में किसान श्री भूपतभाई दुधात जी के परिवार के साथ बिताए गए क्षण अत्यंत सुखद और संतोषजनक रहे। ग्रामीण जीवन की सरलता और अपनत्व में ही भारत की असली आत्मा बसती है। भूपतभाई के निवास पर न केवल गौ-माता की सेवा की, बल्कि स्वयं अपने हाथों से गौ-दुग्ध दोहन भी किया। यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि दुधात परिवार अपनी 30 बीघा भूमि पर समग्र प्राकृतिक खेती कर रहा है। गौ-आधारित कृषि आर्थिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से सर्वश्रेष्ठ है।
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अमरेली जिले की खांभा तहसील स्थित त्राकुडा गांव प्रवास के दौरान ग्रामवासियों के बीच स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को साझा करने का अवसर मिला। किसी भी गांव को 'आदर्श' बनाने की पहली सीढ़ी वहां की स्वच्छता और हरियाली होती है। त्राकुडा में स्वच्छता अभियान में सम्मिलित होकर यह संदेश देने का प्रयास किया कि “जहां स्वच्छता होती है, वहीं प्रभु का निवास होता है।” युवाओं और ग्रामीणों का इस अभियान के प्रति उत्साह देखकर मन प्रफुल्लित हुआ। एक सजग 'स्वच्छताग्राही' बनकर ही हम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के सपनों को साकार कर सकते हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के एक पेड़ मां के नाम अभियान के अंतर्गत बोरसली के पौधे का रोपण किया। बोरसली न केवल अपनी खुशबू और सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि यह आयुर्वेद में भी अत्यंत गुणकारी है। प्रकृति का संरक्षण ही जीवन का वास्तविक जतन है। इस अवसर पर जिला प्रशासन के अधिकारी और गांव के उत्साही युवा स्वयंसेवकों की भागीदारी सराहनीय रही। आइए, हम सब मिलकर अपने गांवों को स्वच्छ, हरित और आत्मनिर्भर बनाएं।
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गाजियाबाद स्थित महर्षि दयानंद विद्यापीठ के रजत जयंती महोत्सव - वार्षिकोत्सव में सम्मिलित होकर अत्यंत हर्ष हुआ। 25 वर्षों की यह यात्रा केवल एक विद्यालय के निर्माण की नहीं, बल्कि हजारों चरित्रवान और अनुशासित नागरिकों को गढ़ने की तपस्या है। महर्षि दयानंद सरस्वती जी ने जिस अंधविश्वास मुक्त और तर्कसंगत समाज की कल्पना की थी, उसे आज की युवा पीढ़ी में जीवंत देखना सुखद है। वैदिक मूल्यों के साथ आधुनिक शिक्षा का समन्वय ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति है। विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मन मोह लिया और हमारी सांस्कृतिक विरासत की भव्यता को भी दर्शाया। उनकी प्रतिभा, अनुशासन और समर्पण प्रशंसनीय है। इस संस्थान ने शिक्षा के क्षेत्र में जो प्रतिमान स्थापित किए हैं, वह अनुकरणीय हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के माननीय मंत्री श्री सुनील कुमार शर्मा जी की गरिमामयी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी विशेष बनाया। शिक्षा वही है जो मनुष्य को स्वतंत्र बनाए और उसे समाज के प्रति संवेदनशील बनाए। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह विद्यालय भविष्य में भी इसी प्रकार ज्ञान की मशाल जलाए रखेगा। पूरे विद्यालय परिवार, प्रबुद्धजनों और अभिभावकों को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।
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मेरठ स्थित स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर युवा मेधा के उत्साह और ऊर्जा को साझा करने का अवसर मिला। दीक्षांत का अर्थ केवल शिक्षा की समाप्ति नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक नये उत्तरदायित्व की शुरुआत है। यह विश्वविद्यालय उस महान व्यक्तित्व के नाम पर है जिन्होंने पूरी दुनिया को भारत की आध्यात्मिक शक्ति से परिचित करवाया। युवाओं को उनके 'उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए' के मंत्र को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। केवल शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है। वास्तविक शिक्षा वही है जो आपको संवेदनशील बनाए, आपके चरित्र को सुदृढ़ करे और आपको राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराए। ज्ञान की इस मशाल को केवल अपने तक सीमित न रखें। जब आप दूसरों की प्रगति में अपनी प्रगति देखेंगे, तभी मानवता का कल्याण होगा। सभी स्नातकों को उनके यशस्वी और उज्ज्वल भविष्य के लिए अनंत शुभकामनाएं।
