پن کیا گیا ٹویٹ
Bhuvan गौरव
35.8K posts

Bhuvan गौरव
@BGPathak1
You are the last person I'd ever think of hurting. 🕊
🇮🇳India شامل ہوئے Kasım 2018
913 فالونگ751 فالوورز

दिव्य दर्शन श्री बाला जी सरकार
श्री बागेश्वर धाम सरकार ग्राम गढ़ा (मध्यप्रदेश)
11-04-2026
#bageshwardham
#bageshwardhamsarkar
#divyadarshan
#balaji



हिन्दी

Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا
Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا
Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا

भारतीय दर्शन मानव जीवन के सबसे गहरे प्रश्नों जैसे
मैं कौन हूँ?
यह संसार क्या है?
जीवन का अंतिम उद्देश्य क्या है?
का उत्तर खोजने का प्रयास करता है। इसका मूल सार अत्यंत व्यापक, गहन और अनुभव पर आधारित है।
भारतीय दर्शन के अनुसार इस पूरे ब्रह्मांड का मूल तत्व ब्रह्म या ईश्वर है। वही एकमात्र सत्य है अनंत, अचल और शाश्वत। उसका स्वभाव आनंद है। संसार में जो विविधता हमें दिखाई देती है, वह उसी एक सत्य का अनेक रूपों में प्रकट होना है।
जीवन का परम उद्देश्य इस ब्रह्म को जानना और उसका साक्षात्कार करना है। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है, तब वह ब्रह्म के साथ एकत्व का अनुभव करता है। यह स्थिति परम शांति और आनंद की होती है। जैसे नदियाँ अंततः समुद्र में मिल जाती हैं, वैसे ही सभी जीवात्माएँ अंत में ब्रह्म में विलीन हो जाती हैं।
भारतीय दर्शन इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए विभिन्न मार्ग भी प्रस्तुत करता है, जिन्हें योग कहा जाता है।
ज्ञान के माध्यम से (ज्ञान योग)
कर्म के माध्यम से (कर्म योग)
भक्ति के माध्यम से (भक्ति योग)
ध्यान के माध्यम से (राज योग)
इन सभी मार्गों का उद्देश्य मनुष्य को आत्मबोध की ओर ले जाना है।
सृष्टि के विषय में भारतीय दर्शन कहता है कि यह “एक से अनेक” होने की प्रक्रिया है। परमात्मा ही अनेक जीवात्माओं के रूप में प्रकट हुआ है। इसलिए, भले ही हम अलग-अलग दिखते हों, लेकिन हमारी मूल सत्ता एक ही है।
इस संसार में द्वैत (ड्यूलिटी) भी एक महत्वपूर्ण तत्व है। हर चीज के दो पहलू होते हैं जैसे
परिवर्तन और अपरिवर्तन
प्रकृति और पुरुष
स्त्री और पुरुष
क्रिया और शांति
यही विरोधाभास इस सृष्टि को संतुलन प्रदान करते हैं।
भारतीय दर्शन का एक और महत्वपूर्ण सिद्धांत है कर्म का नियम। प्रत्येक कर्म का फल अवश्य मिलता है, जिसे कर्मफल कहा जाता है। जीव अपने कर्मों के अनुसार बार-बार जन्म और मृत्यु के चक्र (संसार) में आता-जाता रहता है। लेकिन यदि मनुष्य बिना फल की इच्छा के और बिना अहंकार के कर्म करता है, तो वह इस चक्र से मुक्त हो सकता है।
इसके साथ ही, भारतीय दर्शन हमें यह भी सिखाता है कि इस संसार में कोई भी वस्तु या व्यक्ति अलग-थलग नहीं है। सब कुछ एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। हमारे द्वारा किए गए हर कार्य का प्रभाव वापस हमारे पास आता है इसे ऋणानुबंध कहा जाता है।
अंततः, भारतीय दर्शन सृष्टि को त्रिगुणात्मक मानता है हर चीज में उत्पत्ति, पालन और विनाश होता है; हर वस्तु में सकारात्मक, नकारात्मक और तटस्थ गुण होते हैं; और हर ज्ञान में ज्ञाता, ज्ञान और ज्ञेय शामिल होते हैं।
निष्कर्षतः, भारतीय दर्शन का सार यह है कि समस्त अस्तित्व एक ही परम सत्य (ब्रह्म) है, और जीवन का उद्देश्य उस सत्य को पहचानना है। जीवन एक पद्धति है, जो मनुष्य को अज्ञान से ज्ञान, बंधन से मुक्ति और दुःख से आनंद की ओर ले जाती है।

हिन्दी
Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا
Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا

अलख निरंजन गुरु गोरखनाथ द्वारा प्रचारित ईश्वर-स्मरण का एक पवित्र उद्घोष है।
अघोरपंथ के अनुसार अलख का अर्थ है जगाना या पुकारना, साथ ही वह जिसे देखा न जा सके जो इंद्रियों से परे, ब्रह्मांड की दिव्य, परम शक्ति और ऊर्जा है, जो संपूर्ण सृष्टि को धारण किए हुए है।
निरंजन का अर्थ है अनंत काल का स्वामी जो निराकार, निर्विकार, निर्गुण और सर्वव्यापी है, जो माया (प्रकृति) से भी परे है; वही परमात्मा है।
इस प्रकार अलख निरंजन का घोष करते हुए साधक भाव प्रकट करते हैं “हे अनंत, निराकार परमात्मा! हम तुम्हें पुकार रहे हैं, तुम्हारा स्मरण कर रहे हैं।”

हिन्दी

Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا
Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا
Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا
Bhuvan गौरव ری ٹویٹ کیا

Finally Friday.....
Share your 🌷📷 picture for Flowers on Friday!
#theme_pic_India_flowers

Manda Bendre 🇮🇳@mabend2
Finally Friday..... Share your 🌷📷 picture for Flowers on Friday! #theme_pic_India_flowers
English

