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संस्कार, अनुशासन और कठिन परिश्रम ही उन्नति के शिखर का मार्ग है। ​आज गुरुकुल कुरुक्षेत्र के प्रांगण में विद्यार्थियों के बीच उपस्थित होकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। किशोरावस्था जीवन का वह मोड़ है जहां लिया गया सही निर्णय भविष्य की दिशा तय करता है। विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान जीवन के कुछ व्यावहारिक सूत्रों को साझा किया। ​किशोरावस्था में शारीरिक और हार्मोनल बदलावों के कारण निर्णय अक्सर भावनाओं के वशीभूत होते हैं। विद्यार्थियों को समझाया कि इस उम्र में कोई भी बड़ा निर्णय अपने माता-पिता और गुरुजनों के विमर्श के बाद दिमाग से लेना चाहिए। ​इस संसार में केवल माता-पिता और गुरु ही ऐसे व्यक्तित्व हैं जो नि:स्वार्थ भाव से आपको स्वयं से भी आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं। उनका आज्ञापालन ही उन्नति का मार्ग है। ​स्वामी श्रद्धानन्द जी का जीवन हमें सिखाता है कि कमियां सब में हो सकती हैं, लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और संकल्प से हम अपनी कमियों को दूर कर अनेकों में एक बन सकते हैं। संस्कारयुक्त और अनुशासित दिनचर्या ही वह आधार है, जिस पर कठिन परिश्रम करके सफलता के शिखर को छुआ जा सकता है। ​यह जानकर गर्व की अनुभूति हुई कि इस वर्ष 10वीं की CBSE परीक्षाओं में गुरुकुल के 49 विद्यार्थियों ने 95 फीसदी से अधिक अंक प्राप्त किए हैं। साथ ही, गुरुकुल में अब शिक्षा के साथ-साथ आर्चरी (धनुर्विद्या), लॉन टेनिस और शतरंज जैसे खेलों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। सभी सफल विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को हार्दिक बधाई। याद रहे, आप स्वयं ही अपने भाग्य के निर्माता हैं!
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कुरुक्षेत्र की पावन धरा पर गुरुकुल के सभागार में आर्य समाज के प्रबुद्धजनों के साथ विचार साझा करने का अवसर मिला। महर्षि दयानन्द सरस्वती जी ने समाज को जोड़ने और 'लोक कल्याण' का मार्ग दिखाया था, जो आज भी वैश्विक शांति और प्रगति का एकमात्र आधार है। सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय: आर्य समाज का नियम हमें सिखाता है कि प्रत्येक को केवल अपनी ही उन्नति में प्रसन्न नहीं होना चाहिए, अपितु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए। परमार्थ का इससे बड़ा उदाहरण विश्व में कहीं और नहीं मिलता। कुरीतियों को दूर करना और समाज में आपसी भाईचारे का वातावरण बनाना ही वास्तविक मानवता है। आज हमारे सामने सबसे बड़ी समस्या दूषित खानपान और बीमारियां हैं। रासायनिक खेती ने हमारे अन्न को विषैला और शरीर को कैंसर, हार्टअटैक, शुगर जैसी बीमारियों का घर बना दिया है। इससे बचने का एकमात्र मार्ग प्राकृतिक खेती है। यह पद्धति आने वाली पीढ़ियों को शुद्ध जल, स्वच्छ वातावरण और मित्र जीवों की सौगात देगी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में देश के 40 लाख से अधिक किसान इस मिशन से जुड़ चुके हैं। गुजरात में भी 8 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती को अपनाकर समृद्धि और स्वास्थ्य का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। जिस प्रकार हम हवन और सत्संग से संस्कारों का प्रसार करते हैं, उसी प्रकार प्राकृतिक खेती को भी एक जन-आंदोलन बनाएं ताकि गौमाता का संरक्षण हो और समाज को रोगमुक्त किया जा सके।
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भिवानी स्थित हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड के प्रांगण में प्रदेशभर से आए शिक्षक भाई-बहनों और प्रबुद्धजनों के साथ 'संस्कारयुक्त शिक्षा' और 'प्राकृतिक खेती' जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद करने का अवसर मिला। नयी शिक्षा नीति के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने देश की शिक्षा प्रणाली को पुनः अपनी जड़ों और संस्कारों से जोड़ने का जो मार्ग प्रशस्त किया है, वह राष्ट्र निर्माण की नींव है। शिक्षा का अर्थ केवल डिग्रियां प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण है। संस्कारयुक्त शिक्षा ही वह आधार है जिस पर एक उन्नत समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। शिक्षकों से आह्वान किया कि वह विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों और राष्ट्र प्रेम के बीज बोएं। रासायनिक खेती ने हमारे खानपान को विषैला बना दिया है, जिससे कैंसर, हृदय रोग और डायबिटीज जैसी बीमारियां छोटे बच्चों तक को अपनी चपेट में ले रही हैं। अगर हमें अपनी आने वाली पीढ़ियों को बचाना है, तो हमें देशी गाय आधारित प्राकृतिक खेती को अपनाना ही होगा। प्राकृतिक खेती का मूल आधार हमारी 'देशी गाय' है। आज देश में लगभग 40 लाख किसान इस पद्धति से जुड़ चुके हैं। हिमाचल और गुजरात में इसके अभूतपूर्व परिणाम देखने को मिल रहे हैं। शिक्षकों की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं है, वह समाज के मार्गदर्शक हैं। अगर शिक्षक विद्यार्थियों को प्राकृतिक खेती के लाभ और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करेंगे, तो धरती माता को जहरीली होने से बचाया जा सकेगा।
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नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश-1 स्थित आर्य समाज में आयोजित 'अभिनंदन समारोह' में सम्मिलित होना अत्यंत सुखद और संतोषजनक रहा। यह अवसर उन कर्मठ स्वयंसेवकों और टीमों के सम्मान का था, जिनके अथक परिश्रम ने इंटरनेशनल आर्य महासम्मेलन 2025 को ऐतिहासिक वैश्विक सफलता दिलाई। किसी भी बड़े लक्ष्य की प्राप्ति केवल नेतृत्व से नहीं, बल्कि ‘पर्दे के पीछे’ काम करने वाले उन अनगिनत हाथों से होती है जो नि:स्वार्थ भाव से सेवा में जुटे रहते हैं। इंटरनेशनल आर्य महासम्मेलन 2025 की सफलता आर्य समाज परिवार के इसी अटूट समन्वय का परिणाम है। महर्षि दयानंद सरस्वती जी की 200वीं जयंती और आर्य समाज के 150 गौरवशाली वर्षों के उपलक्ष्य में आयोजित इस महासम्मेलन में 40 से अधिक देशों की सहभागिता ने सिद्ध कर दिया कि वैदिक मूल्यों की प्रासंगिकता आज भी वैश्विक है। मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि यदि हम अपनी युवा पीढ़ी को वैदिक संस्कारों और सामाजिक सुधार के मार्ग पर अग्रसर करें, तो एक सशक्त और उन्नत भारत का निर्माण निश्चित है। आइए, हम सब मिलकर शिक्षा, सामाजिक सुधार और राष्ट्र निर्माण के इस पवित्र संकल्प को आगे बढ़ाएं।
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गांवों का सर्वांगीण उत्थान ही विकसित भारत की वास्तविक आधारशिला है। ग्राम कल्याण कार्यक्रम के जरिए हमारा लक्ष्य सुशासन, समरसता, प्राकृतिक कृषि और प्रकृति के जतन को जन-जन की भागीदारी से राष्ट्रव्यापी अभियान बनाना है।
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जूनागढ़ की पावन धरा पर भक्तकवि नरसिंह मेहता विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में सम्मिलित होकर युवाओं के उत्साह को साझा करने का अवसर मिला। इस समारोह में 27,000 से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई और 36 तेजस्वी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। केवल शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करना जीवन की पूर्णता नहीं है। जीवन तभी सार्थक बनता है जब हम अपने ज्ञान का उपयोग समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए करें। जिस शिक्षा में संवेदनशीलता न हो, वह केवल शुष्क ज्ञान है; "संवेदनाविहीन जीवन पत्थर के समान है।" युवाओं का लक्ष्य केवल भीड़ का हिस्सा बनना नहीं, बल्कि नये विचारों और नवाचारों के माध्यम से लोगों के जीवन को सरल और सुखमय बनाना होना चाहिए। जब हमें दूसरे की पीड़ा अपनी लगती है, तभी कुछ नया सृजित करने की प्रेरणा मिलती है। युवाओं से आह्वान किया कि वह जल संचयन, वृक्षारोपण, देसी गायों के संरक्षण और प्राकृतिक खेती जैसे अभियानों में सक्रिय सहभागी बनें। छोटी दिखने वाली चीजें ही समाज में बड़ा बदलाव लाती हैं। सभी डिग्रीधारकों को उनके उज्ज्वल और सेवाभावी भविष्य की अनंत शुभकामनाएं।
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राजकोट जिले की गोंडल तहसील के लुणीवाव गांव में जयन्तीभाई परमार जी के घर का वह स्नेहपूर्ण आतिथ्य आज भी स्मृतियों में ताजा है। जब मैंने उनके 10 दिन के नन्हे शिशु को अपनी गोद में लिया, तो जयन्तीभाई की आंखों में आए भावुकता के आंसू अटूट विश्वास और अपनत्व के प्रतीक थे। सामाजिक समरसता महोत्सव के अवसर पर लोकभवन में जब जयन्तीभाई के परिवार से पुनः भेंट हुई, तो वह क्षण फिर से जीवंत हो उठा। @rashtrapatibhvn @narendramodi @AmitShah @Bhupendrapbjp @ChaudhryShankar @sanghaviharsh @InfoGujarat
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गांवों का विकास ही राष्ट्र की वास्तविक उन्नति है। ​ग्राम कल्याण कार्यक्रम के माध्यम से सुशासन, सामाजिक समरसता, प्राकृतिक कृषि और पर्यावरण संरक्षण जैसे अभियानों को जन-आंदोलन बनाना ही हमारा लक्ष्य है।
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